31/03/2026
योगोत्सव काउंट डाउन कार्यक्रम
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31/03/2026
योगोत्सव काउंट डाउन कार्यक्रम
31/03/2026
*अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस*
*योगोत्सव*
*काउंट डाउन कार्यक्रम (3)*
*दिनांक 31 मार्च 2026*
*सहभागिता बैच 2022 BNYS*
*स्थान - सहेलियों की बाड़ी*
30/03/2026
*अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस*
*काउंट डाउन कार्यक्रम (2)*
*दिनांक 30 मार्च 2026*
*सहभागिता बैच 2021 BNYS*
*स्थान - गुलाब बाग*
29/03/2026
अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस काउंट डाउन कार्यक्रम ( 1)के अंतर्गत आज फतहसागर झील पर राजकीय योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा महाविद्यालय बी एन वाई एस विद्यार्थियों एवं शिक्षकों की सहभागिता से योग आसन प्राणायाम का सामूहिक अभ्यास योग जागरूकता कार्यक्रम रखा गया।
25/03/2026
प्राचार्य प्रो. अशोक कुमार शर्मा ने बताया कि मदन मोहन मालवीय राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय उदयपुर, में 8th एवं 9th मई को NIMA OBGY के सहयोग से 'सुश्रुति 2026- गर्भसिद्धि मीमांसा’, अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया जाएगा। जिसमे देश विदेश के आयुर्वेद एवं आधुनिक चिकित्सा के विद्वान, चिकित्सक, शोध अध्येता (Ph.D. स्कॉलर, स्नातकोत्तर) एवं स्नातक अध्येता भाग लेंगे ।इस सेमीनार को बहुत ही बारीकी से डिज़ाइन किया गया है ताकि ज्ञान, नवाचार और व्यावहारिक कार्यशालाओं—विशेष रूप से बांझपन (infertility) के मुख्य क्षेत्र में आयुर्वेद एवं आधुनिक पद्धति को एक ही मंच पर एक साथ लाया जा सके। विशिष्ट दृष्टिकोण के साथ, 'सुश्रुति 2026' एक समृद्ध अनुभव प्रदान करने का वादा करता है; इसमें व्यावहारिक कार्यशालाएँ, विशेषज्ञ सत्र और संवादात्मक चर्चाएँ शामिल हैं जो आपके कौशल और आपके दृष्टिकोण—दोनों को बेहतर बनाने में सहायक होंगी। इसमें सभी प्रतिभागियों को सक्रिय एवं पूर्ण उत्साह के साथ भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है तथा इस विशिष्ट अवसर का अधिकतम लाभ उठाने हेतु प्रेरित किया गया । यह एक प्रेरणादायक एवं स्मरणीय शैक्षणिक यात्रा सभी के साथ साझा किए जाने की अपेक्षा की जाती है। आज 25/0३/26 को महाविद्यालय के समस्त शिक्षकों की उपस्थिति में पोस्टर का विमोचन किया गया।
23/03/2026
आज महाविद्यालय में लाइफ स्टाइल डिसआर्डर में आयुर्वेद की भूमिका विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन हुआ मुख्य वक्ता के रूप में आचार्य वैद्य तन्मय गोस्वामी जी अपना अनुभव साझा किया वर्चुअल रूप में पद्म श्री वैद्य बालेन्दु प्रकाश जी ने उद्बोधन दिया। कार्यशाला की अध्यक्षता कुलगुरु प्रोफेसर गोविंद सहाय शुक्ल ने की।
मुख्य अतिथि नगर विधायक श्रीमान ताराचंद जी जैन रहे एवं विशिष्ट अतिथि विधायक श्रीमान फूल सिंह जी मीणा रहे।
23/03/2026
आज महाविद्यालय में भूमि पूजन एवं शिलान्यास कार्यक्रम हुआ इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उप मुख्यमंत्री आदरणीय डॉ प्रेम चंद बैरवा (वर्चुअल रूप में)विशिष्ट अतिथि विधायक आदरणीय ताराचंद जी जैन, विधायक आदरणीय फूल सिंह जी मीना, कुल गुरू प्रोफेसर डॉ गोविंद सहाय शुक्ल, आचार्य वैद्य तन्मय गोस्वामी, महाविद्यालय प्राचार्य प्रोफेसर अशोक कुमार शर्मा उपस्थित रहे।
राज्य सरकार की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति से शिलान्यास कार्यक्रम से महाविद्यालय परिसर में कुल 13 नवीन कक्षा कक्ष और 6 राजकीय आवास तैयार होंगे। शिलान्यास उपरांत लाईफ स्टाइल डिसआर्डर में आयुर्वेद की भूमिका विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन भी किया गया मुख्य वक्ता आदरणीय वैद्य तन्मय गोस्वामी जी रहे पद्म श्री वैद्य बालेन्दु प्रकाश जी वर्चुअल रूप में अपना अनुभव साझा किया कार्यशाला की अध्यक्षता कुलगुरू प्रोफेसर गोविंद सहाय शुक्ल ने की। कार्यक्रम संचालन प्रोफेसर डॉ किशोरी लाल शर्मा ने किया।
10/02/2026
राजकपोतासन का जन-स्वास्थ्य संरक्षण से संबंध :-
1)राजकपोतासन शरीर को लचीला और मजबूत बनाता है।
2)यह श्वसन तंत्र को स्वस्थ रखता है और फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है।
3)नियमित अभ्यास से तनाव और मानसिक अशांति कम होती है।
4)यह जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से बचाव में सहायक है।
सूर्य नमस्कार क्या है?
सूर्य नमस्कार योगासनों में सर्वश्रेष्ठ है। सूर्य नमस्कार का अभ्यास हमारे सम्पूर्ण शरीर का व्यायाम है। इसके दैनिक अभ्यास से हमारा शरीर निरोगी, स्वस्थ और चेहरा ओजपूर्ण हो जाता है। महिला हों या पुरुष, बच्चे हों या वृद्ध, सूर्य नमस्कार सभी के लिए बहुत लाभदायक है।
सूर्य नमस्कार आसन के नाम
सूर्य नमस्कार में बारह आसन होते हैं:
प्रणाम आसन
हस्तोत्तानासन
हस्तपाद आसन
अश्वसंचालन आसन
दंडासन
अष्टांग नमस्कार
भुजंग आसन
पर्वत आसन
अश्वसंचालन आसन
हस्तपाद आसन
हस्तोत्तानासन
ताड़ासन
सूर्य नमस्कार के लाभ
सूर्य नमस्कार से हृदय, यकृत, आँत, पेट, छाती, गला, पैर शरीर के सभी अंगो के लिए बहुत से लाभ हैं। सूर्य नमस्कार सिर से लेकर पैर तक शरीर के सभी अंगो को बहुत लाभान्वित करता है। यही कारण है कि सभी योग विशेषज्ञ इसके अभ्यास पर विशेष बल देते हैं। सूर्य नमस्कार के अभ्यास से शरीर, मन और आत्मा सबल होते हैं। सूर्य नमस्कार के शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक और मनोवैज्ञानिक कई निम्नलिखित लाभ हैं:
1. सूर्य नमस्कार करने से शरीर स्वस्थ और हृष्ट- पुष्ट बनता है
सूर्य नमस्कार न सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य प्रदान करता है बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक बल भी प्रदान करता है। सूर्य नमस्कार के 12 आसन हमारे पूरे शरीर के आंतरिक और बाहरी अंगों को स्वस्थ और निरोगी बनाए रखते हैं।
2. बेहतर होता है पाचन तंत्र
सूर्य नमस्कार के आसन हमारे पेट के आंतरिक भाग को मजबूत बनाए रखने में सहायता करते हैं। यदि आप नियमित रूप से सूर्य नमस्कार कर रहे हैं तो आपका पाचन तंत्र मजबूत रहता है और पेट से संबंधित बिमारियाँ आपको परेशान नहीं करतीं।
3. सूर्य नमस्कार करने से पेट की चर्बी घटती है
सूर्य नमस्कार करने से पेट की चर्बी घटती है। जो लोग दिन-रात गूगल पर पेट की चर्बी कम करने के उपाय ढूंढते रहते हैं, उनके लिए यह खुशखबरी है। आज से ही सूर्य नमस्कार को अपने दैनिक जीवन का अंग बना लें। कुछ दिन में आप अपने आपको फिट पाएंगे।
4. सूर्य नमस्कार शरीर का डीटॉक्स करता है
हमारा शरीर, आए दिन के तनाव और जीवन शैली के बदलाव के कारण विषाक्त पदार्थ इकठ्ठा करता रहता है। सूर्य नमस्कार का अभ्यास हमारे शरीर के अनचाहे विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में हमारी मदद करता है।
5. सूर्य नमस्कार चिंता और तनाव को दूर रखता है
सूर्य नमस्कार न केवल हमें शारीरिक रूप से चुस्त-दुरुस्त रखता है बल्कि मानसिक रूप से भी चिंतामुक्त और तनावमुक्त बनाए रखता है। सूर्य नमस्कार के 12 आसन हमें दिन भर तरोताजा अनुभव करने में हमारी मदद करते हैं।
6. सूर्यनमस्कार शरीर को लचीला बनाए रखने में मदद करता है
सूर्य नमस्कार 12 आसनों का एक व्यायाम है। इसके अलग-अलग आसन, शरीर के अलग-अलग अंगों पर अपना प्रभाव डालते हैं। जब हम एक आसन से दूसरे आसन में जाते हैं तो व्यायाम की निरंतरता बनी रहती है और हमारे शरीर के सभी अंगों में लचीलापन और मजबूती आती है। प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करने से शरीर में अकड़न नहीं रहती और हम अधिक लचीला अनुभव करते हैं।
7. रोज सूर्य नमस्कार करने से मासिक-धर्म नियमित रहता है
जो महिलाएं अपने मासिक धर्म में अनियमितता से परेशान हैं, सूर्य नमस्कार उनके लिए वरदान हो सकता है। नियमित सूर्य नमस्कार पेट के निचले हिस्से, नितम्ब, गर्भाशय (यूट्रस) और अंडाशय (ओवरी) को स्वस्थ बनाता है और मासिक धर्म की अनियमितता की समस्या को जड़ से दूर भगाता है।
स्वास्थ्य के प्रति सचेत महिलाओं के लिए यह एक वरदान है। इससे न केवल अतिरिक्त कैलोरी कम होती है बल्कि पेट की मांसपेशियो के सहज खिचाव से बिना खर्च सही आकार पाया जा सकता है। सूर्य नमस्कार का नियमित अभ्यास महिलाओं के मासिक धर्म की अनियमितता को दूर करता है और प्रसव को भी आसान करता है। साथ ही, यह चेहरे पर निखार वापस लाने में मदद करता है, झुर्रियों को आने से रोकता है और चिरयुवा तथा कांतिमय बनाता है।
8. सूर्य नमस्कार से अंतर्दृष्टि (इंट्यूशन) विकसित होती है
सूर्य नमस्कार व ध्यान के नियमित अभ्यास से मणिपुर चक्र बादाम के आकार से बढ़कर हथेली के आकार का हो जाता है। मणिपुर चक्र का यह विकास जो कि दूसरा मस्तिष्क भी कहलाता है, अंतरदृष्टि विकसित कर, अधिक स्पष्ट और केंद्रित बनाता है। मणिपुर चक्र का सिकुड़ना अवसाद और दूसरी नकारात्मक प्रवृत्तियों की ओर ले जाता है।
सूर्य नमस्कार के ढेरों लाभ हमारे शरीर को स्वस्थ और मन को शांत रखते हैं, इसलिए सभी योग विशेषज्ञ सूर्य नमस्कार के नियमित अभ्यास पर विशेष बल देते हैं।
9. रीढ़ की हड्डी को मिलती है मजबूती
सूर्य नमस्कार से रीढ़ की हड्डी के निचले भाग से लेकर ऊपरी भाग तक बढ़िया व्यायाम होता है। इससे रीढ़ की हड्डी को लचीलापन और मजबूती दोनों मिलते हैं।
10. सूर्य नमस्कार बच्चों में एकाग्रता बढ़ाता है
सूर्य नमस्कार मन शांत करता है और एकाग्रता को बढ़ाता है। आजकल बच्चे प्रतिस्पर्धा का सामना करते हैं इसलिए उन्हें नित्यप्रति सूर्य नमस्कार करना चाहिए क्योंकि इससे उनकी सहनशक्ति बढ़ती है और परीक्षा के दिनों की चिंता और असहजता कम होती है।
सूर्य नमस्कार के नियमित अभ्यास से शरीर में शक्ति और ओज की वृद्धि होती है। यह माँसपेशियों का सबसे अच्छा व्यायाम है और हमारे भविष्य के खिलाड़ियों के मेरुदण्ड और दूसरे अंगो के लचीलेपन को बढ़ाता है। 5 वर्ष से बच्चे नियमित सूर्य नमस्कार करना प्रारंभ कर सकते हैं।
सूर्य नमस्कार के पीछे का विज्ञान
सूर्य नमस्कार करने की विधि जानना ही पर्याप्त नहीं है, इस प्राचीन विधि के पीछे का विज्ञान समझना भी आवश्यक है। इस पवित्र व शक्तिशाली योगिक विधि की अच्छी समझ, इस विधि के प्रति उचित सोच व धारणा प्रदान करती है। यह सूर्य नमस्कार की सलाहें आपके अभ्यास को बेहतर बनाती हैं और सुखकर परिणाम देती हैं।
भारत के प्राचीन ऋषियों के द्वारा ऐसा कहा जाता है कि शरीर के विभिन्न अंग विभिन्न देवताओं (दिव्य संवेदनाए या दिव्य प्रकाश) के द्वारा संचालित होते है। मणिपुर चक्र (नाभि के पीछे स्थित जो मानव शरीर का केंद्र भी है) सूर्य से संबंधित है। सूर्य नमस्कार के लगातार अभ्यास से मणिपुर चक्र विकसित होता है, जिससे व्यक्ति की रचनात्मकता और अंतर्ज्ञान बढ़ते हैं। यही कारण था कि प्राचीन ऋषियों ने सूर्य नमस्कार के अभ्यास पर इतना बल दिया।
मणिपुर चक्र में ही हमारे भाव एकत्रित होते हैं और यही वह स्थान है जहाँ से अंतःप्रज्ञा विकसित होती है। सामान्यतया मणिपुर चक्र का आकार आँवले के बराबर होता है लेकिन जो योग ध्यान के अभ्यासी हैं उनका मणिपुर चक्र 3 से 4 गुणा बड़ा हो जाता है। जितना बड़ा मणिपुर चक्र उतनी ही अच्छी मानसिक स्थिरता और अन्तर्ज्ञान हो जाते हैं।
सूर्य नमस्कार कब करें?
सूर्य नमस्कार सुबह के समय खुले में पूर्व दिशा में, उगते सूरज की ओर करने की सलाह दी जाती है। उगते सूर्य के प्रकाश से हमारे शरीर को ‘विटामिन डी’ मिलता है, हड्डियाँ मजबूत होती हैं, त्वचा स्वस्थ रहती है और मानसिक तनाव से भी मुक्ति मिलती है।
सूर्य नमस्कार के आसन, हल्के व्यायाम और योगासनों के बीच की कड़ी की तरह है और खाली पेट कभी भी किए जा सकते हैं। हालांकि सूर्य नमस्कार के लिए सुबह का समय सबसे अच्छा माना जाता है क्योंकि यह मन व शरीर को ऊर्जावान कर तरो ताजा कर देता है और दिनभर के कार्यों के लिए तैयार कर देता है। यदि यह दोपहर में किया जाता है तो यह शरीर को तत्काल ऊर्जा से भर देता है, वहीं शाम को करने पर तनाव को कम करने में मदद करता है। यदि सूर्य नमस्कार तेज गति से किया जाए तो बहुत अच्छा व्यायाम साबित हो सकता है, वजन और मोटापा घटाने में भी सूर्य नमस्कार बहुत लाभदायक है।