Purvanchal vikas morcha

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आओ मिलकर करे पूर्वाचंल निर्माण जहाँ श?

03/07/2016

इरफ़ान खान की अगली फिल्म आने वाली है #मदारी. उन्होंने जयपुर में फिल्म का प्रमोशन किया. बात यहां प्रमोशन की नहीं है. बात है उनकी बेबाकी की. उन्होंने वहां ईद-उल-जुहा यानि बकरीद पर अपने ख्यालात पेश किये और हंगामा हो गया.

इरफान खान ने कहा, “कुर्बानी का मतलब अपनी कोई अजीज चीज कुर्बान करना होता है. ये नहीं कि बाजार से आप कोई दो बकरे खरीद लाए और उनको कुर्बान कर दिया.”

इरफान खान ने एक बात और कही जिसके लिए सबको सोचना चाहिए वो भी अपनी भावनाओं को ताक में रखकर. इरफान ने कहा, “हमारे जो भी त्योहार हैं, उनका मतलब हमें वापस से समझना चाहिए कि वे किसलिए बनाए गए हैं. सौभाग्य है कि ऐसे देश में रह रहा हूं जहां हर धर्म का सम्मान होता है.”

बकरीद को लेकर मैंने खुद अपने आसपास कहते और करते देखा है कि जुम्मन मियां दो बकरे लाए हैं. इस बार दो बकरों पर कुर्बानी होगी. अभी जो घर में बैठे असलम मियां ये सुन रहे थे, बड़ी ही गर्मजोशी में बोले, अजी हम क्या जुम्मन से कम हैं ? वो दो बकरे लाए हैं तो हम तीन लाएंगे. बात हमारी ही जमेगी कि असलम के घर तीन बकरों पर कुर्बानी हुई है. तभी कही और जिक्र होता कि अबके असलम के घर जुम्मन से ज्यादा बकरे कुर्बान हो रहे हैं तभी कोई वहां बुजुर्ग बताते. अजी उनकी क्या है दो करें या तीन, खूब हराम की कमाई आ रही है. अब आप ही सोचिये क्या मकसद होता जा रहा है त्योहार का. एक दूसरे को नीचा दिखाने के लिए न जाने कितने बकरे ऐवईं कुर्बान कर दिए जाते हैं. इस सबको देखकर मुझे लगता क्या कुर्बानी अपनी शान दिखाने के लिए है ? या फिर कोई और मकसद है ? सवाल ये भी है कि जिन गरीबों के घर बकरे नही कटते क्या अल्लाह उनका ख्याल नहीं रखता ?

हद तो तब होती थी जब उन तीन बकरों का मीट थोड़ा बहुत ही किसी को दिया जाता था. बाकी सब घर के फ्रिज में, रोजाना करीब 15 दिन तक उसके कबाब बन रहे हैं तो कभी फ्राई किया जा रहा है. लगता कुर्बानी नहीं हुई बल्कि जायके का तड़का लगा है. जबकि होना ये चाहिए कि अपने अलावा ये मीट गरीबों, रिश्तेदारों में बांटा जाता. अब आप ही बताओ ये कौन सी कुर्बानी है. फिर काहे चिल्ला रहे हो इरफ़ान ने भावना को आहत किया है.

अपनी भावना का तो तुम्हे बेहद ख्याल है मगर कभी उसकी भावना का ख्याल किया है, जिसके लिए तुम कहते हो कि अल्लाह के लिए कुर्बानी कर रहे हैं. अल्लाह को तुम्हारी ऐसी कुरबानी की जरूरत नहीं है. नियत सुधार लो नहीं तो सारे बकरे जुम्मन और असलम के चक्कर में बेकार चले जाएंगे. मकसद ये नहीं कि किसी की भावना को आहत किया जाए. सलाह इस बात की है कि हर त्योहार पर गौर और फ़िक्र की जाए. हम जो अपने त्योहारों को बनाते जा रहे हैं, उनका मकसद क्या ये ही है ? सबसे अफ़सोस की बात ये है जब कोई बात करना चाहता है तो उसे गालियों से नवाज दिया जाता है जैसा अब लोग इरफान के साथ करेंगे. बकरे कुर्बान करने से पहले अगर अपनी गालियों को खत्म कर दो तो ये आपके लिए न सही आपके धर्म के लिए सही होगा, जिसके तुम सच्चे आशिक बनते हो. लेकिन तुम क्या हो ये तुम अच्छे से जानते हो. बकरे खरीद कर तो कुर्बान कर सकते हो, क्योंकि वो पैसे से मिल जाते हैं, लेकिन अपनी गलत हरकतों में सुधार नहीं कर सकते, क्योंकि उसमें यकीनन आपको अपने नफ्स की ख्वाहिशों को कुर्बान करना पड़ेगा.

फ्रिज में बकरे काट कर रख देने से दुआए कुबूल नहीं होंगी, वो भी तब, जब आपके पड़ोस या बस्ती में दो वक्त की रोटी का इंतजाम कोई परिवार मुश्किल से कर पाता हो.

और क्या बोले इरफान जिसका हो रहा विरोध ?
इरफान कुर्बानी की साफ नियत तक ही नहीं बोले बल्कि उन्होंने रोजे और मोहर्रम को लेकर भी विवादित बयान दिया. इरफान ने कहा रोजा रखना सिर्फ भूखे रहना नहीं होता, बल्कि आत्मचिंतन करना होता है. मुहर्रम दुःख मनाने वाला है, लेकिन लोगों ने उसे सर्कस बना दिया है. साथ ही मुसलमानों के लिए कहा कि इस्लाम के नाम पर दहशतगर्दी के खिलाफ आवाज क्यों नहीं उठाते.

क्या बोले उलेमा ?
धार्मिक मामलों में इरफान की दखल अंदाजी मुस्लिम धर्मगुरुओं को पसंद नहीं आई. जमीयत उलेमा ए हिन्द ने कहा कि इरफ़ान एक्टर हैं और एक्टिंग करें. धर्म के बारे में न बोलें. जमीयत उलेमा ए हिन्द के स्टेट जनरल सेक्रेटरी मौलाना अब्दुल वाहिद खत्री ने कहा इरफान ये सब पब्लिसिटी के लिए कर रहे हैं. खालिद उस्मानी ने कहा कि इरफान को इस्लाम का ज्ञान नहीं है, इसलिए चुप रहें तो बेहतर है.

02/07/2016

ईस ग्रुप के सभी साथियों को नमस्कार कुछ लोग जब देखो मोदी के विरोध मे लिखते रहते है उनकी गलती निकालते रहते है अच्छी बात है लेकिन मिलता क्या है 5साल के लिए तो मोदी जी को प्रधानमंत्री बना दिया है।लेकिन प्रदेश मे बहुत सारी समस्या है जिसका सामना प्रदेश की आम जनता कर रही है उस समस्याओं को लेकर जनता के बीच चलना पड़ेगा तब जाकर अच्छी राजनीति का अर्थ निकलेगा।। 1-रोजगार के साधन हमारे शहर मे न होना।जिसके कारण यहाँ के युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे प्रदेशों मे जाकर संधर्ष करना पड़ रहा है।
2-अच्छी शिक्षा व्यवस्था नही होने के कारण हमें अपने बच्चों को नोएडा कोटा और बैगलोर भेजना पड़ता है।जो हर किसान के लिए सम्भव नही है ईसलिए कुछ लोग अच्छी शिक्षा से वंचित रह जाते है।। प्राईवेट स्कूल जो कुछ है भी उनकी फीस इतनी मनमानी तरीकों से ली जाती है कि आम जनता बच्चों की फीस के बोझ से ही दबा है।।
3-दवा जो ईतनी महगी है जो प्राईवेट कम्पनी और सरकार का नतीजा है जिससे जनता को मुक्त कराना है।
4-किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिलता और नहीं जनता को सस्ती सामान।क्योंकि बीच मे मुनाफा खोरी का खेल जो है।
और ईन मुद्दों पर कोई भी पार्टी बात नही करती है।

30/06/2016

पूर्वांचल उत्तर प्रदेश के सबसे पिछड़े क्षेत्र मे से एक के है। इसकी वजह जाति मार्गदर्शित राजनीति तथा एक विशाल जनसंख्या है। पूर्वांचल के प्रमुख मुद्दों मे - नागरिक बुनियादी सुविधाओं की कमी, उचित ग्रामीण शिक्षा और रोजगार, अंधकारमय कानून और व्यवस्था, चिंता का प्रमुख कारण है। पूर्वांचल सांस्कृतिक रूप से समृद्ध क्षेत्र है। पूर्वांचल हमेशा उत्तर प्रदेश सरकार तथा भारत की केन्द्रीय सरकार द्वारा नजरअंदाज़ की गई है।

मंगल पांडे इस क्षेत्र से सबसे प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी के एक है। वह पूर्वांचल के सच्चे पुत्र थे। लोकप्रिय संस्कृति में पूर्वांचल "शूरवीरों की भूमि" के रूप में जाना जाता है। हिंदू धर्म और अपनी उपसमुच्चय बौद्ध धर्म और जैन धर्म की उत्पत्ति पूर्वांचल है।

30/06/2016

पूर्वांचल उत्तर-मध्य भारत के एक भौगोलिक क्षेत्र है जो उत्तर प्रदेश के पूर्वी छोर पर स्थित है। यह उत्तर में नेपाल, पूर्व में बिहार, दक्षिण मे मध्य प्रदेश के बघेलखंड क्षेत्र और पश्चिम मे उत्तर प्रदेश के अवध क्षेत्र द्वारा घिरा है। इसे एक अलग राज्य बनाने के लिए एक राजनीतिक मांग की जाती है। उत्तर प्रदेश विधानसभा में 117 विधायक सदस्यों द्वारा प्रतिनिधित्व करता है। इस क्षेत्र से 23 लोकसभा सदस्य चुने जाते हैं।

पूर्वांचल की मुख्यतः तीन भाग हैं- पश्चिम में पूर्वी अवधी क्षेत्र, पूर्व में पश्चिमी-भोजपुरी क्षेत्र और उत्तर में नेपाल क्षेत्र। यह भारतीय-गंगा मैदान पर स्थित है और पश्चिमी बिहार के साथ यह दुनिया में सबसे अधिक घनी आबादी वाला क्षेत्र है। उत्तर प्रदेश के आसपास के जिलों की तुलना में मिट्टी की समृद्ध गुणवत्ता और उच्च केंचुआ घनत्व के कारण कृषि के लिए अनुकूल है। भोजपुरी क्षेत्र में प्रमुख भाषा या बोली है। हालाँकि हिंदी और भोजपुरी के अलावा भी अवधी तथा बघेलखंडी पश्चिमी और दक्षिणी क्षेत्रों में बोली जाती हैं। पूर्व में बिहार राज्य की तरह, एक बड़ी आबादी, धीमी गति से आर्थिक विकास, कृषि यंत्रीकरण तथा चीनी मिलों के बंद होने से बेरोज़गारी में वृद्धि हुई, यह सामाजिक असंतोष का कारण है।

1991 में उत्तर प्रदेश की सरकार ने पूर्वांचल विकास निधि की स्थापना की जिसका उद्देश्य था कि, क्षेत्रीय विकास परियोजनाएं के लिये पैसा जमा करे और अग्रिम संतुलित विकास हो, स्थानीय जरूरतों को पूरा करे तथा क्षेत्रीय असमानताओं निवारण हो। लेकिन भ्रष्ट वितरण माध्यम के कारण परिस्थितिया अभी भी वही हैं। राजनीतिक दलों ने अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति / अन्य पिछड़ा वर्ग / मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति का खेल खेल रहे है, जो क्षेत्र के पिछड़ेपन के पीछे प्रमुख कारण हैं।

30/06/2016

शहीदों की शहादत को नमन करते हुये उनके परिवारिक शोक मे साथ हूँ।
देश का हर नौजवान आपके शहादत का कर्जदार रहेगा...

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