02/10/2026
गांधी जयंती पर आज़ाद मेहराब का पैग़ाम,मेवात की मिट्टी से निकली एक पुरानी सीख!
आज 2 अक्टूबर है, महात्मा गांधी जयंती।
यह दिन सिर्फ गांधी जी को याद करने का दिन नहीं, बल्कि उनके उन विचारों को याद करने का भी दिन है जिनमें गांव, गरीब, इंसानियत, अमन और समाज के अंतिम व्यक्ति की चिंता सबसे ऊपर थी। और मेवात के लिए गांधी जी की याद सिर्फ इतिहास की किताबों तक सीमित नहीं है।
19 दिसंबर 1947 को, देश के बंटवारे के बाद जब सांप्रदायिक तनाव और असुरक्षा का माहौल था, महात्मा गांधी मेवात के घासेड़ा गांव पहुंचे थे। उस समय बड़ी संख्या में मेव मुस्लिम परिवार पाकिस्तान जाने की सोच रहे थे। गांधी जी ने लोगों से अपने देश में रहने और भरोसा बनाए रखने की अपील की। घासेड़ा में उनकी यात्रा आज भी मेवात की सामूहिक स्मृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।
बाद में घासेड़ा को गांधीग्राम के नाम से भी जाना गया। लेकिन इतिहास की विडंबना देखिए जिस गांव में गांधी जी अमन, भरोसे और इंसानियत का संदेश लेकर पहुंचे थे, वहां वर्षों बाद भी शिक्षा, बुनियादी सुविधाओं और विकास को लेकर सवाल उठते रहे।
आज गांधी जयंती पर हमें इसी इतिहास से एक सवाल लेना चाहिए, क्या हम अपने बच्चों के लिए वह मेवात बना रहे हैं, जिसके बेहतर मुस्तकबिल का सपना हर पीढ़ी देखती रही है?
MCI LAKSHYA की सोच इसी सवाल से जुड़ती है। हम मानते हैं कि मेवात का विकास सिर्फ सड़कों और इमारतों का नाम नहीं है। विकास का मतलब है।
बच्चे स्कूल जाएं।
उन्हें बेहतर तालीम मिले।
बेटियों को आगे बढ़ने का पूरा अवसर मिले।
नौजवान हुनर सीखें।
रोज़गार के नए रास्ते बनें।
स्थानीय कारोबार और निवेश बढ़े।
और मेवात का हर परिवार अपने बच्चों के मुस्तकबिल को लेकर ज्यादा मजबूत और आश्वस्त हो।
आज सरकार की तरफ से भी नूंह में शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार से जुड़े कई कार्यक्रमों और योजनाओं की घोषणा की गई है। अगस्त 2026 में हुई मेवात विकास बोर्ड की बैठक में शिक्षा के लिए लगभग 10 करोड़ और कौशल विकास के लिए 87 लाख के प्रावधानों सहित रोजगार और स्वरोजगार बढ़ाने की बात कही गई।
लेकिन सरकारी योजनाओं के साथ समाज की भागीदारी और निगरानी भी जरूरी है।
इसी सोच के साथ आज़ाद मेहराब के नेतृत्व में MCI LAKSHYA मेवात विकास अभियान 4 अक्टूबर को मेवात की 36 बिरादरियों के विकास महासम्मेलन का आयोजन कर रहा है।
4 अक्टूबर, सद्भावना मंडप, नूंह
यह कार्यक्रम सिर्फ एक सभा नहीं, बल्कि मेवात के विकास से जुड़े सवालों पर बातचीत का एक मंच बनाने की कोशिश है।
तालीम क्या हो?
रोज़गार कैसे बढ़े?
नौजवानों के लिए हुनर और कारोबार के रास्ते कैसे खुलें?
बच्चों का मुस्तकबिल कैसे बेहतर हो?
और मेवात की तरक़्क़ी में समाज की अपनी भूमिका क्या हो?
इन सवालों पर बातचीत जरूरी है।
आज़ाद मेहराब का कहना है
“गांधी जी मेवात आए थे तो उनके सामने इंसान और इंसानियत का सवाल था। आज हमारे सामने हमारी आने वाली नस्लों का सवाल है। अगर हम अपने बच्चों की तालीम, अपने नौजवानों के रोज़गार और अपने समाज की तरक़्क़ी के लिए आज गंभीर नहीं होंगे, तो आने वाली नस्लें हमसे सवाल करेंगी। मेरी कोशिश किसी एक व्यक्ति या संस्था की कामयाबी नहीं, बल्कि मेवात के लोगों को अपने मुस्तकबिल की बातचीत में शामिल करने की कोशिश है।”»
गांधी जयंती पर MCI LAKSHYA का यही पैग़ाम है—
अमन सिर्फ समाज को जोड़ता है,
लेकिन तालीम और रोज़गार उस समाज को मजबूत बनाते हैं।
मेवात की असली ताक़त उसकी जमीन, उसके लोग और उसकी आने वाली नस्लें हैं।
आइए, गांधी जी की उस ऐतिहासिक यात्रा को सिर्फ याद न करें—
उससे एक जिम्मेदारी भी लें।
4 अक्टूबर को मेवात के विकास पर संवाद के लिए मिलते हैं।
MCI LAKSHYA — मेवात विकास अभियान
आज़ाद मेहराब की अगुवाई में
📍 सद्भावना मंडप, नजदीक तिकोना पार्क, नूंह
📅 रविवार, 4 अक्टूबर 2026
⏰ दोपहर 12:30 बजे
#गांधी_जयंती #महापंचायत