26/11/2023
समानता का है जिसमें विधान,
वही है भारतीय संविधान!'
भारत का संविधान देश के नागरिकों को न्याय, स्वतंत्रता व समानता का अधिकार देता है। संविधान दिवस के पुनीत अवसर पर इसके सभी रचनाकारों को दिल्ली पुलिस का नमन।
संविधान दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ!
#संविधान_दिवस
29/09/2023
श्राद्ध के दौरान कुल देवताओं, पितरों और पूर्वजों के प्रति श्रद्धा प्रकट की जाती है. वर्ष में पंद्रह दिन की विशेष अवधि में श्राद्ध कर्म किए जाते हैं और इसकी शुरुआत आज से हो चुकी है. श्राद्ध पक्ष को पितृपक्ष और महालय के नाम से भी जाना जाता है. ऐसी मान्यता है कि श्राद्ध पक्ष के दौरान हमारे पूर्वज पृथ्वी पर सूक्ष्म रूप में आते हैं और उनके नाम से किए जाने वाले तर्पण को स्वीकार करते हैं. इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है.
ईश्वर् आप सभी पर कृपा करें कि आप सभी अपने पितरों के निमित्त पिंडदान कर उन्हें संतुष्ट कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करने में सफल हों।
नम: स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमो नम:।
ॐ पितृगणाय विद्महे जगत धारिणी धीमहि तन्नो पितृो प्रचोदयात्।।
ऊँ सर्व पितरेभ्यो नमः
05/09/2023
कितना खास है भारत मंडपम, जहां होने जा रहा G20 सम्मेलन, जानें 10 बड़ी बातें
नई दिल्ली में 9-10 सितंबर को जी-20 सम्मेलन (G20 Summit) होने जा रहा है। प्रगति मैदान में बने इंटरनेशनल एग्जिबिशन कम कन्वेंशन सेंटर में यह समिट होगी। इसे भारत मंडपम (Bharat Mandapam) के नाम से जाना जाता है।
26 जुलाई, 2023 को इस कन्वेंशन सेंटर का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने किया था। बता दें कि साल 2017 में प्रगति मैदान को रीडेवलप करने की शुरुआत की गई। 2,700 करोड़ रुपए खर्च कर इसे नया अवतार दिया गया। भारत मंडपम का निर्माण ही 750 करोड़ रुपए में हुआ है। 123 एकड़ में बना देश के इस सबसे बड़े कन्वेंशन सेंटर में 10,000 लोग बैठ सकते हैं। आइए जानते हैं इसकी 10 खूबियां...
भारत मंडपम की 10 खूबियां
तीन फ्लोर वाले भारत मंडपम में जी-20 समिट होने जा रहा है। हर फ्लोर पर भारत की संस्कृति नजर आती है। इसे बेहद ही खूबसूरत ढंग से सजाया गया है। हर कमरे और हर जगह भारतीय पारंपरिक विविधता, कला और बहुसंस्कृति की विरासत देख सकते हैं।
फर्स्ट फ्लोर पर कॉन्फ्रेंस के लिए हाईटेक रूम्स हैं। इस फ्लोर पर ऐसी तरह के 18 बड़े कमरे और वीआईपी लॉन्ज हैं।
दूसरे फ्लोर पर दो मॉडर्न हॉल बनाए गए हैं. एक बड़ा लॉन्ज एरिया भी है। यह इतना बड़ा है कि इसका उपयोग समिट रूम के तौर पर किया जा सकता है।
तीसरे फ्लोर पर एक साथ 7 हजार लोग बैठ सकते हैं। एक बड़ा हॉल, जिसमें 4 हजार लोग एक साथ बैठ सकते हैं। तीसरे फ्लोर पर ही एम्फीथिएटर बना है। इसमें 3,000 लोग बैठ सकते हैं।
भारत मंडपम में एक हॉल ऐसा भी है, जिसमें एक साथ 7,000 लोग बैठ सकते हैं। यह हॉल दुनिया के सबसे बड़े हॉल में से एक हैष ऑस्ट्रेलिया के सिडनी के ओपेरा हाउस से कहीं ज्यादा बड़ा है।
भारत मंडपम में ओपन एम्फीथिएटर बनाए गए हैं। जिनमें से एक बार में 3,000 से ज्यादा लोग एक साथ बैठ सकते हैं। भारत मंडपम का कुल एरिया एक फुटबॉल स्टेडियम से 26 गुना ज्यादा बड़ा है।
भारत मंडपम में VIP लॉन्ज एरिया बनाए गए हैं। मीटिंग, कॉन्फ्रेंस और एग्जिबिशन के लिए बनाए गए हैं।
भारत मंडपम में सुरक्षा व्यवस्था ही नहीं पार्किंग भी बेहतरीन है। यहां के अंडरग्राउंड पार्किंग में 4,000 बड़े वाहन पार्क हो सकते हैं। वहीं, ग्राउंड पार्किंग में 1,000 वाहन पार्क हो सकते हैं।
भारत मंडपम काफी भव्य है। इसमें देश के प्रसिद्ध कलाकारों के हाथों से बने सुंदर कालीन बिछे हैं। जी-20 के समिट वाली जगह पर कश्मीर की कालीनें बिछाई गई हैं।
जी-20 सम्मेलन के बाद भारत मंडपम आम नागरिकों के लिए भी खोल दिया जाएगा।
03/09/2023
Property Right : क्या औलाद को बेदखल करने के बाद भी देना होगा संपत्ति में हिस्सा, जानिये कानून में क्या है प्रावधान
Ancestral Property: पैतृक संपत्ति (ancestral property) ऐसी संपत्ति होती है जो आपको पिता के पूर्वजों से मिली हो. पैतृक संपत्ति (ancestral property) कम-से-कम 4 पीढ़ी पुरानी होनी चाहिए. इस बीच परिवार में कोई बंटवारा नहीं होना चाहिए.आइए जानते है इसके बारे में विस्तार से.
कई बार अनचाही परिस्तिथियों के कारण मां-बाप अपने बच्चों को जायदाद से बेदखल कर देते हैं. इसके बाद उन बच्चों को अपने माता-पिता की संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं रह जाता है. हालांकि, एक संपत्ति ऐसी भी होती है जिससे बच्चों को मां-बाप द्वारा बेदखल नहीं किया जा सकता है. इसे पैतृक संपत्ति (Ancestral Property Eviction) कहते हैं. तो अगर आपने अपनी संतान कहीं से बेदखल किया भी है तो तब भी वह पैतृक संपत्ति (ancestral property) में दावे के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं.
लगभग शत प्रतिशत संभावना है कि कोर्ट का फैसला संतान के पक्ष में ही आएगा. हालांकि, कई बार कोर्ट ऐसे में मामलों में मां-बाप का समर्थन कर देते हैं लेकिन यह उस निर्धारित केस की डिटेल्स और जज के विवेक पर निर्भर करता है. यह अपवाद ही होता है. इसके अलावा कोर्ट भी माता-पिता की इस मामले में कोई मदद नहीं कर पाता है.
क्या होती है पैतृक संपत्ति?
किसी भी शख्स को उसके दादा, परदादा से मिली संपत्ति पैतृक कहलाती है. पैतृक संपत्ति (ancestral property) कम-से-कम 4 पुश्तें पुरानी होनी चाहिए. इस बीच परिवार में कोई बंटवारा नहीं होना चाहिए. अगर बंटवारा होता है तो वह प्रॉपर्टी पैतृक नहीं रह जाएगा. पैतृक संपत्ति (ancestral property) पर पुत्र और पुत्री दोनों का हक होता है. पैतृक संपत्ति को विरासत में मिली संपत्ती भी कहा जा सकता है. हालांकि, विरासत में मिली हर संपत्ति पैतृक नहीं होती. पैतृक संपत्ति के बारे में हिंदू उत्तराधिकार कानून 1956 की धारा 4, 8 और 19 में बात की गई है. अगर संपत्ति में बंटवारा हो जाता है तो वह पैतृक की जगह खुद से जुटाई गई संपत्ति में तब्दील हो जाती है और इसके माता-पिता अपनी संतान को उस प्रॉपर्टी से बेदखल कर सकते हैं.
पैतृक संपत्ति पर हक
पैतृक संपत्ति (ancestral property) में किसे कितना हक मिलेगा यह हर पीढ़ी में लोगों की संख्या के बढ़ने के साथ बदलता जाता है. इसमें प्रति व्यक्ति के हिसाब से संपत्ति का बंटवारा नहीं होता है बल्कि पैतृक संपत्ति में आपका हिस्सा इस बात पर निर्भर करता है कि उसमें आपके पिता को कितना हिस्सा मिला है. उस हिस्से में से ही आपके हक में आएगा.
अगर आप इकलौते हैं तो पिता के हिस्से आई संपत्ति पूरी आपकी होगी. अगर आपके भाई बहन हैं तो यह उनमें बंट जाएगा. संभव है कि आपके परिवार में किसी के हिस्से अधिक पैतृक संपत्ति आए और किसी के हिस्से कम. उसकी वजह यही होती है कि उनके पिता और उससे पहले उनके दादा के हाथ कितनी संपत्ति आई थी.
पैतृक और विरासत में अंतर
पैतृक संपत्ति (ancestral property) केवल पिता के परिवार की तरफ से आती है. इसे विरासत में मिली हुई संपत्ति के तहत रखा जा सकता है. हालांकि, विरासत की हर संपत्ति पैतृक हो, ऐसा जरूरी नहीं. ऐसा इसलिए क्योकिं नानी, मां, मामा या अन्य कोई रिश्ता जो पिता-दादा-परदादा की लाइन से ना हो, उनसे मिली संपत्ति को विरासत कहा जाता है. लेकिन यह पैतृक नहीं होती.
26/08/2023
India Created History…. If you are a proud Indian say Jai Hind….
28/07/2023
क्या सीआरपीसी की धारा 151 में जमानत करवाना अनिवार्य है? जानिए क्या है प्रावधान
Narender Yadav, 27.07.2023
151
कानून द्वारा पुलिस को दी गई शक्तियों में एक बड़ी ही प्रसिद्ध शक्ति है जिसे सीआरपीसी की धारा 151 कहा जाता है। यह धारा 151 दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 151 है। दंड प्रक्रिया संहिता के चैप्टर 11 में पुलिस को कुछ निवारक शक्तियां दी गई है
उन शक्तियों में एक शक्ति धारा 151 भी है। हम आए दिन यह देखते हैं कि कहीं न कहीं किसी न किसी मामले में पुलिस किसी व्यक्ति को धारा 151 के अंतर्गत गिरफ्तार करती है और फिर उस व्यक्ति की जमानत करवानी होती है। ऐसी जमानत एसडीएम कोर्ट से होती है।
क्या इस धारा के अंतर्गत जमानत लेना जरूरी है यह इस आलेख में आगे समझने का प्रयास किया जा रहा है।
क्या है धारा 151 जमानत से पूर्व सीआरपीसी की धारा 151 के मूल लक्ष्य को समझा जाना चाहिए। दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 151 को पुलिस को दी गई एक शक्ति माना गया है। जैसा कि पुलिस किसी भी व्यक्ति को किसी भी असंघेय अपराध (नॉन कॉग्निजेबल ऑफेंस) में बगैर वारंट के गिरफ्तार नहीं कर सकती है। अगर कोई वारंट कोर्ट द्वारा जारी किया गया है तभी पुलिस उस व्यक्ति को गिरफ्तार करती है, लेकिन पुलिस को संघेय अपराध में सीधे गिरफ्तार करने की शक्ति प्राप्त है।
कभी-कभी यह होता है कि किसी व्यक्ति को किसी अपराध करने से रोकना होता है और अपराध किया ही नहीं जाता है बल्कि करने का प्रयास होता है। कानून ने पुलिस को यह जिम्मेदारी सौंपी है कि वे नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करें और समाज में शांति व्यवस्था बनाए रखें।
पुलिस केवल अपराध होने के बाद ही कार्य नहीं करती है बल्कि उसकी पहली जिम्मेदारी तो यह है कि वह अपराध होने से से ही रोके। सीआरपीसी की धारा 151 को एक टीके की तरह माना जा सकता है जहां पर किसी रोग को होने के पहले ही रोकने का प्रयास किया जाता है। इसी प्रकार धारा 151 पुलिस को ऐसी शक्ति देती है कि वह किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करके किसी भविष्य में होने वाले अपराध को रोक दें क्योंकि पुलिस की जिम्मेदारी है वह नागरिकों को सुरक्षित रखें।
- भारत का संविधान और आपातकाल धारा 151 के अंतर्गत पुलिस को यह शक्ति है कि किसी भी व्यक्ति को संदेह के आधार पर गिरफ्तार कर सकती है भले ही उसने कोई अपराध नहीं किया हो। अगर पुलिस अधिकारी को यह लगता है कि अगर उस व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं किया गया तो वह व्यक्ति कोई न कोई अपराध जरूर कर देगा और ऐसा अपराध संज्ञेय अपराध होता है। जैसे कि पुलिस को किसी व्यक्ति के बारे में यह लगता है कि वह नगर में आवारा घूम रहा है और लोगों की संपत्ति पर नजर रख रहा है अगर उस व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं किया गया तो वे व्यक्ति कोई लूट डकैती यह चोरी जैसी घटना कारित कर देगा जोकि एक संज्ञेय अपराध है।
इस स्थिति में पुलिस अपनी 151 में मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकती है जिसके द्वारा कोई भी संगीन जुर्म किए जाने की संभावना है। यहां पर यह ध्यान देना चाहिए कि धारा 151 में गिरफ्तार तभी किया जा सकता है जब गिरफ्तारी के अलावा अपराध होने से रोका नहीं जाता हो। अगर पुलिस बगैर गिरफ्तार किए ही अपराध को होने से रोक सकती है तो वह गिरफ्तार करने के पूर्व अपराध को रोकने का प्रयास करें पर फिर भी यह लगता है कि नहीं अब अपराध रोका नहीं जा सकता तब पुलिस अधिकारी अपनी शक्ति का प्रयोग करते हुए किसी संगीन जुर्म करने वाले व्यक्ति को जुर्म होने से पहले ही गिरफ्तार कर ले।
आमतौर पर देखा जाता है कि मोहल्ले कॉलोनी में कुछ लोगों का आपस में झगड़ा हो जाने पर पुलिस दोनों पक्षों पर सीआरपीसी की धारा 151 की कार्रवाई कर देती है। पुलिस ऐसी कार्रवाई इसलिए करती है कि दोनों पक्षों को गिरफ्तार कर लिया जाए और दोनों के बीच में किसी बड़े विवाद को होने से रोका जाए जिससे गंभीर चोट या फिर हत्या जैसे अपराध को होने से रोक दिया जाए।
क्या इस धारा में जेल भेजा जाता है?
सीआरपीसी की धारा 151 के अंतर्गत किसी भी व्यक्ति को न्यायिक अभिरक्षा में जेल नहीं भेजा जाता है, बल्कि केवल पुलिस हिरासत में रखा जाता है। पुलिस ऐसी गिरफ्तारी करके व्यक्तियों के संबंध में रजिस्टर में जानकारी अंकित करती है और उन्हें पुलिस थाने में बने हुए हवालात में रखती है पर यहां ध्यान देना होगा कि भले ही पुलिस धारा 151 के अंतर्गत किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करें उसे किसी भी सूरत में 24 घंटे से ज्यादा हवालात में नहीं रखा जा सकता। 24 घंटे होने के पूर्व पुलिस को ऐसे गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को छोड़ना ही पड़ता है क्योंकि यह किसी भी व्यक्ति को मिला एक संवैधानिक अधिकार है कि पुलिस बगैर मजिस्ट्रेट की अनुमति के किसी भी व्यक्ति को 24 घंटे से अधिक हिरासत में नहीं रख सकती है। कोई व्यक्ति पुलिस हिरासत में रहेगा या न्यायिक अभिरक्षा में रहेगा इसका निर्णय मजिस्ट्रेट करता है पुलिस नहीं करती है।
क्या धारा 151 में जमानत की आवश्यकता होती है?
जब कभी पुलिस धारा 151 के अंतर्गत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी करती है तब ऐसी गिरफ्तारी केवल 24 घंटे तक के लिए होती है। धारा 151 में कहीं भी प्रतिभूति या बंधपत्र का उल्लेख नहीं किया गया है। यह धारा पुलिस को केवल गिरफ्तार करने की शक्ति देती है इस धारा में कहीं भी जमानत जैसी बात का उल्लेख नहीं है पर व्यवहार में ऐसा नहीं होता है। पुलिस जब भी किसी व्यक्ति को धारा 151 के अंतर्गत गिरफ्तार करती है तब उसे एसडीएम की कोर्ट में प्रस्तुत करती है।
पुलिस यहां पर कानून के दूसरे प्रावधानों का सहारा लेकर व्यक्ति से जमानत भी भरवा देती है जैसा कि सीआरपीसी के अध्याय 8 जो सदाचार और शांति के लिए प्रतिभूति देने के संबंध में उल्लेख करता है। इस अध्याय की धारा 107 के अंतर्गत कार्यपालक मजिस्ट्रेट के पास यह अधिकार होता है कि अगर उसे किसी व्यक्ति के बारे में यह सूचना मिलती है कि उसके द्वारा कोई अपराध किया जाना संभव है तब कार्यपालक मजिस्ट्रेट उस व्यक्ति से प्रतिभूति ले सकता है।
मतलब की जमानत ले सकता है फिर उस व्यक्ति की ओर से किसी दूसरे व्यक्ति को जमानत लेना होती है। ऐसा व्यक्ति जमानत लेने के लिए एक सक्षम व्यक्ति होता है। दूसरा व्यक्ति यह घोषणा करता है कि जिस व्यक्ति की व जमानत ले रहा है वह भविष्य में किसी भी तरह का अपराध नहीं करेगा और उसकी निगरानी उस दूसरे व्यक्ति द्वारा की जाएगी जिस व्यक्ति को पुलिस द्वारा पकड़कर कार्यपालक मजिस्ट्रेट के पास प्रस्तुत किया जाता है। उस व्यक्ति द्वारा भी यह बंधपत्र दिया जाता है कि उसके द्वारा भविष्य में कोई भी अपराध नहीं किया जाएगा जिसके संदेह के आधार पर उसे गिरफ्तार किया गया है।
इसे कुछ ऐसे समझ लिया जाए कि किसी कॉलोनी में 2 लोगों का आपस में झगड़ा हुआ उस झगड़े के बाद दोनों ही पक्ष पुलिस थाने पर गए। पुलिस थाने के पुलिस अधिकारियों ने दोनों ही पक्षों को हवालात में बैठा लिया इसके बाद उन्हें अगले दिन 24 घंटे पूरे होने के पहले एसडीएम की कोर्ट में प्रस्तुत किया और पुलिस अधिकारियों ने एसडीएम को इस बात का संज्ञान लिया कि इन दोनों द्वारा किसी बात को लेकर आपस में विवाद किया जा रहा था और अगर इन दोनों से प्रतिभूति नहीं ली गई तो यह संभावना है कि यह दोनों आपस में किसी बड़े जुर्म को अंजाम दे देंगे।
जैसे कि इन दोनों में से किसी की हत्या तक हो सकती है तब एसडीएम उन दोनों ही लोगों से एक बंधपत्र लेता है तथा दोनों ही लोगों से प्रतिभूति मांगता है और यह वचन मांगता है कि उनके द्वारा किसी भी सूरत में भविष्य में कोई भी अपराध नहीं किया जाएगा। धारा 151 का रिकॉर्ड सीआरपीसी की धारा 151 के अंतर्गत गिरफ्तार किए जाने वाले व्यक्तियों के संबंध में पुलिस अधिकारियों द्वारा रिकॉर्ड रखे जाते हैं।
जब भी किसी व्यक्ति के ऊपर धारा 151 लागू होती है उसे गिरफ्तार किया जाता है तब उसे एक मुकदमे की तरह समझा जाता है तथा वह उसके पुलिस रिकॉर्ड में गिना जाता है। यह माना जाता है कि इस व्यक्ति को धारा 151 के अंतर्गत गिरफ्तार किया गया है। धारा 151 को साधारण शब्दों में यूं समझ लिया जाए कि यह एक संपूर्ण शक्ति है जो पुलिस को प्राप्त होती है अर्थात गिरफ्तारी भी वही करती है और किसी व्यक्ति को छोड़ती भी वही है पर उसके लिए एक सीमा निर्धारित कर दी गई है।
पुलिस ऐसे गिरफ्तार किए गए व्यक्ति का रिकॉर्ड संरक्षित कर देती है जिससे उन्हें भविष्य में इस बात की जानकारी होती है कि यह व्यक्ति कोई आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति तो नहीं है।
Thanks 🙏🙏
14/04/2023
भारतीय संविधान निर्माता, सामाजिक न्याय के उन्नायक 'भारत रत्न' बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती पर कोटि-कोटि नमन
11/11/2022
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ भारत के 50 वें चीफ जस्टिस बन गए हैं. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ को भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) के पद की शपथ दिलाई.
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया यूयू ललित की जगह ली. जस्टिस ललित का सीजेआई के तौर पर 74 दिनों का कार्यकाल था जो 8 नवंबर को पूरा हो गया. अब जस्टिस चंद्रचूड़ दो साल यानी 10 नवंबर 2024 तक सीजेआई रहेंगे.
हार्दिक शुभकामनाये..!!
28/08/2022
Justice UU Lalit takes oath as the 49th Chief Justice of India