03/09/2026
1998 के विधानसभा चुनाव में नूरपुर से भाजपा विधायक श्री राकेश पठानिया जी निर्वाचित हुए,तब उनके सामने एक गंभीर मामला सामने आया था कि नूरपुर के एकमात्र आर्य कालेज जो कि आर्य समाज के भवन में चलता था, उसे सरकारी कालेज कैसे बनाएं?
प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल जी थे , तथा विधायक श्री राकेश पठानिया जी।
एक दिन अचानक श्री राकेश पठानिया जी पठानकोट स्थित स्व सत महाजन जी के आवास पर पहुंच गए, तथा उन्हें चरण स्पर्श किया, महाजन जी ने अपनी धर्मपत्नी जी को भी बुलाया कि राकेश पठानिया जी आए हैं, जलपान करने के बाद श्री राकेश पठानिया जी ने अपनी बात रखी कि नूरपुर के आर्य कालेज का सरकारी करण करने की योजना है यदि आर्य समाज मंदिर के प्रधान/ मंत्री अनापत्ति प्रमाण पत्र दे दें तो मैं इसके लिए प्रयास कर सकता हूं।
स्व सत महाजन जी ने इस पर सहमति जताई तथा कहा कि यह कठिन काम है मैंने भी राजा वीरभद्र सिंह जी से निवेदन किया मगर बात नहीं बनीं, महाजन साहब जी ने नूरपुर में आर्य समाज के प्रतिनिधि से बात की तथा अनापत्ति प्रमाण-पत्र देने को कहा, दोपहर का भोजन इकट्ठे किया, तथा श्री सत महाजन जी ने श्री राकेश पठानिया जी को 1100 रूपए शगुन देकर विदा किया,अगले दिन आर्य समाज मंदिर के प्रतिनिधि श्री राकेश पठानिया जी के आवास पर जरुरी कागज़ लेकर पहुंच गए।
सारा रिकॉर्ड लेकर श्री राकेश पठानिया जी शिमला पहुंचे तथा माननीय मुख्यमंत्री श्री प्रेम कुमार धूमल जी से मिलकर अपनी बात रखी, मुख्यमंत्री जी ने इस प्रस्ताव को सहर्ष स्वीकृति प्रदान कर दी। तथा नूरपुर के आर्य कालेज का सरकारी करण का मार्ग प्रशस्त हो गया।
जून 2002 में इसकी नोटिफिकेशन जारी कर दी गई, तथा मुख्यमंत्री जी स्वयं नूरपुर आए उस समारोह में स्व सत महाजन जी भी उपस्थित रहे, मुख्यमंत्री जी ने घोषणा की तथा यह कालेज सरकारी डिग्री कालेज में बदल गया।
इसमें आर्य शब्द को शामिल करने के लिए सत महाजन जी ने श्री राकेश पठानिया जी को कहा जिसे सहर्ष स्वीकार किया गया।
आज इस कालेज में सैंकड़ों बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, जिसके लिए श्री राकेश पठानिया जी का आभार व्यक्त करता हूं।
उपरोक्त कहानी लिखने का मेरा एक उद्देश्य है कि श्री राकेश पठानिया जी जो कि उस समय राजनीति में नए नए आए थे,वह राजनीति के मर्मज्ञ स्व सत महाजन जी के पठानकोट स्थित आवास पर स्वयं गये थे, ताकि नूरपुर में उच्च शिक्षा का भव्य मंदिर बनवाया जा सके।
यदि आर्य समाज मंदिर के प्रतिनिधि अनापत्ति प्रमाण-पत्र नहीं देते तो आज यह सरकारी कालेज नहीं होता, उसके लिए नूरपुर आर्य समाज मंदिर के प्रतिनिधि भी बधाई के पात्र हैं।
कयी बार विकास करने के लिए विरोधी के पास भी जाना पड़ता है,यह बात श्री राकेश पठानिया जी ने प्रमाणित कर दी।
श्री राकेश पठानिया जी का एक मात्र उद्देश्य कि नूरपुर का विकास होना चाहिए इसके लिए चाहे मुझे किसी के दरवाजे पर भी जाना पड़े मैं जा सकता हूं।
श्री राकेश पठानिया जी के काम नूरपुर के हर व्यक्ति की जुबान पर हैं।