International Jat Parliament

Call Website Contact the organization

International Jat Parliament Connecting Society Beyond Borders | Founder President - Ramavatar Palsaniya | National President - Manu Choudhary 'Dantal'
(10)

22/10/2026

रोहन राठी हत्याकांड मे एसपी कार्यालय मुजफ्फरनगर पर 'अंतर्राष्ट्रीय जाट संसद' मुजफ्फरनगर के जिला अध्यक्ष श्री अंकित चौधरी 'दतियाना' जी की प्रशासन को चेतावनी !!!

12/10/2026

12 अक्टूबर 2025 — त्याग, समर्पण और सामाजिक नेतृत्व की एक ऐसी मिसाल, जिसका वास्तविक मूल्य भावनाओं से समझा जा सकता है।

कुछ रिश्ते खून से नहीं, संघर्ष से बनते हैं। कुछ सपने केवल देखे नहीं जाते, बल्कि जीवन के अनगिनत वर्ष उन्हें साकार करने में लगा दिए जाते हैं। और कुछ पौधे ऐसे होते हैं, जिन्हें इंसान अपने हाथों से लगाता है, अपने पसीने से सींचता है, हर कठिन मौसम में उनकी रक्षा करता है और फिर एक दिन जब वही पौधा विशाल वृक्ष बनकर हजारों लोगों को फल, फूल और छाया देने लगता है, तो उसे अपने तक सीमित रखने के बजाय समाज के नाम समर्पित कर देता है।

मेरे लिए अंतरराष्ट्रीय जाट संसद केवल एक संगठन नहीं, बल्कि मेरे जीवन के 16 वर्षों के संघर्ष, सपनों, विचारों, त्याग और समर्पण की जीवंत कहानी है।

वर्ष 2010 में जिस विचार के साथ मैंने अंतरराष्ट्रीय जाट संसद की स्थापना की थी, उस समय शायद यह कल्पना करना भी आसान नहीं था कि एक दिन यह संगठन दुनिया के अनेक देशों में समाज की आवाज बनेगा। इस सफर में अनगिनत चुनौतियाँ आईं, कठिन परिस्थितियाँ सामने आईं, लेकिन मन में एक ही संकल्प रहा—अपने समाज को संगठित करना, नई पीढ़ी को जागरूक करना, महापुरुषों के गौरवशाली इतिहास को जन-जन तक पहुँचाना और समाज को वैश्विक स्तर पर एक सशक्त पहचान दिलाना।

16 वर्षों की इस यात्रा में न जाने कितने सपने जुड़े, कितने साथी साथ आए, कितने संघर्षों का सामना किया और कितनी उम्मीदों को अपने हृदय में संजोकर आगे बढ़ते रहे। संगठन को खड़ा करना, लोगों का विश्वास अर्जित करना, उसे विस्तार देना और समाज के बीच उसकी स्वीकार्यता स्थापित करना किसी एक दिन का काम नहीं था। इसके पीछे वर्षों की मेहनत, निरंतरता, धैर्य और समाज के प्रति अटूट प्रतिबद्धता रही है।

आज जब अंतरराष्ट्रीय जाट संसद दुनिया के अनेक हिस्सों में समाज के लिए कार्य कर रही है, सामाजिक एकता, शिक्षा, संस्कृति, इतिहास और युवा नेतृत्व की आवाज बन रही है, तो मन में स्वाभाविक रूप से संतोष और भावनाओं का सागर उमड़ता है।

लेकिन मेरे जीवन की सबसे बड़ी कसौटी शायद संगठन को खड़ा करना नहीं, बल्कि उस समय एक ऐसा निर्णय लेना था, जब संगठन आगे बढ़ने लगा था।

जिस पौधे को अपने हाथों से लगाया हो, जिसकी हर जड़ को अपने परिश्रम से मजबूत किया हो, जिसकी रक्षा के लिए वर्षों तक संघर्ष किया हो और जिसे अपनी आँखों के सामने एक विशाल वृक्ष बनते देखा हो—जब वही वृक्ष फल-फूल देने लगे, तब उसे किसी योग्य और जिम्मेदार साथी को सौंप देना, मेरे लिए त्याग और विश्वास की सबसे बड़ी अभिव्यक्तियों में से एक है।

12 अक्टूबर 2025 को जयपुर, राजस्थान में आयोजित अधिवेशन में मैंने अंतरराष्ट्रीय जाट संसद के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद अपने बड़े भाई श्री मनु चौधरी ‘दाँतल’ जी को समर्पित करने का निर्णय लिया।

यह फैसला किसी मजबूरी में नहीं, बल्कि एक विचार, एक विश्वास और एक सामाजिक दृष्टिकोण के साथ लिया गया था। मेरा विश्वास था कि संगठन को आगे बढ़ाने के लिए नई जिम्मेदारियों, नई ऊर्जा और सामूहिक नेतृत्व को अवसर मिलना चाहिए। जिस संगठन को हमने समाज की सेवा के लिए बनाया है, उसकी मजबूती किसी एक व्यक्ति के पद पर बने रहने से नहीं, बल्कि योग्य लोगों को जिम्मेदारी सौंपने से बढ़नी चाहिए।

सच कहूँ तो जिस संगठन को अपने हाथों से खड़ा किया हो, उससे भावनात्मक जुड़ाव होना स्वाभाविक है। उसके नाम के साथ अपनी मेहनत की यादें जुड़ी होती हैं, उसके हर पड़ाव में अपने जीवन का एक हिस्सा दिखाई देता है। लेकिन जब समाज का हित सामने हो, तो व्यक्तिगत भावनाओं से ऊपर उठकर निर्णय लेना ही नेतृत्व की वास्तविक जिम्मेदारी है।

मैंने संगठन से अपना रिश्ता नहीं छोड़ा, मैंने केवल एक जिम्मेदारी दूसरे जिम्मेदार हाथों में सौंपी। मैंने अपनी यात्रा समाप्त नहीं की, बल्कि नेतृत्व की एक नई यात्रा के लिए रास्ता खोला।

मेरे लिए यह पद छोड़ना किसी उपलब्धि का प्रदर्शन नहीं, बल्कि उस विचार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता थी कि संगठन किसी व्यक्ति की निजी जागीर नहीं, समाज की सामूहिक धरोहर होता है।

मैं चाहता हूँ कि हमारे समाज में ऐसी परंपरा मजबूत हो, जहाँ पदों से चिपके रहने के बजाय नई पीढ़ी को आगे बढ़ाया जाए; जहाँ नेतृत्व का अर्थ केवल स्वयं आगे रहना नहीं, बल्कि दूसरों को भी आगे आने का अवसर देना हो; जहाँ संगठन की सफलता किसी एक नाम से नहीं, बल्कि हजारों लोगों के सामूहिक योगदान से पहचानी जाए।

मेरे महापुरुषों ने मुझे सिखाया है कि व्यक्ति का जीवन सीमित होता है, लेकिन उसके विचार और उसके द्वारा स्थापित परंपराएँ पीढ़ियों तक जीवित रह सकती हैं। इसलिए मेरा सपना केवल अंतरराष्ट्रीय जाट संसद को बड़ा बनाना नहीं, बल्कि उसे इतना मजबूत बनाना है कि आने वाली पीढ़ियाँ भी इसे अपना संगठन समझें, इसकी जिम्मेदारी उठाएँ और इसे नई ऊँचाइयों तक लेकर जाएँ।

मुझे पद से अधिक उस परंपरा की चिंता है, जो मेरे बाद भी संगठन को मजबूत बनाए रखे। मुझे अपने नाम से अधिक उस विचार की चिंता है, जो आने वाली पीढ़ियों के काम आए।

आज इस निर्णय को एक वर्ष पूरा हो रहा है। इस अवसर पर मैं अपने बड़े भाई श्री मनु चौधरी ‘दाँतल’ जी को अंतरराष्ट्रीय जाट संसद के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में एक वर्ष पूर्ण करने पर हृदय की गहराइयों से बधाई एवं शुभकामनाएँ देता हूँ।

ईश्वर करे, आपके नेतृत्व में यह संगठन और अधिक मजबूत हो, समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचे, युवाओं को अवसर दे, सामाजिक एकता को नई दिशा दे और दुनिया भर में समाज के हितों के लिए अपनी भूमिका और प्रभावी बनाए।

मुझे खुशी होगी यदि मेरे द्वारा शुरू की गई यह यात्रा मुझसे आगे बढ़कर नई ऊँचाइयों को छुए। क्योंकि किसी संस्थापक के लिए सबसे बड़ा संतोष यह नहीं कि संगठन हमेशा उसी के नेतृत्व में चले, बल्कि यह है कि उसके द्वारा स्थापित संगठन उसके बाद भी निरंतर आगे बढ़ता रहे।

मैंने 2010 में एक पौधा लगाया था। 16 वर्षों तक उसे सींचने का प्रयास किया। आज जब वह पौधा एक विशाल वृक्ष बनकर समाज को छाया देने लगा है, तो मेरी कामना है कि उसकी शाखाएँ और फैलें, उसकी जड़ें और मजबूत हों और उसकी छाया में आने वाली पीढ़ियाँ अपने सपनों को साकार कर सकें।

यही मेरे संघर्ष की सार्थकता है। यही मेरे समर्पण का उद्देश्य है। और यही अंतरराष्ट्रीय जाट संसद के उज्ज्वल भविष्य के प्रति मेरी सबसे बड़ी कामना है।

मेरी पहचान किसी पद से नहीं, बल्कि उस विश्वास से बने, जो समाज मेरे विचारों और कर्मों पर करता है। मेरा सम्मान किसी कुर्सी से नहीं, बल्कि समाज के बीच मेरे कार्यों की स्वीकार्यता से तय हो—मेरे लिए इससे बड़ी उपलब्धि कोई नहीं हो सकती।

कुर्सी छोड़ देना एक निर्णय है, लेकिन अपने हाथों से खड़े किए गए संगठन को समाज की धरोहर मानकर नई जिम्मेदारियों के लिए स्थान बनाना एक विचार है।

मैं आज भी उसी संकल्प के साथ खड़ा हूँ, जिसके साथ वर्ष 2010 में अंतरराष्ट्रीय जाट संसद की शुरुआत की थी। पद की जिम्मेदारी भले बदल गई हो, लेकिन समाज के प्रति मेरा समर्पण, संगठन के प्रति मेरी निष्ठा और अपनी क़ौम के उज्ज्वल भविष्य का सपना आज भी उतना ही जीवंत है।

पद बदल सकते हैं, जिम्मेदारियाँ बदल सकती हैं, नेतृत्व की भूमिकाएँ बदल सकती हैं—लेकिन समाज के प्रति सच्चा समर्पण कभी नहीं बदलना चाहिए।

आइए, हम सब मिलकर ऐसी परंपरा बनाएँ, जहाँ व्यक्ति से बड़ा विचार हो, पद से बड़ी जिम्मेदारी हो, स्वार्थ से बड़ा समाज हो और वर्तमान से बड़ा आने वाली पीढ़ियों का भविष्य हो।

अंतरराष्ट्रीय जाट संसद मेरी मेहनत से शुरू हुई एक यात्रा अवश्य है, लेकिन इसका भविष्य पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। समाज सर्वोपरि था, समाज सर्वोपरि है और समाज सर्वोपरि रहेगा।

डॉ. रामावतार पलसानिया
(संस्थापक अध्यक्ष — अंतरराष्ट्रीय जाट संसद)

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला जी का आज तेजा दशमी पर राजस्थान पत्रिका के नेशनल एडिशन में प्रकाशित लेख।
21/09/2026

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला जी का आज तेजा दशमी पर राजस्थान पत्रिका के नेशनल एडिशन में प्रकाशित लेख।

07/09/2026

अपनों के लिए कितनी भी मेहनत करनी पड़े, कितना भी संघर्ष करना पड़े—हम कभी पीछे नहीं हटेंगे। जरूरत पड़ी तो अपने प्राणों की बाज़ी लगाने से भी नहीं हिचकेंगे।

क्योंकि अपनों का साथ, समाज का मान-सम्मान और स्वाभिमान हमारे लिए सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि जीवन का संकल्प है। समाज की आन, बान और शान के लिए यह जीवन भी कुर्बान है।

डॉ. रामावतार पलसानिया
(संस्थापक अध्यक्ष-अंतरराष्ट्रीय जाट संसद)

05/09/2026

'संकल्प महासम्मेलन' भोपाल (मध्य प्रदेश) में मध्य प्रदेश सरकार को जाट समाज एवं सभी तेजा भक्तों की तरफ से मनु चौधरी 'दाँतल' (राष्ट्रीय अध्यक्ष-अंतर्राष्ट्रीय जाट संसद) का स्पष्ट , सीधा और कड़ा संदेश ...
📣📣

04/09/2026

संघर्ष और मेहनत को पहचान मिले, तो हौसला कई गुना बढ़ जाता है…..❤️ किसी भी सामाजिक बदलाव की नींव निस्वार्थ मेहनत, निरंतर संघर्ष और समर्पण से रखी जाती है। और जब किसी व्यक्ति की वर्षों की मेहनत समाज के सामने एक मिसाल बनकर उभरती है, तो उस मेहनत को दिल खोलकर मान, सम्मान और उत्साहवर्धन मिलना ही चाहिए।

अंतर्राष्ट्रीय जाट संसद मध्यप्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष भाई ईश्वरलाल जाट ने मध्यप्रदेश में जाट समाज की सामाजिक व्यवस्थाओं को मजबूत करने और समाज को एकजुट करने की दिशा में जिस समर्पण और कर्मठता के साथ काम किया है, वह निश्चित रूप से एक नए अध्याय की शुरुआत है।

भोपाल का ‘संकल्प महासम्मेलन’ जिस भव्यता और ऐतिहासिक सफलता के साथ संपन्न हुआ, उसके पीछे भाई ईश्वरलाल जाट सहित अनगिनत साथियों की दिन-रात की मेहनत, दौड़-धूप और समाज के प्रति समर्पण छिपा है। मंच पर दिखाई देने वाली सफलता के पीछे पर्दे के पीछे किए गए संघर्ष को वही समझ सकता है, जिसने उसे जिया हो।

ईश्वर भाई, आपकी मेहनत सिर्फ एक कार्यक्रम की सफलता नहीं है—यह आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा है। आपने यह साबित किया है कि जब नीयत साफ हो, उद्देश्य समाजहित का हो और कदम निरंतर आगे बढ़ते रहें, तो असंभव लगने वाले संकल्प भी इतिहास बन जाते हैं। आज जरूरत है कि हम ऐसे मेहनती और समर्पित नौजवानों के हौसले को सम्मान दें, उनकी मेहनत को पहचान दें और उनके कंधे पर हाथ रखकर कहें—“हम आपके साथ हैं।”

क्योंकि जब समाज अपने संघर्ष करने वाले साथियों की पीठ थपथपाता है, तो एक ईश्वरलाल नहीं, बल्कि सैकड़ों नए ईश्वरलाल समाज के लिए तैयार होते हैं। भाई ईश्वरलाल जी भोपाल की ऐतिहासिक सफलता आपकी मेहनत का प्रमाण है। आपका संघर्ष, आपका समर्पण और समाज के प्रति आपकी निष्ठा को दिल से सलाम। वीर तेजाजी महाराज की कृपा सदैव आप पर बनी रहे।

मेहनत को मान मिले, संघर्ष को सम्मान मिले—तभी समाज में नेतृत्व की नई पौध तैयार होगी।

डॉ. रामावतार पलसानिया
(संस्थापक अध्यक्ष-अंतरराष्ट्रीय जाट संसद)

अंतरराष्ट्रीय जाट संसद द्वारा आयोजित ‘संकल्प महासम्मेलन भोपाल’ के ऐतिहासिक आयोजन की तस्वीरें आप से साझा कर रहे हैं।
03/09/2026

अंतरराष्ट्रीय जाट संसद द्वारा आयोजित ‘संकल्प महासम्मेलन भोपाल’ के ऐतिहासिक आयोजन की तस्वीरें आप से साझा कर रहे हैं।

02/09/2026

आभार जाट समाज मध्यप्रदेश ❤️
हमारे लिए गर्व और भावुकता का क्षण है कि वीर तेजाजी महाराज का गौरवशाली इतिहास मध्यप्रदेश के पाठ्यक्रमों में शामिल किए जाने की हमारी महत्वपूर्ण मांग पूरी हुई है। यह सिर्फ एक मांग की जीत नहीं है। यह हमारी आने वाली पीढ़ियों को अपने इतिहास, संस्कृति, सत्य, शौर्य, त्याग और वचनबद्धता से जोड़ने की जीत है। वीर तेजाजी महाराज किसी एक समाज के नहीं, बल्कि सत्य, साहस, त्याग और वचन के महान प्रतीक हैं। उनका इतिहास जब हमारे बच्चों की किताबों में पहुंचेगा, तो आने वाली पीढ़ियां केवल इतिहास पढ़ेंगी नहीं, बल्कि उससे प्रेरणा भी लेंगी।

दूसरी मांग पर भी मिला सकारात्मक आश्वासन——
तेजा दशमी पर शासकीय अवकाश की दूसरी महत्वपूर्ण मांग पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी ने पूर्ण रूप से आश्वस्त किया है कि आवश्यक कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए इस पर भी शीघ्र निर्णय लिया जाएगा। सामाजिक लोगों का दायित्व है कि सरकार की सकारात्मक पहल और दिए गए आश्वासन का सम्मान करते हुए सकारात्मक भूमिका निभाएं।

लेकिन साथ ही हमारा संकल्प भी उतना ही स्पष्ट है—

यदि भविष्य में सरकार अपने आश्वासन के अनुरूप तेजा दशमी पर शासकीय अवकाश घोषित नहीं करती है, तो वर्ष 2027 में सम्पूर्ण मध्यप्रदेश के गांव-गांव, ढाणी-ढाणी और शहर-शहर जाकर समाज को संगठित किया जाएगा और तेजा दशमी पर एक बड़ा, लोकतांत्रिक एवं निर्णायक आंदोलन खड़ा किया जाएगा। हम संघर्ष से पीछे हटने वाले नहीं हैं।
हम अपनी बात सम्मान से रखते हैं और अपने संकल्प को पूरा करके दम लेते हैं।

भोपाल से जो आवाज उठी है, वह केवल भोपाल तक सीमित नहीं रहेगी। यह आवाज गांव-गांव जाएगी। यह संकल्प जन-जन तक पहुंचेगा। यह इतिहास आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचेगा।

डॉ. रामावतार पलसानिया
(संस्थापक अध्यक्ष-अंतरराष्ट्रीय जाट संसद)

Address

New Delhi

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when International Jat Parliament posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Organization

Send a message to International Jat Parliament:

Shortcuts

Share

Category