Ganga Kumar

Ganga Kumar

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Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from Ganga Kumar, New Delhi.

Social Activist and Career Bureaucrat
Secretary,Grameen Sneh Foundation
Festival Director, Nalanda Literature Festival
Executive chairman, Bodhgaya Biennale Trustee, Dhanu Bihar & Shining Muskan Foundation

25/04/2026

Nalanda has always been more than a place—it is an idea, a legacy, and a continuing conversation.
Join us for Nalanda Talks – Episode 1, where Pankaj KP Shreyaskar hosts Padma Vibhushan Sonal Mansingh in an enriching discussion on art, culture, and timeless wisdom.
📅 April 26 | ⏰ 12:00 PM
Be a part of this journey of ideas and reflection.
Sonal Mansingh

25/04/2026
03/04/2026

Raise your hand if you want to be part of something bigger ✋✨

Become a volunteer at Nalanda Literature Festival 2.0 and be the force behind stories, ideas, and unforgettable moments.

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Contact- 98181 26133 (Mausam)

Photos from Nalanda Literature Festival's post 22/03/2026
18/02/2026

Pls listen it. Makes us proud

18/01/2026

पर्यटन से रोज़गार तक: नालन्दा की आर्थिक यात्रा

हमारा बिहार क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का 12हवाँ सबसे बड़ा और 2011 की जनगणना के अनुसार, जनसंख्या की दृष्टि से देश का तीसरा सबसे बड़ा राज्य है। क्षेत्रबल एवं विशाल कार्यबल के बावजूद बिहार का राष्ट्रीय जीडीपी में लगभग 2.5% से 3% योगदान रहता है। यह एक विडंबना है। ऐसी स्थिति में हमें प्रत्येक उस वैकल्पिक मार्ग को विचारणीय बनाना होगा जो हमारी अर्थव्यवस्था के धारणीय विकास में सहयोगी हो।

वर्तमान में पर्यटन भारत की सबसे तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। इसमें रोजगार एवं विकास की असीम संभावनाएँ हैं। पर्यटन एक ऐसा क्षेत्र है जो अर्थव्यवस्था की द्वितीयक एवं तृतीयक, दोनों क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देता है।

नालंदा बिहार का एक ऐतिहासिक शहर है। पहाड़ों की गोद में बसा, प्रकृ‌ति के असीम सौंदर्य से परिपूर्ण यह एक सुंदर शहर है। नालंदा इतिहास, अध्यात्म और संस्कृति का केंद्र है। यहाँ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां न केवल आम पर्यटक बल्कि पुरातत्व प्रेमी, प्रकृति प्रेमी, शिल्प प्रेमी, धार्मिक यात्री आदि सभी के लिए अपने-अपने आकर्षण हैं।

नालंदा में पर्यटन की संभावना से युक्त अनेक स्थान हैं जो बरबस अपनी ओर हमें देश-विदेश से यहाँ खींच ले आते हैं। यहाँ 5वीं शताब्दी में स्थापित नालंदा विश्वविद्यालय के खण्डहर, उसकी अनूठी परतदार स्तंभें, प्राचीन स्तूप, मंदिर और विहार हैं। यह यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थल में शामिल किया जा चुका है। यहाँ नालन्दा से थोड़ी ही दूरी पर पावापुरी में जैन धर्म के प्रवर्तक महावीर को समर्पित जल मंदिर है। ऐसी मान्यता है कि यहीं उनका अंतिम संस्कार हुआ था । यहाँ महावीर के पैरों के छाप की भी पूजा होती है। 1917 ई० में स्थापित नालन्दा पुरातात्विक संग्रहालय भी यहाँ एक महत्वपूर्ण स्थल है जहाँ हिन्दु, जैन और बौद्ध, सभी से संबंधित प्राचीन मूर्तियां और कलाकृतियां हैं। यहाँ 7वीं शताब्दी के चीनी यात्री और विद्वान, ह्वेन त्सांग की स्मृति में स्थापित ह्वेन त्सांग मेमोरियल है जिसकी स्थापना वर्ष 1984 में की गई थी। यहाँ उनके लेखन संबंधी पांडुलिपियां, अनु‌दित एवं मुद्रित किताबें हमें प्राप्त हो सकती हैं। यहाँ कुंडलपुर का प्रसिद्ध दिगम्बर जैन मंदिर है। यह मंदिर अपने सुंदर शिखरों के लिए, 4-5 फुट ऊँची महावीर की पद्‌मासन प्रतिमा के लिए, महावीर के जीवन पर आधारित कला दीर्घा के लिए एवं महावीर के चरणों की प्रतिमा के लिए जाना जाता है।

नालंदा, राजधानी पटना से लगभग 100 किमी॰ की दूरी पर है। नालंदा और बिहार की प्राचीन राजधानी, राजगीर की दूरी 15 किमी॰ के लगभग है। यहाँ परिवहन के सस्ते और सुलभ पर्याप्त साधन हैं। राजगीर में राजगीर वन्यजीव अभयारण्य, जू सफारी और नेचर सफारी दर्शनीय है। इन वनों में बुद्ध, जैन काल के कई चिह्न और महत्वपूर्ण संकेतक हैं। यहाँ शेर, बाघ, नीलगाय, हाथी और भालू बहुतायत में पाए जाते हैं। यह पूरा क्षेत्र वैभिगिरी और सोनगिरी के हरे- भरे पहाड़ों के बीच स्थित है। नेचर सफारी वाले इलाके में देश का पहला ग्लास स्काई वॉक खोला गया है। इसके अलावा यहाँ ब्लैक बुद्ध टेम्पल है जहाँ काले बुद्ध की प्रतिमा स्थापित है। ऐसी प्रतिमाएं हमें थाइलैण्ड में भी देखने को मिलती है। इसके अलावा राजगीर में सारिपुत्र स्तुप, गाँव मंदिर, मखदूम शाह शरीफ-उद-दीन मस्जिद, मनियार मठ, साइक्लोपियन दीवार, बिम्बिसार जेल, अशोक स्तूप, ग्रिडकुटा पहाड़ी, सोन भंडार गुफा, जरासंध का अखाड़ा, घोड़ा कटोरा झील, ब्रह्म कुण्ड गर्म झील, वेणुवन, वीरायतन जैन संस्थान,विश्व शांति स्तूप, पाण्डु पोखर आदि स्थल आकर्षण के प्रमुख केंद्र हैं। इनमें से प्रत्येक का अपना विशेष ऐतिहासिक महत्व है।

21वीं शताब्दी के इस युग में पर्यटन और रोज़गार में सीधा समानुपातिक संबंध है। बिहार की अर्थव्यवस्था में पर्यटन के सुनहरे भविष्य की संभावनाएँ है। नालंदा में पर्यटन की बढ़ोतरी से आतिथ्य, होटल, रेस्तरां, टूर ऑपरेटर, गाइड सेवाएँ, परिवहन, स्थानीय शिल्प, स्वरोजगार आदि में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। इससे राज्य और राष्ट्र दोनों की अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय परिवर्तन हो सकता है। यात्रियों और पर्यटकों के व्यापक आवागमन से बिहार में लघु और कुटीर उद्योग अपने समृ‌द्धतम शिखर पर पहुँच सकता है। यहां की स्थानीय शिल्प जैसे - मधुबनी चित्रकला, सुजुनी कढ़ाई, पत्थर शिल्प, धातु शिल्प, लाख की चूड़ियाँ, बाँस के उत्पाद, काष्ठ कला, सिक्की घास शिल्प, स्थानीय प्रसिद्ध खाद्य सामग्रियों आदि की व्यापक मांग वृध्दि हो सकती है। राज्य और भारत सरकार इसके लिए पर्याप्त सक्रिय है।

नालंदा प्रकृति, इतिहास, धर्म और संस्कृति का अनूठा केंद्र है। इस लोकप्रिय गंतव्य के बारे में अखिल विश्व को जानकारी होनी चाहिए। यहाँ जीवन अभी भी प्रकृति की गोद से शुरू होता है। मानव और प्रकृति के बीच सततपोषणीय विकास का संबंध और अवधारणा का यह अद्‌भुत उदाहरण है।


















Dhanu Bihar in association with Shining muskan foundation Indira Gandhi National Centre for the Arts for the Sahitya Akademi Sonal Mansingh Ganga Kumar

Pankaj Dubey Rajesh Ranjan Anantashutosh Dwivedi

Photos from Shashi Tharoor's post 04/01/2026
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