30/09/2024
simple
VARANASI ... about art nd culture Well, I created this page out of the humor I find in VARANASI.
So here's my way of presenting my love for the City of mast malang culture!!!!!!
30/09/2024
simple
29/09/2024
Respect to him ❤️🙏
28/09/2024
12/03/2024
Biggest truth of the universe.. This is the truth behind all lies. This is the truth behind all love. This is life after life 🙏🙏
Devo ke dev mahadev
01/02/2017
लीजिये संकट मोचन के देशी घी का लड्डू
13/01/2017
Bade Hattan se ....... Bhak Kate
09/01/2017
जब ले अमेरिका वाले एके पैक करवा के अॉनलाइन इको फ्रेंडली बता के न बेचीहन इंडिया वाले कभो न मनीहन..
लोग जिन्दगी के मुश्किल फैसले ना जाने कैसे ले लेते हैं हम तो आज तक इसी में कन्फ्युज हैं कि मुढैला, मढौली और महरौली में से सही नाम कौन सा है..
- मंगरु भांग वाले..
25/05/2016
बनारस
इस शहर में वसंत
अचानक आता है
और जब आता है तो मैंने देखा है
लहरतारा या मडुवाडीह की तरफ़ से
उठता है धूल का एक बवंडर
और इस महान पुराने शहर की जीभ
किरकिराने लगती है
जो है वह सुगबुगाता है
जो नहीं है वह फेंकने लगता है पचखियाँ
आदमी दशाश्वमेध पर जाता है
और पाता है घाट का आखिरी पत्थर
कुछ और मुलायम हो गया है
सीढि़यों पर बैठे बंदरों की आँखों में
एक अजीब सी नमी है
और एक अजीब सी चमक से भर उठा है
भिखारियों के कटरों का निचाट खालीपन
तुमने कभी देखा है
खाली कटोरों में वसंत का उतरना!
यह शहर इसी तरह खुलता है
इसी तरह भरता
और खाली होता है यह शहर
इसी तरह रोज़ रोज़ एक अनंत शव
ले जाते हैं कंधे
अँधेरी गली से
चमकती हुई गंगा की तरफ़
इस शहर में धूल
धीरे-धीरे उड़ती है
धीरे-धीरे चलते हैं लोग
धीरे-धीरे बजते हैं घनटे
शाम धीरे-धीरे होती है
यह धीरे-धीरे होना
धीरे-धीरे होने की सामूहिक लय
दृढ़ता से बाँधे है समूचे शहर को
इस तरह कि कुछ भी गिरता नहीं है
कि हिलता नहीं है कुछ भी
कि जो चीज़ जहाँ थी
वहीं पर रखी है
कि गंगा वहीं है
कि वहीं पर बँधी है नाँव
कि वहीं पर रखी है तुलसीदास की खड़ाऊँ
सैकड़ों बरस से
कभी सई-साँझ
बिना किसी सूचना के
घुस जाओ इस शहर में
कभी आरती के आलोक में
इसे अचानक देखो
अद्भुत है इसकी बनावट
यह आधा जल में है
आधा मंत्र में
आधा फूल में है
आधा शव में
आधा नींद में है
आधा शंख में
अगर ध्यान से देखो
तो यह आधा है
और आधा नहीं भी है
जो है वह खड़ा है
बिना किसी स्थंभ के
जो नहीं है उसे थामें है
राख और रोशनी के ऊँचे ऊँचे स्थंभ (स्तम्भ)
आग के स्तम्भ
और पानी के स्तम्भ
धुऍं के
खुशबू के
आदमी के उठे हुए हाथों के स्तम्भ
किसी अलक्षित सूर्य को
देता हुआ अर्घ्य
शताब्दियों से इसी तरह
गंगा के जल में
अपनी एक टाँग पर खड़ा है यह शहर
अपनी दूसरी टाँग से
बिलकुल बेखबर!
07/08/2015
Zinda.......
Aaj maan mei aaya chal dekhe yeh banarak kya h .. kyuon log iski gatha gaate h ..kyoun zikra h inka purano mei kyun sab yanha aate h ... nikal chali mei yahi dhundne kyun milta sukun h kyun milta sukun h ... meine paya kabhi banaras sota nai puri raat bhi vo rounak jo sham dhale hoti h .. subah .. sabhi ghar se nikalte h .. dost ke lia pyar h.. insaniyat h ... har gali mri gunjta mandir ka ghanta aur ajan h .. yeh meri kashi h .. yeh kashi h janha na bhed bhav h .. janha prem apar h keh meri kasi h yeh meri kashi .... bam bam bol raha hai kasi bam bam bol raha h ...