25/04/2023
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25/04/2023
24/05/2022
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भारत चीन के साथ व्यापार बंद करता है तो क्या होगा !
यदि भारत सरकार तत्काल प्रभाव से चीन के साथ पूरी तरह व्यापार बंद कर देती है, तो निम्नलिखित प्रभाव होंगे |
१. निश्चय ही अल्पावधि में भारतीय अर्थव्यवस्था को घोर संकट का सामना करना पड़ेगा |
२. भारत का दवा उद्योग, सॉफ्टवेयर उद्योग की ही तरह भारत को भारी लाभ कमा कर देता हैं | हमारे देश में बनी दवायें विश्व के लगभग हर देश में निर्यात की जाती हैं | पर इन दवाओं के लिए बहुत सारा कच्चा माल चीन से आता है | इस कच्चे माल की आपूर्ति बंद होने से दवाइयां मँहगी हो जाएंगी |
३. भारत में मोबाइल व अन्य इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद एवं उनके कलपुर्जे चीन से ही आयात किये जाते हैं तुरंत आयात बंद होने से ये सभी बहुत महँगे हो जायेंगे |
४. ऐंसा बिल्कुल भी नहीं है की हम हर चीज चीन से मंगाते हैं और वो हमसे कुछ नहीं लेता समय -समय पर SAIL जैसी सरकारी कम्पनियाँ चीन को भारी मात्रा में इस्पात आदि निर्यात करती रहती हैं| हमारे इस्पात कारखानों में भिलाई , राउरकेला जैसे शहरों में लाखों लोग नौकरी करते हैं | उनपर कुछ असर तो पड़ेगा |
५. ओयो OYO जैसी कुछ कम्पनियाँ भारत की तरह चीन में भी काम करती हैं और वहां उनका बड़ा प्रभाव है इसके चीन में बंद होने से भारत को बहुत नुकसान होगा |
६. चीन ने भारत की कई बड़ी कंपनियों में भारी निवेश किया हुआ है, जैसे PAYTM में चीन की २५% हिस्सेदारी है| अधिकांश युवा उद्यमी जिन्हें भारतीय बैंको से पैसा नहीं मिल पाता उन्हें आसानी से चीन से फंडिंग मिल जाती है |
अगर हम और गहरायी में जाएँ तो कई ऐंसे सेक्टर नजर आयेंगे जिनसे ज्ञात होता है कि हमे नुकसान होगा | उदाहरण के लिये विमान सेवाएं आदि अधिकांश लघु उद्योग तो चीन पर ही निर्भर हैं| जैसे झाड़ू बनाने की मशीन, अगरबत्ती बनाने की मशीन आदि हमें चीन से ही मंगानी पड़ती है |
पर बंधुजनों सिर्फ और सिर्फ नुकसान होगा हम बरबाद हो जायेंगे ऐंसे विचार आप निराशावादियों के लिये छोड़ दीजिये |
विश्वास कीजिये ये एक अवसर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए ऐतिहासिक होगा | आवश्यक्ता ही अविष्कार की जननी होती है | यदि कोई वस्तु हमे बनी - बनाई उपलब्ध नहीं होती तो हम उसे स्वयं बनाते हैं |
१. मैं स्वयं एक शिक्षक हूँ मेरे संस्थान में विभिन्न महाविद्यालयों के छात्र समस्त भारत से आते हैं | हमारे विद्यार्थी जो रोबोट्स बनाते हैं उनमे एक IR sensor नामक पार्ट होता है हम चाहें तो ये पार्ट स्वयं बना सकते हैं बस अलग से थोड़ा ज्यादा समय देना पड़ता है तो हम स्वयं न बना कर उसे खरीद लेते हैं |
२. भारत में जब चीनी वस्तुएँ नहीं मिलेंगी तो भारतीय उद्यमी ही उन्हें बनाने लगेंगे| आरम्भ में कीमत ज्यादा होगी और गुणवत्ता कम होगी किन्तु समय के साथ गुणवत्ता ज्यादा और कीमत काम होगी| इससे भारत में लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा और देश का पैसा देश में ही रहेगा |
३. हम अपनी स्वयं की तकनीकें उन्नत कर सकते हैं जापान, इजराइल जैसे देश अपनी तकनीकें साझा करने के लिए उत्सुक हैं |
४. एक बड़ा मुद्दा चीनी एप्स का रहा है विश्वास कीजिये ऐंसा कोई भी ऐप्प नहीं है जिसके बिना आप रह न सकें |
भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनीयरों का लोहा पूरी दुनिया मानती है नासा - गूगल जैसी कंपनियों में ३०-४० %
तो भारतीय ही हैं पैर दुःख की बात यही ये सब वहां मजदुर हैं कोई मालिक बनने की सोचता ही नहीं | हम हमारे बच्चों को बचपन से युवावस्था तक यही सिखाते अच्छी नौकरी करो अच्छा नौकर बनो आप ये क्यों नहीं सीखा सकते एक अच्छा वैज्ञानिक बनो, या एक अच्छे व्यवसायी बनो और लाखों लोगों को नौकरो दो |
अमेरिका जापान के कुछ लोग भारत आते हैं वो भारत का लोहा - कोयला खरीदते हैं भारत के मजदूरों और इंजीनियरों को नौकरी पर रखते हैं भारत में मोटर -कार बनाते हैं और भारत में ही बेचकर चले जाते हैं | भारत में पिज्जा बनाते हैं और भारतीयों को ही बेचकर चले जाते हैं | वो जो कर सकते हैं हम उनसे ज्यादा अच्छे से कर सकते हैं | बस करने की देर है |
चीन के विरूद्व हमारे सहयोगी देश :-
यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है परन्तु इसका सही उत्तर बहुत कठिन है |
१. रूस - अधिकांश भारतीयों को भ्रम है कि रूस हमारा मित्र देश है | ये बात पूर्णतया सत्य नहीं है | रूस हमारी सहायता तभी करता है जब उसमे उसे कोई लाभ हो | १९६२ के युद्ध में रूस ने यह कहकर हमारी सहायता नहीं की थी, कि भारत तो सिर्फ रूस का मित्र है किन्तु चीन रूस का भाई है | सनद रहे दोनों ही कम्युनिस्ट देश हैं और अच्छे पडोसी हैं साथ ही दोनों ही अमेरिका के दुश्मन है | तो आप कभी भी ये आशा मत रखिये की रूस चीन के विरुद्ध भारत की कोई सहायता करेगा | और २०२० में रूस और पाकिस्तान में उसी तरह अच्छे संबंध विकसित हो चुके हैं जैसे भारत व अमेरिका में हैं |
२. नेपाल - नेपाल भले ही एक हिन्दू बहुसंख्यक देश है हमारे देश के लोग उसे छोटा भाई मानते है पर अभी का नेपाल ऐंसी विचारधारा नहीं रखता | वो हमें अत्यंत नापसंद करते हैं | ये पूरी तरह से हमारे ही राजनैतिक वर्ग की गलतियां हैं जो ऐंसा हुआ है , १९६२ के युद्ध में भी नेपाल ने चीन की सहायता की थी और अब और ज्यादा सहायता करेगा | क्यूंकि दोनों ही देशों में कम्युनिस्ट पार्टिया सत्ता में हैं | अगर नेपाल का वश चले तो वो पुरे उत्तरप्रदेश बिहार आदि को अपने में मिला ले |
३. ताईवान - निश्चय ही कोई देश हमारी सहायता करेगा तो वो यही देश है , इस देश का आधिकारिक नाम रिपब्लिक ऑफ़ चाइना है यह चीन का वह भाग था जिस पर १९४५ में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी अधिकार प्राप्त नहीं कर पायी थी | यह एक लोकतांत्रिक एवं स्वतंत्र देश है चीन इसे अपना एक स्वायत्त प्रदेश मानता है | और जो भी अन्य देश इसे मान्यता देते हैं | चीन उनसे अपने संबंध समाप्त करने की धमकी देता है | इस कारण अमेरिका समेत कुछ एक देशो ने ही इसको मान्यता दी हुई है | ये पुनः हमारे राजनैतिक वर्ग की गलती है वो वो इस परमित्र देश को मान्यता न देकर चीन से मित्रता करने हेतु एक पैर पर खड़े रहते |
४. वियतनाम - यह एक ऐंसा देश है जिस पर भारतीयों का ज्यादा ध्यान नहीं जाता | यह वो देश है जिसने अमेरिका तक को युद्ध में नाको चने चबवा दिए थे | एकमात्र देश जिसने अमेरिका को युद्ध में हराया है | यह एक कम्युनिस्ट देश है किन्तु चीन का दुसमन है क्यूंकि भारत ही की तरह चीन ने वियतनाम की हजारो एकड़ भूमि पर बलपूर्वक कब्जा किया हुआ है |
५. अमेरिका - दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है | १९५० हमारे नेताओं ने रूस और अमेरिका बीच रूस को चुना था जिसने हमें अमेरिका का दुश्मन बना दिया था किन्तु अब २०२० में परिस्थिति अलग है, अब भारत और अमेरिका दोनों को ही एक दूसरे की आवश्यकता है |
६. जापान - जापान और चीन की दुश्मनी ऐतिहासिक है | पर द्वितीय विश्वयुद्ध के त्रासद अनुभव के कारण वो यथासंभव युद्ध से दूर रहना ही पसंद करेगा जापान अमेरिका के साथ संधि में हैं जापान वही करेगा जो अमेरिका चाहेगा | फिर भी वह युद्ध में हमारा साथ ही देगा |
७. ब्रिटेन - ब्रिटेन सदियों तक विश्व की महाशक्ति रहा है आज के बड़े देश अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया , कनाडा , न्यूजीलैण्ड आदि ब्रिटेन के ही वंशज हैं | इनका DNA आत्मा एक ही है | ब्रिटेन आज भी विश्व का भूगोल बदलने की शक्ति रखता है | ब्रिटेन ने सदियों तक भारत और चीन का शोषण किया है किन्तु वर्तमान परिस्थति में चीनी ड्रेगन को रोकने के लिये वो भारत का साथ देगा | वैसे भी अभी हॉन्गकॉन्ग के विषय पर दोनों में तनाव है |
८. इजराइल - इजराइल और चीन में कोई सीधी दुश्मनी नहीं है | भारत ने कभी भी अपनी मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति के कारण इजराइल को वो सम्मान नहीं दिया है जिसका वो अधिकारी था, जबकि इजराइल ने भारत को अपना मित्र बनाने की हरसंभव कोशिश की है और हर मुसीबत में हमारी सहायता की है | इजराइल वो देश है जिसने अकेले ५७ मुस्लिम देशों को हराया था | ये वो देश है जिसने अमेरिका परमाणु बम भी चुरा लिया था | इजऱाइली यहूदियों को उनका देश १४०० साल बाद मिला है उन्होंने सदियों तक अपनी संस्कृति और देश के लिये मुस्लिम, ईसाईयों के साथ संघर्ष किया है वो जानते हैं अपने देश से दूर हो जाना क्या होता है |
९. पाकिस्तान - हमारे ही देश का एक टुकड़ा जो हमारी जान का दुश्मन बना हुआ है | ये हमारा एक ऐंसा बेटा है समझता है इसका बाप कोई और है, एक शैतानी किताब ने इसे इसकी संस्कृति धर्म सब इतिहास सब कुछ भुला दिया हैं | चीन के एक इशारे पैर यह भारत पैर हमला कर देगा |
१०. बर्मा - भारत का यह पडोसी १९३५ से पहले भारत ही भाग था इसकी जमीनी सेना बहुत मजबूत है | अगर हमारे नेता सही विदेश नीति का प्रयोग करें तो यह युद्ध में हमारा साथी होगा |
चीन -भारत युद्ध
भारत और चीन के बीच आज जो कुछ भी हो रहा है, उसके वास्तविक कारण इतिहास में दर्ज हैं | कारण तो हजारो हैं, जिनकी वजह से चीन भारत के बीच मित्रता नहीं हो सकती और संघर्ष होना ही है | तथापि मैं कुछ कारणों पर प्रकाश डालना चाहूंगा |
१. यदि हम १९०० से पहले के समय में जाएँ तो भारत से सीधे चीन जाना और आना बहुत ही दुष्कर कार्य था, क्यूंकि बीच में हिमालय पर्वत और बर्फीला रेगिस्तान था तो उस खाली भूमि में मानव भी कम ही थे, कह सकते हैं प्रकृति ने ही हमें एक-दूसरे से दूर रखा हुआ था | जब संपर्क ही नहीं था तो संघर्ष भी नहीं था |
२. १९५० से पहले तक चीन और भारत के बीच एक और विशाल देश हुआ करता था "तिब्बत" जिस पैर १९५० में चीन ने कब्ज़ा कर लिया वो आज भी अपनी आजादी के लिए संघर्ष कर रहा है भारत ने इसका राजनैतिक स्तर पर नाममात्र का विरोध किया, सैनिक विरोध इसीलिए नहीं क्यूंकि हमारे तत्कालीन प्रधानमंत्री को हिंसा पसंद नहीं थी |
३. १९६० के दशक में तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री चीन से मित्रता करने के लिए मरे जा रहे थे उन्होंने स्वयं के देश की कीमत पर चीन को आगे बढ़ाने के लिए कार्य किये शायद स्वयं को महान नेता सिद्ध करने के लिए | कहा जाता उस समय विश्व के बड़े देश संयुक्त राष्ट्र की स्थायी सदस्य्ता के लिए भारत को सम्मिलित करना चाहते थे किन्तु नेहरू ने इसके ने इसके लिए मना किया और चीन को संयुक्त राष्ट्र में सम्मिलित करने का दबाव बनाया |
४. चीन तिब्बत के बाद भारत के अनेक क्षेत्रों जैसे लद्दाख अरुणाचल प्रदेश आदि पैर गिद्ध दृष्टि गड़ाए बैठा था |
५. इसी काल में भारत ने एक और ऐतिहासिक गलती की १९५३ में तत्कालीन नेपाल नरेश नेपाल को भारत संघ में सम्मिलित करना चाहते थे किन्तु फिर जवाहरलाल नेहरू ने कहा ही देशों को कोई लाभ नहीं होगा और नेपाल में भी पर्यटक काम हो जायेंगे |
६. भारत ने एक अच्छा मित्र बनने की कोशिश तो की किन्तु कई इनसे कार्य किये जो चीन को पसंद नहीं थे जैसे तिब्बतियों को शरण देना उनके गुरु दलाई लामा को सम्मान देना आदि |
७. चीन के संस्थापक माओ जेदांग (Mao Zedong) नेहरू की तरह बिलकुल भी नहीं थे वो भारत को एक प्रतिद्व्न्दी के र्रोप में देखते थे उनकी योजना अनुसार उस समय चीन को भारत से युद्ध करना आवश्यक था ताकि भारत अगले ५० वर्षों तक चीन से पीछे रहे |
८. नेहरू को अपनी नीतियों पर अन्धविश्वास था उन्होंने भारत चीन सीमा पर नाममात्र के सैनिक ही रखे उनके अनुसार भारत एक अहिंसक देश है, उसे किसी सेना की आवश्य्कता ही नहीं है और गाँधी की तरह सत्याग्रह करके किसी भी सेना को भगा सकते हैं |
९. १९६२ में चीन ने भारत पर अचानक पूरी तैयारी से हमला कर दिया और अक्साई चीन एवं अन्य सामरिक महत्व के स्थानों को हमसे चीन लिया उनकी सेना असम तक आकर कुछ समय बाद वापस लौट गयी नेहरू सिर्फ असम के लोगो के लिए रेडिओ पर सहानभूति प्रकट करते रह गए |
१०. १९६२ में भारत की अर्थव्यवस्था चीन से बड़ी थी हमारी सेना चीन से ज्यादा शक्तिशाली थी किन्तु हमारे नेताओं ने सैनिको को युद्धस्थल पर रखा ही नहीं था \ हमारी एयरफोर्स कभी लड़ी ही नहीं | ये सेना की नहीं बुद्धिहीन नेताओं की हार थी |
११. १९२० आज चीन की अर्थव्यवस्था भारत की तुलना में ५ गुना है, उनकी सेना हमसे ३ गुनी है | वो बहुत जल्दी महाशक्ति बनने जा रहे हैं पर उन्हें पता है भारत आज नहीं तो कल उन्हें चुनौती देने की स्थिति में होगा | वो पूरी रोटियां अकेले ही खाना चाहते हैं उन्हें भारत से कुछ भी नहीं बांटना है |
१२ वो भारत से युद्ध चाहते हैं, ताकि अगले ५० वर्षों तक भारत उनके सामने खड़ा न हो पाए |
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