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18/10/2021

उत्तर प्रदेश से पहली बार विदेशी बाजार में जाएगा केला, लखीमपुर के किसानों के नाम होगी उपलब्धि।

यूपी के तराई क्षेत्र की जलवायु की वजह से वैसे तो केले की पैदावार इस क्षेत्र में होती है, लेकिन लखीमपुर खीरी के किसानों के नाम यह बड़ी उपलब्धि दर्ज़ होगी. क्षेत्र के मेहनतकश किसानों को अपने केले की फ़सल को निर्यात का ऑर्डर मिलना बड़ी बात है.

उत्पादन में विशेष तकनीक का इस्तेमाल होगा
केला मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट से निर्यात किया जाएगा।

यूपी के लखीमपुर के किसानों को कृषि की वजह से बड़ी उपलब्धि मिलने वाली है. उत्तर प्रदेश से पहली बार विदेश में केला निर्यात किया जा रहा है. इसकी पैदावार लखीमपुर के पलिया कलान क्षेत्र के किसानों ने की है.

40 मीट्रिक टन केले की पहली खेप ईरान के लिए 14 अक्टूबर को रवाना हुई है. इस उपलब्धि के बाद लखीमपुर खीरी का नाम भी देश के महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश जैसे प्रदेश के किसानों के साथ दर्ज हो जाएगा जो उन्नत तकनीक से केले की पैदावार करते हैं.

पहली बार यूपी से होगा निर्यात

यूपी के तराई क्षेत्र की जलवायु की वजह से वैसे तो केले की पैदावार इस क्षेत्र में होती है, लेकिन लखीमपुर खीरी के किसानों के नाम यह बड़ी उपलब्धि दर्ज होगी. क्षेत्र के मेहनतकश किसानों को अपने केले की फ़सल को निर्यात का ऑर्डर मिलना बड़ी बात है.

पलिया कलान क्षेत्र के किसानों की केले की फसल का 40 मीट्रिक टन केला ईरान निर्यात किया जा रहा है. इसके लिए उच्चस्तरीय तकनीक और 'मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट' को माध्यम बनाया जाएगा. अब तक केवल महाराष्ट्र,आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों से केला निर्यात किया जाता था और यूपी के किसान अभी तक अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार से दूर थे.

उत्पादन में विशेष तकनीक का इस्तेमाल

केले के इस निर्यात के पीछे किसानों की मेहनत के अलावा उन्नत तकनीक भी है. केले की शेल्फ लाइफ (shelf life) बहुत कम होती है. इसको ज्‍यादा दिन तक रखने के लिए न सिर्फ इसके उत्पादन के बाद पैकेजिंग पर ध्यान देना होता है बल्कि ज्‍यादा समय तक इसको रखने के केले का पेड़ लगाते समय ही विशेष तकनीक अपनायी जाती है. यानी इसके shelf life के लिए शुरू से ही इसकी देखभाल और बचाव का विशेष तरीका अपनाना होता है. फि‍लहाल, लखीमपुर खीरी के हज़ार एकड़ में इस तकनीक से केला लगाया गया था.

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत आने वाले APIDA के यूपी, बिहार, झारखंड के प्रमुख सी बी सिंह कहते हैं, "इससे यूपी में केले की पैदावार करने वाले किसानों का केला सीधे अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में जाएगा और किसानों को सीधा लाभ मिलेगा. किसानों की आमदनी बढ़ेगी. यही नहीं, इस प्रयास के बाद लखीमपुर के किसान एक मॉडल के रूप में सामने आएंगे." इसके बाद गोरखपुर और वाराणसी में भी इसी तकनीक से निर्यात का प्रयास किया जा रहा है. केले को ईरान तक पहुँचाने के लिए 40 फ़ीट के दो कंटेनर का प्रयोग किया जाएगा जो मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट से ईरान के लिए रवाना होगा. ये खेप 15 दिन में ईरान के मार्केट में होगी.

क्‍या है मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट
केला लखनऊ में मलीहाबाद के पैक हाउस में पैक किया गया है. यहां से यह सड़क से कानपुर तक जाएगा. कानपुर से ट्रेन से मुंबई के जवाहर लाल नेहरू पोर्ट पहुंचेगा जहां से यह ईरान के लिए रवाना होगा. इसके निर्यात के लिए काम करने वाले देसाई एग्रो (Desai Agro)के प्रमुख अजीत देसाई लखीमपुर के किसानों का विशेष प्रशिक्षण भी करवा चुके हैं.

उनका कहना है कि वर्तमान में बहुत उन्नत तकनीक से केले के उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है. ये प्रयोग महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गुजरात, छत्तीसगढ़ में हो चुका था पर यूपी के किसानों के लिए ये पहला मौका है.

उन्‍होंने आगे कहा कि अभी दुनिया में केले के उत्पादन का 30 प्रतिशत भारत में होता है पर विश्व बाज़ार में टॉप की कम्पनियों में 3 अमेरिकी और 1 आयरलैंड की कम्पनी है. इसलिए देश में केले का उत्पादन करने वाले किसानों को उन्नत टेक्निक से उसकी क्वालिटी बढ़ाने की ज़रूरत है।

23/08/2021

जनसंख्या रोको, टैक्स कम करो।
आपने 1 या 2 बच्चों को जन्म दिया ताकि उनकी अच्छी परवरिश कर सकें। 4 बच्चों पर करने वाले खर्च को आप 2 बच्चों पर ही करना चाहते थे ताकि उन 2 बच्चों को ही पूरा सुख मिल सके।

लेकिन जो 1 बच्चे को अच्छे से नहीं पाल सकते वो डंके की चोट पर 18 बच्चों को जन्म दे रहे हैं। क्योंकि उनको पता हैकि उनके बच्चों को पालने, सुख, समृद्धि की जिम्मेदारी आपके कंधों पर है।

5 लाख वार्षिक से अधिक कमाने पर 30% टैक्स... क्योंकि आपके पैसे लेकर इनके 18 बच्चों को पाला जा रहा है।

18 बच्चे यानी 20 साल बाद 18 परिवार.. उन सबके लिये सरकारी खर्चे पर फ्री मकान, फ्री शिक्षा, विवाह का खर्च, बच्चेपैदा करने का खर्च.. सब सरकार आपकी जेब से निकालकर उनको देगी।

यानी आप अपने 2 बच्चों के साथ इनके 18 बच्चों को भी पाल रहे हो।

आने वाली 10 पीढ़ी तक आपके बच्चों को इस भारी टैक्स या इस लूट से मुक्ति नहीं मिलेगी।

आवाज उठाईये। जनसंख्या वृद्धि पर रोक लगाने के लिये सरकारों , नेताओं, दलों पर दवाब बनाइये। चाहे आप किसी भी धर्म, जाति के हों।

Photos from Progressive Bharat's post 20/06/2021



#एग्रीकल्चर_इन्फ्रास्ट्रक्चर_फंड_योजना 2021 किसान ऋण

एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड / Agriculture Infrastructure Fund, जो भारत के आत्मनिर्भर भारत पैकेज का एक हिस्सा है, को पीएम नरेंद्र मोदी ने अगले 4 वर्षों के लिए 1 लाख करोड़ रुपये की वित्त सुविधा के साथ लॉन्च किया है। कृषि अवसंरचना कोष के तहत, केंद्र सरकार प्रदान किए गए ऋण पर प्रति वर्ष लगभग 3% ब्याज अनुदान वहन करेगी।

इस योजना का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज के लिए अधिक मूल्य प्राप्त करने में सक्षम बनाना है क्योंकि वे उच्च मूल्यों पर भंडारण और बिक्री कर सकेंगे, अपव्यय को कम कर सकेंगे और प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन में वृद्धि कर सकेंगे।

About Agriculture Infrastructure Fund under -:

एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के तहत किसानों को 2 करोड़ रुपये तक का लोन दिया जाएगा। इसके कुछ प्रमुख बिंदु हम आपके साथ नीचे अनुभाग में साझा कर रहे हैं।

ऋण का लाभ कौन उठा सकता है?
Who Can Apply for Loan / Rin under Krshi Avasanrachana Nidhi or Agriculture Infrastructure Fund -: सभी पात्र लाभार्थियों को देश भर में बैंकों द्वारा ऋण प्रदान किया जाएगा, जिसमें शामिल हैं:

किसान
प्राथमिक कृषि साख समितियां (पैक्स)
विपणन सहकारी समितियाँ
स्वयं सहायता समूह (SHG)
किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ)
देयता समूह (JLG) में शामिल हों
बहुउद्देशीय सहकारी समितियाँ
एग्री - उद्यमी
कृषि स्टार्टअप
पीपीपी कृषि परियोजनाओं को केंद्रीय / राज्य एजेंसी या शहरी स्थानीय निकाय द्वारा प्रायोजित किया जाता है।
योजना के औपचारिक अनुमोदन के 30 दिनों के भीतर, केंद्र सरकार पहले ही देश भर में 2,280 से अधिक किसान समाजों को 1000 करोड़ रुपये से अधिक की मंजूरी दे चुकी है।

कृषि अवसंरचना निधि के तहत ऋण के लिए आवेदन कैसे करें?

How to Apply for Loan under Agriculture Infrastructure Fund Scheme -: ऊपर सूचीबद्ध किसान और संस्थाएं सरकार द्वारा योजना के तहत राष्ट्रीयकृत बैंकों, वाणिज्यिक बैंकों या किसी अन्य वित्तीय संस्थानों से 2 करोड़ रुपये तक के ऋण का लाभ उठा सकेंगे।

निम्नलिखित बैंकों की सूची है, जिनके साथ कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने पहले ही कृषि अवसंरचना कोष के तहत वित्त सुविधा के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।

ऋण के लिए बैंकों की सूची:
यूको बैंक
भारतीय बैंक
बैंक ऑफ महाराष्ट्र
केनरा बैंक
भारतीय स्टेट बैंक
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया
पंजाब नेशनल बैंक
बैंक ऑफ इंडिया
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया
बैंक ऑफ बड़ौदा
इंडियन ओवरसीज बैंक
पंजाब एंड सिंध बैंक

कृषि अवसंरचना निधि के तहत ऋण के लिए बैंकों की सूची:

Agriculture Infrastructure Fund List of Banks for Loan Application -: 13 अगस्त तक सूची, हालांकि, नवीनतम सूची आधिकारिक वेबसाइट http://agricoop.nic.in/ से प्राप्त की जा सकती है।

पात्र लाभार्थी इस योजना के तहत वित्तपोषण सुविधा का लाभ लेने के लिए भी सीधे आवेदन कर सकते हैं। किसी भी स्तर पर पूर्व जांच की आवश्यकता नहीं है। इस तरह के अनुप्रयोगों पर बैंकों द्वारा अपने स्तर पर विचार किया जा सकता है।

ऐसे आवेदनों के लिए समय पर एमआईएस संबंधित बैंकों द्वारा डीएलएमसी (जिला स्तरीय निगरानी समिति) और एसएलएमसी (राज्य स्तरीय निगरानी समिति) को उपलब्ध कराया जाएगा।

Eligible Projects to Get Loan under Agriculture Infrastructure Fund -: योजना मूल्य श्रृंखला के प्रमुख तत्वों को स्थापित करने और आधुनिकीकरण की सुविधा प्रदान करेगी:

पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट्स जैसे:
ई-मार्केटिंग प्लेटफॉर्म सहित आपूर्ति श्रृंखला सेवाएं
गोदामों
भूमिगत कक्ष
घरों को पैक करें
इकाइयों की परख
छँटाई और ग्रेडिंग इकाइयाँ
कोल्ड चेन
रसद सुविधाएं
प्राथमिक प्रसंस्करण केंद्र
बड़े चेंबर के लिए
सामुदायिक खेती की संपत्ति के निर्माण के लिए व्यवहार्य परियोजनाएं:
जैविक आदानों का उत्पादन
जैव उत्तेजक उत्पादन इकाइयाँ
स्मार्ट और सटीक कृषि के लिए बुनियादी ढांचा। निर्यात समूहों सहित फसलों के समूहों के लिए आपूर्ति श्रृंखला बुनियादी ढांचा प्रदान करने के लिए पहचान की गई।
सामुदायिक खेती की संपत्ति या फसल प्रबंधन परियोजनाओं के निर्माण के लिए पीपीपी के तहत केंद्र / राज्य / स्थानीय सरकारों या उनकी एजेंसियों द्वारा प्रचारित परियोजनाएं।

कृषि अवसंरचना निधि ऋण लाभ:
Benefits Provided under Agriculture Infrastructure Fund -: किसी भी सरकारी योजनाओं के तहत ऋण लेने के कुछ लाभ हैं, और इसीलिए सरकार द्वारा ऋण योजनाएँ हैं। इसलिए, कृषि इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड ऋण योजना के तहत प्रदान किए जाने वाले कुछ मुख्य लाभ नीचे दिए गए हैं:

योजना के तहत अधिकतम ऋण अवधि 7 वर्ष होगी।
इस योजना के तहत प्राप्त ऋण पर 3% प्रति वर्ष का ब्याज उपार्जन।
2 करोड़ रुपये तक के ऋण के लिए CGTMSE योजना के तहत क्रेडिट गारंटी कवरेज।
इस कवरेज के लिए शुल्क का भुगतान सरकार द्वारा किया जाएगा। एफपीओ के मामले में डीएसीएफडब्ल्यू की एफपीओ पदोन्नति योजना के तहत बनाई गई सुविधा से क्रेडिट गारंटी का लाभ उठाया जा सकता है।
एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड लोन स्कीम किसानों, पीएसीएस, एफपीओ, एग्री-एंटरप्रेन्योर्स आदि को कम्युनिटी फार्मिंग एसेट्स और पोस्ट-हार्वेस्ट एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में सपोर्ट करेगी।

कृषि अवसंरचना निधि का राज्य वार आवंटन:

राज्य / केन्द्र शासित प्रदेश - करोड़ में आवंटन

उत्तर प्रदेश - 12831 रूपये
राजस्थान - 9015 रूपये
महाराष्ट्र - 8460 रूपये
मध्य प्रदेश - 7440 रूपये


गुजरात - 7282 रूपये
पश्चिम बंगाल - 7260 रूपये
आंध्र प्रदेश - 6540 रूपये
तमिलनाडु - 5990 रूपये
पंजाब - 4710 रूपये
कर्नाटक - 4525 रूपये
बिहार - 3980 रूपये
हरियाणा - 3900 रूपये
तेलंगाना - 3075 रूपये
केरल - 2520 रूपये
ओडिशा - 2500 रूपये
असम - 2050 रूपये
छत्तीसगढ़ - 1990 रूपये
झारखंड - 1445 रूपये
हिमाचल प्रदेश - 925 रूपये
जम्मू कश्मीर और लद्दाख - 900 रूपये
उत्तराखंड - 785 रूपये
त्रिपुरा - 360 रूपये
अरुणाचल प्रदेश - 290 रूपये
नागालैंड - 230 रूपये
मणिपुर - 200 रूपये
मिजोरम - 196 रूपये
मेघालय - 190 रूपये
गोवा - 110 रूपये
दिल्ली - 102 रूपये
सिक्किम - 56 रूपये
पुदुचेरी - 48 रूपये
एक और एन द्वीप - 40 रूपये
दमन और दीव - 22 रूपये
लक्षद्वीप - 11 रूपये
दादरा और नगर हवेली - 10 रूपये
चंडीगढ़ - 9 रूपये
कुल - 1,00,000 रूपये
ऊपर हमने एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड्स लिस्ट का राज्यवार टेंटेटिव अलोकेशन की पूरी सूची प्रदान की है। प्रत्येक राज्य के लिए भारत सरकार किसानों को लोन प्रदान करेगी।

योजना की कार्यान्वयन अवधि:
Implementation Period of Agriculture Infrastructure Fund Scheme -: यह योजना 2021 से 2029-30 तक चालू होगी। चार वर्षों में संवितरण पहले वर्ष में 10,000 करोड़ रुपये और अगले तीन वित्तीय वर्षों में 30,000 करोड़ रुपये की मंजूरी के साथ शुरू होगा।


इस वित्तपोषण सुविधा के तहत पुनर्भुगतान के लिए अधिस्थगन न्यूनतम 6 महीने और अधिकतम 2 वर्ष के अधीन हो सकता है।

03/06/2021

#विल्लुण्डी_का_अर्थ_हैं_तीर_से_छेदा_हुआ

यह कूप कोई सामान्य कूआँ नहीं है.. यह अपने आप में आश्चर्यजनक विशिष्टता समेटे हुए है..समुद्र के अन्दर स्थित होने पर भी इस कूप का जल मीठा है...!!

समुद्र के खारे पानी में मध्य मीठा पानी मिलना असम्भव है किन्तु
रामेश्वरम के प्रभु शिव मन्दिर संस्थानम ( तमिलनाडु ) में स्थित है..और विल्लुण्डी तीर्थम कहलाता है..जिसका जल मीठा हैं...!!

ऐसी मान्यता है.. कि रावण से सीता जी को मुक्त कराकर श्री राम जी यहीं.. इस शिवलिङ्ग का पूजन किया.. पूजन समाप्ति पश्चात सीता जी को प्यास लगने पर श्री राम ने अपने तूणीर से समुद्र छेदन कर मीठा पानी निकाला था...!!

वैसे विल्लुण्डी का अर्थ "तीर से छेदा हुआ" होता है
यह है महान सनातन धरोहर

03/06/2021
04/05/2020

.. system by Poor but rich brain villagers.

गांव के गरीब व्यक्ति होने का अर्थ ये नहीं कि उसमें ज्ञान की कमी है।
इतिहास गवाह है कि साधारण लोग अपनी बुद्धि, विवेक, परिश्रम और कौशल के बल पर असाधारण काम कर जाते हैं।

देखिये कैसे कुछ गांव वालों ने जुगाड़ से ऑटोमैटिक हैंड वाश सिस्टम बना दिया। ताकि बार बार.. हर व्यक्ति द्वारा एक ही बोतल को छूने और चीनी वायरस कोरोना के संक्रमण से बचा जा सके।
इसको विज्ञान कहना गलत नहीं होगा।

आइये इनका उत्साहवर्धन करें।

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13/04/2020

ये फ़ोटो तब का है जब रामायण में सीता जी की भूमिका अदा कर चुकी दीपिका भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ी थीं। आडवाणी जी उनके घर पहुंचे थे और तब उनके साथ थे आज के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी।

17/07/2019

अलीबाबा के संस्थापक ने क्या कहा अपनी सफलता और परिवार के बारे में ?

05/07/2019

2 मिनट का ये वीडियो आपकी सोच बदल सकता है।
सोच तो बदलनी ही पड़ेगी।

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