05/09/2025
कॉलेज का लड़का बोला –
"डिग्री है, सपने हैं… पर नौकरी कहाँ है?"
गाँव का किसान बोला –
"खेती है, पसीना है… पर दाम कहाँ है?"
शहर का मजदूर बोला –
"मेहनत है, ईमान है… पर इज़्ज़त कहाँ है?"
और नेता बोला –
"सब ठीक है, बस चुप रहो।"
👉 पर कोई चुप नहीं रहा, सबने मिलकर कहा –
✊
04/09/2025
1. विधवाओं की सुरक्षा का अभाव
पुराने समय में विधवा स्त्रियाँ बहुत असुरक्षित मानी जाती थीं।
समाज में उन्हें "अपशकुनी" समझा जाता था।
परिवार और समाज अक्सर उन्हें बोझ मानते थे।
ऐसे माहौल में "सती" को सम्मानजनक मृत्यु समझा जाने लगा।
2. युद्ध और राजपरिवार
प्राचीन और मध्यकालीन समय में राजा-महाराजाओं के युद्ध लगातार होते थे।
जब राजा युद्ध में मारा जाता था, तो उनकी रानियाँ दुश्मनों के हाथ न पड़ने के डर से जौहर या सती कर लेती थीं।
धीरे-धीरे यह "वीरता और पवित्रता" का प्रतीक बना दिया गया।
3. धार्मिक व्याख्या और कर्मकांड
धर्मग्रंथों की गलत व्याख्या की गई।
कुछ पुजारियों और समाज के ठेकेदारों ने यह फैलाया कि सती होने से महिला और उसके परिवार को "मोक्ष" मिलेगा।
इससे यह एक धार्मिक रस्म बन गई।
4. स्त्री की स्वतंत्रता पर रोक
उस समय समाज पितृसत्तात्मक (पुरुष प्रधान) था।
विधवाओं का पुनर्विवाह लगभग वर्जित था।
ताकि विधवा दोबारा शादी न करे या संपत्ति पर हक न जताए, सती प्रथा को प्रोत्साहित किया गया।
5. सामाजिक प्रतिष्ठा का दबाव
यदि कोई महिला सती होती थी, तो उसका परिवार समाज में "महान" और "पवित्र" माना जाता था।
अगर कोई विधवा सती नहीं होती थी, तो उसे तिरस्कार और अपमान झेलना पड़ता था।
🔹
🔹
🔹
🔹
🔹
🔹
🔹
🔹
07/08/2025
हम कविता नहीं,
ज़माने के चेहरे पढ़ते हैं।