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मेरी नशिस्त से क़द अपना मापने वाले,तेरा ये क़द मेरे उठने से घट भी सकता है। अभी बिसात बिछी है अभी ग़ुरूर ना कर,संभल के चल कि...
23/10/2026

मेरी नशिस्त से क़द अपना मापने वाले,
तेरा ये क़द मेरे उठने से घट भी सकता है।
अभी बिसात बिछी है अभी ग़ुरूर ना कर,
संभल के चल कि पासा पलट भी सकता है!

मेवात इंजीनियरिंग कॉलेज पल्ला का हल अब और नहीं टलना चाहिए बबहुत अफ़सोस की बात है कि मेवात इंजीनियरिंग कॉलेज पल्ला से जुड...
19/10/2026

मेवात इंजीनियरिंग कॉलेज पल्ला का हल अब और नहीं टलना चाहिए ब

बहुत अफ़सोस की बात है कि मेवात इंजीनियरिंग कॉलेज पल्ला से जुड़े कई अहम मुद्दे अब तक पूरी तरह हल नहीं हो सके हैं।कॉलेज के स्टाफ की वेतन और सेवा संबंधी समस्याएं हों या विद्यार्थियों की बुनियादी सुविधाओं, लैब, हॉस्टल और शिक्षकों की कमी से जुड़ी मांगें इनका असर आखिरकार मेवात के बच्चों की पढ़ाई और उनके मुस्तकबिल पर पड़ रहा है।

कॉलेज प्रशासन और तमाम जिम्मेदार अधिकारियों से मेरी अपील है कि इस मामले को और लंबा न खींचा जाए। हर पक्ष को साथ बैठाकर, एक-एक मांग को सुनकर और जो जायज़ है उसका समाधान निकालकर इस अध्याय को जल्द खत्म किया जाए।

यह वक्त एकbदूसरे पर जिम्मेदारी डालने का नहीं है।
यह वक्त बच्चों की पढ़ाई बचाने का है।
स्टाफ अपने अधिकारों और वेतन की चिंता में परेशान रहे और विद्यार्थी कॉलेज की बुनियादी सुविधाओं को लेकर आंदोलन करते रहें यह किसी भी शिक्षा संस्थान के लिए अच्छी स्थिति नहीं हो सकती। मेवात को पहले ही शिक्षा के क्षेत्र में बहुत लंबा सफर तय करना है। ऐसे में हमारा एक महत्वपूर्ण तकनीकी शिक्षण संस्थान लगातार विवाद और समस्याओं में घिरा रहे, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान हमारे बच्चों को होगा।
मैं सभी जिम्मेदार लोगों से कहना चाहता हूं कि अना, आरोप-प्रत्यारोप और बयानबाज़ी से ऊपर उठकर समाधान की तरफ बढ़िए। स्टाफ की जायज़ मांगों पर फैसला हो, विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान हो, कॉलेज और हॉस्टल की स्थिति सुधारी जाए और पढ़ाई का माहौल पूरी तरह बहाल किया जाए।
मेवात के बच्चों का वक्त बेहद कीमती है। उनका समय आंदोलन और अनिश्चितता में नहीं, किताबों, लैब और अपने मुस्तकबिल को बनाने में लगना चाहिए। मेरी कोशिश पहले दिन से यही रही है कि मेवात में तालीम का स्तर ऊपर उठे और समाज अपने बच्चों की शिक्षा को लेकर जागरूक हो। इसलिए जहां कहीं शिक्षा से जुड़ी समस्या सामने आएगी, वहां समाधान की आवाज़ उठाना हमारी जिम्मेदारी है।

उम्मीद है कि संबंधित जिम्मेदार लोग इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द ठोस समाधान निकालेंगे, ताकि कॉलेज का स्टाफ सम्मान के साथ अपना काम कर सके और हमारे बच्चे बिना किसी रुकावट के अपनी पढ़ाई जारी रख सकें।

मेवात के बच्चों का मुस्तकबिल किसी भी मतभेद से बड़ा है।

— आज़ाद मेहराब
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मेवात इंजीनियरिंग कॉलेज पल्ला, आखिर कब तक उलझा रहेगा मेवात के बच्चों का मुस्तकबिल?मेवात इंजीनियरिंग कॉलेज पल्ला का मामला...
15/10/2026

मेवात इंजीनियरिंग कॉलेज पल्ला, आखिर कब तक उलझा रहेगा मेवात के बच्चों का मुस्तकबिल?
मेवात इंजीनियरिंग कॉलेज पल्ला का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। कॉलेज के शिक्षक, कर्मचारी और विद्यार्थी अपनी समस्याओं को लेकर धरने पर बैठे हैं। खबरों के मुताबिक, कर्मचारियों ने कई महीनों से वेतन न मिलने और लंबे समय से लंबित मांगों का मुद्दा उठाया है, जबकि विद्यार्थी कॉलेज की बुनियादी सुविधाओं, प्रयोगशालाओं और हॉस्टल की स्थिति को लेकर परेशान हैं। अब कुछ लोग भूख हड़ताल पर भी बैठ गए हैं।
सवाल यह है कि आखिर इस मामले का समाधान क्यों नहीं निकल पा रहा है?

दुनिया के बड़े बड़े मसलों पर बातचीत के जरिए रास्ते निकाले जाते हैं, तो फिर मेवात के एक अहम शिक्षण संस्थान की समस्याओं का समाधान एक साथ बैठकर क्यों नहीं किया जा सकता?
क्या संबंधित अधिकारियों, कॉलेज प्रबंधन और जिम्मेदार संस्थाओं के लिए इतना भी मुश्किल है कि सभी पक्षों को एक मेज पर बैठाकर समस्याएं सुनी जाएं और हर मांग पर स्पष्ट फैसला लिया जाए?

अगर किसी कॉलेज में शिक्षक और कर्मचारी अपने वेतन व अधिकारों के लिए परेशान हैं, विद्यार्थियों को बुनियादी सुविधाओं की चिंता है और पढ़ाई का माहौल प्रभावित हो रहा है, तो इसका सबसे बड़ा असर आखिरकार मेवात के बच्चों के भविष्य पर ही पड़ेगा।
आज़ाद मेहराब की मेवात को लेकर शुरू से यही सोच रही है कि इलाके में तालीम का स्तर बेहतर हो, बच्चों को अच्छे अवसर मिलें और समाज शिक्षा की अहमियत को समझे। Mission Mewat Education के जरिए भी यही संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि मेवात की तरक्की के लिए शिक्षा को प्राथमिकता देना और उसके रास्ते में आने वाली समस्याओं को दूर करना जरूरी है। लेकिन अफसोस की बात है कि जब शिक्षा से जुड़ा कोई बड़ा मुद्दा सामने आता है, तो हम अक्सर जिम्मेदारी एक दूसरे पर डालने लगते हैं। कभी आरोप प्रत्यारोप होते हैं, कभी प्रेस कॉन्फ्रेंस और बयान सामने आते हैं, लेकिन आम लोगों का सवाल यही रहता है कि आखिर समाधान कब निकलेगा?

रहनुमाई की असल जिम्मेदारी सिर्फ बयान देने या किसी पद पर बैठने तक सीमित नहीं होती। उसकी अहमियत इस बात से भी समझी जाती है कि लोगों की समस्याओं को सुनकर उनके समाधान के लिए कितनी गंभीरता से प्रयास किए जाते हैं।
और हम आम लोगों को भी यह सोचना होगा कि हम अपने इलाके के शिक्षा संस्थानों के बारे में कितने जागरूक हैं और उनकी बेहतरी के लिए कितनी जिम्मेदारी निभाते हैं।
MCI Lakshya की अपील है कि इस मामले को निजी अना, आरोप प्रत्यारोप और राजनीतिक खींचतान से ऊपर उठाकर देखा जाए। संबंधित अधिकारी, कॉलेज प्रशासन, हरियाणा वक्फ बोर्ड और स्टाफ के प्रतिनिधि एक साथ बैठें। हर मांग पर बातचीत हो, जो जायज़ है उस पर फैसला लिया जाए और जिस मुद्दे पर और जांच या प्रक्रिया की जरूरत है, उसके लिए स्पष्ट समयसीमा तय की जाए।

सबसे जरूरी बात यह है कि भूख हड़ताल पर बैठे स्टाफ सदस्यों की बात सम्मानपूर्वक सुनी जाए और उनकी समस्याओं का समाधान निकालकर उन्हें सम्मान के साथ भूख हड़ताल समाप्त करने का अवसर दिया जाए। किसी भी पक्ष की गरिमा को ठेस पहुंचाए बिना बातचीत से रास्ता निकालना ही बेहतर होगा।

कॉलेज की व्यवस्था में सुधार, विद्यार्थियों की पढ़ाई, शिक्षकों-कर्मचारियों के वेतन और सुविधाओं से जुड़े मुद्दों का समाधान किसी एक पक्ष की जीत या हार नहीं है। यह मेवात के भविष्य का मामला है।
"आज़ाद मेहराब का कहना है कि मेवात की तालीम और तरक्की के लिए हम सबको मिलकर प्रयास करने होंगे। सरकार और संबंधित संस्थाओं से समाधान की मांग भी होगी और समाज अपनी तरफ से जागरूकता व सहयोग की जिम्मेदारी भी निभाएगा।

क्योंकि अगर शिक्षा संस्थान ही परेशानियों में घिरे रहेंगे, तो हमारे बच्चों के सपनों को आगे बढ़ने का मौका कैसे मिलेगा?

मेवात को बयानबाज़ी नहीं, बेहतर तालीम चाहिए।
मेवात को टकराव नहीं, समाधान चाहिए।
और मेवात के बच्चों को अनिश्चितता नहीं, बेहतर मुस्तकबिल चाहिए।

✍️ आज़ाद मेहराब

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मेवात में तालीम की तस्वीर बदलनी है, तो समाज को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी!हल ही के अख़बार की यह खबर एक अहम सवाल खड़ा ...
11/10/2026

मेवात में तालीम की तस्वीर बदलनी है, तो समाज को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी!

हल ही के अख़बार की यह खबर एक अहम सवाल खड़ा करती है। रिपोर्ट के मुताबिक, हरियाणा सरकार ने सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य के लिए शिक्षकों और स्कूलों की जिम्मेदारी तय करने पर जोर दिया है। शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए ऐसे प्रयास जरूरी हैं, लेकिन क्या सिर्फ सरकार और शिक्षकों की जिम्मेदारी से समाज में तालीम की तस्वीर बदल सकती है?
आज़ाद मेहराब का कहना है कि जब तक मां बाप खुद जिम्मेदारी के साथ अपने बच्चों की परवरिश नहीं करेंगे और उनकी तालीम पर ध्यान नहीं देंगे, तब तक बच्चों को अच्छी शिक्षा से जोड़ने का मकसद अधूरा रहेगा। मां बाप को यह पता होना चाहिए कि उनका बच्चा रोज़ स्कूल जा रहा है या नहीं, उसकी पढ़ाई कैसी चल रही है, उसे स्कूल में क्या परेशानियां हैं और वह अपने मुस्तकबिल के लिए किस दिशा में आगे बढ़ रहा है। बच्चों की तालीम सिर्फ स्कूल में दाखिला कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी पढ़ाई में दिलचस्पी पैदा करना और उन्हें सही राह दिखाना भी हमारी जिम्मेदारी है। मेवात के बच्चों का दुर्भाग्य यह है कि जब कोई शख्स या संस्था समाज की भलाई की नीयत से आगे बढ़ती है, तो कई बार उसकी कोशिशों को सहयोग देने के बजाय शक की निगाहों से देखा जाता है। नीयत और काम को समझने से पहले ही सवाल उठने लगते हैं और अच्छे मकसद के साथ शुरू की गई कोशिशें भी आलोचनाओं में उलझ जाती हैं।

आलोचना करना हर किसी का हक़ है, लेकिन क्या बेहतर नहीं होगा कि हम किसी भी कोशिश को उसके काम और नतीजों की बुनियाद पर परखें? अगर कोई हमारे बच्चों की तालीम, स्कूलों की बेहतरी और मेवात के मुस्तकबिल के लिए काम कर रहा है, तो हमें उसके सामने रुकावटें खड़ी करने के बजाय कमियों की पहचान करके मिलकर समाधान तलाशना चाहिए।

MCI Lakshya की Mission Mewat Education मुहिम का मकसद भी यही है स्कूलों की समस्याओं को सामने लाना, समाज को जागरूक करना और बच्चों की तालीम को बेहतर बनाने के लिए सामूहिक जिम्मेदारी का एहसास पैदा करना।

मेवात को आगे बढ़ाने के लिए सरकार, शिक्षक, मां बाप, सामाजिक कार्यकर्ता और समाज के जिम्मेदार लोगों सभी को अपनी भूमिका निभानी होगी।
आखिर सवाल हमारी आपसी बहस का नहीं, हमारे बच्चों के मुस्तकबिल का है। आइए, शक और आपसी खींचतान से ऊपर उठकर तालीम को अपनी पहली प्राथमिकता बनाएं। किसी की कोशिश में कमी दिखे, तो उसकी निशानदेही करें और जहां कोई अच्छा काम हो रहा हो, वहां सहयोग का हाथ बढ़ाएं।
क्योंकि मेवात की तरक्की का रास्ता हमारे बच्चों की तालीम से होकर गुजरता है, और इस रास्ते को आसान बनाना हम सबकी साझा जिम्मेदारी है।

✍️ आज़ाद मेहराब

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मेवात विकास महासम्मेलन में पहुंचे हर शख्स का दिल से शुक्रिया!आज के मेवात विकास महासम्मेलन में शिरकत करने वाले तमाम लोगों...
05/10/2026

मेवात विकास महासम्मेलन में पहुंचे हर शख्स का दिल से शुक्रिया!

आज के मेवात विकास महासम्मेलन में शिरकत कर
ने वाले तमाम लोगों का दिल की गहराइयों से शुक्रिया और शुक्रगुज़ारी।

जिन लोगों ने अपना कीमती वक्त निकाला, दूर दूर से पहुंचे, इस सम्मेलन में हिस्सा लिया और मेवात के मुस्तकबिल से जुड़े मुद्दों पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई हम उन सभी के तहेदिल से शुक्रगुज़ार हैं। यह बात भी बेहद अफसोसनाक रही कि मेवात के कई राजनीतिक नेताओं की ओर से इस तरह की सामूहिक जिम्मेदारी में अपेक्षित भागीदारी नजर नहीं आई। मेवात जैसे इलाके के तालीम, रोज़गार, नशा, दहेज़ और दूसरी सामाजिक समस्याओं पर गंभीरता से एक साथ बैठकर बात करना जरूरी है। उम्मीद है कि आने वाले वक्त में सभी जिम्मेदार लोग इन मुद्दों को गंभीरता से लेंगे। कार्यक्रम के दौरान आज़ाद मेहराब ने मेवात के मौजूदा हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि मेवात की तरक्की के लिए हमें मिलकर लगातार प्रयास करने होंगे और समाज में मौजूद बुराइयों के खिलाफ भी एकजुट होकर लड़ना होगा। यह सम्मेलन किसी एक व्यक्ति या संस्था की कोशिश भर नहीं, बल्कि मेवात के मुस्तकबिल पर सामूहिक बातचीत की एक कोशिश है। हमारा मकसद साफ है तालीम बेहतर हो, नौजवानों के लिए रोज़गार और कारोबार के रास्ते खुलें, नशे और दहेज़ जैसी बुराइयों के खिलाफ समाज एकजुट हो और मेवात विकास की राह पर आगे बढ़े। आज जो आवाज़ यहां से उठी है, उसे आगे गांव गांव और घर घर तक पहुंचाना हम सबकी जिम्मेदारी है।

मेवात की तरक्की किसी एक शख्स की नहीं, हम सबकी साझा जिम्मेदारी है।

तमाम मेहमानों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, नौजवानों और हर उस शख्स का एक बार फिर दिल से शुक्रिया, जिसने इस कोशिश में अपना हिस्सा डाला।

आज़ाद मेहराब। MCI Lakshya। मेवात विकास।

05/10/2026
04/10/2026

आज मेवात विकास महासम्मेलन का आगाज़ दोपहर 12 बजे से होगा।

नशा, दहेज़ और दूसरी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ आवाज़ के साथ-साथ तालीम, रोज़गार, कारोबार, सेहत और मेवात की तरक्की पर मिलकर आगे का रास्ता तलाशने की कोशिश है।

आइए, अपनी मौजूदगी दर्ज कराएं और मेवात की तरक्की में अपना हिस्सा डालें।

📍 सद्भावना मंडप, नूंह
🕛 दोपहर 12 बजे से

MCI LAKSHYA | मेवात विकास अभियान

मेवात के मुस्तकबिल पर बात करने का वक्त आ गया है। कल मेवात विकास महासम्मेलन है।मेवात में इससे पहले भी कई बार पंचायतें और ...
03/10/2026

मेवात के मुस्तकबिल पर बात करने का वक्त आ गया है।

कल मेवात विकास महासम्मेलन है।

मेवात में इससे पहले भी कई बार पंचायतें और बड़े कार्यक्रम होते रहे हैं। इलाके की समस्याओं पर बातें भी होती रही हैं, लेकिन इस बार कोशिश यह है कि बात सिर्फ बातों तक सीमित न रहे, बल्कि उसे अमली जामा पहनाने की पूरी कोशिश की जाए। मेवात में नशा, दहेज़, बेरोज़गारी, तालीम की कमी और दूसरी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ एक गंभीर और सामूहिक कोशिश की जरूरत है। साथ ही तालीम, रोज़गार, कारोबार, स्वास्थ्य और इलाके की तरक्की के लिए ठोस रास्ते तलाशना भी जरूरी है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आज़ाद मेहराब की तरफ से कहा गया कि मेवात की तरक्की के लिए पूरे एफर्ट्स लगाए जाएंगे। सरकार के साथ मिलकर समस्याओं के समाधान की कोशिश की जाएगी और अगर हर समस्या का समाधान सरकारी स्तर पर तुरंत संभव नहीं होता, तो अपनी क्षमता के मुताबिक सामाजिक और निजी प्रयासों से भी मेवात की तरक्की को आगे बढ़ाने की कोशिश जारी रहेगी। इस कार्यक्रम के लिए करीब 1,000 से 1,200 लोगों तक निमंत्रण पहुंचाया गया है और उम्मीद है कि 1,000 से ज्यादा मेवाती इस सम्मेलन में पहुंचकर अपनी भागीदारी दर्ज कराएंगे।

लेकिन असल सवाल यह नहीं है कि सम्मेलन में कितने लोग आएंगे।

असल सवाल यह है कि इसके बाद हम अपने हिस्से की जिम्मेदारी कितनी ईमानदारी से निभाएंगे। नशे के खिलाफ लड़ाई सिर्फ भाषणों से नहीं जीती जा सकती, इसके लिए परिवार, समाज और नौजवानों को साथ आना होगा। दहेज़ और फिज़ूलखर्ची को कम करने की शुरुआत भी अपने घर से करनी होगी।

तालीम बेहतर बनाने के लिए बच्चों की पढ़ाई, स्कूलों की हालत और अभिभावकों की जिम्मेदारी पर गंभीरता से काम करना होगा। रोज़गार के लिए नौजवानों को हुनर, कारोबार और नए अवसरों से जोड़ने के रास्ते तलाशने होंगे। मेवात की तरक्की किसी एक व्यक्ति, संस्था या सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें हम सबका हिस्सा है।उम्मीद है कल का यह सम्मेलन सिर्फ एक कार्यक्रम बनकर खत्म नहीं होगा, बल्कि यहां से निकलने वाली बात गांवों तक पहुंचेगी, गांवों से समाज तक पहुंचेगी और समाज की आवाज़ समाधान तक पहुंचाने की कोशिश जारी रहेगी।

आइए, सिर्फ देखने और सुनने के लिए नहीं, बल्कि मेवात की तरक्की में अपना हिस्सा डालने की नीयत के साथ जुड़ें।

मेवात का मुस्तकबिल किसी एक शख्स का नहीं, हम सबकी साझा जिम्मेदारी है।

MCI LAKSHYA | मेवात विकास अभियान

#मेवात #महापंचायत

 #मेवात पहुंचे आज़ाद मेहराब, टीम की मेहनत को दी मुबारकबाद4 अक्टूबर के मेवात विकास महासम्मेलन की तैयारियों के बीच आज़ाद म...
02/10/2026

#मेवात पहुंचे आज़ाद मेहराब, टीम की मेहनत को दी मुबारकबाद

4 अक्टूबर के मेवात विकास महासम्मेलन की तैयारियों के बीच आज़ाद मेहराब मेवात पहुंच चुके हैं। नूंह स्थित MCI Lakshya ऑफिस पहुंचकर उन्होंने कार्यक्रम की तैयारियों का जायज़ा लिया और टीम के सभी साथियों से मुलाकात की। आज़ाद मेहराब ने कम वक्त में दिन-रात मेहनत करके कार्यक्रम की तैयारियों को यहां तक पहुंचाने वाले MCI Lakshya के तमाम साथियों की मेहनत को सराहा और उन्हें दिल से मुबारकबाद दी।

उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े काम की कामयाबी सिर्फ एक व्यक्ति की कोशिश से नहीं, बल्कि पूरी टीम की मेहनत, जिम्मेदारी और आपसी सहयोग से होती है। मेवात के मुस्तकबिल को लेकर जिस तरह टीम के साथी लगातार लोगों तक पहुंच रहे हैं, सम्मानित और जिम्मेदार लोगों को न्योता दे रहे हैं और इस कार्यक्रम को कामयाब बनाने में जुटे हुए हैं, वह अपने आप में एक अच्छी शुरुआत है। अब उम्मीद है कि 4 अक्टूबर को मेवात के लोग भी अपनी मौजूदगी और अपने विचारों के साथ इस कोशिश का हिस्सा बनेंगे और तालीम, रोज़गार, कारोबार, सेहत और इलाके की तरक़्क़ी जैसे अहम मुद्दों पर मिलकर बातचीत करेंगे।

मेवात की फिक्र करने वाले हर साथी को सलाम।
आपकी मेहनत ही इस मुहिम की असली ताक़त है!

गांधी जयंती पर आज़ाद मेहराब का पैग़ाम,मेवात की मिट्टी से निकली एक पुरानी सीख!आज 2 अक्टूबर है, महात्मा गांधी जयंती।यह दिन...
02/10/2026

गांधी जयंती पर आज़ाद मेहराब का पैग़ाम,मेवात की मिट्टी से निकली एक पुरानी सीख!

आज 2 अक्टूबर है, महात्मा गांधी जयंती।

यह दिन सिर्फ गांधी जी को याद करने का दिन नहीं, बल्कि उनके उन विचारों को याद करने का भी दिन है जिनमें गांव, गरीब, इंसानियत, अमन और समाज के अंतिम व्यक्ति की चिंता सबसे ऊपर थी। और मेवात के लिए गांधी जी की याद सिर्फ इतिहास की किताबों तक सीमित नहीं है।

19 दिसंबर 1947 को, देश के बंटवारे के बाद जब सांप्रदायिक तनाव और असुरक्षा का माहौल था, महात्मा गांधी मेवात के घासेड़ा गांव पहुंचे थे। उस समय बड़ी संख्या में मेव मुस्लिम परिवार पाकिस्तान जाने की सोच रहे थे। गांधी जी ने लोगों से अपने देश में रहने और भरोसा बनाए रखने की अपील की। घासेड़ा में उनकी यात्रा आज भी मेवात की सामूहिक स्मृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।

बाद में घासेड़ा को गांधीग्राम के नाम से भी जाना गया। लेकिन इतिहास की विडंबना देखिए जिस गांव में गांधी जी अमन, भरोसे और इंसानियत का संदेश लेकर पहुंचे थे, वहां वर्षों बाद भी शिक्षा, बुनियादी सुविधाओं और विकास को लेकर सवाल उठते रहे।
आज गांधी जयंती पर हमें इसी इतिहास से एक सवाल लेना चाहिए, क्या हम अपने बच्चों के लिए वह मेवात बना रहे हैं, जिसके बेहतर मुस्तकबिल का सपना हर पीढ़ी देखती रही है?

MCI LAKSHYA की सोच इसी सवाल से जुड़ती है। हम मानते हैं कि मेवात का विकास सिर्फ सड़कों और इमारतों का नाम नहीं है। विकास का मतलब है।

बच्चे स्कूल जाएं।
उन्हें बेहतर तालीम मिले।
बेटियों को आगे बढ़ने का पूरा अवसर मिले।
नौजवान हुनर सीखें।
रोज़गार के नए रास्ते बनें।
स्थानीय कारोबार और निवेश बढ़े।
और मेवात का हर परिवार अपने बच्चों के मुस्तकबिल को लेकर ज्यादा मजबूत और आश्वस्त हो।

आज सरकार की तरफ से भी नूंह में शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार से जुड़े कई कार्यक्रमों और योजनाओं की घोषणा की गई है। अगस्त 2026 में हुई मेवात विकास बोर्ड की बैठक में शिक्षा के लिए लगभग 10 करोड़ और कौशल विकास के लिए 87 लाख के प्रावधानों सहित रोजगार और स्वरोजगार बढ़ाने की बात कही गई।
लेकिन सरकारी योजनाओं के साथ समाज की भागीदारी और निगरानी भी जरूरी है।

इसी सोच के साथ आज़ाद मेहराब के नेतृत्व में MCI LAKSHYA मेवात विकास अभियान 4 अक्टूबर को मेवात की 36 बिरादरियों के विकास महासम्मेलन का आयोजन कर रहा है।

4 अक्टूबर, सद्भावना मंडप, नूंह

यह कार्यक्रम सिर्फ एक सभा नहीं, बल्कि मेवात के विकास से जुड़े सवालों पर बातचीत का एक मंच बनाने की कोशिश है।

तालीम क्या हो?
रोज़गार कैसे बढ़े?
नौजवानों के लिए हुनर और कारोबार के रास्ते कैसे खुलें?
बच्चों का मुस्तकबिल कैसे बेहतर हो?
और मेवात की तरक़्क़ी में समाज की अपनी भूमिका क्या हो?

इन सवालों पर बातचीत जरूरी है।

आज़ाद मेहराब का कहना है

“गांधी जी मेवात आए थे तो उनके सामने इंसान और इंसानियत का सवाल था। आज हमारे सामने हमारी आने वाली नस्लों का सवाल है। अगर हम अपने बच्चों की तालीम, अपने नौजवानों के रोज़गार और अपने समाज की तरक़्क़ी के लिए आज गंभीर नहीं होंगे, तो आने वाली नस्लें हमसे सवाल करेंगी। मेरी कोशिश किसी एक व्यक्ति या संस्था की कामयाबी नहीं, बल्कि मेवात के लोगों को अपने मुस्तकबिल की बातचीत में शामिल करने की कोशिश है।”»

गांधी जयंती पर MCI LAKSHYA का यही पैग़ाम है—

अमन सिर्फ समाज को जोड़ता है,
लेकिन तालीम और रोज़गार उस समाज को मजबूत बनाते हैं।

मेवात की असली ताक़त उसकी जमीन, उसके लोग और उसकी आने वाली नस्लें हैं।

आइए, गांधी जी की उस ऐतिहासिक यात्रा को सिर्फ याद न करें—
उससे एक जिम्मेदारी भी लें।

4 अक्टूबर को मेवात के विकास पर संवाद के लिए मिलते हैं।

MCI LAKSHYA — मेवात विकास अभियान
आज़ाद मेहराब की अगुवाई में

📍 सद्भावना मंडप, नजदीक तिकोना पार्क, नूंह
📅 रविवार, 4 अक्टूबर 2026
⏰ दोपहर 12:30 बजे

#गांधी_जयंती #महापंचायत

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