23/05/2026
#कुल_के_गौरव #शुभकामनाएं_ब्रह्मर्षि_समाज
#जहाज_इंडस्ट्री_के_बड़े_भूमिहार_नाम
= बिहार मुजफ्फरपुर गांव मीनापुर के "सर्वेश शाही जी
मालिक - शाही शिपिंग लिमिटेड
मालिक - शाही लॉजिस्टिक - शाही पोर्ट लिमिटेड - शाही कंटेनर्स लिमिटेड - SKS ड्रेजिंग - SKS शिपयार्ड
इनका लगभग 3 दर्जन फ्लीट व तेलवाहक जहाज चलता है .. भारत की कई बड़ी तेल कम्पनी के साथ टाई अप है ... ये भूमिहार समाज की 50 वर्ष पुरानी कम्पनी है ..
= बिहार पाटलिपुत्र गांव कला के रमेश शर्मा जी
मालिक - मरमरी शिपिंग
मालिक - मल्टी मैरीन सर्विसेज
इनका मरमरी एक्सप्रेस व अन्य कई नामों से कई दर्जन बड़े बड़े मालवाहक जहाज चलते हैं ....
इनका खुद का जहाज बनाने का कम्पनी है ... पुराने जहाज को रिसाइकल करके नए जहाज भी बनाते है ... मुंबई में बंदरगाह किनारे खुद की कई सौ एकड़ नीजि ज़मीन है...
04/05/2026
बंगाल चुनाव में भूमिहारों ने परचम लहराया तीन सीट जीती जो तीनों भाजपा के उम्मीदवार उमेश राय दिलीप सिंह रितेश तिवारी
1= उमेश राय जी - हावड़ा उत्तर विधानसभा से है, यूपी गाजीपुर के भूमिहार है
2= दिलीप सिंह जी - चांपदानी विधानसभा से है, यूपी बनारस पिंडरा के भूमिहार है
3= रितेश तिवारी जी -काशीपुर बेलगछिया विधानसभा से है, बिहार सिवान के भूमिहार है
1= कौशिक राय जी- लखीपुर विधानसभा से है, यूपी गाजीपुर के भूमिहार है
वर्तमान विधायक और मंत्री भोजन मंत्रालय,कोयला एवं खनन मंत्रालय असम सरकार देख रहे है
बहुत शुभकामनाएं त्यागी भूमिहार 💐
19/04/2026
भगवान परशुराम जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं ..........
05/04/2026
तुम कोई शरीफ आदमी हो की अफ़सर हो… दिन में मत आना, रात में आओ…. इस वाक्य के बाद जन्म हुआ बिहार की राजनीति में एक राजघराने की!
तो कहानी है अनंत सिंह के बड़े भाई, बड़े सरकार दिलिप सिंह की! दिलिप सिंह RJD से दो बार विधायक और 1995-2000 तक बिहार सरकार में मंत्री रहे थे।
तो आखिर दिलिप सिंह के बनने की कहानी क्या है? बात है उस समय की की जब कांग्रेस राज था, गाड़ियाँ कम ही थी, तस्करियाँ ज़्यादा!
ऐसे में दिलिप सिंह के पास घोड़े की तो कमी नहीं थी, यानी साधन थे। इलाक़े में दबदबा था कामदेव सिंह का, दिलिप सिंह पहले कामदेव के साथ हो लिए, धीरे-धीरे काम और दबदबा दोनों बढ़ने लगा। बाद में कामदेव की मृत्यु हो गई और कामदेव की जगह अब दिलिप सिंह हो गए और यहाँ से कहानी बदली।
दरअसल, कामदेव के उपर भी एक BOSS थे। उस समय के वर्तमान मोकामा के कांग्रेस विधायक “श्याम सुंदर सिंह धीरज”
कामदेव के जाने के बाद दिलिप,विधायक के डायरेक्ट संपर्क में आए गए और चुनाव कैसे जितना है, बूथ कैसे मजबूत करना है,सब दिलिप सिंह के जिम्मे आ गया। यह काम कैसे होता था, आप सब समझदार है, समझ जाइएगा।
बात तब बिगड़ी जब श्याम सुंदर जी मंत्री बने और पटना आवास पर आराम फ़रमा रहे थे, तभी दिलिप सिंह उनके आवास पर पहुँचे। इससे मंत्री जी नाराज़गी ज़ाहिर की और कहा- तुम लोग ऐसे दिन में ना आया करो, रात के अँधेरे में आओ। लोग देख लेंगे तो क्या सोचेंगे! बस यहीं से दिलिप सिंह का माथा ठनका और वे चुनाव लड़ने का मन बना लिया।
साल 1990 में जनता दल के टिकट पर दिलिप सिंह, श्याम सुंदर सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ा और 20 हजार वोटों से चुनाव जीते। 1995 में फिर चुनाव जीता और मंत्री बने। RJD का निर्माण हुआ, वे RJD के सदस्य हुए।
अब आया 2000 का चुनाव तब तक एक और भुमिहार नेता का उत्थान हो चुका था, नाम सुरजभान सिंह! 2000ई के चुनाव में सुरजभान ने दिलिप को निर्दलीय ही हराया।
हालाँकि की RJD ने दिलिप सिंह को 2003 में MLC बनाया लेकिन दिलिप सिंह की मृत्यु 2006 में हो गई।
इसमें दिलचस्प यह है की अनंत सिंह 2005 में JDU में आ गए थे और विधायक भी बन गए थे।
03/04/2026
कुश्ती प्रतियोगिता के अखाड़े में छोटे सरकार ❤
23/03/2026
कल भूमिहार परिवार बैठकी का वार्षिकोत्सव के उपलक्ष्य में अदिति कम्युनिटी हॉल में मिलन समारोह आयोजित किया गया था जिसमें हजारों हजार लोग शामिल हो कर अपनी एकता का मिसाल दिया
22/03/2026
कल 23/03/26 को विधायक जी २ बजे के बाद पटना स्थित आवास १ माल रोड में आयेंगे और मंगल वर सुबह 8 बजे पटना से बरहिया महारानी स्थान तक जाएँगे भाया बख्तियारपुर पुरानी रोड से
19/03/2026
🔥 **सच की जीत हुई है… और ये तो बस शुरुआत है!** 🔥
बहुत दिनों के संघर्ष, साजिशों और झूठ के बाद आखिरकार सत्य की जीत हुई 💪
अनंत सिंह जी को बेल मिल गई है, और अब वो वापस आ रहे हैं अपने असली ताकत *अपनी जनता मालिक** के बीच 👑
जो लोग सोच रहे थे कि शेर को कैद कर लेंगे, उन्हें आज समझ आ गया होगा —
**शेर कुछ वक्त के लिए रुक सकता है, झुकता कभी नहीं!** 🦁
🙏 दिल से धन्यवाद उन सभी लोगों को जो इस कठिन समय में चट्टान बनकर साथ खड़े रहेआपकी दुआ, आपका विश्वास ही असली ताकत है
अब वक़्त है…**मोकामा फिर से अपने असली अंदाज़ में दिखेगा 🔥**
Anant Kumar Singh
19/03/2026
पटना कॉलेज कैंपस में मनुस्मृति को आग लगाया गया, Manish Kumar ने सवर्णों और सवर्ण के ठेकेदारों के मुँह पर कालिख पोत कर औकात दिखाया है।
समय समय से ये सब होते रहना जरूरी है ताकि सवर्णों के मठाधीशों को ये पता चलता रहे कि सवर्ण अगले 10 सालों में भारत में अपनी पहचान वैसे ही छुपाकर रहेंगे जैसे बांग्लादेश और पाकिस्तान में हिन्दू रहते हैं।
छात्रसंघ चुनाव के वक्त ही हम कहे थे, पूरे पटना में पटना विश्वविद्यालय ही एक स्थान है जहां लोग अपने आत्मसम्मान, स्वाभिमान और वजूद के साथ आजादी से रहते हैं इसको हर कीमत पर बचाया जाए लेकिन बिखराव, महत्वाकांक्षा और ईगो क्लैश ने पटना विश्वविद्यालय से भी हमारी उस अस्मत और अस्मिता छीन ली, जिसके लिए हमारी पिछली पीढ़ी ने लाठी खाए थे, जेल गए थे और कई एक मुकदमे झेले थे।
हम याद दिलाते रहे कि जब पिछली बार ये नरमुंडे जीते थे तब पटना कॉलेज कैंपस में भगवा झंडा जलाया गया था, अगर इस बार इनकी जीत हुई तो पटना यूनिवर्सिटी में 85 और 15 के नाम पर हर दिन नंगा नाच होगा लेकिन लोगों के अपने फिलॉस्फी थे, मान्यताएं थीं मसलन जैसे ही पटना यूनिवर्सिटी का कंट्रोल इनके हाथों में गया आज नजारा सबके सामने है, अभी शपथग्रहण हुआ ही है कि आज नजारा सबके सामने है।
आने वाले दिनों में अभी और बहुत कुछ बाकी है, इतना तांडव होगा कि हर दूसरे दिन सवर्ण छात्रों का स्वाभिमान आहत होगा, मैं इन लोगों को जानता हूं, इसीलिए हर कीमत पर छात्र जदयू और NSUI का हार चाहता था।
खैर, हमारा क्या है न हम पटना विश्वविद्यालय के छात्र हैं, ना ही अपने समाज का प्रतिनिधित्व कर कभी नेता बनने की ख्वाहिश है, बस समाज प्रेम इतना है कि जहां अपना समाज दिखता है लगता है अपनों के लिए क्या कर दें, भगवान भला करें उस लीगेसी का जो पिछले 109 सालों से हिमालय के भांति छाती ताने खड़ा हर साल हजारों छात्रों का भला कर रहा है।