31/05/2026
पुण्यश्लोका अहिल्याबाई होल्कर जयंती
“राजसत्ता को सेवा का माध्यम बनाकर,
धर्म, न्याय और जनकल्याण की मिसाल बनने वाली
लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर को कोटि-कोटि नमन।” 🙏
मंदिरों का पुनर्निर्माण,
नारी शक्ति का सम्मान,
प्रजा के सुख को अपना धर्म मानने वाली
ऐसी महान शासिका थीं अहिल्याबाई होल्कर।
“अहिल्याबाई केवल एक रानी नहीं थीं,
वे भारतीय संस्कृति, सेवा और न्याय की जीवित प्रेरणा थीं।”
उनकी जयंती पर आइए संकल्प लें —
समाज सेवा, धर्म रक्षा और राष्ट्र निर्माण के मार्ग पर चलने का।
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31/05/2026
महात्म्य पुरुषोत्तम मास का
प्राणशक्ति की असंक्रांत आपूर्ति का मास
इसीलिए अधिक ऊर्जा, पुण्य, फल की आस
यज्ञ-दान-तप से पुरुषत्व का सर्वोत्तम विकास
https://youtu.be/gpLljTdYKq4
सुनें ! जानें!! अपनाएँ!!! अपनों में फैलाएँ!!!!
Donate and get Enriched this month|अधिक मास का महात्म्य
*अधिकस्य अधिकं फलम्*राम राम !अधिक (पुरुषोत्तम) ज्येष्ठ मास चल रहा है। कहते हैं कि इस बड़े माह में किए दान का कई गुना प.....
30/05/2026
Shashwat Bazar | Sanatani & Swadeshi
• सनातनी और स्वदेशी आधार
• सनातन स्वदेशी का द्वार
• अपनों को आधार
• राष्ट्रीय आस्था को समर्पित
• सनातन आर्थिकी का आधार
30/05/2026
Shashwat Bazar | सनातनी और स्वदेशी
Ownership: Sanatani
Restriction: Halal Certification
Product: Made in India, Swadeshi
Product Focus: Handicraft, Local Product, Small Supplier strengthening Vocal for Local
Opportunities: Class 2 and Class 3 Cities / Town
Model: Direct Sales
29/05/2026
ब्रह्मांड की ध्वनि ॐ है, जीवनदाता सूर्य की ध्वनि ॐ ही है। निज शांति से विश्व शांति का मार्ग है और हम इसके लिए संकल्पित हैं।
मन, बुद्धि और चित्त को स्थिर करने की ध्वनि ॐ और शान्ति का मार्ग ॐ। भारतीय समाज अनन्तकाल से ही विश्व कल्याण और शान्ति की कामना करता आया है।
शान्ति कार्ड विश्व को एक नया मार्ग और नई दिशा देगा; यही “सर्वे भवन्तु सुखिनः” का मार्ग होगा।
ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिः
पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः।
वनस्पतयः शान्तिर्विश्वेदेवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः
सर्वं शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
मेरी शांति, आपकी शांति, समाज शांति, राष्ट्र शांति से विश्व शांति का मार्ग, शांति कार्ड आपका आर्थिक बोझ कम करने का मार्ग। क्योंकि सनातन, 'वसुधैव कुटुम्बकम्' का पालन करता है।
विश्व एक परिवार का मतलब ही है कोई युद्ध नहीं, कोई षड्यंत्र नहीं, कोई अपना-पराया नहीं - सब अपने है, इसलिए विश्वास शांति स्वाभाविक और प्राकृतिक है।
28/05/2026
“जिस युग में अंग्रेजों का नाम सुनकर लोग डर जाते थे, उस समय Vinayak Damodar Savarkar ने भारत की स्वतंत्रता को अपना जीवन लक्ष्य बना लिया।
उन्होंने केवल क्रांति की बात नहीं की, बल्कि उसे अपने जीवन में जीकर दिखाया।
कालापानी की अमानवीय यातनाएँ, वर्षों का संघर्ष और अनगिनत कष्ट भी उनके राष्ट्रप्रेम को झुका नहीं सके।
वीर सावरकर एक महान क्रांतिकारी, प्रखर राष्ट्रवादी, समाज सुधारक और दूरदर्शी विचारक थे।
उन्होंने हिंदू समाज में एकता, स्वाभिमान और राष्ट्र चेतना जगाने का कार्य किया।
उनका जीवन हमें सिखाता है कि राष्ट्र के लिए समर्पण, साहस और आत्मबल ही सच्ची देशभक्ति है।
आज वीर सावरकर जयंती पर हम उस अमर क्रांतिकारी को नमन करते हैं, जिसने अपना सम्पूर्ण जीवन भारत माता की सेवा और स्वतंत्रता के लिए समर्पित कर दिया।
ऐसे महान राष्ट्रनायक को कोटि-कोटि प्रणाम🙏🙏।
27/05/2026
शाश्वत कार्ड और शांति कार्ड: अपनों का पैसा, अपनों के पास - स्वदेशी एवं सनातनी को आधार
1. बैंकिंग सिस्टम में आपकी पहचान का मार्ग
2. समृद्धि प्वाइंट्स द्वारा आर्थिक लाभ
3. निज शांति से विश्व शांति का मार्ग
शाश्वत कार्ड और शांति कार्ड - अपनों का पैसा, अपनों के पास
शाश्वत कार्ड लाखों सनातनी दुकानों, सनातनी समर्थित सस्थाओं पर आर्थिक...
17/05/2026
शाश्वत प्रागंण हेतु चयन प्रक्रिया शुरू है। ऑनलाइन बैठक । संगठन लक्ष्य प्राप्ति में मेरी भूमिका
आयोजित ऑनलाइन बैठक में संगठन के प्रति प्रत्येक कार्यकर्ता की जिम्मेदारी, समर्पण एवं योगदान पर विस्तार से चर्चा की गई। सभी सदस्यों ने अपने विचार साझा किए तथा संगठन को मजबूत बनाने हेतु सक्रिय सहयोग देने का संकल्प लिया।
अधिवक्ता संदीप त्यागी जी ने बैठक की शुरुआत करते हुए कहा कि “संगठन के लक्ष्य प्राप्ति में मेरी भूमिका” विषय पर हम सभी को अपने विचार एवं सुझाव साझा करने हैं। उन्होंने बताया कि संगठन अपने उद्देश्यों को लेकर निरंतर आगे बढ़ रहा है और आने वाले समय में विभिन्न जिम्मेदारियों एवं कार्यों को और अधिक विस्तार दिया जाएगा।
उन्होंने सभी सदस्यों से आग्रह किया कि वे यह विचार करें कि संगठन की वर्तमान परिस्थितियों एवं चुनौतियों में वे किस प्रकार सहयोग कर सकते हैं, अपनी भूमिका को कैसे बेहतर बना सकते हैं तथा संगठन को मजबूत करने में क्या योगदान दे सकते हैं।
चतर सिंह: हम संगठन के सिपाही है। जो भी संगठन का आदेश होगा वो हम करेंगे। जब से मैं संगठन से जुड़ा हूँ मैं प्रवास पर जाता रहता हूँ और आगे भी करूंगा।
महेंद्र सिंह: संगठन के लिए महीने में चार दिन दे सकते हैं।
ज्ञान सिंह: जो भी संगठन का आदेश होगा उसके लिए हमेशा तत्पर रहेंगे और संगठन के काम से प्रवास पर जाने के लिए तैयार है।
रोमी जी: हम संगठन के एक समर्पित सिपाही हैं। संगठन द्वारा जो भी दायित्व एवं आदेश दिए जाएंगे, उनका पूर्ण निष्ठा एवं अनुशासन के साथ पालन करेंगे। उन्होंने बताया कि पूर्व में गुजरात सहित विभिन्न स्थानों पर संगठन के प्रवास कार्य हेतु गए थे तथा भविष्य में भी संगठन के कार्य, प्रवास एवं किसी भी आवश्यक परिस्थिति में सेवा देने के लिए सदैव तैयार रहेंगे।
जयाश्री: दैनिक जीवन में संगठन के विचारों को अपनाकर अनुशासन, सेवा एवं समर्पण भाव से कार्य करने की बात कही। जैसा काम होगा उसके हिसाब से समय देंगे
श्रवण कुमार: हम प्रयास कर रहे की कही पर भी सभी मंदिर मिल जाए जिससे हम कार्य की शुरुआत कर सके। जैसा संगठन का आदेश होगा हम वो करेंगे। हमारे मुजफ्फरनगर के आस पास कही भी प्रवास के लिए जा सकते है।
नितिन जी: संगठन के लिए मेरे पास जितना समय है वो सारा संगठन के लिए ही है।
ललित जी: सभी इस काम के लिए उत्साही है। जैसा आदेश रहेगा वो करेंगे
निष्कर्ष: बैठक में सभी सदस्यों ने संगठन की विचारधारा को समाज तक पहुँचाने, संगठन को मजबूत बनाने तथा अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने का सामूहिक संकल्प लिया।