🔥 लखनऊ से खास चर्चा! हज यात्रा 2026 पर अफजल अंसारी की बात | भारत की तरक्की के लिए दुआ की अपील 🇮🇳🕋
📍 लखनऊ स्थित ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ के राष्ट्रीय कार्यालय में
प्रदेश प्रभारी अफजल अंसारी से 22 अप्रैल 2026 को हज कमेटी द्वारा पहले हाजियों के जत्थे की रवानगी के अवसर पर प्राप्त आमंत्रण को लेकर चर्चा हुई।
इस दौरान यह संदेश सामने आया कि हज पर जाने वाले सभी लोग
भारत की तरक्की, अमन और भाईचारे के लिए दुआ करें।
यह पहल एक सकारात्मक सोच को दर्शाती है, जहां धार्मिक यात्रा के साथ-साथ देश की बेहतरी को भी प्राथमिकता दी जा रही है।
📢 आपकी क्या राय है? क्या हज यात्रियों को देश के लिए दुआ करनी चाहिए? कमेंट में जरूर बताएं।
All India Pasmanda Muslim Mahaz - Bihar
इस पेज का मकसद मुस्लिम पसमांदा जातियों की समस्याओं और उनसे जुड़े सवालों को सामने लाना है।
23/04/2026
📌 मुस्लिम समाज: इतिहास की कड़वाहट या भविष्य की मिठास?
आज वैश्विक स्तर पर मुस्लिम समाज एक ऐसे दोराहे पर खड़ा है, जहाँ उसे यह तय करना होगा कि वह अतीत का कैदी बनकर रहना चाहता है या भविष्य का निर्माता। हमारे उलमा, बुद्धिजीवियों और राजनेताओं को अब इस बुनियादी सवाल का सामना करना ही होगा।
१. मूल स्वरूप की ओर वापसी: जब इस्लाम एक था
इतिहास के पन्नों को पलटें तो हम पाते हैं कि नबी करीम (स.अ.व.) के दौर में इस्लाम एक सरल और अखंड जीवन पद्धति थी। उस समय न कोई शिया था, न सुन्नी; न वहाबी, न बरेलवी और न ही देवबंदी। न ही अहले-हदीस या विभिन्न फिरकों की दीवारें थीं।
• एक स्रोत, एक पहचान: तब केवल एक कुरान थी और मुसलमान की पहचान केवल 'मुसलमान' थी।
• बदलाव का दौर: नबी करीम की वफ़ात के बाद शुरू हुए आपसी राजनीतिक मतभेदों ने धीरे-धीरे धार्मिक रंग ले लिया। हदीसों की व्याख्या और विभिन्न विचारधाराओं के टकराव ने इस्लाम के मूल 'तौहीद' (एकता) को फिरकों में बांट दिया। आज का मुसलमान उन्हीं सदियों पुराने आपसी झगड़ों का बोझ ढो रहा है, जिसने इस्लाम की मूल रूह को ही धुंधला कर दिया है।
२. इतिहास: सबक या संघर्ष का हथियार?
इतिहास पढ़ने का उद्देश्य अपनी जड़ों को पहचानना और पिछली गलतियों से सीख लेना होता है। लेकिन दुर्भाग्यवश, आज इतिहास का उपयोग 'सीखने' के बजाय 'लड़ने' के लिए किया जा रहा है। शफ़ाअत, इमामत और खिलाफत जैसे मुद्दे आज भी हमारी मस्जिदों और सोशल मीडिया की बहसों का केंद्र हैं। इन बहसों से न तो किसी का ईमान बढ़ता है और न ही समाज की गरीबी दूर होती है; इससे केवल दिलों में दूरियां बढ़ती हैं।
३. संसाधनों की प्रचुरता और विकास का अभाव
यह एक कड़वा सच है कि मुस्लिम जगत संसाधनों से समृद्ध है, फिर भी हम विकास की दौड़ में पीछे हैं:
• शिक्षा और विज्ञान: जहाँ दुनिया मंगल ग्रह और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बात कर रही है, हम आज भी सदियों पुराने फतवों में उलझे हैं।
• सुनहरा दौर: हमें याद रखना होगा कि मुसलमानों का 'स्वर्ण युग' केवल इबादतों से नहीं, बल्कि बगदाद और स्पेन के पुस्तकालयों और प्रयोगशालाओं से आया था।
४. वक्त की पुकार: प्राथमिकताएं बदलें
अब समय आ गया है कि हम अपनी ऊर्जा को नष्ट करना बंद करें और निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करें:
• आधुनिक शिक्षा (Modern Education): दीन के साथ-साथ दुनियावी तालीम में उत्कृष्टता प्राप्त करना अनिवार्य है।
• फिरकापरस्ती का अंत: अपनी पहचान को फिरकों से ऊपर उठाकर पुनः 'उम्मत' के रूप में स्थापित करना होगा।
• संवाद (Dialogue): मतभेदों को खत्म करने के लिए 'मुनाज़रा' (वाद-विवाद) नहीं, बल्कि 'मुकालमा' (संवाद) की आवश्यकता है।
निष्कर्ष: एक नई शुरुआत का संकल्प
असली ताकत विभाजन में नहीं, बल्कि एकता (Unity) में है। आने वाली पीढ़ियां हमसे यह नहीं पूछेंगी कि १४०० साल पहले किसने क्या किया था, बल्कि वे यह पूछेंगी कि हमने उनके लिए कैसा समाज छोड़ा है।
"इतिहास के जख्मों को कुरेदने के बजाय, वर्तमान के घावों पर मरहम लगाएं। नफरत के अंधेरे को ज्ञान और मोहब्बत के दीयों से मिटाएं। आइए, एक ऐसे समाज का निर्माण करें जहाँ इंसानियत सर्वोपरि हो।"
लेखक:
मोहम्मद यूनुस
मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO)
ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़
23/04/2026
📢 ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ (बिहार)
🔔 आवश्यक सूचना
📅 तारीख: 03 मई 2026 (रविवार)
⏰ समय: दोपहर 12:00 बजे
📍 स्थान: प्रदेश कार्यालय, नया टोला, फुलवारी शरीफ,
जामा मस्जिद के पास, पटना
🔴 प्रदेश कार्यकारिणी एवं जिला कार्यकारिणी की अहम बैठक
🟢 महत्वपूर्ण विषय:
• संगठन के विस्तार को गांव-गांव तक पहुंचाने की रणनीति
• सदस्यता अभियान को मजबूत करने की योजना
• बिहार में नई सरकार के गठन में पसमांदा समाज की योग्य भागीदारी
• नई सरकार के साथ संगठन का तालमेल स्थापित करना
• पसमांदा समाज के उत्थान से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर गंभीर विचार-विमर्श
🙏 सभी संबंधित पदाधिकारियों से अनुरोध है कि समय पर उपस्थित होकर बैठक को सफल बनाएं।
सादर,
तौकीर अहमद
प्रदेश अध्यक्ष
ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़, बिहार
अरब राजघरानों का इतिहास: विरासत या सत्ता की रणनीति? | Middle East Power Game
अरब देशों के राजघरानों का इतिहास सिर्फ शाही विरासत नहीं, बल्कि सत्ता, राजनीति और रणनीति का जटिल खेल है।
इस वीडियो में हम जानेंगे कि कैसे सऊदी अरब, UAE और अन्य अरब देशों के शासकों ने अपनी सत्ता को मजबूत किया, और क्या यह परंपरा है या एक सुनियोजित रणनीति?
👉 क्या राजशाही आज भी प्रासंगिक है?
👉 क्या यह धर्म, तेल और राजनीति का गठजोड़ है?
👉 आम लोगों की भूमिका क्या है?
पूरी सच्चाई जानिए—तथ्यों और विश्लेषण के साथ।
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“क्या अरब राजघराने सिर्फ परंपरा और शान की निशानी हैं…
या फिर ये सत्ता का सबसे मजबूत और सोचा-समझा खेल है?
जहाँ एक तरफ दिखती है शाही जिंदगी—महल, दौलत और ताकत…
वहीं दूसरी तरफ छुपी होती है राजनीति, तेल और ग्लोबल कंट्रोल की कहानी।
आख़िर कैसे कुछ परिवार दशकों से पूरी दुनिया की नजरों में रहते हुए भी अपनी सत्ता बनाए हुए हैं?
और क्या ये सिर्फ विरासत है… या एक परफेक्ट रणनीति?
आज हम इसी सच्चाई को खोलेंगे—तथ्यों के साथ, बिना किसी झूठ के।”
📰 पसमांदा समाज के उत्थान पर तेज़ हुई सियासत, CM सम्राट चौधरी से अहम मुलाकात
बिहार की राजनीति में पसमांदा समाज के मुद्दे एक बार फिर केंद्र में आ गए हैं। ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज के बिहार के प्रदेश अध्यक्ष चौकी रहमत ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से शिष्टाचार मुलाकात कर पसमांदा समाज की सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक चुनौतियों को विस्तार से रखा। इस मुलाकात में पसमांदा समाज को मुख्यधारा से जोड़ने, शिक्षा और रोजगार के अवसर बढ़ाने तथा सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने इन बातों को गंभीरता से सुनते हुए सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया। यह मुलाकात पसमांदा समाज के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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