19/07/2026
हमारे "प्रधान भइया"
मुझे याद है आज से दस वर्ष पूर्व जून 2016 में भालेसुलतान क्षत्रिय समाज के एक स्तम्भ, हमारे पारिवारिक स्नेही, बाबू के अभिन्न सहयोगी और मित्र, हमारे "प्रधान भैया" दिल्ली जाने से एक रोज पहले घर आये, खट्टी मीठी चर्चाओं का दौर चला हमेशा की तरह बाबू जी और उनकी प्रेमभरी नोक झोंक भी हम सबने देखी । रात को प्रधान भैया इस आश्वाशन के साथ घर गए कि दिल्ली में डॉ को दिखा के जल्दी ही लौटेंगे पर दिल्ली में उनकी तबियत ज्यादा खराब हुई, अस्पताल में भर्ती हुए हम सबको भी सूचना मिली बाबू जी से रहा नहीं गया और वो दिल्ली गए 2-3 दिन उनके साथ रहकर आश्वस्त होकर इस विश्वास के साथ लौटे कि जल्द ही प्रधान भैया स्वस्थ होकर वापस आएंगे पर ईश्वर को ये मंजूर नही था। 19 जुलाई की रात्रि यह सूचना मिली कि प्रधान भइया नहीं रहे । उन्हें घर लाया जा रहा है किसी तरह रात बीती भोर में ही हम सब उमरा पहुंचे । प्रधान भैया वापस तो आये थे पर अपने वादे से मुकर गए थे उन्हें ऐसे देखने की किसी ने कल्पना नहीं की थी। बाबू जी अंदर से द्रवित थे पर खुद को रोके हुए थे पर पुष्प अर्पित करते समय वो खुद को रोक न सके और छलछलाती आंखों से अश्रुधारा बाह निकली । मैंने पहली बार उन्हें ऐसे देखा था।
आज दस वर्ष बीत चुके हैं इन दस वर्षों में एक युग का अंत हो चुका है ,जीवन बहुत बदल चुका है प्रधान भइया ,बाबू जी, परमेश भैया सब एक साथ चले गए है हम सबसे बहुत दूर पर उनकी स्मृतियां,उनके आदर्श और उनके बताए संस्कार आज भी जीवंत है। अभी भी जहां बैठकर ये लिख रहा हूँ मुझे लग रहा है जैसे बाबू जी प्रधान भैया और परमेश भैया यहीं बैठे है और उनके मुस्कुराते चेहरे मेरे सामने हैं ।
हम किसी को जाने से रोके तो नहीं सकते पर उनके आदर्शों का पालन कर और उनके बताए रास्ते पर चलकर सदैव उन्हें अपने आस पास महसूस कर सकते हैं ।
प्रधान भैया की दसवीं पुण्यतिथि पर कोटि कोटि नमन💐💐🙏🙏