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10/05/2024
06/05/2022

बाबा केदारनाथ धाम 🚩

27/04/2022

वाराणसी में तुलसी घाट से मस्तक पर धारण कर संकट मोचन मंदिर तक लाई गई हनुमान चालीसा
388 वर्ष पुरानी हनुमान चालीसा की पांडुलिपि को तुलसी घाट से मस्तक पर धारण कर संकट मोचन मंदिर तक लाया गया। पांडुलिपि की शोभायात्रा की अगुआई नगर के डमरू दल ने की। तुलसी घाट स्थित गोस्वामी तुलसी दास की शेष स्मृतियों के संग्रहण कोष का अभिन्न अंग बन गई।
वाराणसी, कुमार अजय। किसी सामान्य सांगीतिक आयोजन की संकुचित सीमाओं का बंधन तोड़कर श्री संकट मोचन संगीत समारोह। काशी के सबसे बड़े संपूर्ण सांस्कृतिक महोत्सव के रूप में प्रतिष्ठित हो चुका है। अपनी यात्रा के शतकीय सोपान से महज एक कदम पीछे रह गए इस गरिमामय महोत्सव में सोमवार को अंतिम निशा में देश की सर्वाधिक पुरानी हनुमान चालीसा की भव्य पीठिका प्रतिष्ठा की गई।
388 वर्ष पुरानी हनुमान चालीसा की पांडुलिपि को तुलसी घाट से मस्तक पर धारण कर संकट मोचन मंदिर तक लाया गया। पांडुलिपि की शोभायात्रा की अगुआई नगर के डमरू दल ने की। धरोहरी थाती के संरक्षण के निमित्त आयोजित इस विशेष सत्र में संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वम्भर नाथ मिश्र ने पूजन व आरती के साथ पांडुलिपि का पीठिका रोहण किया। इसी के साथ एक और धरोहर तुलसी घाट स्थित गोस्वामी तुलसी दास की शेष स्मृतियों के संग्रहण कोष का अभिन्न अंग बन गई।
पांडुलिपियों की विशेषज्ञ प्रो. उदय शंकर दुबे के अनुसार हस्तनिर्मित कागज पर काली रोशनाई से अंकित हनुमान चालीसा की यह दुर्लभ प्रति गोस्वामी तुलसी दास के किसी शिष्य द्वारा वर्ष 1734 में अंकित की गई है। उन्होंने करीब एक दशक पूर्व काफी जीर्ण अवस्था में यह पांडुलिपि प्रो. विश्वम्भर नाथ मिश्र को भेंट की थी। प्रो. मिश्र ने इसे इटैलियन पार्चामेंट तकनीक से संरक्षित कराया। अब यह अगले कई सौ वर्षों के लिए संरक्षित हो चुकी है।
इस मंदिर के चारों ओर एक छोटा सा वन है। श्री संकटमोचन हनुमान मंदिर में श्री हनुमान जी की दिव्य प्रतिमा है। ऐसी मान्यता है कि हनुमान जी की यह मूर्ति गोस्वामी तुलसीदासजी के तप एवं पुण्य से प्रकट हुई थी। इस मूर्ति में हनुमान जी दाएं हाथ से भक्तों को अभयदान दे रहे हैं और बायां हाथ उनके ह्रदय पर स्थित है। प्रत्येक कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को सूर्योदय के समय यहां हनुमान जी की विशेष आरती होती है।

Photos from Cholapur BLOCK KI AAWAZ's post 23/03/2022

मशान की होली✨

18/03/2022

Happy holi...

Photos from Cholapur BLOCK KI AAWAZ's post 15/03/2022

रंगभरी एकादशी पर काशी में भोले को लगा पहला गुलाल
काशी में भोले का गौना होने पर उनके भाल पहला गुलाल लगाने की परंपरा का निर्वहन सोमवार को किया गया। भगवान शिव को पहला गुलाल लगाने के बाद काशी पूरी तरह होली के मूड में आ जाती है।
वाराणसी, जागरण संवाददाता। होली 2022 में कई मायनों में अनोखी नजर आ रही है। एक ओर कोरोना संक्रमण का शोर थम चुका है तो दूसरी ओर काशी में सियासी रंग भी अब घुल चुका है। ऐसे में रंगभरी एकादशी के मौके पर काशी में भोले शंकर को पहला गुलाल लगाने की परंपरा का निर्वहन सोमवार को किया गया। इस दौरान तस्‍वीरों में काशी का होलियाना मिजाज भी खूब झलका...
काशी में रंगभरी एकादशी
पूर्व महंत के आवास से गौरा की पालकी यात्रा बाबा दरबार की ओर निकली तो काशी वासी रंगों से सराबोर नजर आए।
शिव और गौरा को अबीर और गुलाल से रंगने के बाद बाबा दरबार में आस्‍था की कतार गुलजार रही। हर हर महादेव का उद्घोष शिव की नगरी में उल्‍लास का पर्याय बना नजर आया।
बाबा की पालकी गुजरी तो हर कोई किनारे मौजूद रहकर पालकी को छूकर आशीर्वाद पाने की कामना करता नजर आया।
पालकी का रास्‍ते भर इंतजार लोगों की भीड़ करती रही और हर हर महादेव का उत्‍साह बाबा की नगरी में दिन भर परवान चढ़ती रही।
वहीं पालकी यात्रा के पूर्व रजत पालकी को सजाकर तैयार किया गया और पालकी को हाथ लगाने वालों की कतार लगातार बढ़ती रही।
पालकी के हिस्‍सों को जोड़कर बाबा दरबार में आस्‍था दिन भर परवान चढ़ती रही और बाबा दरबार में रंगोत्‍सव का उल्‍लास छलकता रहा।पालकी यात्रा के रास्‍ते में डमरू दल हर हर महादेव का उद्घोष कर बाबा की पालकी का इंतजार करता नजर आया।
रास्‍ते में शिव पार्वती की झांकी ने गौरा के गौना विदायी की जीवंत प्रस्‍तुतियां दीं और बाबा के दरबार में आस्‍था एकाकार होती रही।पालकी के आने की आहट हुई तो डमरू की डमडम से पूरी विश्‍वनाथ गली गूंज उठी और बाबा दरबार में आस्‍था का कोई ओर छोर नहीं रहा।
बाबा दरबार तक रंगों का उल्‍लास बिखरा रहा तो बाबा दरबार में डमरू दल की धुन ने लोगों का मन भी मोह लिया।
डमरू दल ने रास्‍ते भर बाबा की पालकी का स्‍वागत किया तो लोगों का उत्‍साह भी चरम पर नजर आया और आस्‍था दिन भर परवान चढ़ती रही।

11/03/2022

स्वामी प्रसाद मौर्य को लेकर भक्तों में विरोध इतना तीव्र था कि
उसी चक्कर मे उनसे मिलते जुलते नाम वाले केशव प्रसाद मौर्य भी निपट गये!! 😉

Photos from Cholapur BLOCK KI AAWAZ's post 10/03/2022
Photos from Cholapur BLOCK KI AAWAZ's post 10/03/2022

2.0

Photos from Cholapur BLOCK KI AAWAZ's post 09/03/2022

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