नरेला इंदिरा कॉलोनी के पास खुलेआम शराब के ठेके के बाहर खड़े होकर लोग दारू पीते हैं और वहीं खुले में शौच करते हैं तो बहन अंजू शर्मा जी की शिकायत पर हुई कारवाई ।।।
धन्यवाद कमल भाई ✌️
I Support Ravish Bhardwaj
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29/07/2024
यो दुनिया एक शोले फिल्म से
अर हम हैं आड़े के धर्मेंद्र ✌️
घोगा सामुदायिक भवन केंद्र के भव्य दर्शन 😔
मनुष्य और हिंसा 🤼
ये धार्मिक है या प्राकृतिक ???
14/08/2022
11/08/2022
आप सभी को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं
10/08/2022
Laddakh Diaries 🧿
आज फिर दिल जीत लिया इस पगली ने 🤣😂
लाल सिंह चड्डी 😁🤣😂
दिल्ली में है MP सात,कोई न हमारी सुनता बात
टैक्स हमारा खाती दिल्ली,मेहनत करते हम दिन रात
इतनी क्यों है नफरत हमसे क्यों करते हो पक्षपात
बहुत हुए गोलमोल वादे,अब होगी सीधी बात
फूल,झाड़ू ना हाथ
I ❤️ दिल्ली देहात
मखमली बिस्तरों पे बाहरी नेता हमारे पास टूटी खाट
कदे उदित राज ते कदे टोटे टोटे,गंजी होली म्हारी टांट
राजनीति के चक्कर में हमने भाईचारे को दिया है बांट
म्हारी थाली में शलगम भी कोनी दिल्ली खावे फ्रूट चाट
फूल,झाड़ू ना हाथ
I ❤️ दिल्ली देहात
मेट्रो म्हारी आई नहीं नेता,पार्टी, प्रशासन कर गए शांठ-गांठ
बेरोजगारी में अपराध बढ़ गया मां-बाप देखें बालकां की बांट
झुग्गी,डेयरी,खत्ता म्हारी छाती पे किसे का नहीं म्हारे सिर पे हाथ
अब तो जागों भोले देहातवासियों, छोड़ दो ये जात-पात
फूल,झाड़ू ना हाथ
I ❤️ दिल्ली देहात
पार्टियों के बंधन तोड़ दो,जातियों की जंजीरे दो कांट
जो काम करेगा उसको वोट,दो टूक करो अपनी बात
झाड़ू भी जितवा ली बीजेपी का भी दे लिया साथ
इब भी म्हारी नहीं सुनी ते करने पड़ेंगे दो-दो हाथ
फूल, झाड़ू ना हाथ
I ❤️ दिल्ली देहात
~ रविश एक देहाती
मेरी शुरू से सोच पार्टीवादी नहीं रही है में पार्टीवाद,जातिवाद और अन्य भेदभावों को नहीं मानता लेकिन मुझेमें एक वाद है जिसे में डंके की चोट पर कहना चाहता हूं वो है देहातवाद इसके पीछे मेरा एक कारण है वो यह है नरेला,बवाना,मुंडका,नांगलोई,नजफगढ़ और अन्य दिल्ली के चारों तरफ जो गांव हैं की इन जगहों पर मुख्य दिल्ली की अपेक्षाकृत कम विकास हुआ है सौतेला व्यवहार हुआ है वह आप खुद महसूस कर सकते हैं हमसे 20 किमी दूर की सड़के स्ट्रीट लाइटें,स्कूल,अस्पताल, बड़े बड़े मॉल आकर्षक सरकारी और प्राइवेट प्रोजेक्ट्स और एक तरफ हम हैं आप खुद महसूस कर सकते हैं मुझे बताने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए, हम में से शायद ही कोई ऐसा होगा जो जब कभी भी बाईपास से आगे या लुटियंस दिल्ली जाकर अपने आप को दीतकारा हुआ समझते हुए ये ना कहता हो की यही वो दिल्ली जिसमें हम रहते हैं ।।।
दो लाइन और हैं जिन्हें लिखने का मुझे ऊपर स्थान नहीं मिल रहा था (अपने हक की बात करें तो नेता,अधिकारी मारते हैं डांट...नेता हो तुम हमारे दम पे अपनी औकात में रहो नहीं हो कोई सम्राट)
सोचिए और चलिए कुछ करते हैं 🙏
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