Bharat Hamari Maa

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राष्ट्र प्रथम,भारतीय गौरवमयी इतिहास ?

23/09/2025
23/09/2025

23 सितंबर को हरियाणा "वीर शहीद दिवस" मनाता है क्योंकि 1863 में आज ही के दिन राव तुला राम का निधन हुआ था. रेवाड़ी के राजा राव तुलाराम ने आजादी के पहले स्वाधीनता संग्राम मे अहम योगदान दिया था. अंग्रेजों के साथ एक ही युद्ध मे राज राव तुलाराम की सेना के लगभग पांच हजार सैनिक शहीद हुए थे.

23/09/2025

डॉ. हेडगेवार जी का वह पत्र, जिसमें है संघ कार्य का मूल दर्शन

संघ संस्मरण

मार्च 1936 में कृष्णराव वाडेकर महाराष्ट्र के धुले जलगांव क्षेत्र में शाखा शुरू करने के उद्देश्य से वहाँ पर गए। 24 मार्च 1936 को डॉ. हेडगेवार ने उन्हें एक लिखित स्मृति पत्र ‘संघ-स्थापना विधि’ दिया। उस प्रलेख में स्पष्ट रूप से उस व्यवहार के बारे में लिखा था, जिसकी अपेक्षा एक स्वयंसेवक से की जाती है। इसकी विशेष बातें इस प्रकार थी

- “जैसे शिवाजी का प्रत्येक अधिकारी एक कुशल राजनीतिज्ञ था, ठीक उसी तरह संघ का भी प्रत्येक अधिकारी संघ द्वारा दिए गए प्रशिक्षण के हर पहलू का जानकार होना चाहिए। स्वयंसेवक सरसंघचालक से अनुमति प्राप्त कर, अपनी स्वयं की जिम्मेदारी पर ऐसे किसी भी कार्य में भाग ले सकते हैं, जो हिन्दुओं के कल्याण के विपरीत न हो।

स्वदेशी का विकास किया जाना चाहिए, जिसकी प्रेरणा देशभक्ति की मनोवृत्ति से हो। अपने आपको एक तरफ तो किसी आचार संहिता की कमी की चरम सीमाओं से अनभिज्ञ रखकर, दूसरी और निरर्थक रूढ़ियों से भी दूर रहकर संघ के कार्यकर्ताओं को एक स्वर्णिम साधन ढूँढना होगा, ताकि समाज में नई जान फूँकी जा सके। संघ को ऐसे कार्यक्रमों से दूर रखना होगा, जो अल्पकालीन उत्साह से उपजे हो या फिर अस्थिर भावनाओं के उद्गार हों। ऐसे कार्यक्रमों से जुड़ाव संघ की स्थिरता को केवल नुकसान ही पहुँचाएगा।”

#संघ_संस्मरण #आरएसएस #संघयात्रा #राष्ट्रीय_स्वयंसेवक_संघ #संघ_सन्देश #संघ_स्टोरी #हेडगेवार #महात्मा_गांधी #स्वयंसेवक

23/09/2025

केवल 11 दिन शेष

महेन्द्रो मलयः सह्यो देवतात्मा हिमालयः ।
ध्येयो रैवतको विन्ध्यो गिरिश्वारावलिस्तथा।।

अर्थात् -
हमारे देश के इन पहाड़ों को हमेशा याद रखना चाहिए- महेंद्र, मलाया गिरि, सह्याद्रि, हिमालय, देवताओं का निवास, रैवतक, विंध्याचल और अरावली।

#विजयदशमी2025 #शताब्दीवर्ष #दशहरा #विजयादशमी

23/09/2025

#भारतविमर्श
*क्या किसी ने जम्मू-कश्मीर में गृह मंत्रालय द्वारा 10 दिनों में उठाए गए आठ बड़े कदमों पर ध्यान दिया?*
1. 5 लाख हिंदू-सिख परिवार जम्मू-कश्मीर के निवासी बन गए।
2. उमर अब्दुल्ला और महबूबा से सभी भत्ते/सुविधाएँ वापस ले ली गईं।
3. जम्मू-कश्मीर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय सहित सभी विश्वविद्यालयों पर कश्मीर का नियंत्रण समाप्त हो गया।
4. हिंदू धर्मस्थलों पर कश्मीर का नियंत्रण समाप्त हो गया।
5. 1990 में कश्मीर में हिंदुओं द्वारा छोड़ी गई संपत्तियों से अतिक्रमणकारियों को बेदखल करने और स्वतः संज्ञान लेने का अधिकार सक्षम प्राधिकारी को दिया गया।
6. जम्मू-कश्मीर के सभी गोल्फ़ और अन्य क्लबों पर कश्मीर का नियंत्रण समाप्त हो गया।
7. विश्वविद्यालय मामलों में कश्मीर (मुख्यमंत्री) की भूमिका शून्य हो गई।
8. जम्मू-कश्मीर में 42 साल पहले राष्ट्रद्रोहियों को दी गई कानूनी सुरक्षा वापस ली गई
अब, जन सुरक्षा अधिनियम, 1978 के तहत आने वाले लोगों को जम्मू-कश्मीर के बाहर किसी भी जेल में रखा जा सकता है।
9. फिलहाल जम्मू से कश्मीर कोई सचिवालय स्थानांतरित नहीं होगा या सचिवालय जम्मू में ही काम करता रहेगा।

कुछ और बदलाव:
1. फारूक, उमर, आज़ाद, महबूबा समेत सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों से आवास और वाहन सहित सभी सुविधाएँ वापस ले ली गईं।
2. सभी विश्वविद्यालय अब सीधे नई दिल्ली के नियंत्रण में होंगे और इन विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम को कश्मीर केंद्रित होने से हटाकर संशोधित किया जाएगा।
3. हिंदू तीर्थस्थलों पर हमेशा धर्माथ ट्रस्ट या संबंधित श्राइन बोर्ड का नियंत्रण होता था। अब ये बोर्ड सीधे गृह मंत्रालय को रिपोर्ट करते हैं। लेकिन बात यहीं खत्म नहीं होती। अब जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड (औकाफ) को भी नई दिल्ली ने अपने नियंत्रण में ले लिया है और इसकी सभी संपत्तियाँ, जो अब तक कश्मीरी मुसलमानों के योगदानकर्ताओं और नियाज़ द्वारा बनाई जाती थीं, नई दिल्ली के नियंत्रण में आ गई हैं और अब उन्हीं के नियंत्रण में रहेंगी।
4. नई दिल्ली ने स्थानीय प्रशासन को स्थानीय लोगों को पंडितों से खरीदी गई संपत्तियों से बेदखल करने का अधिकार दे दिया है। बिक्री के दस्तावेज़ रद्द किए जा सकते हैं।
5. न केवल गोल्फ कोर्स, बल्कि सभी वन भूमि और पर्यटन विकास प्राधिकरण अब सीधे नई दिल्ली के नियंत्रण में हैं। वे अब भारत के किसी भी व्यक्ति को प्रमुख भूमि और सुविधाएँ जारी, आवंटित, पट्टे पर या प्रदान कर सकते हैं।
6. जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री को वरीयता क्रम में पहले के 7 से घटाकर 15वें स्थान पर कर दिया गया है।
विश्वविद्यालय बोर्डों या वक्फ बोर्डों से जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री के सभी नामांकन हटा दिए गए हैं।
7. सभी कश्मीरी आईएएस अधिकारियों को कम महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त किया गया है, जबकि गैर-स्थानीय अधिकारी जम्मू से प्रशासन चला रहे हैं।
8. कश्मीर के विभिन्न जिलों में हज़ारों कनाल भूमि को अनिश्चित काल के लिए 'निवेश और उद्योग' के नाम पर गैर-राज्यीय विषयों को आवंटित करने के लिए चिह्नित किया गया है।

*हम सोच रहे थे कि गृह मंत्री इतने चुप क्यों हैं। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में चुपचाप ये कार्रवाइयाँ लागू कीं।*
नरेंद्र सिंह

23/09/2025

जब कोई व्यक्ति किसी विशेष व्यवहार का आदी हो जाता है, तो सामान्य व्यवहार उसे अपमानजनक लगने लगता है क्योंकि वह उस विशेष व्यवहार को अपनी अपेक्षा या पहचान का हिस्सा मान लेता है, और जब सामान्य व्यवहार उस अपेक्षा पर खरा नहीं उतरता, तो उसे ठेस या अपमान महसूस होता है। यह व्यक्ति के आत्म-केंद्रित दृष्टिकोण और दूसरों की भावनाओं को न समझने की प्रवृत्ति से भी जुड़ा होता है, जिससे वह अपने व्यवहार को गलत मानने के बजाय दूसरों को ही दोषी ठहराने लगता है।

ऐसा क्यों होता है?

आत्म-केंद्रित दृष्टिकोण: व्यक्ति केवल अपनी बात सुनने और अपनी अपेक्षाओं को पूरा करने का आदी हो जाता है।

अहंकार: वह खुद को दूसरों से श्रेष्ठ समझता है और किसी की भावनाओं या विचारों का सम्मान नहीं करता, जिससे सामान्य व्यवहार उसे नीचा दिखाने वाला लगने लगता है।

अपेक्षाओं का उल्लंघन: जब सामान्य व्यवहार उसकी अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं होता, तो वह उसे अपनी अवहेलना के रूप में देखता है।

दूसरों को महत्व न देना: वह दूसरों की भावनाओं को महत्व नहीं देता और उन्हें अपने से कमतर आंकता है।

नकारात्मक सोच: ऐसी स्थिति में व्यक्ति नकारात्मक सोच रखने लगता है और हर चीज में दोष देखने लगता है, जिससे उसे हर सामान्य व्यवहार अपमानजनक प्रतीत होता है।
साभार
@राष्ट्रनीति

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