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 #नोबेल_पुरस्कार_2026 की घोषणा का  #शेड्यूल जारीNobel Prize
04/10/2026

#नोबेल_पुरस्कार_2026 की घोषणा का #शेड्यूल जारी

Nobel Prize

 #गर्व_का_पल: बिहार खेल विश्वविद्यालय, राजगीर में नामांकित BPES प्रथम वर्ष के छात्र रोबिन कुमार ने Youth Parliament 2026...
04/10/2026

#गर्व_का_पल: बिहार खेल विश्वविद्यालय, राजगीर में नामांकित BPES प्रथम वर्ष के छात्र रोबिन कुमार ने Youth Parliament 2026 में बिहार का प्रतिनिधित्व कर विश्वविद्यालय एवं राज्य का गौरव बढ़ाया है। रॉबिन ने 2 अक्टूबर 2026 को लोकसभा सचिवालय द्वारा आयोजित “PRIDE – Know Your Leader” कार्यक्रम में भाग लिया।


Bihar Sports University, Rajgir

04/10/2026
मातृभाषा  #हिंदी से प्रेम करने वालों के लिए आज का दिन खास है.  आज ही के दिन 4 अक्टूबर 1977 को तत्कालीन प्रधान मंत्री मोर...
04/10/2026

मातृभाषा #हिंदी से प्रेम करने वालों के लिए आज का दिन खास है. आज ही के दिन 4 अक्टूबर 1977 को तत्कालीन प्रधान मंत्री मोरारजी देसाई के नेतृत्व वाली जनता पार्टी सरकार के तहत भारत के विदेश मंत्री िहारी_वाजपेई ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 32वें सत्र को हिंदी में संबोधित किया था. संयुक्त राष्ट्र संघ के मंच पर हिंदी भाषा में यह पहला संबोधन था. संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिंदी में भाषण देने वाले पहले विदेश मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने परमाणु निरस्त्रीकरण, राज्य प्रायोजित आतंकवाद और विश्व निकाय में सुधार जैसे प्रमुख मुद्दों पर भारत के रुख को प्रभावी ढंग से उठाया।

वाजपेयी ने इस ऐतिहासिक संबोधन में कहा था कि ‘एक ऐसा शख्स जो अपने देश में दो दशक और उससे अधिक समय तक सांसद रहा, लेकिन पहली बार राष्ट्रों की इस सभा में हिस्सा लेकर अपने अंदर विशेष अनुभूति महसूस कर रहा हूं।’

यह पहली बार था जब किसी भारतीय नेता ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपना भाषण हिंदी में दिया था। क्योंकि वैश्विक मंच पर प्रमुख भाषा होने के कारण अन्य भारतीय नेता अंग्रेजी भाषा का चयन करते थे। हालांकि वाजपेयी धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलते थे, लेकिन संयुक्त राष्ट्र में अपने भाषण के लिए उस वक्त हिंदी के चयन के पीछे उनका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय पटल पर हिंदी को उभारना था।

वाजपेयी ने गुटनिरपक्ष आंदोलन के विषय को उठाया और कहा कि भारत शांति, गुटनिरपेक्षता और सभी देशों के साथ मित्रता के लिए बहुत दृढ़ता के साथ खड़ा है।

'वसुधैव कुटुंबकम् की परिकल्पना बहुत पुरानी है'
अपने संबोधन में वाजपेयी ने कहा था कि ‘वसुधैव कुटुंबकम्' की परिकल्पना बहुत पुरानी है। भारत में सदा से इस धारणा में विश्वास रहा है कि सारा संसार एक परिवार है।भारत में हम सभी वसुधैव कुटुंबकम् की अवधारणा में विश्वास रखते हैं।’

'लोकतंत्र की जड़ें एक विकासशील देश में स्थापित हो सकती हैं'

साल 1998 में वाजपेयी ने बतौर प्रधानमंत्री संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया और पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से न्यूयार्क में मुलाकात की थी।उन्होंने कहा था कि ‘भारत ने यह दिखाया है कि लोकतंत्र की जड़ें एक विकासशील देश में स्थापित हो सकती हैं।’

 #इतिहास_के_पन्नों_से: 04 अक्तूबर 1957 का दिन मानव के अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास मे एक स्वर्णिम पृष्ठ है। इसी दिन पृथ्वी...
04/10/2026

#इतिहास_के_पन्नों_से: 04 अक्तूबर 1957 का दिन मानव के अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास मे एक स्वर्णिम पृष्ठ है। इसी दिन पृथ्वी की सतह से पहली मानव-निर्मित वस्तु – रूसी उपग्रह ‘ #स्पुतनिक‘ अंतरिक्ष में छोड़ा गया। इसी के साथ 83.5 किलोग्राम भारी स्पुतनिक पहला ऐसा सैटेलाइट बना जो पृथ्वी के वायुमंडल से बाहर सफलतापूर्वक भेजा गया। धातु की गेंद की तरह बनाए स्पुतनिक में चार एंटीना थे।

 #श्यामजी_कृष्ण_वर्मा (DOB :  4 अक्तूबर, 1857) ने  #लंदन में  #इंडिया_हाउस की स्थापना कर विदेशी हुकूमत की धरती से उन्हें...
04/10/2026

#श्यामजी_कृष्ण_वर्मा (DOB : 4 अक्तूबर, 1857) ने #लंदन में #इंडिया_हाउस की स्थापना कर विदेशी हुकूमत की धरती से उन्हें कमजोर करने की नींव रखी। उन्होंने #इंडियन_होम_रूल_सोसायटी' की स्थापना कर अपनी #क्रांतिकारी गतिविधियों के जरिए स्वतंत्रता के संकल्प को लगातार प्रज्वलित रखा। यह राष्ट्र उनके संघर्ष व त्याग का सदैव ऋणी रहेगा। ऐसे देश के महान सपूत को उनकी #जयंती पर नमन करता हूँ।

इनके पिता श्रीकृष्ण वर्मा की आर्थिक स्थिति अच्छी न थी; पर मुम्बई के सेठ मथुरादास ने इन्हें छात्रवृत्ति देकर विल्सन हाईस्कूल में भर्ती करा दिया। वहाँ वे नियमित अध्ययन के साथ पंडित विश्वनाथ शास्त्री की वेदशाला में संस्कृत का अध्ययन भी करने लगे।

मुम्बई में एक बार महर्षि दयानन्द सरस्वती आये। उनके विचारों से प्रभावित होकर श्यामजी ने भारत में संस्कृत भाषा एवं वैदिक विचारों के प्रचार का संकल्प लिया। ब्रिटिश विद्वान प्रोफेसर विलियम्स उन दिनों संस्कृत-अंग्रेजी शब्दकोष बना रहे थे। श्यामजी ने उनकी बहुत सहायता की। इससे प्रभावित होकर प्रोफेसर विलियम्स ने उन्हें ब्रिटेन आने का निमन्त्रण दिया। वहाँ श्यामजी ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में संस्कृत के अध्यापक नियुक्त हुए; पर स्वतन्त्र रूप से उन्होंने वेदों का प्रचार भी जारी रखा।

कुछ समय बाद वे भारत लौट आये। उन्होंने मुम्बई में वकालत की तथा रतलाम, उदयपुर व जूनागढ़ राज्यों में काम किया। वे भारत की गुलामी से बहुत दुखी थे। लोकमान्य तिलक ने उन्हें विदेशों में स्वतन्त्रता हेतु काम करने का परामर्श दिया। इंग्लैण्ड जाकर उन्होंने भारतीय छात्रों के लिए एक मकान खरीदकर उसका नाम इंडिया हाउस (भारत भवन) रखा। शीघ्र ही यह भवन क्रान्तिकारी गतिविधियों का केन्द्र बन गया। उन्होंने राणा प्रताप और शिवाजी के नाम पर छात्रवृत्तियाँ प्रारम्भ कीं।

1857 के स्वातंत्र्य समर का अर्धशताब्दी उत्सव ‘भारत भवन’ में धूमधाम से मनाया गया। उन्होंने ‘इंडियन सोशियोलोजिस्ट’ नामक समाचार पत्र भी निकाला। उसके पहले अंक में उन्होंने लिखा – मनुष्य की स्वतन्त्रता सबसे बड़ी बात है, बाकी सब बाद में। उनके विचारों से प्रभावित होकर वीर सावरकर, सरदार सिंह राणा और मादाम भीकाजी कामा उनके साथ सक्रिय हो गये। लाला लाजपत राय, विपिनचन्द्र पाल आदि भी वहाँ आने लगे।

विजयादशमी पर्व पर ‘भारत भवन’ मंे वीर सावरकर और गांधी जी दोनों ही उपस्थित हुए। जलियाँवाला बाग हत्याकाण्ड के अपराधी माइकेल ओ डायर का वध करने वाले ऊधमसिंह के प्रेरणास्रोत श्यामजी ही थे। अब वे शासन की निगाहों में आ गये, अतः वे पेरिस चले गये। वहाँ उन्होंने ‘तलवार’ नामक अखबार निकाला तथा छात्रों के लिए ‘धींगरा छात्रवृत्ति’ प्रारम्भ की।

भारतीय क्रान्तिकारियों के लिए शस्त्रों का प्रबन्ध मुख्यतः वे ही करते थे। भारत में होने वाले बमकांडों के तार उनसे ही जुड़े थे। अतः पेरिस की पुलिस भी उनके पीछे पड़ गयी। उनके अनेक साथी पकड़े गये। उन पर भी ब्रिटेन में राजद्रोह का मुकदमा चलाया जाने लगा। अतः वे जेनेवा चले गये। 30 मार्च, 1930 को श्यामजी ने और 22 अगस्त, 1933 को उनकी धर्मपत्नी भानुमति ने मातृभूमि से बहुत दूर जेनेवा में ही अन्तिम साँस ली।

श्यामजी की इच्छा थी कि स्वतन्त्र होने के बाद ही उनकी अस्थियाँ भारत में लायी जायें। उनकी यह इच्छा 73 वर्ष तक अपूर्ण रही। अगस्त, 2003 में गुजरात के मुख्यमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी उनके अस्थिकलश लेकर भारत आये।

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Courtesy : विश्व संवाद केंद्र गुजरात

#श्यामजी_कृष्ण_वर्मा

🔯🌺शुभ रविवार🔯🌺 🌞ॐ श्री आदित्याय नमः🌞 🌻💐शुभ प्रभात💐🌻ॐ सूर्य देवं नमस्ते स्तु गृहाणं करूणा करं।अर्घ्यं च फलं संयुक्त गन्ध ...
04/10/2026

🔯🌺शुभ रविवार🔯🌺
🌞ॐ श्री आदित्याय नमः🌞
🌻💐शुभ प्रभात💐🌻
ॐ सूर्य देवं नमस्ते स्तु गृहाणं करूणा करं।
अर्घ्यं च फलं संयुक्त गन्ध माल्याक्षतै युतम्॥
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👏आप सभी पर भगवान सूर्यदेव जी की कृपा सदा बनी रहे और सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो🙏
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आप का दिन शुभ और मंगलमय हो
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🌞ॐ श्री सूर्य देवाय नमः🌞

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