25/07/2026
दो टूक- सच्चाई यही है...
नीट परीक्षा विवाद, पेपर लीक, छात्रों की आत्महत्या, धरना-प्रदर्शन, अशोभनीय एवं अश्लील आचरण तथा हाल की राजनीतिक घटनाओं ने पूरे देश को चिंतित किया है। यह केवल किसी सरकार, विपक्ष या एक मंत्री का विषय नहीं है, बल्कि भारत के भविष्य—हमारे युवाओं—का प्रश्न है।
देश का प्रत्येक विद्यार्थी वर्षों की कठिन मेहनत, अपने माता-पिता के त्याग और अपने उज्ज्वल भविष्य के सपनों के साथ परीक्षा देता है। यदि परीक्षा की निष्पक्षता पर प्रश्न उठते हैं, तो सबसे बड़ी चोट उस छात्र के विश्वास पर पड़ती है जिसने ईमानदारी से परिश्रम किया है। इसलिए परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीकी रूप से सुदृढ़ बनाना समय की आवश्यकता है।
साथ ही, मैं अपने युवा साथियों से विनम्र आग्रह करता हूँ कि जीवन किसी एक परीक्षा का नाम नहीं है। असफलता या अन्याय की पीड़ा कितनी भी बड़ी क्यों न लगे, आत्महत्या कभी समाधान नहीं हो सकती। आपका जीवन आपके परिवार, समाज और राष्ट्र की अमूल्य धरोहर है। संघर्ष कीजिए, न्याय के लिए आवाज़ उठाइए, पर अपने जीवन से कभी समझौता मत कीजिए।
लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रत्येक नागरिक का अधिकार है, लेकिन किसी भी आंदोलन में अभद्र भाषा, अश्लील हरकतें, हिंसा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाना या राष्ट्र एवं संवैधानिक संस्थाओं का अपमान करना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं कहा जा सकता। इससे न्याय की माँग कमजोर पड़ती है और समाज में गलत संदेश जाता है।
मैं विपक्ष के उन राजनीतिक दलों और नेताओं से भी कहना चाहता हूँ कि छात्रों की पीड़ा को केवल राजनीतिक अवसर में बदलने का प्रयास लोकतंत्र की स्वस्थ परंपरा नहीं है। यदि किसी परीक्षा में अनियमितता हुई है तो उस पर सरकार से कठोर प्रश्न पूछना विपक्ष का संवैधानिक दायित्व है, किंतु छात्रों के आक्रोश को भड़काकर, आंदोलनों को राजनीतिक रंग देकर, अशोभनीय नारों, अमर्यादित भाषा या अश्लील आचरण को मौन समर्थन देकर तात्कालिक राजनीतिक लाभ लेने की प्रवृत्ति अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। युवाओं का भविष्य किसी भी दल की राजनीति का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी है। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष—दोनों का प्रथम दायित्व समाधान प्रस्तुत करना और युवाओं का विश्वास बनाए रखना होना चाहिए, न कि केवल राजनीतिक लाभ-हानि का गणित।
मैं माननीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान जी द्वारा नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए दिए गए इस्तीफे के निर्णय को भी लोकतांत्रिक परंपरा का हिस्सा मानता हूँ। साथ ही यह भी आवश्यक है कि पेपर लीक के दोषियों पर कठोर एवं निष्पक्ष कार्रवाई हो, चाहे वे कितने ही प्रभावशाली क्यों न हों। दोषियों को दंड मिले और निर्दोष छात्रों का भविष्य सुरक्षित रहे—यही देश की अपेक्षा है।
आज आवश्यकता किसी की राजनीतिक जीत या हार की नहीं, बल्कि छात्रों के विश्वास को पुनः स्थापित करने की है। सरकार, विपक्ष, न्यायपालिका, प्रशासन, शिक्षाविद्, अभिभावक और समाज—सभी को मिलकर ऐसी व्यवस्था बनानी होगी जहाँ प्रतिभा जीते, माफिया हारे और किसी भी छात्र को अपने भविष्य के लिए भयभीत न होना पड़े।
आइए संकल्प लें—
- शिक्षा को राजनीति का अखाड़ा नहीं, राष्ट्र निर्माण का आधार बनाएँ।
- छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य का सम्मान करें।
- परीक्षा प्रणाली को भ्रष्टाचार और पेपर लीक से मुक्त करें।
- लोकतांत्रिक विरोध को मर्यादा, शालीनता और संविधान की सीमाओं में रखें।
- सत्ता और विपक्ष दोनों शिक्षा के प्रश्न पर राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में कार्य करें।
- युवाओं को निराशा नहीं, विश्वास और अवसर दें।
भारत की युवा शक्ति ही विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत है। उनके सपनों की रक्षा करना हम सभी का साझा राष्ट्रीय दायित्व है।
जय हिन्द!
— विनोद कुमार झा
संस्थापक अध्यक्ष, कोशी विकास संघर्ष मोर्चा, सहरसा (