01/03/2026
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@pahat1672
01/03/2026
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13/02/2026
"अलवर के गोविंदगढ़ में झाड़ियों में सात माह का मृत भ्रूण मिला है। भ्रूण सफेद पॉलीथिन में शॉल और सलवार में लिपटा हुआ था। मामला गोविंदगढ़ थाना क्षेत्र के सीकरी-गोविंदगढ़ मार्ग पर बारोली के पास रविवार सवेरे करीब 7ः30 बजे का है।"
सड़क किनारे पड़ी थी पोटली
स्थानीय निवासी साजिद खान ने बताया कि शनिवार देर शाम एक किसान ने सड़क पर कपड़े की एक पोटली पड़ी देखी थी। जिसे उसने किनारे कर दिया। रविवार सुबह जब वो खेत से वापस लौटा और शक होने पर पोटली को खोलकर देखा।
"शॉल और सलवार में लिपटा था भ्रूण
पोटली में एक सफेद पॉलीथिन के अंदर शॉल और सलवार में लिपटा हुआ सात माह का मृत भ्रूण था। ग्रामीणों ने तुरंत सुबह 7:30 बजे पुलिस को सूचना दी और करीब एक घंटे तक मौके पर पहरा दिया। ताकि कोई आवारा जानवर या कुत्ता उस मासूम के शरीर को नुकसान न पहुंचा सके।"
"घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर भीड़ जमा हो गई। सूचना मिलते ही करीब 8:30 बजे गोविन्दगढ़ थाना पुलिस मौके पर पहुंची।"
"गोविंदगढ़ सीएचसी की मॉर्च्युरी में रखवाया
ASI तेजराम ने बताया कि मृत भ्रूण लगभग सात माह की लड़की का है। पुलिस ने भ्रूण को अपने कब्जे में लेकर एम्बुलेंस की सहायता से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गोविंदगढ़ की मॉर्च्युरी में रखवाया है। फिलहाल पुलिस जांच में जुट गई है।"
# #गृहdeob #
प्रिय मित्र Shaharukh Khan Mewati के पिता और राजस्थान #डीग मेवात के #कैथवाड़ा गांव के रिहायशी अंतरराष्ट्रीय भंपक वादक व मशहूर लोक कलाकार Gafruddin Mewati Jogi को भारत सरकार के #गृह मंत्रालय विभाग द्वारा कला क्षेत्र में #पदम श्री अवार्ड से किया जाएगा सम्मानित।
डीग मेवात के कैथवाड़ा गांव से ताल्लुक रखने वाले व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त लोक कलाकार और भपंग वादक गफरुद्दीन मेवाती जोगी को अब पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा। इस से पहले भी गफरुद्दीन मेवाती जी को कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। 62 साल के गफरूद्दीन मेवाती का जन्म डीग ज़िले की पहाड़ी तहसील के गांव कैथवाड़ा में हुआ। मेवाती जोगी समुदाय से आने वाले गफरुद्दीन मेवाती को संगीत की विरासत में मिला। उनके वालिद खुद सारंगी के उस्ताद थे। गफरूद्दीन मेवाती पंडुन का कड़ा (महाभारत ) गाने वाले इकलौते गायक कलाकार हैं और उन्हें 2,500 से अधिक महाभारत के मेवाती जबान के दोहे याद है हैं। बता दें कि गफरुद्दीन ने सात साल की उम्र में अपने वालिद से पांडुन का कड़ा सीखा। पिछले 60 सालों से अधिक समय से इसका मंचन कर रहे हैं। उन्होंने भारत सहित कई देशों में सांस्कृतिक उत्सवों में अपनी कला का प्रदर्शन किया है।
गफरुद्दीन उन चुनिंदा कलाकारों में से हैं, जिन्होंने छह दशक से अधिक समय तक एक ख़त्म होती लोककला को जिंदा रखा और उसे दुनिया भर में पहचान दिलाई।
गफरुद्दीन मेवाती लंदन, पेरिस, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस और अमेरिका सहित कई देशों में अपनी कला का प्रदर्शन कर चुके हैं। वो इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ के जन्मदिन पर भपंग की प्रस्तुति दे चुके हैं। गफरूद्दीन मेवाती इस विरासत को आगे बढ़ाने में जुटे हैं। वे अपने बेटे शाहरुख और पोतों को भी इस कला को सिखा रहे हैं ताकि आने वाली पीढ़ी तक यह परंपरा जिंदा रहे।
इस मेवाती हीरे ने देश विदेश में इलाका मेवात का नाम रोशन किया है, सभी लोग नेक दुआओ से नवाजे 💐🎉🌹
Tarri Athelete Drx Talim Khan Md Aspak Ali Khan Aslam Mewati Jilshad Sahun Aspak Padaliya
2nd
80 साल के गुनहा माफ 🤲🤲🤲