21/10/2025
*कोशी नव निर्माण के 17 साल, बेमिसाल*
आज 21 अक्टूबर को कोशी नव निर्माण मंच का स्थापना दिवस है। तमाम उतार चढ़ाव से गुजरते हुए 17 साल का बेमिसाल सफर पूरा किया गया। इस यात्रा में भागीदार सभी साथियों का हृदय की गहराइयों से अभिवादन।
2008 की कुसहा त्रासदी के समय मधेपुरा के बिहारीगंज प्रखंड के बभनगामा गांव के पारा माउंट स्कूल में आपदा पीड़ितों और उनके लिए कार्यरत साथियों ने मिलकर संगठन की स्थापना की थी। इन सफर में संगठन के सभी कार्यकमों के संचालन में लगे साथियों, समर्थक साथियों, सहयोग करने वाले साथियों, सभी समर्थक साथियों, मार्गदर्शकगण को हार्दिक धन्यवाद के साथ आभार। साथ ही संगठन के साथ जुड़े शोधकर्ताओं, मीडिया के बंधुओं को धन्यवाद। संगठन की आलोचना करते हुए अपनी गलतियों को सुधारने का मौका देने वाले लोगों को भी धन्यवाद। इस सफर में वैसे साथी जो छोड़कर चले गए उनके प्रति आदरांजलि।
कुसहा त्रासदी के पीड़ितों की आवाज उठाने के बाद हमलोग कोशी तटबंध के भीतर के लाखों पीड़ित नर नारियों के पीड़ा के साथ खड़े हुए और उनकी मुखर आवाज बनकर आज भी मैदान में है।
शांतिपूर्ण जन संघर्षों को गैर दलीय रूप से खड़ा करने की लगातार कोशिश जारी है। हमलोग चुनाव आचार संहिता के मद्देनजर इस वर्ष स्थापना दिवस पर कार्यक्रम नहीं कर पाए है जिसका खेद है।
कोशी के सवाल, तटबंध के भीतर के पीड़ितों के सवाल, पूरे कोशी क्षेत्र के पारिस्थितिकी के अनुरूप जन विकास का सवाल आज भी मौजू है। उनके लिए पूरी ऊर्जा से कोशी नव निर्माण मंच के साथी समर्पित है।
आइए आज हमलोग मिलकर संकल्प लेते हैं कि एक मजबूत जन संगठन बनाएंगे जो कोशी के लोगों की उम्मीदों और उनकी आकांक्षाओं पर खरा उतरे।
जय कोशी
जय कोशी नव निर्माण मंच
08/09/2025
"कोशी की विद्यमान चुनौतियां और हमारा दायित्व" विषय पर
*जिला कार्यकर्ता सम्मेलन*
तिथि : 11 सितंबर 2025
समय : 10 .30 बजे दिन से
स्थान : पब्लिक लाइब्रेरी क्लब ( हॉस्पिटल गेट) महावीर चौक सुपौल
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प्रियजन,
कोशी नव निर्माण मंच द्वारा कोशी पीड़ितों के लिए जारी प्रयासों से आप अवगत होंगे।
2008 की कुसहा त्रासदी के समय शुरू सफर 17 सालों से जारी हैं। सुपौल जिले में तटबंध के भीतर के लोगों के अधिकारों की मजबूत आवाज को लगातार उठाया जा रहा है। तटबंध के भीतर के कटाव पीड़ितों को सरकारी जमीन में बसाने, तटबंध और स्परों पर बसे लोगों को उजाड़ने के बजाय उन्हें मुकम्मल पुनर्वासित करने, कोशी के भीतर बसे सभी लोगों का सर्वे कराकर विभिन्न कारणों से पुनर्वास से वंचित लोगों को मुकम्मल पुनर्वास दिलाने, कोशी पीड़ित विकास प्राधिकार लागू कराने, लगान मुक्ति, जमीन सर्वे में रैयती जमीन, रैयत के नाम रखने की लड़ाई, कोशी पीड़ितों को जीआर और क्षतिपूर्ति दिलाने का अभियान जारी है तो संगठन द्वारा कोशी की समाधान के दिशा में सभी 14 छाड़न धाराओं को पुनर्जीवित कर कोशी का पानी उसमें डायवर्ट (भेजने) सहित लोक भागीदारी और विज्ञान सम्मत समाधान की तलाश करने की मांग उठाया जा रहा है। सरकार, संबंधित विभागों तक इन मागों को उठाने, इसके साथ मंच द्वारा न्यायालय में याचिका दायर करने, विभिन्न मंचों पर इन सवालों को उठाने, देश भर के वैज्ञानिकों, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं, शोधकर्ताओं को क्षेत्र में लाकर अपनी आवाज के साथ उनकी एकजुटता कायम करने का प्रयास भी चलता रहता है। संघर्ष के साथ अनेक रचनात्मक कार्य भी जारी हैं।
राज्य में होने वाले विधान सभा चुनावों के मद्देनजर मंच द्वारा सभी प्रमुख दलों को घोषणा पत्र में इन मुद्दों को शामिल करने का मांग पत्र को भी दिया गया है।
विधान सभा चुनावों में कोशी के मुद्दा को जोरदार तरीके से उठाने, चुनाव बहिष्कार की लोगों के बीच की सुगबुगाहट और चुनाव में अपने संगठन की भूमिका को तय करने, आगे सांगठनिक प्रकिया को मजबूत करने की तात्कालिक आवश्यकता को देखते हुए यह जिला कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इसमें हम सब मिलकर आपस में आगे की योजना और रणनीति तय करेंगे।
अतः आपको इस अति आवश्यक जिला कार्यकर्ता सम्मेलन में सम्मान पूर्वक सादर भागीदारी का आमंत्रण हैं।
*कोशी नव निर्माण मंच, सुपौल*
सम्पर्क : 9973936658, 8825167828, 7631818453, 8434709510, 9534617523,
91229 66419
15/07/2025
महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी जी सुपौल में
26/12/2024
ये है तस्वीर आजादी के 75 साल वाले अमृत महोत्सव वाले साल की,ये तस्वीर है 5 ट्रिलियन के करीब वाले विश्व गुरु देश की, ये तस्वीर है 2022 में हो जाने वाली दुगुनी आय वालों की, ये तस्वीर है सनातनी हिंदू राष्ट्र की, ये तस्वीर है एक है तो सैफ है की..
आखिर कहां ओर किस दिशा में ले जाया जा रहा है इस विज्ञान की 21वीं सदी में हमें, आज भी हालात वहीं है अन्नदाता की जो दशको से रही है, तिल तिल कर मर रहा है देश का अन्नदाता और नीरो बांसुरी बजा रहा है देश देश राज्य राज्य जा कर कर ऐलान कर रहा है के मैं हु तो मुमकिन है और मेरे होने से आप है, आज़ादी के 75 साल में फिर राजतंत्र लौट रहा है जहाँ राजा हज़ारों मौत पर जश्न मनाता है और आवाम तालियां बजाती है, देश की 60-65% आबादी देश का अन्नदाता अपनी खेती की रोजमर्रा की चीजों खाद बीज भाव पर फसलों की निश्चित समय पर खरीददारी के लिए कड़कती ठंड भीषण गर्मी तो कभी बारिश में गोलियां डंडे लाठी खा रहा है और आए दिन बदहाली आर्थिक तंगी से खुद जान गंवा रहा है और ये आत्महत्या के आंकड़े दिन प्रतिदिन बढ़ रहे है.
बीते कितने सालों से अपने हक के लिए सड़कों पर है और कभी राजा की गोलियों से तो कभी राजा के वजीरों की गाड़ियों से मारे कुचले जा रहे है फिर किस आय दुगुनी फिर किस 5 ट्रिलियन का बार बार उदघोष हो रहा है, और देश की जीडीपी में कृषि की 18% से ज्यादा की भागीदारी इस बीते साल में 1.5% कम होकर 17% से नीचे होने की संभावनाएं है, न जाने हम सब सो रहे है या राजा ओर उसका राजतंत्र ज्यादा जागता है तभी राजा जी बार बार उदघोष करते रहते है कि भाइयों और बहनों मैं आपकी बदहाली के लिए 18 18 घंटे काम करता हूं..
राजा शंखनाद करता है ओर देश ओर राज्य दर राज्य बार बार जीत रहा है और राजतंत्र की ओर मजबूती से बढ़ रहा है, इनके एक वजीर मोटा भाई ने तो यह तक कह रखा है कि हम 2050 तक राज करेंगे, सब साधन और सब संसाधन काबू करके इसी लक्ष्य को पूरा किया जा रहा है, राजा जी ने हमें कमज़ोर और अलग करने के तरीके बदल दिए है हमारी ओर हमारी अगली पीढ़ी(जिसके बल पर 2050तक जाना है) की मानसिकता को काबू किया जा रहा है जिसमें सफल भी हो रहे है, दूसरा तरीका राजा जी के ख़ास ओर देश के सबसे बड़े धनी मित्र की बंदरगाह से हर दिन टनों में जन्नत की सेर कराने वाला चिटा हमारी जीभ और हमारी नसों तक पहुंचाया जा रहा, तीसरा ओर सबसे आसान तरीका अब्दुल पंचर वाले को टाइट करने और उसका डर दिखा के एक है सैफ है रास्ते हमारी ज्ञानेंद्रियों को काबू में किया जा रहा है जिसका शिकार हमारी वो पीढ़ी जिसे हम ये लड़ने और लड़कर अपना हक लेने की विरासत सौंपने वाले है, वक्त बहुत कम है साथियों जल जंगल जमीन बचाने का हमारे पास, रंग भेद जात धर्म भुलाकर उठिए जागिए संगठित होइए इस सदी की आखिरी लड़ाई में अपने आहुति दीजिए(आखिरी लड़ाई इसलिए की आने वाली पीढ़ी नाउम्मीद होती जा रही है) जैसा भी जहां भी जैसा भी है इस जंग का इस हक हुकूक और अपनी विरासत अपना वजूद बचाने की लड़ाई का हिस्सा बनिए, सड़कों पर आइए अगर सड़कों पर नहीं पहुंच सकते तो अपने अपने चौक चौराहों पर आइए वहां भी नहीं आ पाते है तो सोशल मीडिया के सहारे हिस्सा बनिए सरकारों और दमनकारी नीतियों के खिलाफ लिखिए लिख नहीं भी सकते तो शेयर करिए ग्रुप बनाइए ज्यादा से ज्यादा हर वर्ग को साथ जोड़िए हर वर्ग व्यापारी कमेरा मजदूर सबको बताइए उनको समझाइए साथ लेकर इस आखिरी लड़ाई को बड़ा और पूरे देश का आन्दोलन बनाइए ये एक MSP की लड़ाई मत समझिए ये जल जंगल जमीन ओर अपने वजूद को बचाने की लड़ाई है..
अपने हक़ की लड़ाई लड़ना मेरी मजबूरी नहीं जरूरत है,
तुम चाहें कुचल दो जला दो या लाठियां बरसा दो,
ये सवाल पूछना मेरी आदत नही हिम्मत है..
*सबनू-मालक-राजी-रखे*
02/04/2024
कोशी नव निर्माण मंच की पहल पर शुरू यह सामुहिक पहल को जिंदाबाद
सरकार की बिना मदद के 600 किसान चला रहे हैं FPO,रोक रहे हैं कालाबाजारी | Bihar | Kisan Tak
बिहार के मधेपुरा जिला के किसानों ने कालाबाजारी से निपटने के लिए एफपीओ बनाया और आज करीब 600 किसान इस समूह से जुड़े हुए ...
20/03/2024
https://m.thewire.in/article/rights/bihar-families-affected-by-kosi-river-floods-march-12-days-to-patna-to-lodge-protest
Bihar: Families Affected by Kosi River Floods March 12 Days to Patna to Lodge Protest
About 8 lakh people living between embankments across the river, which is spread over Supaul, Saharsa, Madhubani and Darbhanga districts, suffer losses every year due to floods. They have been demanding rehabilitation for decades.