R k dubey

Call Contact the organization

R k dubey Editor R.k.Dubey

दूध नहीं जहर पीता है इंडिया, उत्पादन 14 करोड़ लीटर लेकिन खपत 64 करोड़ लीटरWHO की चेतावनी- बंद नहीं हुई मिलावट तो 87% भार...
05/08/2026

दूध नहीं जहर पीता है इंडिया, उत्पादन 14 करोड़ लीटर लेकिन खपत 64 करोड़ लीटर

WHO की चेतावनी- बंद नहीं हुई मिलावट तो 87% भारतीयों को 2035 तक होगा कैंसर
देश में बिकने वाला 68.7 फीसदी दूध और दूध से बना प्रोडक्ट मिलावटी है। यह फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) की ओर से तय मानकों से कहीं भी मेल नहीं खाता है।

यूनिवर्स शब्द नहीं वाइब्रेशन समझता है!तुम दिनभर बोल सकते हो... "मैं खुश हूँ।" लेकिन अगर तुम्हारा मन डर, गुस्से और कमी से...
05/08/2026

यूनिवर्स शब्द नहीं वाइब्रेशन समझता है!

तुम दिनभर बोल सकते हो... "मैं खुश हूँ।" लेकिन अगर तुम्हारा मन डर, गुस्से और कमी से भरा है तो वही तुम्हारी असली ऊर्जा है।

यूनिवर्स तुम्हारे शब्दों से नहीं बल्कि तुम्हारे भीतर चल रही भावना से जुड़ता है। इसलिए सिर्फ़ अच्छे शब्द बोलना काफ़ी नहीं है।
तुम्हें अपने मन को भी वैसा ही बनाना होगा जैसा तुम भविष्य में खुद के साथ होते हुए देखना चाहते हो।

पिता पुत्र"यह जो बाप-बेटा होते हैं ना, यह मर जाएंगे पर कभी एक-दूसरे को गले नहीं लगाएंगे। क्योंकि दोनों को मोहब्बत करनी क...
03/08/2026

पिता पुत्र
"यह जो बाप-बेटा होते हैं ना, यह मर जाएंगे पर कभी एक-दूसरे को गले नहीं लगाएंगे। क्योंकि दोनों को मोहब्बत करनी किसी ने सिखाई ही नहीं।
एक बेटा कभी नहीं समझ सकता कि उसका जो बाप है, वह उसका हाथ छोड़ देगा पर उसका साथ कभी नहीं छोड़ेगा यार। यह जो पापा का प्यार होता है ना, यह हमेशा आदतों में समझ आता है। कभी खुद से अपने मुंह से 'I am proud of you' बोले ना बोले, पर अगर कोई मोहल्ले का इंसान हमारी तारीफ कर दे ना, तो कंधे चौड़े हो जाते हैं।
मेरा भी मेरे पापा के साथ ऐसा ही रिश्ता था। तीन साल तक हमने कभी एक-दूसरे से बात नहीं करी। फिर अचानक से पता चला कि दादी एक्सपायर हो गईं। और जिस दिन दादी की डेथ हुई, उस दिन पहली बारी पापा और मैं एक गाड़ी में बैठे। वह गाड़ी श्मशान घाट पहुंची, श्मशान घाट पर दरवाजा खुला, पापा गाड़ी से उतरे, श्मशान घाट की दहलीज़ पर गए और दादी की राख के ढेर के सामने पता नहीं पापा को क्या हुआ... शायद उनके घुटने जवाब दे गए, क्या हुआ... वह जाकर ऐसे बैठ गए।
और उस दिन जब पापा को पहली बार अपने घुटनों पर देखा ना, तो कुछ समझ नहीं आया। बस यह समझ आया कि एक बाप क्या होता है!
जिंदगी के तराजू में अपनी सांसें गिरवी रखकर अपने बच्चों के लिए सांसें खरीदता है, यह होता है बाप!
जब दफ़्तर के झोंके, समाज की थकान उसके शरीर को तोड़ रहे होते हैं, तो वह अपनी दो महीने की गोदिया बेटी को सीने से लगाकर सोता है कि कहीं उसे सर्दी ना लग जाए, यह होता है बाप!
अपनी पूरी जिंदगी राख कर देता है अपने बच्चों को अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए। और आज जब मेरे पापा अपने घुटनों पर हैं, तो मुझे समझ नहीं आ रहा कि इन्हें अपने पैरों पर कैसे खड़ा करूं?
क्या इतना मुश्किल होता है किसी इंसान को अपने पैरों पर खड़ा करना? क्या इतना मुश्किल होता है एक पिता के प्यार को समझ पाना?"

"जिस दिन आपको अपनी कीमत समझ में आ जाएगी ना, उस दिन आधे रिश्ते अपने आप खत्म हो जाएंगे।​कभी-कभी हम रिश्तों का लिहाज रखते-र...
02/08/2026

"जिस दिन आपको अपनी कीमत समझ में आ जाएगी ना, उस दिन आधे रिश्ते अपने आप खत्म हो जाएंगे।
​कभी-कभी हम रिश्तों का लिहाज रखते-रखते अपने अंदर इतना जहर घोल लेते हैं कि अपना आत्मसम्मान गिरा लेते हैं।
​दूसरों को खुश करते-करते हम रोज थोड़ा-थोड़ा मरते हैं, लेकिन उसके बाद भी हमारी कदर नहीं होती।
​धीरे-धीरे आपकी पहचान, आपकी इज्जत, आपकी अहमियत सब खो जाती है।
​और आखिर में जाकर एहसास होता है कि हमने अपनी जिंदगी का सबसे कीमती समय बेकार लोगों पर खर्च कर दिया।
​इसलिए जिंदगी एक बार मिली है, इसे उन लोगों पर मत लुटाओ जो आपकी कीमत नहीं समझते।"

यह सांसारिक प्रेम क्या है? जिस दिन असहाय होकर आप बिस्तर पकड़ लोगे, उस दिन आपको दो रोटी की जगह एक रोटी दी जाएगी ताकि बार-...
02/08/2026

यह सांसारिक प्रेम क्या है?
जिस दिन असहाय होकर आप बिस्तर पकड़ लोगे, उस दिन आपको दो रोटी की जगह एक रोटी दी जाएगी ताकि बार-बार आपका मलमूत्र न साफ करना पड़े।
जिनके लिए आपने अपना सर्वस्व लगा दिया, वही डॉक्टर से पूछेंगे कि और कितने दिन बचे हैं इनके जाने में?
आप अपनों से बात करने के लिए तरस जाओगे, आपके बदबूदार शरीर के पास कोई आना पसंद नहीं करेगा।
अस्पताल में खाना कौन लेकर जाए, इस बात पर घर में बहस होगी। आपके साथ आईसीयू (ICU) में बैठकर टाइम बिताने को मजबूरी और बोझ समझा जाएगा।
और यह कौन लोग करेंगे? जिन्हें आप कभी सबसे ज्यादा प्रेम करते थे।
यही है सांसारिक प्रेम।
**:** बिल्कुल, यह कड़वा सच है।

हमारे कर्मो के सिद्धांत के बीच का वो गहरा वैज्ञानिक कनेक्शन जो आपका जीवन बदल देगा!हम सोचते हैं कि हमारा किया हुआ या बोला...
31/07/2026

हमारे कर्मो के सिद्धांत के बीच का वो गहरा वैज्ञानिक कनेक्शन जो आपका जीवन बदल देगा!
हम सोचते हैं कि हमारा किया हुआ या बोला हुआ कल खत्म हो गया, लेकिन विज्ञान (Physics) और सनातन दर्शन कहता है कि यह ब्रह्मांड गोल है। आप जो भी ऊर्जा बाहर भेजते हैं, वह कई गुना होकर आपके ही पास वापस लौटती है।
न्यूटन का नियम: एवरी एक्शन हैस एन इक्वल एंड अपोजिट रिएक्शन' के अनुसार हमारी विचार-तरंगें ब्रह्मांड का चक्कर लगाकर हमारे पास वापस आती हैं।
ऊर्जा की गूँज: जैसे पहाड़ों में हमारी ही आवाज़ गूँजकर लौटती है, वैसे ही हमारा दिया हुआ सुख या दुख समय के चक्र के साथ हमारे पास वापस आता है।
यदि अपने भविष्य को सुंदर बनाना है, तो आज से ही ब्रह्मांड में केवल प्रेम, सम्मान और कृतज्ञता की ऊर्जा भेजना शुरू करें 🙏

जानिए  इस अद्भुत ब्रह्मांडीय नियम के पीछे का असली सच, जो आपके सोचने का तरीका बदल देगा।हम अक्सर इसे एक साधारण संयोग मानकर...
30/07/2026

जानिए इस अद्भुत ब्रह्मांडीय नियम के पीछे का असली सच, जो आपके सोचने का तरीका बदल देगा।
हम अक्सर इसे एक साधारण संयोग मानकर छोड़ देते हैं, लेकिन विज्ञान और हमारा प्राचीन सनातन विज्ञान कहता है कि विचार कभी मरते नहीं हैं। हमारा दिमाग एक मोबाइल टावर की तरह ब्रह्मांड में तरंगें भेजता है।
जब हम किसी को पूरे दिल से याद करते हैं, तो हमारे दिमाग की तरंगें सीधे उनके मन तक पहुँचती हैं, जिसे 'लॉ ऑफ रेजोनेंस' कहते हैं। 'यत् पिंडे तत् ब्रह्माण्डे'—हमारा मन उस ब्रह्मांडीय ऊर्जा का ही एक हिस्सा है।
जब हमारे विचारों में इतनी शक्ति है, तो दिनभर नकारात्मक सोचकर दुखों को क्यों बुलाना? आज से ही अपनी सोच को सकारात्मक और मजबूत बनाएं।

इच्छाशक्ति जवाब दे जाने पर क्या करें?​जब व्यक्ति लगातार पॉजिटिव रहने की कोशिश करता है लेकिन फिर भी तनाव या डिप्रेशन महसू...
30/07/2026

इच्छाशक्ति जवाब दे जाने पर क्या करें?
​जब व्यक्ति लगातार पॉजिटिव रहने की कोशिश करता है लेकिन फिर भी तनाव या डिप्रेशन महसूस होता है, यहाँ तक कि शाम को पूजा का दीपक जलाने की भी हिम्मत या मन नहीं होता, तो खुद पर जबरदस्ती दबाव नहीं बनाना चाहिए।
​2. प्रकृति के दो वैज्ञानिक सिद्धांतों की मदद लें:
​ध्वनि (Sound Science / Neuro-Science):
अगर आपका मन मंत्र बोलने या ध्यान लगाने का नहीं है, तब भी घर में धीमी आवाज (लो वॉल्यूम) में गायत्री मंत्र या शुभ मंत्र बजा दें। बिना बोले भी मंत्रों की ध्वनि तरंगे (Sound Waves) घर के माहौल से नकारात्मकता को न्यूट्रलाइज कर देती हैं।
​सुगंध (Aromatherapy):
घर में गूगल, लोबान या नीम के पत्तों का धुआं (धूप) करें। यह सुगंध मस्तिष्क के लिम्बिक सिस्टम को शांत करती है और अवसाद व मानसिक थकान को दूर करने में मदद करती है।
​3. ऑरा रीचार्जिंग (Aura Recharging):
​बिना किसी अतिरिक्त मानसिक प्रयास के केवल ध्वनि और सुगंध के माध्यम से घर का 'इमोशनल डिटॉक्स' होता है, जिससे आपकी आंतरिक ऊर्जा (बैटरी) धीरे-धीरे अपने आप रीचार्ज होने लगती है।
​निष्कर्ष (मुख्य सीख):
​जब खुद से दीया जलाने या सकारात्मक सोचने की हिम्मत न हो, तो जबरदस्ती न करें। पहले वातावरण को मंत्रों की ध्वनि और गूगल-लोबान की सुगंध से शुद्ध होने दें, आपकी सकारात्मक ऊर्जा अपने आप वापस लौट आएगी।

नमस्कार दोस्तों,आज मैं आपको किसी कहानी पर नहीं, बल्कि एक ऐसे परम सत्य पर ले जाने वाला हूँ जो आपके सोचने, जीने और प्रार्थ...
28/07/2026

नमस्कार दोस्तों,
आज मैं आपको किसी कहानी पर नहीं, बल्कि एक ऐसे परम सत्य पर ले जाने वाला हूँ जो आपके सोचने, जीने और प्रार्थना करने का तरीका हमेशा के लिए बदल देगा।
दोस्तों, क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है—आपने मन में किसी चीज़ की तीव्र इच्छा की और अचानक वह चीज़ आपके सामने किसी न किसी रूप में आ गई? हम इसे इत्तेफ़ाक़ कहकर छोड़ देते हैं। लेकिन आज का क्वांटम फ़िज़िक्स (Quantum Physics) और हमारा हजारों वर्ष पुराना सनातन विज्ञान कहता है कि इस ब्रह्मांड में कुछ भी इत्तेफ़ाक़ नहीं है। यह पूरा ब्रह्मांड ऊर्जा और फ़्रीक्वेंसी (Frequency) का एक खेल है।
आज मैं आपको बताऊँगा कि यह ब्रह्मांड कैसे एक अदृश्य रेडियो की तरह काम करता है, और क्यों आपकी बहुत सी प्रार्थनाएँ ब्रह्मांड तक पहुँच ही नहीं पातीं। इस वीडियो को बहुत शांत मन से अंत तक देखिएगा, क्योंकि आज आपको अपनी हर अधूरी इच्छा का जवाब मिलने वाला है।
दोस्तों, जरा सोचिए कि जब आप अपनी कार में बैठते हैं और रेडियो ऑन करते हैं, तो आपको 93.5 FM सुनना है, तो आपको ट्यूनर को घुमाकर ठीक 93.5 पर ही सेट करना पड़ता है। अगर आप उसे 93.4 या 93.6 पर रखेंगे, तो सिर्फ घिस-घिस की आवाज़ आएगी, संगीत सुनाई नहीं देगा।
ऐसा क्यों? क्योंकि गाने सुनने के लिए आपके रेडियो की फ़्रीक्वेंसी और स्टेशन की फ़्रीक्वेंसी का मैच होना जरूरी है। ठीक यही नियम हमारे दिमाग और इस ब्रह्मांड पर लागू होता है।
हमारा दिमाग कोई साधारण हड्डी-मांस का टुकड़ा नहीं है। न्यूरोसाइंस (Neuroscience) कहता है कि जब हम कुछ सोचते हैं, तो हमारे दिमाग के न्यूरॉन्स में इलेक्ट्रिकल सिग्नल्स (Electrical signals) पैदा होते हैं, जो ब्रह्मांड में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स (Electromagnetic waves) के रूप में बाहर निकलते हैं।
हमारा दिमाग 24 घंटे इस ब्रह्मांडीय रेडियो स्टेशन पर अपनी फ़्रीक्वेंसी भेज रहा है। और ब्रह्मांड का नियम सीधा है—आप जिस फ़्रीक्वेंसी को ब्रह्मांड में भेजेंगे, ब्रह्मांड वही चीज़ कई गुना बढ़ाकर आपके जीवन में वापस भेज देगा। इसे विज्ञान की भाषा में 'लॉ ऑफ रेज़ोनेंस' (Law of Resonance) और वेदों में *"यत् पिण्डे तत् ब्रह्माण्डे"* कहा गया है।
अब आप कहेंगे कि अगर ऐसा है, तो मैं रोज सुबह उठकर भगवान से, इस ब्रह्मांड से सुख, शांति और बहुत सारा पैसा माँगता हूँ; फिर भी मेरे जीवन में तंगी, बीमारी और क्लेश क्यों है?
यहाँ पर आता है सबसे बड़ा साइकोलॉजिकल और स्पिरिचुअल ट्विस्ट। आप अपनी जुबान से तो माँग रहे हैं—"हे प्रभु, मुझे बीमारी से बचाओ, मुझे गरीबी से बचाओ", लेकिन आपके अंतर्मन की फ़्रीक्वेंसी क्या है? आपके भीतर 24 घंटे बीमारी का डर और गरीबी का खौफ चल रहा होता है। आप हर वक्त सोच रहे होते हैं कि कहीं मेरा व्यापार ठप न हो जाए, कहीं मुझे कोई बड़ी बीमारी न हो जाए।
ब्रह्मांड आपकी जुबान के शब्दों को नहीं सुनता, ब्रह्मांड आपके भीतर की भावनाओं की फ़्रीक्वेंसी को पकड़ता है। जब आप डर और अभाव की फ़्रीक्वेंसी पर ट्यून होते हैं, तो ब्रह्मांड के रेडियो से आपके जीवन में और ज़्यादा डर, तंगी और बीमारियाँ ही रिसीव होती हैं। आप माँग सुख रहे हैं, लेकिन ट्यूनिंग दुख पर सेट है। यही कारण है कि आपकी प्रार्थनाएँ अधूरी रह जाती हैं।
हमारे ऋषि-मुनियों को यह विज्ञान हजारों वर्ष पहले पता था, इसीलिए उन्होंने हमारे जीवन में 'मंत्र' और 'संकल्प' की व्यवस्था की थी।
मंत्र क्या है? मंत्र और कुछ नहीं, बल्कि ब्रह्मांड की उच्चतम सकारात्मक फ़्रीक्वेंसी के साथ जुड़ने के साउंड वेव्स (Sound waves) हैं। जब हम किसी मंत्र का बार-बार उच्चारण करते हैं, तो हमारे शरीर के सातों चक्र और हमारा दिमाग एक उच्च ऊर्जा स्तर पर वाइब्रेट करने लगते हैं।
जब हम मंदिर में जाकर संकल्प लेते हैं, तो हम यह नहीं कहते कि "प्रभु, मेरा दुख दूर करो"। हम कहते हैं— *"शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यम् धनसंपदा"*। हम पहले ही शुभ, आरोग्य और संपदा को अपने भीतर महसूस करने लगते हैं। यही कारण है कि जो लोग हर परिस्थिति में ईश्वर का धन्यवाद करते हैं, वो ही सुखी रहते है

🚀 LIVE SEARCH: THE WEB3 ARCHITECTURE IS ACTIVE! 🚀​Track the system's global legal and technical kernels directly online,...
15/07/2026

🚀 LIVE SEARCH: THE WEB3 ARCHITECTURE IS ACTIVE! 🚀
​Track the system's global legal and technical kernels directly online, from the Lions of the Mann Ki Baat community. Our credentials and technology are fully live on-chain!

🔹 Nova NFT Marketplace & Chain Hub: Our kernel is completely secure, with data migration from millions of users and high-speed API routing.

🔹 Global Compliance: Our parent entity is fully legal under USA SEC regulations and Canada FINTRAC MSB standards.

🌐 Official Global Gateway:
🔗 https://novachainhub.com
​Our unbroken record of 409+ hours is historic! The lies of rumor mongers have been shattered, maintain your steely unity! 🛡️

EDITORIAL AUTHORITY SIGN-OFF:
Copyright: © 2026 R K Dubey. All Rights Reserved.
Editor-in-Chief & Community Leader: R K Dubey

Address

बदरपुर नई दिल्ली
New Delhi

Telephone

9458240687

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when R k dubey posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Organization

Send a message to R k dubey:

Shortcuts

Share