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02/06/2026

सम्राट जी, अपने ही तरह आप पूरे बिहार को अनपढ़ समझते हैं क्या?

02/06/2026

एकदम अनपढ़ है रे भाई प्रोकेंडा, हाफ़ीडिपिट इत्यादि के बाद पेश है ‘स्वस्त’

02/06/2026

16 बीघा में देश के सबसे बड़े आवास में अय्याशी रहे CM जनसेवा का ज्ञान पेल रहे हैं

02/06/2026

20 साल के BJP नीतीश सरकार में भूख से मर रही जनता, सुन लीजिए 👇🏼

01/06/2026

5 देशरत्न मार्ग को 1 अन्ने मार्ग में किस नियम कानून के तहत मिलाया गया है?

हाथ में नारियल दे देने पर इतना तो बंदर भी नहीं उछलता जितना उछल कूद यह डुप्लीकेट भाजपाई कर रहा है

01/06/2026

"चुनाव विकास से नहीं, तिकड़म से जीता जाता है" - भाजपा विधायक

01/06/2026

महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता - पार्टी कार्यालय, पटना

01/06/2026

सम्राट सरकार में खौफ़ में जीने को मजबूर बेटियां...
बाहर निकलने में डरती हैं

31/05/2026

घुटने टेकने की उम्मीद तब करना जब कटाने के लिए सर नहीं होगा

ना डरने वाले हैं ना झुकने वाले हैं।

31/05/2026

राबड़ी देवी बिहार की एकमात्र महिला मुख्यमंत्री रही हैं। उन्होंने 1997 से 2005 तक बिहार की सरकार चलाई।

उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि रही है कि बिहार में 25 सालों से चली आ रही जातीय हिंसा उनके कार्यकाल में लगभग थम गई। 2000 के बाद सीधे 2009 में नीतीश कुमार के कार्यकाल में एक बड़ा नरसंहार हुआ और फिर वैसी घटनाएं रुक गईं।

बिहार अपनी उपलब्धियों पर गर्व नहीं करता। बिहार में बहुत कुछ ऐसा हुआ है स्त्रियों के प्रसंग में जिसे सेलिब्रेट होना चाहिए। वैसा ही एक प्रसंग है देश की पहली प्रैक्टिसिंग महिला डॉक्टर बिहार के भागलपुर की कादम्बिनी गांगुली थीं। राबड़ी जी बिहार की पहली महिला मुख्यमंत्री हैं। तारकेश्वरी सिन्हा बिहार की पहली महिला मंत्री थीं केंद्र में और बिहार में पहली महिला मंत्री बनी थीं सुमित्रा देवी। हालांकि तारकेश्वरी सिन्हा उपमंत्री थीं और सुमित्रा देवी केंद्र में भी बिहार से पहली महिला कैबिनेट मंत्री बनी थीं।

इन सभी महिलाओं का पहला होना एक बात है, एक खास बात है उनमें जाति वैविध्य। पहली महिला लोकसभा अध्यक्ष भी बिहार से थीं, मीरा कुमार।

इन सभी का सम्मान क्यों नहीं होना चाहिए?

आज जो बिहार में एक राजनीतिक नाटक रचा जा रहा है मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का बंगला खाली करवाने का वह एक आत्महीन कृतघ्न बिहारी समाज के नेतृत्व द्वारा रचा जा रहा प्रहसन है।

आखिर दो पूर्व मुख्यमंत्रियों का बंगला खाली करवाकर आप दे एक मंत्री को ही रहे हैं, तो पहले से चली आ रही व्यवस्था को क्यों डिस्टर्ब करना? जाहिर है इसमें राजनीतिक ऑप्टिक है। तो राबड़ी देवी भी उस ऑप्टिक में हिस्सा क्यों न लें! उन्होंने कह दिया है कि आप जबरदस्ती खाली करवा लें।

राजधानियों के बंगले बड़ा मुद्दा रहे हैं राजनेताओं और उनके समर्थकों के लिए। राजनेता इन बंगलों की सुविधाओं और पावर मेसेज को समझते हैं।

दिल्ली में नेताओं के सामान बाहर फेके जाते रहे हैं। जैसे केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का मोदी सरकार ने सामान फेका था तो रामदास आठवले का मनमोहन सरकार ने। ये घटनाएं मुद्दा भी बनीं।

शारद यादव को बंगले की लड़ाई लड़ते हमने करीब से देखा, वे सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर वहां बने रहे।

अभी जो पटना में हो रहा है वह एक सम्राट की शान में चार चांद तो नहीं ही लगाएगा। हो सकता है कि दिल्ली दरबार में उनके कुछ अंक बढ़ जाएं, घट भी सकते हैं - ये दो धारी है। नेता बड़े विपक्षी नताओं को आमतौर पर सीधे टारगेट नहीं करते, खासकर इस तरह के ऑप्टिक से।

जिस दिशा में घटनाक्रम देखा जा रहा है क्या वह तमिलनाडु की उस राजनीति तक जाने वाला है जिसमें सत्ता में आने के बाद विपक्ष के नेता को पुलिस द्वारा घसीटा गया था।

क्या बिहार अपनी एक मात्र महिला मुख्यमंत्री का सम्मान करने का सलीका हासिल नहीं कर सकता है?

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