Santosh Kumar "J.R."

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It’s much easier to forget our personal woes when we serving the needs of those around us. For social workers, the needs can be overwhelming.

But regardless of the results, the career rewards are intangible.

04/04/2026

Celebrating my 5th year on Facebook. Thank you for your continuing support. I could never have made it without you. 🙏🤗🎉

14/02/2026

27/11/2025

Bas itna hi...

02/11/2025

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बिहार से एनडीए की विदाई क्या होने वाली है ?


बिहार चुनाव ने छठ पूजा के बाद रफ्तार पकड़ ली है। नेताओं के दौरे चरम पर पहुंच चुके हैं।यह चुनाव ऐतिहासिक होने वाला है क्योंकि इससे देश का भावी राजनैतिक परिदृश्य बदलने वाला है। चूंकि इस चुनाव में मोदी शाह और महागठबंधन के नेता राहुल गांधी आमने सामने हैं।इस चुनाव में बिहार की लोकल राजनीति पर देश के ये नेता हावी हैं। एक का उद्देश्य भविष्य के लिए अपनी सत्ता को कायम रखना है और दूसरे का उद्देश्य देश में संविधान बचाने, संविधान विरोधी लोगों को हटाना है।बाकी जो समस्या संपूर्ण देश के सामने हैं वे ही समस्याएं बड़े पैमाने पर बिहार में मौजूद हैं।जबकि कथित सुशासन बाबू ने एनडीए के साथ सरकार बनाके राज्य को गर्त में ढकेल दिया है।

पलटू राम नाम से ख्यात इस नेता से बिहार वासी ऊब गए हैं। भाजपा और संघ की रीतिनीति से अब तो सवर्ण जातियों के लोग भी नाराज़ नज़र आ रहे हैं। फलत:अब पलटू राम का भी रामनाम सत्य होने वाला है। भाजपा वैसे भी इस बार नीतीश को निपटाने में लगी है। जबकि नीतीश और उनके साथी नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री का चेहरा बता कर वोट हथियाने में लगे हैं। जबकि यह तय है कि भाजपा नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री नहीं बनाएगी। यह बात भाजपा के मेनोफेस्टो घोषणा के वक्त भी उभर कर सामने आ गई है। जबकि ऐसा कयास लगाया जा रहा था कि इस महत्वपूर्ण अवसर पर नीतीशकुमार को मुख्यमंत्री घोषित किया जाएगा। महज़ दो मिनिट के इस कार्यक्रम में जानबूझकर प्रेस कांफ्रेंस नहीं की गई क्योंकि पत्रकार भी यही सवाल पूछने वाले थे। दूसरे इस मंच से किसी राष्ट्रीय नेता ने भी संबोधित नहीं किया वरना नीतीश कुमार भी बोलते और क्या बोल जाते।इससे भाजपा संकट में पड़ जाती ।

इधर नेपाल और लद्दाख के जेन जेड का असर भी बिहार पर पड़ा साफ़ दिख रहा है इसलिए इस बार बिहार का युवा तेजस्वी के जोश ख़रोश के साथ तेजी से जुड़ गया है। राहुल गांधी की बिहार यात्रा में तेजस्वी, अखिलेश यादव और कामरेड दीपांकर भट्टाचार्य के साथ जिस तरह युवाओं का अपार समर्थन मिला उससे भी बदलाव की लहर उठी है।युवा आक्रोशित हैं।उनकी भीड़ राहुल, तेजस्वी और प्रियंका की सभाओं में खूब उमड़ रही है।

बहरहाल, इस बार बिहार में जिस तरह बीजेपी नेताओं को चुनाव क्षेत्रों में अपमानित होना पड़ रहा है,उसके अलावा वोट चोर गद्दी छोड़ भी जिस तरह गूंज रहा है।वह ताकीद कर रहा है कि बिहार बदल रहा है। मोदी शाह की सभाओं में खाली कुर्सियां भी भाजपा से मोहभंग की दास्तां कह रही है।इसके अलावा इस बार मतदाता मौन नहीं बल्कि मुखर है वह खुलकर नीतीश बाबू की सरकार हटाने की बात कर रहा है। मोदी शाह से मोहभंग तो बहुत पहले से हो चुका है। यानि लगता है,तेजस्वी ही बिहार की कमान संभालेंगे।

सबसे बड़ी दुखकर बात यह भी मतदाताओं ने खुलकर मीडिया को बताई जो वोट चोरी की पुष्टि करती है।वे सहजता से यह कह रहे हैं कि पिछली बार भी हम तेजस्वी को वोट दिए थे किंतु ईवीएम ने उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनने दिया।ये एक ऐसा सच है जिसे मतदाता समझ गए हैं।

विदित हो, पिछले विधानसभा चुनाव में ऐसा ही बदलाव का माहौल था और मतदाता चुनाव परिणाम से हतप्रभ था। उस समय तेजस्वी के आरजेडी उम्मीदवारों को कई सीटों पर मार्जिन वोट से हराया गया था। कहा जाता है यदि वे सब सीट मिल गई होती तो तेजस्वी सरकार ही बनती।

इस बार हालात बदले हैं आरजेडी, कांग्रेस और सीपीआईमाले ने सोच समझकर जो सीटों का बंटवारा किया है वह अच्छे संकेत दे रहा है। दूसरी ओर बीजेपी जेडीयू और घटक दलों के अंदरुनी तनाव से भी एनडीए हताश है। मोदी शाह की देश दुनिया में गिरती छवि भी इसके लिए जिम्मेदार है।

अब तो मोदी शाह चुनाव आयोग की मेहरबानियों पर ही निर्भर है कि वह 67 लाख काटे गए वोटरों से कैसा जीत का प्लान बनाए हुए है। बिहार में चुनाव प्रचार के दौरान हत्या और मारपीट की ख़बरें आने लगी हैं वोटिंग के समय क्या स्थिति बनायी जाती है ये अंदर खाने की बात है। वैसे अमित शाह की लड़खड़ाती जबान और मोदीजी की बेतुकी हल्की बातें यह बता रही हैं कि यदि वोट चोरी ना की गई तो बिहार में एनडीए हार रहा है।ऐसा पिछले मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान के विधानसभा चुनाव में हम देख चुके हैं।यदि यह संभव हुआ तो बिहार निश्चित तौर पर किसी अपरिचित संघी मुख्यमंत्री के हाथ में चला जाएगा। जबकि जनमत तो एनडीए के ख़िलाफ़ है। वह चीखता चिल्लाता रहेगा।
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07/10/2025

जन-नायक की खोज क्विज: आपकी आवाज़, आपका नेता 17/08/2025

जन-नायक खोज की क्विज: आपकी आवाज़, आपका नेता
दिवस-प्रतिदिन बदलती राजनीति के बीच यह 25 प्रश्नों का इंटरैक्टिव क्विज आपको एक मौका देता है कि आप स्वयं यह आंकलन करें—कौन से ऐसे गुण हैं जो एक सच्चे जन-नायक को परिभाषित करते हैं, और कौन-सा नेतृत्व आपके क्षेत्र के लिए सर्वाधिक उपयुक्त है। नेतृत्व, संवेदनशीलता, जनसेवा, सामाजिक न्याय और संकट प्रबंधन जैसे विविध पहलुओं को छूते हुए यह क्विज आपको यह समझने में मदद करेगा कि आपका “आदर्श जोड़ीदार” कैसा हो।
• क्विज में पूछे गए प्रश्न आपकी प्राथमिकताएँ, निर्णय क्षमता और नैतिक मूल्यों की परख करते हैं।
• अंत में आपके प्रत्येक उत्तर को स्कोरिंग के आधार पर विश्लेषित किया जाएगा, जिससे आप जान सकेंगे कि किन क्षेत्रों में आपका और आपके प्रतिनिधि का विज़न मेल खाता है।
• इस प्रक्रिया के माध्यम से जनता के बीच स्वयंफलक संवाद बढ़ेगा और सही जन-नायक की पहचान में योगदान मिलेगा।
अपनी पंचायत, अपने गाँव, अपने शहर या शहर के कोने-कोने तक इस क्विज को साझा करें। मिलकर बनाएँ ऐसा नेतृत्व जो हमारे हर सवाल का जवाब हो! 25 प्रश्नों का इंटरैक्टिव क्विज

जन-नायक की खोज क्विज: आपकी आवाज़, आपका नेता हर सवाल इस बात की परख करता है कि कोई व्यक्ति जन-नायक बनने की योग्यता रखता है या नहीं। ये प्रश्न नेतृत्व, संवेदनशीलता...

13/08/2025

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वोट चोरी

दर असल ये शब्द हाल ही में नया चलन में आया है। मामला कुछ यूँ समझिये कि विपक्ष को जब ये महसूस हुआ कि चुनाव में कुछ झोल हो रहा है तो उन्होंने चुनाव आयोग से कुछ दस्तावेज मुहैया करवाने का अनुरोध किया।

उधर चुनाव आयोग ने विपक्ष को उलझाने के लिए ट्रक भर के कागज सौंप दिए।

लगा कि ये 7 फिट ऊंचा कागजों का ढेर देखकर शायद विपक्ष इनका विश्लेषण करने का इरादा या तो छोड़ देगा या फिर इनका विश्लेषण करते करते शायद विपक्ष बुढा ही हो जाए।

लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। लेकिन हुआ वैसा जो चुनाव आयोग ने सोचा नहीं था। विपक्ष ने इस दौरान कुछ सूचनाएँ आरटीआई लगाकर हासिल की तो बाकी सूचनाएँ अपनी अलग अलग टीमों के जरिये हासिल की।

और अंततः विपक्ष की और से क्रीज पर आए नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी और आते ही पहली ही गेंद पर जड़ दिया लंबा सिक्सर।( प्रेस कॉन्फ्रेंस) इस ताबड़तोड़ बैटिंग को देखकर चुनाव आयोग सकते में आ गया। उसे उम्मीद नहीं थी कि विपक्ष इतनी जल्दी ऐसा डेटा (तथ्य) ले आएगा।

जब विपक्ष ने उन्हीं कागजों को दिखाया जो चुनाव आयोग ने दिए थे। उन्हीं कागजों में खोज निकाला कि कोई आदित्य श्री वास्तव चार राज्यों में वोट डाल रहा है तो कहीं एक मकान में 80 लोग रह रहे हैं, तो कहीं 1 लाख से अधिक फर्जी वोट पाए गए, तो कहीं ऐसे मकान और एड्रेस थे जो वास्तव में कहीं थे ही नहीं।

विपक्ष ने मांग की कि उन्हें डिजिटल डेटा दिया जाए, मगर चुनाव आयोग जानता था कि ऐसा करने पर वोट चोरी की पोल खुल जाएगी। लिहाजा डिजिटल डेटा देने के बजाय जो उपलब्ध था वो भी वेबसाइट से हटा दिया गया। और राहुल गाँधी को ही कह दिया कि आप शपथ पत्र दीजिये।

शपथ पत्र उन कागजों की गड़बड़ी के लिए राहुल गाँधी से मांगा जा रहा था, जो कागज असल में तो चुनाव आयोग के ही थे। कमाल का खेल रचा जा रहा था।

और शपथ पत्र भी वो मांग रहा था जिसके कागजों में बिहार में कुत्ता सिंह ( डॉगी सिंह), कौआ सिंह और यहाँ तक की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तक नाम लिस्ट में जोड़ दिए।

वैसा ऐसा सिर्फ
विश्वगुरु के देश में ही संभव था।

उधर बिहार में पुनरीक्षण के नाम पर 65 लाख लोगों के मत का अधिकार ही छीन लिया जो उनको संविधान से प्राप्त था।

जब विपक्ष ने इसका कारण पूछा तो साफ कह दिया कि हम कारण नहीं बताएंगे। नाम किस किस के काटे ये भी नहीं बताएंगे। यानि कि खुद को खुद ही के जाल में फसाये जा रहे थे चुनाव आयोग ।

संविधान ने भारत में भारतीय नागरिकों को व्यस्क मताधिकार का अधिकार दिया है। जिसकी उम्र 18 वर्ष या अधिक है उसे बिना जाति, धर्म, लिंग का भेद किए, चुनाव का अधिकार होगा। लेकिन वही अधिकार अब चोरी होने लगे तो लोकतंत्र और संविधान के क्या मायने रह जाएंगे।

बात राहुल गाँधी ने उठाई है लेकिन चिंतन और मनन पूरे देश को करना चाहिए कि क्या आप अपने वोट के अधिकार को चोरी होते हुए देखना चाहोगे?

हालांकि इस गंभीर मुद्दे पर मीडिया को मोदी सरकार से सफाई मांगनी चाहिए थी, लेकिन मीडिया का कहना है कि वे मोदी सरकार से सवाल करने का कार्य 2014 में छोड़ चुके हैं अब एक बार छोड़ा गया कार्य वापस पकड़ना अच्छा नहीं लगता। फिर भी आप जिद्द करते हैं तो हम जब मोदी सरकार बदलेगी तब ये कार्य दुबारा शुरू कर देंगे। तो फिलहाल बिकाऊ मिडिया से इससे अधिक उम्मीद करना उम्मीद की ही तौहीन करने जैसा होगा।

सोचना ये है कि-

लोकतंत्र में जनता सरकार को चुनती हैं अपने वोट के जरिये तो क्या वो वोट लुट जाने दोगे?

सवालों के जवाब जिनको देने चाहिए वो विपक्ष को हिरासत में ले रहा है बाकी सब ठीक....
🇮🇳🇮🇳🇮🇳

12/08/2025

सुप्रीम कोर्ट चंद्रचूड़ जी ने ठाकरे की सरकार गिराकर बनाई गई महाराष्ट्र की बीजेपी सरकार को असंवैधानिक कहा लेकिन भरपूर मजे से पूरा कार्यकाल पूरा किया

सुप्रीम कोर्ट ने इलोक्ट्रल बांड को अवैधानिक कहा लेकिन उस अवैधानिक अंसवैधानिक धन पर कोई कार्रवाई हुई क्या?

12/08/2025

पहले मोदी परेशान थे की हिन्दू खतरे में है
अब अंधभक्त परेशान है कि मोदी खतरे में है

12/08/2025

ये वाराणसी है…
50 बच्चों के पिता का नाम राजकमल दास..
सबसे छोटा बेटा राघ्वेन्द्र 28 साल का..
सबसे बड़ा बेटा बनवारी दास 72 साल का.

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