26/01/2026
गणतन्त्रदिवसः शुभाशयाः 💐💐
👏 77वाँ गणतंत्र दिवस
विश्वविद्यालय में 77वें गणतंत्र दिवस का भव्य आयोजन हुआ। माननीय कुलपति जी द्वारा NCC परेड की निरीक्षण पश्चात ध्वजारोहण किया गया तथा उत्कृष्ट कार्य हेतु आचार्य, अधिकारी, कर्मचारी एवं विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।
संगीत विभाग की ध्वजवंदना एवं कुलगीत ने कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की।
जयतु संस्कृतम् | जयतु भारतम् 🇮🇳
Satyajeet Tiwari Kashi वेदोपासकः मिश्रोहम् शिवानन्दः VCSSVVOfficial Sampurnanand Sanskrit Vishvavidyalaya ABP Live Dainik Bhaskar Anand Kumar Jha
12/01/2026
*स्वामी विवेकानन्द की शिक्षायें आज भी राष्ट्रीय चेतना की प्राणवायु : प्रो॰ बिहारी लाल शर्मा*
महान विचारक , युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानन्द जी केवल एक महापुरुष ही नहीं, अपितु भारत की राष्ट्रीय चेतना के जाग्रत प्रतीक थे। उनका सम्पूर्ण जीवन आत्मबल, राष्ट्रगौरव, मानवता एवं सांस्कृतिक स्वाभिमान का विराट उद्घोष है।
स्वामी विवेकानन्द जी की जयन्ती (राष्ट्रीय युवा दिवस) के पावन अवसर पर हमारा मानना है कि “भारत की आत्मा को विश्व-पटल पर प्रतिष्ठित करने का जो युगान्तकारी कार्य स्वामी विवेकानन्द ने किया, वह आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना उनके समय में था”।
1893 के शिकागो धर्म संसद में दिया गया विवेकानन्द जी का ऐतिहासिक भाषण केवल एक आध्यात्मिक उद्बोधन नहीं था, बल्कि वह भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण एवं राष्ट्रीय आत्मविश्वास का उद्घोष था, जिसने गुलामी की मानसिकता से ग्रस्त राष्ट्र को आत्मगौरव का बोध कराया।
स्वामी विवेकानन्द की शिक्षा-परिकल्पना ‘मनुष्य-निर्माण’ पर आधारित थी। वे ऐसी शिक्षा के पक्षधर थे, जो चरित्र निर्माण करे, आत्मविश्वास जगाए और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करे। उनका यह कथन—
“उठो, जागो और लक्ष्य की प्राप्ति तक रुको मत”
आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।
स्वामी विवेकानन्द ने युवा शक्ति को राष्ट्र की सबसे बड़ी ऊर्जा माना। उनके विचारों में युवा केवल आयु की अवस्था नहीं, बल्कि साहस, संकल्प और सेवा की चेतना है। आज जब भारत ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर अग्रसर है, तब विवेकानन्द जी की शिक्षाएँ युवाओं को आत्मनिर्भर, नैतिक एवं राष्ट्रनिष्ठ बनाने की दिशा में पथप्रदर्शक सिद्ध हो सकती हैं।
स्वामी विवेकानन्द की राष्ट्रीय चेतना का मूल आधार भारतीय ज्ञान परम्परा थी, जिसमें वेद, उपनिषद, गीता और सनातन जीवन-दर्शन की सार्वभौमिकता समाहित है। उन्होंने भारत को केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि “जीवित संस्कृति” के रूप में देखा।
सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय जैसे प्राचीन एवं प्रतिष्ठित संस्थान का दायित्व है कि वह स्वामी विवेकानन्द के विचारों को शिक्षा, अनुसन्धान एवं सामाजिक चेतना के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुँचाए। विश्वविद्यालय इस दिशा में निरन्तर प्रयासरत है।
विवेकानन्द जी की जयन्ती केवल स्मरण का दिवस न होकर, उनके विचारों को जीवन में आत्मसात करने का संकल्प-दिवस बने, जिससे राष्ट्र में सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक समरसता एवं आत्मगौरव का नवजागरण हो सके।
12/01/2026
संपूर्ण विश्व में भारतीय संस्कृति, योग और वेदांत का परचम लहराने वाले महान दार्शनिक एवं विचारक
स्वामी विवेकानंद जी की जयंती पर कोटिशः नमन 💐
व राष्ट्रीय युवा दिवस की शुभकामनाएं 💐
03/01/2026
विश्वविद्यालय की परीक्षाएं दिनांक 09.01.2026 से आरंभ होगीं।
Satyajeet Tiwari Kashi Anand Kumar Jha वेदोपासकः मिश्रोहम् शिवानन्दः
19/12/2025
शास्त्री प्रथम एवं आचार्य प्रथम के छात्र अपना परीक्षा फॉर्म 30 के पहले पुरित कर लें