वह परम् शक्ति कभी भी, कहीं भी, किसी भी स्वरूप में अंश अशं और अदम्य स्वरूप में प्रकट होने के लिए सदैव समर्थ थी, समर्थ है; समर्थ रहेगी...
Srvar - श्री रामकृष्ण विवेकानंद आश्रम रतलाम
जीव सेवा ही शिव सेवा है।
आत्मनो मोक्षार्थं जगद्धिताय च
09/25/2021
मुण्डकोपनिषद्
शान्ति पाठ
ॐ भद्रं कर्णेभि: श्रणुयाम देवा
भद्र पश्येमाक्षभिर्यजत्रा:।
स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवांसस्तनूभि-
र्व्यशेम देवहितं यदायु:।।
स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवा:
स्वस्ति न: पूषा विश्ववेदा:।
स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमि:
स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु।।
ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति:।।
हे देवगण! हम कानों से शुभ वचन सुनें तथा नेत्रों से शुभ दर्शन करें। सदैव स्तुतिगान करते हुये हम अपने पुष्ट अंग और स्वस्थ शरीरों द्वारा ईश्वरप्रदत्त आयु को (सब की सेवा करते हुए) पूर्ण रूप से जी सकें। प्रसिद्ध कीर्तिमान इन्द्र, सर्वज्ञ सूर्य (पूषा), संकट से रक्षा करने वाले तार्क्ष्य (गरूड़) तथा बृहस्पति जी (हमें शास्त्र को समझने की बौद्धिक क्षमता एवम् उसके अनुसार आचरण करने का साहस प्रदान कर) हमारा कल्याण करें।
ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति:।
Om! O gods, may we hear auspicious words with the ears; while engaged in Sacrifices, may we see auspicious things with the eyes; while praising the gods with steady limbs, may we enjoy a life that is beneficial to the gods.
May Indra of ancient fame be auspicious to us; may the supremely rich (or all-knowing) pūsā (god of the earth) be propitious to us; may Garuda, the destroyer of evil, be well disposed towards us; may Brhaspati ensure our welfare.
Om! Peace! Peace! Peace!
08/22/2021
*प्रश्नोपनिषद्*
प्रथम प्रश्न
*अहोरात्रो वै प्रजापतिस्तस्याहरेव*
*प्राणो रात्रिरेव रयि: प्राणं वा एते*
*प्रस्कन्दन्ति ये दिवा रत्या संयुज्यन्ते*
*ब्रह्मचर्य तद्यद्रात्रौ रत्या संयुज्यन्ते॥१३॥*
दिन-रात भी प्रजापति हैं। उनमें दिन ही प्राण है और रात्रि ही रयि है। जो लोग दिन के समय रति के लिये [स्त्रीसे] संयुक्त होते हैं वे प्राण की ही हानि करते हैं और जो रात्रि के समय रति के लिये [स्त्रीसे] संयोग करते हैं वह तो ब्रह्मचर्य ही है।
Day and night are verily the Lord of all creatures. Day is surely His prāna and night is certainly the food. Those who indulge in passion during the day, waste away Prāna. That they give play to passion at night is as good as celibacy.
*प्रश्नोपनिषद्*
प्रथम प्रश्न
*मासो वै प्रजापतिस्तस्य कृष्णपक्ष*
*एव रयि: शुक्ल: प्राणस्तस्मादेत*
*ऋषय: शुक्ल इष्टं कुर्वन्तीतर*
*इतरस्मिन् ॥१२॥*
मास ही प्रजापति है। उसका कृष्णपक्ष ही रयि है और शुक्लपक्ष प्राण है। इसलिये ये [प्राणोपासक] ऋषिगण शुक्लपक्ष में ही यज्ञ किया करते हैं तथा दूसरे [अन्नोपासक] दूसरे पक्षमें यज्ञ करते हैं।
The month verily is the Lord of all creatures. The dark fortnight is His food, and the bright His Prāna. Therefore these seers perform the sacrifices in the bright fortnight. The others perform it in the u0906u092a.
15 मार्च 2021 को श्री रामकृष्ण देव की जन्मतिथि के अवसर पर आश्रम में वरिष्ठ सदस्यों के सम्मान समारोह की यह क्लिप उस समय पोस्ट करने से रह गई थी, आज पूराने विडियों देखते हुवें यह पता चला। बहुत महत्वपूर्ण क्लिप लगी तो आज पोस्ट कर रहा हूं...
प्रश्नोपनिषद्
प्रथम प्रश्न
मासो वै प्रजापतिस्तस्य कृष्णपक्ष
एव रयि: शुक्ल: प्राणस्तस्मादेत
ऋषय: शुक्ल इष्टं कुर्वन्तीतर
इतरस्मिन् ॥१२॥
मास ही प्रजापति है। उसका कृष्णपक्ष ही रयि है और शुक्लपक्ष प्राण है। इसलिये ये [प्राणोपासक] ऋषिगण शुक्लपक्ष में ही यज्ञ किया करते हैं तथा दूसरे [अन्नोपासक] दूसरे पक्षमें यज्ञ करते हैं।
The month verily is the Lord of all creatures. The dark fortnight is His food, and the bright His Prāna. Therefore these seers perform the sacrifices in the bright fortnight. The others perform it in the other.
07/26/2021
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