05/31/2024
पुलिसकर्मियों के लिए सदमे से कम नहीं
अनुराधा शंकर सिंह का रिटायर होना...
मध्यप्रदेश में 24 कैरेट की खांटी ईमानदार 1990 बैच की वरिष्ठ महिला आईपीएस अधिकारी अनुराधा शंकर सिंह आज 31 मई 2024 को अपनी सेवाकाल के 34 वर्ष पूरे करने के बाद सेवानिवृत्त हो गई अनुराधा शंकर सिंह मध्यप्रदेश की पहली ऐसी महिला आईपीएस अधिकारी है जो. जहा पर रही, जिस पद पर रही, वहा से उनका तबादला जब भी हुआ तो, विदाई की बेला में उनके शुभ-चिंतकों से ज्यादा उनके अधिनस्थ काम करने वाले पुलिसकर्मियों के आंसू छलक आए और इसलिए क्योंकि वे जहा पर रही वहा पर उन्होंने अपने सहकर्मियों का अपने परिवार के सदस्य की तरह ध्यान रखा। इतिहास गवाह है कि, नौकरशाह कितना भी अर्कमण्य रहा हो, गरीब आदमी को न्याय दिलाने के लिए उसके साथ किसी आईपीएस अधिकारी का नाम सबसे पहले लिया जाएगा तो उसमें नंबर-1 पर अनुराधा शंकर सिंह ही रहेंगी। भ्रष्टाचार में लिप्त किसी कलेक्टर से तो अनुराधा की कभी पटरी ही नहीं बैठी, जिला विदिशा और जिला होशंगाबाद में एसपी के रूप में अनुराधा के कार्यकाल को स्मरण किया जाए तो तत्कालीन कलेक्टरों को रास्ते पर लाने का काम अनुराधा के बस में ही था. इसमें संदेह नहीं है और तो और पुलिस महानिरीक्षक के रूप में इंदौर का कार्यकाल अपने सहकर्मियों के साथ चट्टान की तरह खड़े होने का दृष्टिकोण कोई भी पुलिसकर्मी अनुराधा शंकर सिंह को
भुला नहीं सकता। सूत्रों के अनुसार अनुराधा शंकर सिंह उन ईमानदार महिला आईपीएस अधिकारियों में से एक है, जिन्होंने पुलिस मुख्यालय में एडीजी प्रशासन के रूप में पुलिसकर्मियों के लिए स्वर्णिम समय बनकर काम करने में सफलता पाई है और दुआएं इतनी बटोरी है कि. हर पुलिसकर्मी अनुराधा शंकर सिंह के रिटायरमेंट को एक सदमे की तरह देख रहा है। सूत्रों के अनुसार अनुराधा शंकर सिंह ने ऑन ड्यूटी जिन पुलिसकर्मियों की मृत्यु हुई उनके घरों में पत्र भेज-भेजकर पात्र सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति दिलाने में जो अहम भूमिका निभाई है वह अनुराधा के लिए, किसी नोबल पुरस्कार से कम नहीं है। छोटे-छोटे कर्मचारियों के लिए पुलिस मुख्यालय में न्याय की मूर्ति बनकर काम करना कितना दूभर है, यह सबकों पता है लेकिन कठिनतम से कठिनतम दौर सहकर्मियों की मदद और बुरे से बुरे वक्त में अच्छे पत्रकार के साथ खड़े होने का साहस भी अनुराधा शंकर सिंह में देखा गया है। ईमानदारी और समर्पण भाव से सेवा के बदले में एक दिन के लिए भी वरियता के आधार पर अनुराधा शंकर सिंह को डीजीपी बनाने का साहस दिखा दें तो पूरे पुलिस मुख्यालय में पुलिसकर्मियों को लगेगा कि, जिन्होंने हमारे साथ न्याय किया है उनके साथ भी न्याय हो गया...।

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