28/09/2024
एक दिन एक बच्चा अपने पिता से सवाल करता है, " पापा हम दोनों में से ज्यादा काबिल कौन है , मै या आप?"
यह सुन पिता जवाब देते हैं, "मैं हूँ, क्योंकि एक तो मैं तुम्हारा बाप हूं और दूसरा तुमसे उम्र में बड़ा हूं और मेरा तर्जुबा भी तुम से ज्यादा है!"
बच्चा कुछ देर सोचने के बाद फिर एक सवाल पूछता है," फिर तो आपको पता ही होगा कि अमेरिका की खोज किसने की थी ?"
पिता जवाब देता है;" हां मुझे पता है, कोलंबस ने की थी !"
यह सुन बच्चा तुरंत जवाब देता है, " कोलम्बस के बाप ने क्यों नही की , उसका तजुर्बा भी तो कोलम्बस से ज्यादा ही रहा होगा ना पिताजी ?"
22/09/2024
एक आदमी था। वो लंबी लंबी हांकने का बड़ा शौक़ीन था। जब भी कोई कहानी सुनाता तो उसे बढ़ा चढ़ाकर ऐसा बना देता कि अक़लमंद तो क्या जाहिलों, मूर्खों को भी उसकी बातों पर यकीन न होता।
एक दिन उसके एक शुभचिंतक ने समझाया कि यार अपने हाथ हल्के रखना चाहिए। इतनी लंबी हांकते हो कि मूर्खों को भी तुम्हारी बातों पे शक होने लगता है। लोग हँसते हैं। तुम्हारा मज़ाक उड़ाते हैं। अब सम्भल जाओ ।
उस आदमी ने कहा... ठीक हैं। अगली बार जब मैं कोई कहानी या क़िस्सा शुरू करूँ और तुम्हें लगे कि लंबी हांक रहा हूँ तो बस थोड़ी सी खांस लेना। मैं समझ जाऊँगा ।
उसके शुभचिंतक ने कहा.....ठीक है ।
एक दिन वो आदमी दोस्तों की महफ़िल में बैठे एक क़िस्सा सुनाने लगा कि मैं एक बार किसी भयानक जंगल में जा रहा था। तभी अचानक मैंने देखा कि वहां एक बहुत बड़ा सांप था। मुझे लगता है कि सांप लगभग 140 फीट लंबा होगा ।
उसका हितैषी उसके इस बात पर थोड़ा खांसा। वह आदमी कुछ हडबडाया लेकिन उसने कहना जारी रखा.... मैंने सोचा कि इतना बड़ा कोई सांप नहीं हो सकता, मैंने सोचा चलो क़रीब जाकर देखना चाहिए , तो मैं क़रीब गया और देखा, अनुमान लगाया कि कोई लगभग वो 110 फीट का होगा ।
उसका दोस्त फिर से खांसा।
उस आदमी ने नाराज़गी से उसे देखा और कहानी जारी रखी कि 110 फीट बहुत ज्यादा है। मैंने सोचा कि केवल सांप को मारकर ही वास्तविक लंबाई का पता लग सकता है।जब मैंने सांप को मारा और मुर्दे को क़रीब से देखा तो ख्याल आया कि 90 फीट कहीं नहीं गया।
दोस्त उसकी बात पर फिर जोर जोर से खांस रहा था।
अब उस आदमी ने बेचैनी से करवटें बदल लीं और कहा, "अरे दोस्तों! " बात को परखने के लिए ज़रूरी था कि मैं इसकी लंबाई नापता। मरा सांप मेरे सामने था। मैंने अपने अनुमान की सच्चाई को परखने के लिए जब नापा तो वो पूरे 70 फीट का निकला।
उसका दोस्त इस पर फ़िर से जोर जोर से खांसने लगा। तो उस आदमी ने पलटकर कहा...."अबे यार, अब क्या फायदा… अब तो नाप लिया गया है , तू अब अगर खांसते खांसते मर भी जाए तो भी सांप की लंबाई कम नहीं होगी । "
22/09/2024
एक परेशान पति डॉक्टर के पास गया और कहा कि डॉक्टर साहब मेरी पत्नी बहरी हो गयी है,मैं कमरे से आवाज़ लगाते रहता हूँ पर वो सुन नहीं पाती है ..!!
डॉक्टर – आप उन्हें यहाँ ले आइये !
पति : नहीं डॉक्टर साहब,मै उससे बहुत प्यार करता हूं और इस बारे में उसे कुछ भी नहीं बताना चाहता,आप कोई दवा दे दीजिये, जिसे मैं उसे बिना कुछ कहे खिला दू…
डॉक्टर : ठीक है, पहले आप एक टेस्ट कीजिये …आप 50 फ़ीट दूर से पूछिये – HOW ARE YOU…
यदि वो नहीं सुन पाये तो फिर 30 फ़ीट दूर से पूछिये…
फिर भी नहीं सुन पाये तो 20 फ़ीट …. फिर 10 फ़ीट…
तब आप आ के मुझसे मिलियेगा, उस हिसाब से मैं उनके लिए दवाईयां लिखूंगा..!!
पति खुश होकर रात को घर पहुँचता है,पत्नी किचन में खाना बना रही होती है…
पति 50 फ़ीट से पूछता है…मैडम, आज खाने में क्या बना रही हो ????
पत्नी कोई जवाब नहीं देती…
30 फ़ीट से,डार्लिंग आज खाने में क्या बना है ????
फ़िर कोई जवाब नही मिलता….
20 फ़ीट से,देवी जी,आज खाने में क्या बना है ????
नो रिस्पॉन्स…
10 फ़ीट से,सुनिये जी,आज खाने में क्या है ????
फिर भी कोई जवाब नहीं तो पति एकदम से पीछे नज़दीक आकर उससे पूछता है…..आज खाने में क्या है ?????
तब बेचारी पत्नी पलट कर कहती है…….अबे बहरे सुल्तान......5 बार तो गला फाड़ फाड़ कर,चीख़ चीख़ कर बता चुकी हूँ …...आलू के पराठे बनाये हैं..तुम अपने कान का कुछ करते क्यों नहीं........।
अक्सर कमियां हममें होती हैं और हम ढूँढते हैं दूसरे में...............।
17/09/2024
एक गरीब आदमी की भगवान के प्रति इतनी बड़ी आस्था थी कि वो बेचारा प्रतिदिन सादे कागज़ पर भगवान के नाम एक संदेश लिखता..." हे...प्रभु, मुझे पचास हजार रुपए भेज दो,मैं ग़रीब हूँ,आपका बहुत एहसान होगा " ।
संदेश लिखने के बाद वो आदमी प्रतिदिन उस काग़ज़ को एक गुब्बारे में बांध कर आसमान में उड़ा देता ये सोचकर कि उसका संदेश एक न एक दिन भगवान के पास जरूर पहुंच जाएगा ।
वो गुब्बारा अक्सर एक पुलिस थाने के ऊपर से गुजरता और पुलिसकर्मी उस गुब्बारे को पकड़ कर वो पर्ची पढ़ते और उस आदमी के भोलेपन पर ख़ूब हंसते।
एक दिन थाने के सारे पुलिसकर्मियों ने मिलकर सोचा कि क्यों ना उस गरीब आदमी की कुछ मदद की जाए क्योंकि वो बेचारा बड़ी गहरी आस्था से रोज़ भगवान से उम्मीद के साथ मदद मांगता है।
उस ग़रीब आदमी की मदद करने की भावना से पुलिसकर्मियों ने मिलकर पच्चीस हजार रुपए जमा किये और उस व्यक्ति को उसके घर ले जाकर दे आये।
दूसरे दिन फ़िर जब उन पुलिसकर्मियों ने गुब्बारा उड़ता देखा तो उन्हें बेहद आश्चर्य हुआ कि फिर वो आदमी ऐसा क्यों कर रहा है जबकि उसे रुपए तो मिल चुके हैं ??
इस बार पुलिसकर्मियों ने बड़ी उत्सुकता से गुब्बारा रोक कर पर्ची पढ़ी तो उनके होश उड़ गए क्योंकि उसमें लिखा था..." प्रभु.. आपके द्वारा भेजे गए पैसे तो मिल गए, लेकिन आपको पुलिसवालों के हाथों रुपए नहीं भेजने चाहिए थे...साले पच्चीस हजार खा गए "।
16/09/2024
एक स्कूल में निरीक्षण के लिए एक साहब आए।
वे एक हिंदी कक्षा में गए और शिक्षिका से पूछने लगे “अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारना” इस मुहावरे का वाक्य प्रयोग करके अर्थ बताओ।
कुछ सोचकर शिक्षिका बड़े आत्मविश्वास से बोली- “मैंने अपनी बेटी को दसवीं कक्षा में मोबाइल दिला कर अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली।“
साहब बोले “यह तो जानबूझ कर कुएं में कूदने जैसी बात हुई, पैरों पर कुल्हाड़ी मारने वाली नहीं। कोई और वाक्य प्रयोग बताओ।”
शिक्षिका कुछ क्षण सोचते हुए, “रमेश ने अपनी पत्नी को अपना क्रेडिट कार्ड देकर अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली।”
साहब फिर बोले- “इसे तो ‘मजबूरी का नाम महात्मा गांधी’ कहेंगे । पत्नी को क्रेडिट कार्ड देना पति की न टाली जा सकने वाली मजबूरी होती है, कोई सटीक वाक्य प्रयोग बताओ।”
बहुत सोच विचार कर शिक्षिका को अपने पति की कहीं एक बात याद आई वह बोली- “कल ही मेरे पति कह रहे थे कि तुम्हारी सुंदरता पर रीझकर मैं तुमसे शादी कर बैठा और अपने पैरों पर खुद ही कुल्हाड़ी मार ली।”
साहब अब जोर जोर से हंसने लगे और बोले, “यह तो ‘आंख का अंधा नाम नैनसुख’ का उदाहरण है।”
अब तो शिक्षिका का भी पारा चढ़ गया और वह गुस्से से बोली – “इस स्कूल में शिक्षक बनकर मैंने अपने पैरों पर कुल्हाडी मार ली।”
साहब फिर बोले “यह तो ‘नाच न जाने आंगन टेढ़ा’ वाली बात हुई, इसमें कुल्हाडी कहाँ है?”
अब तो शिक्षिका का भी सिर घूम गया और वह गुस्से से फट पडी- “मेरे साथ ज्यादा तीन-पाँच मत करो वरना तुम्हारी राई का ऐसा पहाड़ बनाऊंगी कि दिन में तारे नज़र आ जाएंगे। चुपचाप यहां से नौ दो ग्यारह हो जाओ वरना आज…, अभी…, इसी जगह, सांप भी मरेगा और लाठी भी टूटेगी...।”
उसका रौद्ररूप देख साहब घबरा गए... औऱ चीख़ उठे “ओह, लगता है आज मैंने गलती से अपने पैरों पर खुद ही कुल्हाड़ी मार ली”.......!
15/09/2024
प्रशांत महासागर से हज़ारों फीट की ऊंचाई पर एक एयरबस तकरीबन तीन सौ यात्रियों के साथ उड़ रही थी।
तभी अचानक दो फ़ाइटर जेट आसमान में दिखाई दिए और इस यात्री जहाज़ की तरफ उड़ने लगे।
उसके कुछ पल बाद जब उनका आपस में रेडियो संपर्क हुआ तो लड़ाकू विमान के एक युवा पायलट ने एयरबस के बुजुर्ग पायलट से कहा, 'कितनी बोरिंग फ्लाइट है तुम्हारी। देखो, मैं आपकी इस उड़ान को कैसे दिलचस्प बना देता हूँ ??
यह कहने के बाद, उसने अचानक अपनी गति पकड़ ली और एयरबस के चारों ओर तब तक कलाबाज़ियाँ दिखाता रहा,जब तक समुद्र का स्तर निकट नहीं आया, वहां से वह ऊपर गया, साउंड बैरियर को तोड़ दिया, मुड़ गया और एयरबस की तरफ आ गया।
अब उत्तेजित स्वर में उसने फिर पूछा ....कैसा लगा?
एयरबस पायलट ने कहा कि यह कुछ भी नहीं है। अब आप देखिए मैं क्या दिखाता हूं ??
दोनों फ़ाइटर देखने लगे।
समय बीत रहा था लेकिन विमान सीधा उड़ रहा था। काफी समय बाद एयरबस के सीनियर पायलट का एक रेडियो संदेश आया जिसमें पूछा गया कि आपको कैसा लगा?
युवा फाइटर पायलट ने कहा, "लेकिन बॉस, आपने क्या किया है?" ?
एयरबस के पायलट ने कहा, सबसे पहले मैं बाथरूम गया उसके बाद रास्ते में कुछ लोगों से बातचीत हुई। फिर मैंने शांति से खड़े होकर चॉकलेट कॉफी पी और अब मैं वापस आ गया हूं। क्या आप यह कर सकते हैं ? अगर दम है तो ये करके दिखाओ ??
दोनों फाइटर खामोश हो गए ।
.......
नौजवानी का दौर बस ऐसा ही होता है। दूसरों की झूठी वाह वाही के लिए हमेशा तमाशा दिखाते रहने से अक्सर ख़ुद का ही तमाशा बन जाता है औऱ जब जीवन में वक़्त निकल जाता है, तब पता चलता है कि लोगों को प्रभावित करने की कोशिश में ख़ुद का कितना कुछ बर्बाद हो चुका है ।
दरअसल दिखावे की ज़िंदगी बस पछतावे की ज़िंदगी बन कर रह जाती है.....!!
14/09/2024
लगातार कानों को चीरती हुई एम्बुलेंस की सायरनों के बीच अचानक तेज़ी से एक सरकारी अस्पताल के ट्रामा सेंटर के माइक से एक आवाज़ गूंजने लगी......" कृपया ध्यान देंगे , इमरजेंसी बेड नम्बर तीन के मरीज़ के साथ जो भी अटेंडेंट हैं वो कृपया तुरंत गेट पर पहुँचे " ।
तक़रीबन दो मिनट बाद माइक से फ़िर आवाज़ गूंजी..." कृपया ध्यान देंगे , इमरजेंसी बेड नम्बर तीन के मरीज़ के साथ उनके जो भी रिश्तेदार हैं ,वो बिना विलम्ब किए तुरंत गेट पर पहुंचे "।
कुछ देर के अंतराल के बाद माइक से ये आवाज़ बार बार गूंजने लगी औऱ फ़िर उसके बाद माइक ने लंबी ख़ामोशी साध ली ।
तक़रीबन पंद्रह मिनट के बाद एक युवक इमरजेंसी गेट पर पंहुचा औऱ वहाँ मौजूद सिक्युरिटी गार्ड से बोला कि " वो बेड नम्बर तीन के मरीज़ के साथ है औऱ उसे बार बार माइक से अनाउंस कर क्यों बुलाया जा रहा था "??
गार्ड ने जब अंदर जाकर ख़बर दी तो उस इमरजेंसी वार्ड में अपनी ड्यूटी पर तैनात एक नर्स दनदनाती हुई बाहर आई औऱ सबसे पहले उसने भड़कते हुए उस युवक को जबरदस्त रूप से फटकार लगाई..... " बेवकूफ इंसान , तुम्हारा बाप मर रहा है और तुम उसे छोड़कर लापता हो ? जल्दी से ब्लड बैंक भागो औऱ अपना दो यूनिट ब्लड देकर किसी तरह अपने बाप के लिए तत्काल दो यूनिट ओ निगेटिव ब्लड की व्यवस्था करो...जल्दी " ।
वो युवक सरसराता हुआ आंधियों की रफ़्तार से भागा औऱ फ़िर बिना वक़्त गवाएं जितनी जल्दी वापस आ सकता था , ब्लड लेकर लौट आया ।
ब्लड का थैला नर्स की हाथों में पकड़ाते हुए उस वक़्त वो सिर्फ़ इतना ही बोल सका...".सॉरी सिस्टम , अगर कुछ विलम्ब हुआ हो तो , लेकिन अभी उनकी हालत कैसी है " ??
नर्स ने जल्दबाजी दिखाते हुए कहा..." उनकी हालत नाज़ुक बनी हुई है ,बहुत खून बह चुका है ,फ़िलहाल कुछ कहा नहीं जा सकता "।
उसके बाद नर्स ने सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से ज़ख्मी एक बुजुर्ग मरीज़ को तुरंत ब्लड चढ़ाना शुरू कर दिया ।
कुछ देर बाद वो नर्स फ़िर बाहर आई औऱ उस युवक को अंदर अपने साथ वार्ड में ले गई...." देखिए चचा ,आपका बेटा आ गया है ,आप उसके लिए बुदबुदा रहे थे न " ....उसने धीरे से ऑक्सीजन मास्क लगे उस बूढ़े आदमी से कहा ।
बुजुर्ग की आंखें हिलने से पहले नर्स को कई बार अपने इन्ही शब्दों को दोहराना पड़ा।
सड़क दुर्घटना के बाद हुए गंभीर ज़ख्म एवं दर्द के कारण भारी बेहोशी की हालत के बावजूद हल्की आँखे हिलाकर किसी तरह उन्होंने उस युवक को धुंधले दृष्टि से अपने बिस्तर के पास खड़े होने का आभास पाया ।
अब उस युवक ने बिना देर किए अपना हाथ उनकी तरफ बढ़ा दिया।
उसके बाद फ़िर उस युवक ने अपने प्यार और स्नेह को बुजुर्ग मरीज़ तक पहुंचाने के लिए उनके बेहद क़रीब जाकर ध्यानपूर्वक उन्हें एक भावनात्मक स्पर्श देने का भरपूर प्रयास किया।
इस प्यार भरे लम्हे के बाद युवक ने उन बूढ़े हाथों को अपनी सख्त उंगलियों में, प्यार से कसकर थामा और " मैं आपके साथ हूँ , आपके पास ही हूँ ", का उन्हें एक गहरा अहसास दिलाया।
इन मार्मिक नाज़ुक क्षणों को देखते हुए नर्स ने उस युवक को मरीज़ के बेड के एक हिस्से में बैठने का इशारा किया लेकिन वो युवक खड़ा रहा ।
सारी रात वो युवक वहां, खराब रोशनी वाले इमरजेंसी वार्ड में जमा रहा। बस बुजुर्ग का हाथ पकड़े, उन्हें स्नेह, प्यार और ताकत के अनेकों शब्द बोलते, संबल देते साथ ही एक गहरे प्रेम का एहसास ।
बीच- बीच में, नर्स ने उस युवक से आग्रह किया कि "आप भी थोड़ी देर बैठ जाइए " लेकिन उसने शालीनता से इनकार कर दिया।
जब भी नर्स वार्ड में आयी हर बार वह युवक उसके आने से बेखबर बस यूँ ही बुजुर्ग का हाथ थामे खड़ा रहा।
ऑक्सीजन टैंक की गड़गड़ाहट, रात के स्टाफ सदस्यों की फुसफुसाहट का आदान-प्रदान, अन्य रोगियों के रोने और कराहने की आवाजें, कुछ भी उसकी एकाग्रता को तोड़ नही पाई थी।
नर्स ने उस युवक को हरदम, बस बुजुर्ग को कुछ कोमल मीठे शब्द कहते सुना ,दुलार करते देखा ।
गंभीर रूप से ज़ख्मी वो बुजुर्ग उस वक़्त किसी से भी कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं था लेकिन रात भर उस युवक ने उनकी हाथों को कसकर पकड़े रखा।
लेकिन डॉक्टरों के लाख प्रयासों के बावजूद भोर होते ही बुजुर्ग का अंत हो गया।
उसके बाद युवक ने उन बुजुर्ग के बेजान हाथों को छोड़ दिया और नर्स को कुछ बताने के लिये उसे वार्ड के चारो तरफ खोजने लगा ।
अंततः जब नर्स वापस लौट आई और वो जबतक उस युवक से अपनी सहानुभूति जताने के लिये कुछ कह पाती , उससे पहले ही युवक ने उसे रोककर पूछा "कौन थे वे बुजुर्ग आदमी ?"
नर्स चौंक गई " क्या वे आपके पिता नहीं थे ? "
"नहीं, वे नहीं थे" युवक ने उत्तर दिया। " मैंने उन्हें अपने जीवन में पहली बार देखा है , दरअसल कल माइक में बार बार अनाउंस होने के बाद भी जब उनका कोई रिस्तेदार इमरजेंसी गेट पर नहीं पहुंचा तो वहीं गेट के पास खड़ा मैं समझ गया कि इस मरीज़ का फ़िलहाल यहाँ कोई नहीं है शायद , औऱ फ़िर अंत में मैंने ही ये जिम्मेदारी उठाने की ठान ली ।"
"तो जब मैं आपको उनके पास ले गयी थी तो आपने कुछ कहा क्यों नहीं ?" नर्स ने जानना चाहा ।
" मैं उसी समय उन्हें देखकर समझ गया था कि दुर्घटना में बेहद गंभीर रूप से ज़ख्मी उस बुजुर्ग को इस वक़्त शायद अपने बेटे की ज़रूरत है और उनका बेटा यहाँ नहीं है तो मैंने ख़ुद को उनके बेटे के रूप में समर्पित करने का दृढ़ निश्चय कर लिया ।" युवक ने अपनी बात कही ।
नर्स बेहद आश्चर्य औऱ उलझन में सब सुनती रही ।
"तो फिर इस घायल बुजुर्ग को अस्पताल में लाया कौन ?" नर्स आश्चर्य भरी भाव भंगिमा में बोल उठी ।
" हो सकता है सिस्टर कि इस बुजुर्ग को सड़क पर ज़ख्मी अवस्था में देख किसी रहमदिल इंसान ने उन्हें यहाँ भर्ती करा दिया हो औऱ फ़िर यहाँ से चला गया हो "....युवक ने आशंका व्यक्त करते हुए अनुमान लगाया ।
" लेकिन फ़िर आप यहाँ कैसे "...?? नर्स ने आश्चर्य से प्रश्न किया ।
" जी सिस्टर , दरअसल पास के ही स्त्री प्रसूति वार्ड में मेरी गर्ववती पत्नी भर्ती है , वो माँ बनने वाली है , बस उसी को लेकर मैं यहाँ कल से हूँ , फ़िलहाल मेरी पत्नी की देखभाल के लिए मेरी माँ वहाँ मौजूद है " युवक ने कहा ।
" इसका मतलब कि आपने किसी अजनबी के लिए अपना खून दिया औऱ पूरी रात उसके लिए खडे रहे...." नर्स ने फ़िर आश्चर्य भरी नज़रों से उस युवक की तरह देखा ।
युवक बिलकुल चुप रहा ।
दोनों कुछ पलों तक बिलकुल ख़ामोश खड़े एक दूसरे को देखते रहे क्योंकि दोनों को ये बखूबी एहसास था कि एक मरते हुए आदमी की जिंदगी के लिए उस वक़्त उसके लिए अपने बेटे के हाथ से ज्यादा आश्वस्त करने वाला कुछ नहीं हो सकता था।
कुछ देर की ख़ामोशी के बाद अपनी चुप्पी तोड़ती हुई डबडबाई आँखों से नर्स ने युवक को शुक्रिया कहा ।
" इसमें शुक्रिया कहने वाली कोई बात नहीं सिस्टर , हम तो फ़ौजी आदमी हैं , हर वक़्त अपने फ़र्ज़ के लिए समर्पित रहते हैं औऱ यहाँ भी हमनें अपनी फ़र्ज़ निभाई है , ये औऱ बात है कि समय समय पर हमारा सिर्फ़ जंग का मैदान बदलते रहता है "....!! ......नर्स से इतना कहकर युवक वहाँ से निकल गया ।
13/09/2024
एक बार एक हवाई जहाज़ में तकनीकी ख़राबी के कारण दस डॉक्टर ,पाँच इंजीनियर और एक शिक्षक आपातकालीन स्थिति में रस्सी से लटके हुए थे ।
कुछ देर बाद पायलट ने कहा...रस्सी पर वज़न बढ़ रहा है इसलिए किसी एक को सबके लिए अपनी कुर्बानी देते हुए रस्सी छोड़ नीचे कूदना होगा,जल्दी।
लेकिन कोई रस्सी छोड़ नीचे कूदने के लिए तैयार नहीं था,सबको अपनी जान प्यारी थी।साथ ही सबको अपने परिवार की भी चिंता सता रही थी कि उनके नहीं रहने पर उनका क्या होगा??
पायलट ने फ़िर कहा.. वज़न ज़्यादा है,जल्दी फैसला करो कि कौन आदमी रस्सी को छोड़ेगा नहीं तो सभी एक साथ ऊपर जाएंगे ?
पायलट बार बार कहता रहा लेकिन किसी ने कोई उत्तर नहीं दिया बल्कि उल्टे सब के सब दहाड़ मारकर रोने लगे।
अंत में पूरी परिस्थिति को भाप एकलौते शिक्षक महोदय ने बेहद गंभीर मन से कहा....सबके लिए ये कुर्बानी आज हम देंगे क्योंकि हम शिक्षक हैं और समाज को सुरक्षित रास्ता दिखाने के साथ युग निर्माण सदियों से हमारा धर्म रहा है..... तो बजाओ तालियां....!!
सभी डॉक्टर और इंजीनियर मन ही मन खुश होकर तालियां बजाने लगे ।
वजन खुद ही कम हो गया।
इसलिए जीवन में चाहे डॉक्टर बनो या इंजीनियर , लेकिन ये क़भी मत भूलना कि गुरू आखिर गुरू होता है...!!
12/09/2024
एक फैक्ट्री में उसके मालिक ने अपने कर्मचारियों को प्रेरणा देने के लिए दीवारों पर जगह-जगह "कल करे सो आज कर, आज करे सो अब" लिखवा दिया ।
एक हफ्ते बाद जब उसने मैनेजर से इस प्रेरक वाक्य के असर के बारे में पूछा तो मैनेजर ने बताया- "बहुत असर हुआ है सर.... एकाउन्टेंट 5 लाख रुपये लेकर भाग गया है, जूनियर मैनेजर महिला सेक्रेटरी को लेकर चम्पत हो गया है, तीन क्लर्क वेतन बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, मजदूर हड़ताल पर चले गए हैं और चपरासियों ने दूसरी नौकरी तलाश कर ली है !"
11/09/2024
एक मेजर साहब के नेतृत्व में बीस जवानों की एक टुकड़ी हिमालय के अपने रास्ते पर थी ।
बेतहाशा ठण्ड में मेजर ने सोचा की अगर उन्हें यहाँ एक कप चाय मिल जाती तो आगे बढ़ने की ताकत आ जाती ।
लेकिन रात का समय था आस पास कोई बस्ती भी नहीं थी।
लगभग एक घंटे की चढ़ाई के पश्चात् उन्हें एक जर्जर चाय की दुकान दिखाई दी ।
लेकिन अफ़सोस उस पर ताला लगा था ।
भूख और थकान की तीव्रता के चलते जवानों के आग्रह पर मेजर साहब दुकान का ताला तुड़वाने को राज़ी हो गये ।
ताला तोडा गया, तो अंदर उन्हें चाय बनाने का सभी सामान मिल गया ।
जवानों ने चाय बनाई साथ वहां रखे बिस्किट आदि खाकर खुद को राहत दी । थकान से उबरने के पश्चात् सभी आगे बढ़ने की तैयारी करने लगे , लेकिन मेजर साहब को यूँ चोरो की तरह दुकान का ताला तोड़ने के कारण आत्मग्लानि हो रही थी ।
उन्होंने अपने पर्स में से दो हज़ार का एक नोट निकाला और चीनी के डब्बे के नीचे दबाकर रख दिया तथा दुकान का शटर ठीक से बंद करवाकर आगे बढ़ गए ।
चार महीने की समाप्ति पर इस टुकड़ी के सभी बीस जवान सकुशल अपने मेजर के नेतृत्व में उसी रास्ते से वापस आ रहे थे ।
रास्ते में उसी चाय की दुकान को खुला देखकर वहां सभी विश्राम करने के लिए रुक गए ।
उस दुकान का मालिक एक बूढ़ा चाय वाला था जो एक साथ इतने ग्राहक देखकर खुश हो गया और उनके लिए चाय बनाने लगा ।
चाय की चुस्कियों और बिस्कुटों के बीच मेजर साहब चाय वाले से उसके जीवन के अनुभव पूछने लगे ,खासतौर पर
इतने बीहड़ में दूकान चलाने के बारे में ।
बुजुर्ग व्यक्ति उन्हें कईं कहानियां सुनाता रहा और साथ ही भगवान का आभार प्रकट करता रहा ।
तभी एक जवान बोला " बाबा आप भगवान को इतना मानते हो , अगर भगवान सच में होता तो फिर उसने तुम्हें इतने बुरे हाल में क्यों रखा हुआ है" ।
बाबा बोला "नहीं साहब ऐसा नहीं कहते भगवान के बारे में, भगवान् तो है और सच में है .... मैंने देखा है"
आखरी वाक्य सुनकर सभी जवान कोतुहल से बुजुर्ग की ओर देखने लगे ।
बाबा बोला "साहब मै बहुत मुसीबत में था , एक दिन मेरे इकलौते बेटे को आतंकवादियों ने पकड़ लिया । उन्होंने उसे बहुत मारा पिटा, लेकिन उसके पास कोई जानकारी नहीं थी, इसलिए उन्होंने उसे मार पीट कर छोड़ दिया"।
"मैं दुकान बंद करके उसे हॉस्पिटल ले गया ।मै बहुत तंगी में था साहब और आतंकवादियों के डर से किसी ने उधार भी नहीं दिया" ।
"मेरे पास दवाइयों के पैसे भी नहीं थे और मुझे कोई उम्मीद भी नज़र नहीं आती थी । उस रात मै बहुत रोया और मैंने भगवान से प्रार्थना की और मदद मांगी "और साहब ... उस रात भगवान मेरी दुकान में खुद आए"
"मै सुबह अपनी दुकान पर पहुंचा ताला टूटा देखकर मुझे लगा कि मेरे पास जो कुछ भी थोड़ा बहुत था वो भी सब लुट गया" ।
" मै दुकान में घुसा तो देखा दो हज़ार रूपए का एक नोट, चीनी के डब्बे के नीचे भगवान ने मेरे लिए रखा हुआ है" ।
"साहब ..... उस दिन दो हज़ार के नोट की कीमत मेरे लिए क्या थी, शायद मै बयान न कर पाऊं ...
लेकिन भगवान् है साहब ... भगवान् तो है" ।
बुजुर्ग फिर अपने आप में बड़बड़ाया* ....
भगवान् के होने का आत्मविश्वास उसकी आँखों में साफ़ चमक रहा था ।
यह सुनकर वहां सन्नाटा छा गया
बीस जोड़ी आँखे मेजर की तरफ एकटक देख रही थी जिसकी आंख में उन्हें अपने लिए स्पष्ट आदेश था " खामोश रहो " ।
मेजर साहब उठे, चाय का बिल जमा किया और बूढ़े चाय वाले को गले लगाते हुए बोले "हाँ बाबा मै जानता हूँ भगवान् है.... और तुम्हारी चाय भी शानदार थी" ।
और उस दिन उन बीस जोड़ी आँखों ने पहली बार मेजर की आँखों में चमकते हुए पानी के दुर्लभ दृश्य को देखा और साथ ही ये अनुभव किया कि भगवान तुम्हें कब किसकी मदद के लिए किसका भगवान बनाकर कहाँ भेज देंगे, ये खुद तुम भी नहीं जानते....!!
10/09/2024
एक बहुत ग़रीब लकड़हारा था।
वह प्रतिदिन जंगल में जाकर लकड़ी काटता और उसे गांव ले जाकर बेचता था। लकड़ी काटना और बेचना ही उसका काम था। इसी से उसका घर चलता था।
लकड़हारा जंगल से जब लकड़ी काट कर चलता, तो रास्ते में एक राजा का महल पड़ता था।
राजा महल की छत पर खड़ा होकर रोज़ देखता कि सिर पर लकड़ी उठाए लकड़हारा चला जा रहा है।
रोज लकड़हारे को रोज देखते हुए राजा को उस पर दया आने लगी थी औऱ वह सोचने लगा कि बेचारा कितनी मेहनत करता है। सारा दिन लकड़ियां काटता है और बेचता है।
लकड़हारा भी राजा को दूर महल की छत पर देखता, सोचता राजा कितना अच्छा है,वो रोज़ उसकी ओर दया व करुणा से देखता है।
इस तरह मन की तरंगों से दोनों के बीच एक रिश्ता बन गया था। राजा लकड़हारे की ओर देख कर मुस्कुराता। लकड़हारा राजा की ओर देख कर मुस्कुराता।
दोनों मन ही मन एक दूसरे के प्रति प्रेम व सम्मान रखते ।
दिन गुज़रते रहे।
एक दिन लकड़हारे के हाथ चंदन की लकड़ी लग गई। वो उसे बेचने गांव की ओर चला।
अब चंदन की लकड़ी भला कौन खरीदता? इतनी महंगी लकड़ी।
बेचारा लकड़हारा सिर पर लकड़ी का गट्ठर उठाए रोज़ गांव की ओर जाता।
राजा उसे महल की छत से देखता।
लकड़हारा लकड़ी नहीं बिकने से उदास था।
अचानक उसके मन में ख्याल आया कि अगर राजा मर जाए तो उसे जलाने के लिए अवश्य ही चंदन की लकड़ी की ज़रूरत पड़ेगी।अब लकड़हारा मन ही मन राजा के मरने की दुआ करने लगा।
लकड़हारा रोज़ जंगल से लौटते हुए राजा की ओर देखता, मन ही मन सोचता कि काश राजा की मृत्यु हो जाती ।
इधर लकड़हारे का मन बदला, उधर राजा का भी मन परिवर्तित हो गया ।
राजा को अचानक लगने लगा कि वो तो राजा है। उसका इतना बड़ा महल है। ये गरीब लकड़हारा रोज़-रोज़ इस रास्ते से अपनी गरीबी प्रदर्शित करते हुए गुज़रता है। इसे कोई हक नहीं कि वो इधर से आए-जाए।इससे राज्य की बदनामी हो रही है।
कल तक जिस लकड़हारे को देख कर राजा का मन खुश होता था, आज उसे देख कर उसके मन में नफरत होने लगी ।
राजा ने सिपाहियों को बुलाया और आदेश दिया कि इस लकड़हारे को पकड़ कर जेल में बंद कर दो।
अब लकड़हारा जेल में बंद हो गया।
राजा इतने से ही नहीं माना। उसने उस लकड़हारे को मौत की सजा भी सुना दी।
महामंत्री को जब ये बात पता चली तो उसे बहुत हैरानी हुई। राजा ऐसे तो किसी को सज़ा नहीं सुनाते। फिर आज क्या बात हुई?
महामंत्री जेल में लकड़हारे से मिलने पहुंचे और उन्होंने उससे पूरी कहानी जाननी चाही।
लकड़हारा खुद हैरान था कि ऐसा क्यों हुआ ? उसने महामंत्री को पूरी बात बताई कि वो रोज़ महल के सामने से गुज़रता था, राजा उसे देख कर मुस्कुराता था। दोनों के बीच मन ही मन प्रेम का रिश्ता था। पर जिस दिन उसके हाथ चंदन की लकड़ी लगी, उस दिन पहली बार उसके मन में विचार आया कि काश राजा मर जाए और उसे जलाने के लिए उससे चंदन की लकड़ी खरीदी जाए।
बस उसी दिन से राजा का भी मन बदल गया।
महामंत्री समझदार था। वो समझ गया कि लकड़हारे के मन में जो भाव राजा के लिए जागा, ठीक वही भाव राजा के मन में भी लकड़हारे के लिए जाग गया है। दिल से दिल का ये रिश्ता भी अजीब होता है। जब तक लकड़हारे के मन में राजा के प्रति ऐसे विचार नहीं आए थे, उधर से भी प्रेम टपक रहा था। जिस दिन लकड़हारे के मन में राजा के मरने की बात आई उस दिन राजा को भी उससे नफरत होने लगी ।
महामंत्री ने राजा को पूरी बात विस्तार से बताई औऱ साथ ही साथ उसने लकड़हारे को भी अपने विचार औऱ सोच राजा के प्रति शुद्ध रखने की हिदायत दी।राजा ने पूरी बात समझ लकड़हारे को माफ़ कर दिया औऱ फ़िर दोनों की भावना पहले जैसी हो गई।
हम जिसके प्रति अपने मन में जैसी भावना रखते हैं ,हमारे प्रति भी उस व्यक्ति के मन मे बिलकुल वैसी ही भावना पनप जाती है।दिल से दिल का रिश्ता भी बहुत अज़ीब होता है।जीवन में अपना मन,भावना औऱ विचार बिलकुल शुद्ध व पवित्र रखना बेहद ज़रूरी है।
09/09/2024
बाज़ार में आमलोगों का पैसा कैसे डूबता है औऱ भोलेभाले निरीह लोग कैसे जालसाजी के शिकार होते हैं....... ??
एक बार एक आदमी ने
गाँव वालों से
कहा कि वो 100 रु. में एक बन्दर 🐒
खरीदेगा,
ये सुनकर सभी गाँव वाले
नजदीकी जंगल की ओर
दौड़ पड़े
और वहां से बन्दर पकड़ पकड़ कर 100
रु. में उस आदमी को बेचने लगे .......
कुछ दिन बाद ये सिलसिला कम
हो गया और
लोगों की इस बात में
दिलचस्पी कम
हो गयी .......
फिर उस आदमी ने
कहा कि वो एक एक 🐒बन्दर के
लिए 200 रु. देगा ,
ये सुनकर लोग फिर बन्दर 🐒 पकड़ने में
लग गये।
लेकिन कुछ दिन बाद
मामला फिर
ठंडा हो गया ....
अब उस आदमी ने
कहा कि वो बंदरों के लिए
500 रु. देगा ,
लेकिन क्यूंकि उसे शहर
जाना था, उसने इस काम के
लिए एक असिस्टेंट नियुक्त कर
दिया ........
500 रु. सुनकर गाँव वाले बदहवास
हो गए ,
लेकिन पहले ही लगभग सारे बन्दर
पकड़े जा चुके थे
इसलिए उन्हें कोई हाथ
नहीं लगा ......।
तब उस
आदमी का असिस्टेंट उनसे आकर
कहता है .....
"आप लोग चाहें तो सर के पिंजरे में
से 400 -400 रु. में बन्दर 🐒 खरीद सकते हैं ,
जब सर आ जाएँ तो 500-500 में बेच
दीजियेगा।"
गाँव वालों को ये प्रस्ताव भा गया और उन्होंने (100-200 रु. में बेचे हुए) सारे बन्दर 🐒 400 - 400 रु. में खरीद लिए ....।
अगले दिन न वहां कोई असिस्टेंट था और न ही कोई सर.।
बस बन्दर ही बन्दर...
🐒🐒🐒🐒🐒🐒🐒🐒🐒