29/12/2020
तुर्की सीरियल 'दिरलिस एर्तरुल' के थीम सॉन्ग का उर्दू वर्जन हुआ रिलीज, 13 लाख से भी ज्यादा बार देखा गया
तुर्की सीरियल 'दिरलिस एर्तरुल' के थीम सॉन्ग का उर्दू वर्जन #Like #Subcribe #Share
तुर्की सीरियल 'दिरलिस एर्तरुल' के थीम सॉन्ग का उर्दू वर्जन हुआ रिलीज, 13 लाख से भी ज्यादा बार देखा गया
17/05/2020
पूरी दुनिया इस बार ऐसी ईद मनाएगी जिसमें "ईद की नमाज़" नहीं होगी , ना हज़ारों हज़ार के वह सजदे होंगे , ना वह रौनक होगी , ना वह 6 ज़ाईद तकबीरें होंगी ना लोग एक दूसरे से गले मिलकर ईद की मुबारकबाद देंगे , हाथ भी नहीं मिलाएँगे , एक दूसरे के घर जाकर सेवईं भी नहीं खाएँगे , ना बहन बेटियाँ फूलों के बगीचों की तरह रंग बिरंगे नये लिबास में दिखेंगी , ना छोटे छोटे बच्चे चारों ओर रंगबिरंगे फूलों की तरह खिले दिखेंगे , ना पुरुष नये कपड़ों में इत्र लगाए ईदगाह और मस्जिद की ओर जाता दिखेगा और ना वह खुतबा सुनाई देगा
"अल्लाहु अकबर , अल्लाहु अकबर , लाईलाह इल्लल्लाहू"
"अल्लाहु अकबर , अल्लाहु अकबर वलिल्लाहिल हम्द"
और वो कहते हैं कि मुसलमान अपने मज़हब को लेकर कट्टर होता है , दुनिया और देश की परवाह नहीं करता। वह पूछते थे कि देश पहले या इस्लाम ? देखिए कि देश को बचाने के लिए हमने क्या क्या कुरबान कर दिया।
और तुम एक शराब ना छोड़ सके।
Via Zahid
03/04/2020
एक औसत मुसलमान से पूछिये 'गणेश भगवान कौन हैं' वो सतही तौर पर पहचानता होगा, नवरात्र कब होते हैं, शिव जी की पत्नी कौन हैं,कृष्ण ने किसका वध किया, उसे पता होगा
लेकिन आप मुसलमानों के बारे में कितना जानते हैं? ईमानदारी से बताइयेगा कि इस समाज को कभी करीब से देखने की कोशिश की है आपने?
या 'टीवी वाले मुसलमान' को ही 'मुसलमान' समझा है, वो 'टीवी वाला मुसलमान' जिसके मुहल्ले की गलियों में हमेशा 'चांद-तारे' वाली झंडिया सजी होती हैं,दरवाज़े हरे होते हैं, जो जालीदार बनियान पहनता है, उसके गले में तावीज़, सर पर टोपी और आंखों में सुरमा होता है ..
अगर हां, तो सच तो ये है कि हज़ारों साल की साझा संस्कृति के बावजूद आपने मुसलमानों को कभी नहीं जाना। न आप जानते हैं और न जानना चाहते हैं।
हाल ही में एक न्यूज़ चैनल पर अपनी एक एंकर को ख़बर पढ़ते हुए देख रहा था। उसने कहा, 'फलां गांव में एक ग़ैर मुस्लिम लड़की को उर्दू से इतना लगाव था कि उसने पूरी क़ुरान पढ़ डाली'।
इतने साल मुसलमान दोस्तों के बीच रहने के बावजूद जब आप इतना नहीं जान पाए कि कुरान 'उर्दू' में नहीं 'अरबी' में है, तो आप कैसे ये उम्मीद लगा सकते हैं कि हिंदुस्तानी मुसलमान इस मुल्क में उसी तरह रहे जैसे आप रहते हैं। इतने सालों में आपको ये अंदाज़ा नहीं हुआ कि मुहर्रम हैप्पी नहीं होता तो आप मुसलमानों के बारे में कोई भी राय कैसे बना सकते हैं।
जब आप हर साल आखिरी रोज़े पर अपने मुस्लिम दोस्त को मैसेज करके पूछते हैं 'ये मीठी ईद है या गोश्त वाली?' तो आप अपने और उस दोस्त के बीच का फ़ासला बढ़ा लेते हैं।
अफसोस
इतने साल बीत गए पर आपको आज तक असल और हकीकी पहचान नहीं पता ।
प्लीज़ ज़रा हमारे नज़दीक आईये और हमे व हमारे मज़हब को समझने की कोशिश कीजिये तब शायद आप लोगो को सच्चाई का पता चले...
Cp
22/01/2020
मोदी जी कपड़ों से पहचानो? ये आदित्य राव है मंगलोर एयरपोर्ट पर बम प्लांट किया था। https://t.co/JNVhKAZvqB