08/10/2024
दिव्यांग अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 78 में निम्नलिखित प्रावधान हैं:
धारा 78 - दिव्यांगजनों के अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक आदेश:
(1) अदालत दिव्यांगजनों के अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक आदेश दे सकती है।
(2) अदालत दिव्यांगजनों के अधिकारों का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति या संस्था के विरुद्ध आदेश दे सकती है।
(3) अदालत दिव्यांगजनों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजा देने का आदेश दे सकती है।
(4) अदालत दिव्यांगजनों के अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक निर्देश दे सकती है।
(5) अदालत दिव्यांगजनों के अधिकारों का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति या संस्था के विरुद्ध जुर्माना लगा सकती है।
इस धारा में दिव्यांग अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत दिव्यांगजनों के अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक आदेश देने की शक्ति अदालत को प्रदान की गई है। यह धारा यह सुनिश्चित करती है कि:
- दिव्यांगजनों के अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक आदेश दिए जाएं।
- दिव्यांगजनों के अधिकारों का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति या संस्था के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।
- दिव्यांगजनों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजा दिया जाए।
- दिव्यांगजनों के अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक निर्देश दिए जाएं।
29/07/2023
विश्व दिव्यांग दिवस पर मिल सकता है दिव्यांग को 3000 मानसिक पेंशन
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विश्व दिव्यांग दिवस पर मिल सकता है दिव्यांग को 3000 मानसिक पेंशन
RUBY DPD FOUNDATION , Mb.9473432513
14/07/2023
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जिन लोगों के पास न्यायालय जाकर अपनी कानूनी समस्या को रखने के लिए धन नहीं हो, उन्हें बिना पैसे लिए या बहुत कम पैसे में कानूनी सहायता करना विधिक सहायता (Legal aid) कहलाता है। कानूनी सहायता देना, विधिक समता के लिए बहुत आवश्यक तत्त्व है क्योंकि निर्धनता के कारण कोई न्याय न प्राप्त कर पाए तो विधिक समता का कोई अर्थ नहीं है।
अगर आपकी कोई क्वेरी है, तो 15100 पर डायल कर राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर पर सीधे बात भी कर सकते हैं. राष्ट्रीय और राज्य स्तर के अलावा जिला और तालुका स्तर पर भी लीगल अथॉरिटी के नोटिफिकेशन इस पर उपलब्ध होंगे.
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सवाल: बिना वकील के क्या कोई व्यक्ति खुद ही अपना केस लड़ सकता है? जवाब: बिल्कुल, ऐसा संभव है। संविधान की धारा 32 के एडवोकेट्स एक्ट, 1961 के मुताबिक जब भी कोई व्यक्ति किसी सिविल या आपराधिक मामले में फंस जाता है तब वह कोर्ट में अपना केस लड़ सकता है।
प्रत्येक नागरिक, जिसकी समस्त स्रोतों से आय प्रति वर्ष एक लाख रुपये हो, निशुल्क विधिक सेवा के पात्र हैं। संबंधित विधिक सेवा समिति के अध्यक्ष, प्राधिकरण के सह अध्यक्ष के अनुमोदन से किसी अन्य उपयुक्त मामले में भी मुफ्त विधिक सहायता प्रदान कर सकते हैं।
भारत के संविधान के अनुच्छेद 39ए में प्रावधान है कि राज्य यह सुनिश्चित करेगा कि कानूनी प्रणाली का संचालन समान अवसर के आधार पर न्याय को बढ़ावा दे, और विशेष रूप से, उपयुक्त कानून या योजनाओं या किसी अन्य तरीके से मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करेगा।
मुफ्त विधिक सहायता के लिए सादे कागज पर करें आवेदन:
अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों की महिलाएं और बच्चे भी मुफ्त कानूनी सहायता प्राप्त करने के पात्र हैं। मुफ्त कानूनी सहायता प्राप्त करने के इच्छुक किसी भी व्यक्ति को अपने जिला या उपमंडल या उच्च न्यायालय की मुफ्त कानूनी सहायता समिति को एक सादे कागज पर आवेदन जमा करना होगा। उस आवेदन में उसे अपने साथ हुए अन्याय का संक्षिप्त विवरण या मुकदमे का संक्षिप्त विवरण, नाम, आय की सीमा आदि लिखना होगा तथा अपनी वार्षिक आय के संबंध में एक शपथ पत्र संलग्न करना होगा। यदि व्यक्ति पिछड़ी जाति, जनजाति या अनुसूचित जाति का है तो उसका प्रमाण पत्र संलग्न करें। इस आवेदन को जिला एवं सत्र न्यायाधीश के कार्यालय में दाखिल करें, क्योंकि आवेदन पर केवल जिला एवं उपमंडल स्तर की समितियों में ही विचार किया जाएगा और यदि व्यक्ति मुफ्त सहायता के लिए पात्र पाया जाता है, तो उसे मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान की जाएगी।
22/06/2023
नियोजन-सह-व्यवसायिक मार्गदर्शन मेला-2023