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09/01/2026
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23/09/2024

21/09/2024

क्या आप जानते हैं देश में पहला चुनाव 1937 में हुआ था?

देश में पहली बार चुनाव सन् 1937 में हुआ था। इसके लिए 1935 में ब्रिटिश संसद ने भारतीयों को प्रांतीय शासन के प्रबंध का अधिकार दिया था, जिसकी वजह से पहली बार भारत में चुनाव कराए गए थे। कांग्रेस को आगरा व अवध के संयुक्त प्रातं, मध्य प्रांत व बरार (अब मध्य प्रदेश), मद्रास, उड़ीसा तथा बिहार में पूर्ण बहुमत प्राप्त हुआ।

इस तरह केंद्रीय व्यवस्थापिका सभा में कांग्रेस सबसे बड़े दल के रूप में उभरी। कांग्रेस को अंग्रेजों की ओर से यह भरोसा मिला हुआ था कि जो सरकार वह गठित करेगी, उसमें गवर्नर जनरल बिना वजह हस्तक्षेप नहीं करेंगें। इसके बाद कांग्रेस ने आठ प्रांतों में अपनी सरकार बनाई। सिंध, उत्तर पश्चिम सीमा प्रांत तथा असम में मिला-जुला मंत्रिमंडल गठित हुआ। पंजाब में यूनियनिस्ट पार्टी ने और बंगाल में कृषक प्रजा पार्टी और मुस्लिम लीग ने मिलकर सरकार बनाई।

1937 में प्रांतीय विधानसभा चुनावों के साथ ही विधान परिषदों के लिए भी चुनाव संपन्न कराये गए। पांच प्रांतों, बम्बई, मद्रास, बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश के विधान परिषदों के लिए संपन्न चुनाव में कांग्रेस को आंशिक सफलता प्राप्त हुई। तब बिहार में विधान परिषद की 26 सीटें थीं, जिनमें से आठ पर कांग्रेस को सफलता मिली थी। सबसे ज्यादा मद्रास की 46 सीटों में से 26 कांग्रेस के पक्ष में गई थीं।

चुनाव के दो साल बाद ही 1939 में दूसरा विश्वयुद्ध प्रारंभ हो गया। भारतीय विधान मंडल की सहमति के बिना ब्रिटिश सरकार ने भारत को युद्ध में झोंक दिया। ऐसे में देश में आपातकाल की घोषणा कर दी गई। कांग्रेस ने मांग रखी कि युद्ध के बाद भारत को स्वतंत्र कर दिया जाए। सरकार ने इस मांग की उपेक्षा की, लिहाजा कांग्रेस कार्यकारिणी के निर्देश पर 15 नवम्बर, 1939 को प्रांतीय कांग्रेस मंत्रिमंडलों ने इस्तीफा दे दिया था।

21/09/2024

स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह जी का जन्म 1902 में उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के नूरपुर में एक मध्यम वर्गीय किसान परिवार में हुआ था। उन्होंने 1923 में विज्ञान से स्नातक की एवं 1925 में आगरा विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की।

कानून में प्रशिक्षित श्री सिंह ने गाजियाबाद से अपने पेशे की शुरुआत की। वे 1929 में मेरठ आ गये और बाद में कांग्रेस में शामिल हो गए।

वे सबसे पहले 1937 में छपरौली से उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए चुने गए एवं 1946, 1952, 1962 एवं 1967 में विधानसभा में अपने निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। वे 1946 में पंडित गोविंद बल्लभ पंत की सरकार में संसदीय सचिव बने और राजस्व, चिकित्सा एवं लोक स्वास्थ्य, न्याय, सूचना इत्यादि विभिन्न विभागों में कार्य किया। जून 1951 में उन्हें राज्य के कैबिनेट मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया एवं न्याय तथा सूचना विभागों का प्रभार दिया गया। बाद में 1954 में वे डॉ. सम्पूर्णानन्द के मंत्रिमंडल में राजस्व एवं कृषि मंत्री बने। अप्रैल 1959 में जब उन्होंने पद से इस्तीफा दिया, उस समय उन्होंने राजस्व एवं परिवहन विभाग का प्रभार संभाला हुआ था।

श्री सी.बी. गुप्ता के मंत्रालय में वे गृह एवं कृषि मंत्री (1960) थे। श्रीमती सुचेता कृपलानी के मंत्रालय में वे कृषि एवं वन मंत्री (1962-63) रहे। उन्होंने 1965 में कृषि विभाग छोड़ दिया एवं 1966 में स्थानीय स्वशासन विभाग का प्रभार संभाल लिया।
कांग्रेस विभाजन के बाद फरवरी 1970 में दूसरी बार वे कांग्रेस पार्टी के समर्थन से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। हालांकि राज्य में 2 अक्टूबर 1970 को राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया था।

श्री चरण सिंह ने विभिन्न पदों पर रहते हुए उत्तर प्रदेश की सेवा की एवं उनकी ख्याति एक ऐसे कड़क नेता के रूप में हो गई थी जो प्रशासन में अक्षमता, भाई – भतीजावाद एवं भ्रष्टाचार को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करते थे। प्रतिभाशाली सांसद एवं व्यवहारवादी श्री चरण सिंह अपने वाक्पटुता एवं दृढ़ विश्वास के लिए जाने जाते हैं।
उत्तर प्रदेश में भूमि सुधार का पूरा श्रेय उन्हें जाता है।

ग्रामीण देनदारों को राहत प्रदान करने वाला विभागीय ऋणमुक्ति विधेयक, 1939 को तैयार करने एवं इसे अंतिम रूप देने में उनकी महत्त्वपूर्ण भूमिका थी। उनके द्वारा की गई पहल का ही परिणाम था कि उत्तर प्रदेश में मंत्रियों के वेतन एवं उन्हें मिलने वाले अन्य लाभों को काफी कम कर दिया गया था। मुख्यमंत्री के रूप में जोत अधिनियम, 1960 को लाने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी। यह अधिनियम जमीन रखने की अधिकतम सीमा को कम करने के उद्देश्य से लाया गया था ताकि राज्य भर में इसे एक समान बनाया जा सके।

देश में कुछ-ही राजनेता ऐसे हुए हैं जिन्होंने लोगों के बीच रहकर सरलता से कार्य करते हुए इतनी लोकप्रियता हासिल की हो। एक समर्पित लोक कार्यकर्ता एवं सामाजिक न्याय में दृढ़ विश्वास रखने वाले श्री चरण सिंह को लाखों किसानों के बीच रहकर प्राप्त आत्मविश्वास से काफी बल मिला।

श्री चौधरी चरण सिंह ने अत्यंत साधारण जीवन व्यतीत किया और अपने खाली समय में वे पढ़ने और लिखने का काम करते थे। उन्होंने कई किताबें एवं रूचार-पुस्तिकाएं लिखी जिसमें ‘ज़मींदारी उन्मूलन’, ‘भारत की गरीबी और उसका समाधान’, ‘किसानों की भूसंपत्ति या किसानों के लिए भूमि, ‘प्रिवेंशन ऑफ़ डिवीज़न ऑफ़ होल्डिंग्स बिलो ए सर्टेन मिनिमम’, ‘को-ऑपरेटिव फार्मिंग एक्स-रयेद्’ आदि प्रमुख हैं।

Photos from RLD Noida's post 20/09/2024

आज महाराष्ट्र के वर्धा में आयोजित 'राष्ट्रीय विश्वकर्मा कार्यक्रम' में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के साथ माननीय केंद्रीय राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार चौधरी जयन्त सिंह जी ने शिरकत की। इस दौरान योजना के लाभार्थियों से मुलाकात एवं महाराष्ट्र सरकार की आचार्य चाणक्य कौशल विकास केंद्र योजना की शुरुआत भी की गई।

20/09/2024

20/09/2024

जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के गुलमर्ग विधानसभा के प्रत्याशी के लिये विनय प्रधान, प्रभारी, जम्मू-कश्मीर ने पब्लिक मीटिंग कर और जनसंपर्क कर लोगों से पार्टी के चुनाव चिन्ह 'हैंड पंप' के पक्ष में वोट करने की अपील की।
वह मतदाताओं तक पार्टी का संदेश पहुंचाया .

Photos from RLD Noida's post 20/09/2024

आज राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष केंद्रीय मंत्री चौधरी जयंत सिंह जी ने महाराष्ट्र के वर्धा में सेवा ग्राम का दौरा किया। गांधी जी यहां करीब 10 साल तक रहे, उनके साथ अब्दुल गफ्फार खान और सरदार पटेल जी सहित भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के कई दिग्गज भी रहे। इस जगह को आज भी वैसा ही बनाए रखा गया है जैसा कि 80+ साल पहले थी, जिसमें खेत-फाइबर-कपड़े की मूल्य श्रृंखला का एक मजबूत गांव उद्यम, 1936 में गांधी जी द्वारा लगाया गया पीपल का पेड़ और 1940 में गांधी जी द्वारा स्थापित एक नई तालीम स्कूल शामिल है.

20/09/2024

सपा की पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता रोली मिश्रा तिवारी ने थामा RLD का हाथ, जयंत चौधरी से की मुलाकात

आज समाजवादी पार्टी की पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता तथा राज्य महिला आयोग की पूर्व सदस्य रोली मिश्रा तिवारी ने पार्टी के राष्ट्रीय सचिव अनुपम मिश्रा के साथ दिल्ली स्थित राष्ट्रीय लोक दल के केंद्रीय कार्यालय पर राष्ट्रीय अध्यक्ष व केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) शिक्षा राज्य मंत्री चौधरी जयंत सिंह से भेंट कर राष्ट्रीय लोक दल की सदस्यता ग्रहण कर ली।

चौधरी जयंत सिंह ने रोली मिश्रा तिवारी का स्वागत करते हुए कहा कि तेज तर्रार नेत्री के जुड़ने से पार्टी को मज़बूती मिलेगी तथा उनके राजनैतिक अनुभव से नारी शक्ति व पार्टी निश्चित तौर पर लाभान्वित होगी पार्टी शीघ्र ही उन्हें अहम ज़िम्मेदारी देगी ।

साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय सचिव अनुपम मिश्रा की सराहना करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में व अन्य प्रदेशों में भी वह संगठन विस्तार को लेकर काफ़ी गंभीरता से कार्य कर रहे हैं और उनकी मेहनत व लगन के परिणाम भी सामने आ रहे हैं।

रोली मिश्रा तिवारी ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन के बहुमूल्य सोलह वर्ष समाजवादी पार्टी को दिये पर पार्टी नेता जी मुलायम सिंह यादव के बाद से अपनी विचारधारा से तो विमुख हो ही गई है अब वहाँ वफ़ादार, कर्मठ, ईमानदार कार्यकर्ताओं की नहीं बल्कि चाटुकार व सनातन द्रोहियों की पार्टी बन गई है।

ग़ौरतलब है कि रोली तिवारी ने स्वामी प्रसाद मौर्य के राम चरित मानस के विवादित बयानों के बाद मौर्य पर जमकर हमला बोला था और चर्चा में आई थीं। राष्ट्रीय सचिव अनुपम मिश्रा ने कहा कि रोली जी में राजनैतिक इच्छाशक्ति व दूरदर्शिता तो है ही साथ ही वह प्रखर वक्ता भी हैं जिसका लाभ निश्चित रूप से ना केवल नारी शक्ति को मिलेगा बल्कि पूरी पार्टी को मिलेगा।

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