Sitamarhi Loksabha

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10/02/2026

सांसद निधि फंड से सीतामढ़ी में CCTV लगाने वाली AV Entertainment कंपनी याद है आप लोगों को? अपने सांसद महोदय को टैग करके पूछिए कि पुणे की वह कंपनी आखिर करती क्या है? और उसे 2.27 करोड़ का टेंडर कैसे मिला?

04/02/2026

सीतामढ़ी के गालीबाज ट्रैफिक इंस्पेक्टर साहब के वायरल वीडियो की जांच हो गई क्या? कोई अपडेट?

Photos from Sitamarhi Loksabha's post 03/02/2026

नेताओं की दलाली करते-करते प्रशासन के आपराधिक कृत्यों के पक्ष में भी दलील देने लगे हैं ये दलाल (पत्रकार) सब।

अबे, शर्म करो बेशर्मो। कल को तुम्हारे घर-परिवार के लोगों के साथ भी ये हो सकता है। बोल नहीं सकते तो कम से कम दलाली तो मत करो, दल्लों।

02/02/2026

सीतामढ़ी ट्रैफिक पुलिस द्वारा एक व्यक्ति के साथ गाली-गलौज करते हुए बेरहमी से मारपीट का वीडियो/घटना बेहद शर्मनाक और चिंताजनक है। सवाल यह है कि क्या कानून के रखवाले को इस तरह की भाषा और हिंसक व्यवहार का अधिकार है?

पुलिस की जिम्मेदारी जनता की सुरक्षा और कानून का पालन कराना है, न कि सरेआम अपमानित करना और मारपीट करना। अगर कोई व्यक्ति नियम तोड़ता भी है, तो उसके लिए कानूनी प्रक्रिया मौजूद है, अभद्र गाली और मारपीट नहीं।

इस तरह की घटनाएं पुलिस व्यवस्था पर जनता के भरोसे को कमजोर करती हैं और सत्ता के दुरुपयोग को उजागर करती हैं।

Bihar Police और सीतामढ़ी के पुलिस अधीक्षक (SP) को इस मामले पर तत्काल संज्ञान लेना चाहिए। दोषी पुलिसकर्मियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख़्त और पारदर्शी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

Samrat Choudhary

29/01/2026

सीतामढ़ी के नेताओं के UGC गाइडलाइंस पर क्या विचार हैं, खासकर दलित-पिछड़ा और प्रोग्रेसिव नेताओं के?

19/01/2026

सुनील कुमार पिंटू इन सवालों का जवाब कब देंगे?

Photos from Sitamarhi Loksabha's post 17/01/2026

ये 2.34 करोड़ रुपये की हाई मास्ट लाइटें कहाँ लगाई गई हैं? पूर्व सांसद सुनील कुमार पिंटू कब जवाब देंगे? क्योंकि MPLADS पोर्टल पर न तो जगह का कोई ज़िक्र है और न ही कोई इमेज उपलब्ध है।

15/01/2026

"कहो नरेंद्र मजा आ रहा..."
क्या आपने यह वायरल गीत सुना?

14/01/2026

साल बीत जाने के बावजूद सांसद निधि (MPLADS) से एक भी रुपये खर्च नहीं करने वाले बिहार के छह सांसदों के नाम सामने आए हैं। इस सूची में देश की सबसे युवा सांसद और समस्तीपुर से लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की सांसद शांभवी चौधरी का नाम भी शामिल है। समस्तीपुर में एक कार्यक्रम के दौरान जब पत्रकारों ने उनसे एमपी फंड खर्च न किए जाने को लेकर सवाल किया, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि सांसद निधि खर्च करना उनका निजी अधिकार है और वे इसे विपक्ष के दबाव में खर्च नहीं करेंगी।

14/01/2026

लीजिए सीतामढ़ी में 'विकास' का एक और नमूना देखिए.

13/01/2026

2.34 करोड़ की 47 हाई मास्ट लाइटें कहाँ लगाई गईं?

क्या 17वीं लोकसभा के दौरान सीतामढ़ी के तत्कालीन सांसद सुनील कुमार पिंटू की सांसद निधि का उपयोग वास्तव में जरूरत आधारित विकास के लिए हुआ या फिर यह कुछ तय कामों, तय इलाकों और तय वेंडरों तक सीमित रह गया। MPLADS पोर्टल पर उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार इस पूरे कार्यकाल में हाई मास्ट लाइट से जुड़े लगभग सभी कार्य एक ही वेंडर R K ENTERPRISES को दिए गए। कुल 173 हाई मास्ट लाइटों पर 8 करोड़ 61 लाख 62 हजार रुपये से अधिक का खर्च दिखाया गया, यानी सांसद निधि का सबसे बड़ा हिस्सा केवल स्ट्रीट लाइटिंग जैसे एक ही प्रकार के काम पर केंद्रित रहा। इतने बड़े पैमाने पर काम का एक ही वेंडर को मिलना अपने आप में यह सवाल खड़ा करता है कि क्या टेंडर प्रक्रिया में वास्तव में प्रतिस्पर्धा थी या विकल्पों पर विचार ही नहीं किया गया।

इस पूरी तस्वीर को और गंभीर बनाता है यह तथ्य कि इन 173 हाई मास्ट लाइटों में से कम से कम 47 स्थानों के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है कि आखिर ये लाइटें कहां लगाई गईं। न तो पोर्टल पर उनकी लोकेशन दर्ज है, न कोई supporting document अपलोड किया गया है और न ही एक भी जियोटैग्ड इमेज उपलब्ध है। बाकी लाइटों के मामले में भी यह साफ नहीं होता कि लाइटें कितने में खरीदी गईं, इंस्टॉलेशन का खर्च कितना था और सामग्री का ब्रेकअप क्या रहा। जब करोड़ों रुपये खर्च होने का दावा हो और काम के सबसे बुनियादी प्रमाण यानी तस्वीरें और दस्तावेज मौजूद न हों, तो कामों के वास्तविक अस्तित्व पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

मामला यहीं तक सीमित नहीं रहता। दस्तावेजों के अनुसार सीतामढ़ी सांसद निधि से शिवहर जिले में भी हाई मास्ट लाइटें लगाई गईं। शिवहर में कुल 10 हाई मास्ट लाइटों पर 49 लाख 85 हजार रुपये खर्च दिखाया गया और प्रति लाइट लागत लगभग पांच लाख रुपये रही। इन लाइटों में से कुछ का स्थान शिवहर स्थित भाजपा कार्यालय के आसपास दर्ज है। यानी सीतामढ़ी लोकसभा क्षेत्र के लिए आवंटित सांसद निधि का इस्तेमाल दूसरे लोकसभा क्षेत्र में राजनीतिक कार्यालय के आसपास लाइटिंग पर किया गया। सवाल यह है कि जब सीतामढ़ी जिले के भीतर ही बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है, तो प्राथमिकता शिवहर में और वह भी ऐसे स्थानों पर क्यों दी गई।

यहां एक और अहम पहलू सामने आता है। शिवहर से जुड़े ये सभी कार्य 2023-24 के वित्तीय वर्ष में पास किए गए बताए जाते हैं, जबकि MPLADS गाइडलाइन्स के अनुसार आपदा की स्थिति को छोड़कर एक वित्तीय वर्ष में किसी सांसद द्वारा की जाने वाली सिफारिशों की सीमा 25 लाख रुपये तय है। कुछ मामलों में तो यह भी स्पष्ट नहीं है कि लाइटें वास्तव में किस स्थान पर लगाई गईं, जबकि District Planning Officer Sheohar की भूमिका इन कार्यों को आगे बढ़ाने में दर्ज है। इससे यह सवाल और गहराता है कि क्या लोकसभा क्षेत्र की सीमा और वित्तीय नियमों का पालन किया गया।

शिक्षा से जुड़े कार्यों की स्थिति भी अलग नहीं है। पूरे कार्यकाल में केवल पांच स्कूलों और कॉलेजों में प्रयोगशालाओं की स्थापना दर्ज है, जिनका वेंडर PUSTAK BHAWAN बताया गया है। पांच लैब्स पर कुल 92 लाख 5 हजार रुपये खर्च दिखाया गया, जिसमें प्रति लैब लागत 18 लाख 41 हजार रुपये रही, लेकिन इन लैब्स में किस प्रकार के उपकरण खरीदे गए, उनकी संख्या क्या थी, उनकी कीमत कितनी थी और सप्लाई से जुड़े बिल क्या थे, इसकी कोई जानकारी या supporting document सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में उपकरणों का पूरा विवरण न होना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।

खेल के क्षेत्र में भी तस्वीर लगभग औपचारिक ही नजर आती है। दस्तावेजों के अनुसार जानकी स्टेडियम, डुमरा में केवल 30x20 मीटर का एक कबड्डी प्लेटफॉर्म बनाया गया, जिस पर लगभग 14 लाख रुपये खर्च दिखाया गया है। हालांकि इके खर्च का भी कोई विवरण मौजूद नहीं है। इसके अलावा पूरे कार्यकाल में खेल, स्वास्थ्य, पेयजल या अन्य बुनियादी जरूरतों से जुड़े किसी बड़े, विविध या व्यापक कार्य का स्पष्ट विवरण सामने नहीं आता।

17वीं लोकसभा में सीतामढ़ी सांसद के लिए कुल 9 करोड़ 81 लाख रुपये की राशि आवंटित की गई थी, जिसमें से 9 करोड़ 68 लाख रुपये खर्च होने का दावा किया गया है। इस अवधि में 179 कार्यों की अनुशंसा दर्ज है और कागजों में सभी 179 कार्य पूरे बताए गए हैं।

जब एक ही तरह के काम पर करोड़ों रुपये खर्च हों, अधिकांश प्रोजेक्ट एक ही वेंडर को दिए गए हों, दर्जनों स्थानों की जानकारी ही उपलब्ध न हो, एक भी जियोटैग्ड इमेज या supporting document मौजूद न हो और सांसद निधि का पैसा दूसरे जिले में राजनीतिक कार्यालय के आसपास लाइटिंग पर खर्च दिखे, तो यह सब केवल संयोग मान लेना मुश्किल हो जाता है। सवाल यह नहीं है कि कागजों में काम पूरे दिखाए गए या नहीं, सवाल यह है कि क्या सांसद निधि का उपयोग पारदर्शी तरीके से और क्षेत्र की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप किया गया। यही वह बिंदु है, जिस पर सबसे ज्यादा जवाबदेही और सार्वजनिक स्पष्टीकरण की जरूरत है।

सुनील कुमार पिंटू सीतामढ़ी से मौजूदा विधायक हैं, इसलिए उनकी यह जवाबदेही बनती है कि इन सभी सवालों का जवाब जनता को दें, ताकि जनप्रतिनिधि और जनता के बीच पारदर्शिता बनी रहे।

नोट: आर्टिकल में प्रस्तुत सभी आंकड़ें और डिटेल्स MPLADs पोर्टल से लिया गया है।

13/01/2026

सुनील कुमार पिंटू को सांसद रहते हुए विकास की ऐसी तलब थी कि सीतामढ़ी में जगह नहीं मिली तो 50 लाख का ‘विकास’ शिवहर में कर दिया… वाह 👏

आज दोपहर Sitamarhi Loksabha पेज पर पढ़िए पूर्व सांसद के MPLADS का लेखाजोखा.

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