Abhishek Singh LJP

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Photos from Chirag Paswan's post 18/08/2025
16/08/2025

सर्वं मयि विलीयते मुरलीस्वरेण…..🪈🪐🌏

“In the melody of Krishna’s flute, the entire universe dissolves.” 💐💐

——श्रीमद् भगवद् गीता पुराण 🐚🪐

जिस “मुरली” से भगवान वासुदेव की पहचान है, मुरलीधर - वंशीधर, इत्यादि कई नामकरण दिए गए ! श्री कृष्ण के हर स्वरूप - प्रतीक चिह्न में बांसुरी दिख जाएगी।किंतु यह उनके पास आया कहाँ से ??

श्री कृष्ण की “बाँसुरी” का नाम ही “सम्मोहिनी” था। द्वापरयुग के समय जब भगवान श्री कृष्ण ने धरती में जन्म लिया तब देवी-देवता वेश बदलकर समय-समय पर, उनसे मिलने धरती पर आने लगे. इस दौड़ में “भगवान शिव” कहाँ पीछे रहने वाले थे? अपने प्रिय भगवान से मिलने के लिए वह भी धरती में आने के लिए उत्सुक हुए❗️🔱🔥

किंतु जाने की अपनी व्याकुलता, यह सोच कर छुपा गए, की जा ही रहे हैं, तो कुछ “उपहार” स्वरूप ले लिया जाये, ऐसा जो “प्रभु” सदा अपने सानिध्य में रख सकें ?? 🤷‍♂️ भगवान के पास तब, महर्षि “दधीचि” की एक महाशक्तिशाली “हड्डी” का टुकड़ा पड़ा था। ऋषि दधीचि वही महान ऋषि है जिन्होंने धर्म के लिए अपने शरीर को त्याग दिया था व अपनी शक्तिशाली शरीर की सभी हड्डिया दान कर दी थीं ! उन “हड्डियों” की सहायता से तब “विश्कर्मा जी” ने तीन धनुष - “पिनाक, गाण्डीव, शारंग” तथा इंद्र देव के लिए “व्रज” का निर्माण किया था।☝️

महादेव शिव ने उस हड्डी को घिसकर एक सुन्दर व मनोहर “बाँसुरी” का निर्माण किया।जब शिव जी भगवान श्रीकृष्ण से मिलने गोकुल पहुचे, तो उन्होंने श्री कृष्ण को भेट स्वरूप वह बंसी प्रदान की तथा उन्हें आशीर्वाद दिया।तभी से भगवान श्री कृष्ण उस बंसी को अपने पास रखते हैं ! 💐💐🙏

सभी भक्तजनों को “कृष्ण जन्माष्टमी” की अशेष बधाई ! 🎉👏

ISKCON 🕉️🦚🦚

Photos from Chirag Paswan's post 10/08/2025

💐💐☝️

30/07/2025

भगवान शिव के कई अवतार हैं !! 🔱🐂🌙

किंतु इनमें सबसे कम प्रचलित “बटुक” अवतार है।बटुक यानी “बालक” ।भले ही यह अवतार एक बच्चे का है, किंतु इसके उपासना से आपके संतान के स्वास्थ्य और सुरक्षा संबंधी बाधायें समाप्त हो जाती हैं।☝️

History:-

भगवान् शिव का बटुक अवतार बेहद दिलचस्प अवतार हैं। बटुक भैरव जहां शिव के एक गण माने जाते हैं, वहीं वो “रात्रि के देवता” भी माने जाते हैं। अगर आप रात में यात्रा कर रहे हैं, तो आपको बटुक भैरव की आराधना करने की सलाह दी जाती है। बटुक भैरव भगवान शिव के “उग्र अवतार भी हैं और क्षेत्रपालक भी, इन्हें काशी विश्वनाथ मंदिर के रक्षक और “यात्रीयों” के रक्षक के रूप में भी जाना जाता है।

पौराणिक काल में “आपद राक्षस” ने ब्रह्मा जी को प्रसन्न करके, “अजेय” होने का आशीर्वाद प्राप्त कर लिया था।फिर हर शक्तिशाली भौतिक प्राणी की भांति उसको भी “अहंकार” ने घेर लिया।आज आप जो “आपदा” शब्द सुनते हैं, वह यहीं से लिया गया था संभवतः ! मनुष्यों एवं देवताओं द्वारा त्राहि-माम के बाद, भगवान शंकर ने पाँच वर्षीय बटुक अवतार की रचना की।✌️

चूंकि “बटुक भैरव” भगवान् शिव का बाल रूप है, इसलिए अगर आप अपने बच्चे के स्वास्थ्य में सुधार चाहते हों, उसे निरोगी बनाना चाहते हैं, उसके जीवन में आई बाधाओं को दूर करना चाहते हैं, उसे चिंता से दूर रखना चाहते हैं और उसे अपने जीवन में सफल बनाना चाहते हैं, तो आप बटुक भैरव की उपासना कर यह सब संभव कर सकते हैं।💐🙏


08/06/2025

Chirag Paswan speaking at a Seminar ! ✌️

कम ज़्यादा मुझसे जितना बन पड़ा, मैंने पिछले 10 वर्षों में बिहार के लिए वो हर संभव प्रयास किया, जो मैं कर सकता था।

दिल्ली में रह कर अब नहीं होगा, मुझे अब बिहार आना ही होगा।और यहीं पर रह कर, आप लोगों के बीच रह कर, आप लोगों का हाथ थाम कर, कंधा से कंधा मिला कर, अपने “राज्य को उस विकसित “बिहार” की श्रेणी में ले कर जाऊँगा, जिसको मैं गर्व से “बिहार फर्स्ट - बिहारी फर्स्ट” कहता हूँ।वहाँ तक मुझे अपने प्रदेश को लेकर जाना है।✌️

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