14/03/2026
राष्ट्रीय जनजाति भित्ति चित्र एवं मांडणा कला कार्यशाला में विभिन्न राज्यों के 36 कलाकार हिस्सा ले रहे
माणिक्य लाल वर्मा आदिम जाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान (टीआरआई) में शुक्रवार को पांच दिवसीय राष्ट्रीय भित्ति चित्र एवं मांडणा कला कार्यशाला का आगाज हुआ। जनजातीय कार्य मंत्रालय और जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग के मंत्री श्रीमान बाबूलाल खराड़ी ने कहा कि भित्ति चित्र आदिवासी जीवन शैली का अभिन्न हिस्सा हैं।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की कला, संस्कृति और परंपराएं भारतीय संस्कृति को निरंतर प्रेरित करती रही हैं। खराड़ी ने कहा कि आदिवासी समाज सदियों से प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर जीवन जीता आया है और उनकी कला में भी प्रकृति के प्रति गहरा लगाव दिखाई देता है।
उन्होंने कलाकारों से आह्वान किया कि वे अपनी पारंपरिक कला और संस्कारों को जीवंत बनाए रखें तथा नई पीढ़ी तक इस विरासत को पहुंचाने का प्रयास करें। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सांस्कृतिक स्त्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ विनोद नारायण इंदुकर ने की। उन्होंने जनजातीय कलाकारों के संरक्षण और प्रोत्साहन के लिए केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।
श्री इंदुकर ने जनजातीय कला के संरक्षण के लिए जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग के साथ एमओयू करने की आवश्यकता भी जताई। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से शिक्षकों, चिकित्सा कर्मियों और कलाकारों के लिए विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
कलाकारों को स्टाइपेंड और छात्रवृत्ति भी प्रदान की जा रही है। कार्यक्रम में मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के दृश्य कला विभाग के निदेशक प्रो. हेमंत द्विवेदी ने कहा
कि आदिवासी समाज प्रकृति प्रेमी होने के साथ मानव सृष्टि के मूल जनक माने जाते हैं। उन्होंने बताया कि हजारों वर्ष पहले भी आदिवासी अपने परिवेश और अनुभवों को भित्ति चित्रों के माध्यम से अभिव्यक्त करते थे। उन्होंने कलाकारों से इस प्राचीन कला को संरक्षित और समृद्ध बनाने का आह्वान किया।
टीआरआई के निदेशक श्री ओपी जैन ने बताया कि इस कार्यशाला में केरल, बिहार, त्रिपुरा, ओडिशा, महाराष्ट्र और गोवा सहित विभिन्न राज्यों से 35 कलाकार हिस्सा ले रहे हैं। यह कार्यशाला 17 मार्च तक चलेगी, जिसमें विभिन्न राज्यों के कलाकार भित्ति चित्र और मांडणा कला की अपनी-अपनी शैलियों के अनुभव साझा करेंगे।
उन्होंने बताया कि भित्ति चित्र आदिवासी समाज के प्रकृति से जुड़ाव और उनके दैनिक जीवन की गतिविधियों को दर्शाते हैं, जबकि मांडणा कला के माध्यम से त्योहारों और विशेष अवसरों पर घरों के आंगन में पारंपरिक आकृतियां बनाई जाती हैं।
09/11/2025
जनजाति गौरव वर्ष के तहत काष्ठ कला कार्यशाला शुरू, 6 दिन तक रचेंगे मास्टर पीस
धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के मौके पर जनजाति गौरव वर्ष तहत माणिक्य लाल वर्मा आदिम जाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान (टीआरआई) की ओर से राज्य स्तरीय जनजाति काष्ठ कला कार्यशाला शुक्रवार को शुरू हुई। 6 दिन के इस आयोजन में उदयपुर, राजसमंद, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, सिरोही जिले के 25 कलाकार हिस्सा लेने पहुंचे हैं, जो ग्रामीण क्षेत्रों में विलुप्त हो चुके लकड़ी के आइटम तैयार करेंगे। इनमें हल, परात, डोयला (लकड़ी का बड़ा चम्मच), बेलन-बिलोनी, मास्क, देव मूर्तियां आदि तैयार करेंगे।
बदलते दौर में ट्रैक्टर सहित अन्य मशीनों के आ जाने से ग्रामीणों में भी लकड़ी से बने कृषि और किचन के लिए उपयोगी सामान का प्रचलन कम हो गया है। कलाकार अपने गांव से सागवान, हल्दू, अडूसा, नीम, साल, आम, बबूल की लकड़ी खुद लेकर आए है। हर अलग प्रोडक्ट को बनाने के लिए अलग-अलग लकड़ी का उपयोग किया जाता है।
ये कृतियां 15 को डूंगरपुर में राज्य स्तरीय समारोह में प्रदर्शित होंगी
इस कार्यशाला का उद्देश्य जनजातीय परंपराओं का संरक्षण और युवा कलाकारों को पारंपरिक काष्ठ कला की तकनीकों से परिचित कराना है। कार्यशाला में डिम्पल चण्डात, दिलीप कुमार डामोर, डॉ. यशपाल बरण्डा, चन्द्रिका परमार, प्रभुलाल गमेती, प्रवीण बरण्डा, वाडीलाल, नवीन चंद्र, खेमराज डिण्डोर, मांगूसिंह आदि काष्ठ कला के आइटम तैयार करेंगे। जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग के आयुक्त कन्हैया लाल स्वामी, दृश्य कला संकाय के प्रो. हेमंत द्विवेदी ने उद्घाटन किया है। कार्यशाला में तैयार भी सभी आइटम को 15 नवंबर को बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर डूंगरपुर जिले में होने वाले राज्य स्तरीय दिवस कार्यक्रम में प्रदर्शित किए जाएंगे।
09/05/2025
‘‘जनजाति भित्ति चित्रण एवं माण्डना कला‘‘ चार दिवसीय कार्यशाला
माणिक्य लाल वर्मा आदिम जाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान, उदयपुर में जनजातीय कार्य मंत्रालय भारत सरकार, जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग एवं टीआरआई, उदयपुर के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक 25 से 28 मार्च 2025 तक ‘‘जनजाति भित्ति चित्रण एवं माण्डना कला‘‘ चार दिवसीय कार्यशाला का शुभारम्भ हुआ। इस कार्यशाला का उद्देश्य आदिवासी अंचल के कलाकरों की प्रतिभा को दुनिया व समाज के समक्ष लाने व उनके तैयार कलाकृतियों की मार्केट तक पहुंच सुनिश्चित करना था ।
कार्यशाला के उद्घाटन में मुख्य अतिथि श्री मदन सिंह राठौड़, डीन, सामाजिक विज्ञान व मानविकी कॉलेज, मोहनलाल सुखाड़िया विश्व विद्यालय, विशिष्ठ अतिथि श्री रामसिंह भाटी, सह आचार्य, मीरा गर्ल्स कॉलेज, उदयपुर व संस्थान के निदेशक श्री ओ.पी. जैन ने अपने विचार प्रकट किए ।कार्यक्रम में संस्थान के श्री सुधीर दवे (निदेशक,सांख्यिकी), श्री बनवारी लाल बुम्बरिया (सहायक निदेशक सांख्यिकी),कार्यशाला के समन्वयक श्री दिनेश उपाध्याय (कलाकार) भी उपस्थित रहे एवं कार्यक्रम का संचालन श्री हर्षवदन सिंह सोलंकी (व्याख्याता) ने किया।
चार दिवसीय आवासीय कार्यशाला के आखरी दिवस संभागी कलाकारों द्वारा केनवास पर उकेरी गई जनजाति भित्ति चित्रण एवं माण्डना कला की प्रदर्शनी का अवलोकन सुश्री प्रज्ञा केवलरमानी (संभागीय आयुक्त उदयपुर ), श्री शक्तिसिंह राठौड़ (आयुक्त टी.ए.डी. उदयपुर), श्री नमित मेहता (जिला कलक्टर उदयपुर), श्री राहुल जैन (कमिश्नर यू.डी.ए. उदयपुर), श्रीमती ज्योति मेहता (संयुक्त निदेशक,सांख्यिकी) द्वारा अवलोकन किया गया।
Ministry of Tribal Affairs, Government of India
27/02/2025
जनजाति_डिजाइन_स्टूडियों _"बनफूल"_के जनजाति कलाकारों द्वारा बनाई कलाकृतियां ‘इंटरनेशनल_टेम्पल_कन्वेन्शन_एंड_एक्सपो’ तिरुपति, आन्ध्रप्रदेश में प्रदर्शित
‘टेम्पल कनेक्ट’द्वारा दिनांक 17 से 19 फरवरी 2025 तक तिरुपति, आन्ध्रप्रदेश में आयोजित ‘इंटरनेशनल टेम्पल कन्वेन्शन एंड एक्सपो’ जिसे मंदिरों के महाकुंभ के रूप मे भी जाना जाता हैं । इसमें जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग व माणिक्य लाल वर्मा आदिम जाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान राजस्थान, उदयपुर के सांझा प्रयास से संचालित जनजाति डिजाइन स्टूडियों "बनफूल" के जनजाति कलाकार श्री रमेश असोड़ा, श्री प्रवीण बरण्डा, श्री ईश्वर लाल डामोर, सुश्री डिम्पल चण्डात ने हस्तशिल्प एवं कला प्रदर्शनी भाग लिया । इस तीन दिवसीय हस्तशिल्प एवं कला प्रदर्शनी कार्यक्रम में 32 देशों के 1600 से अधिक मन्दिरों के प्रतिनिधि भाग लिया ।
‘इंटरनेशनल टेम्पलस कन्वेन्शन एंड एक्सपो’ में विशिष्ट वक्ता के रूप में सुश्री प्रज्ञा केवलरमानी सम्भागीय आयुक्त, उदयपुर शामिल हुए । इस कला प्रदर्शनी के माध्यम से में इन देशों से जुड़े मन्दिरों के प्रतिनिधि देश के विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों द्वारा बनाई स्थानीय हस्तशिल्प एवं कला से रूबरू हुए , साथ कलाकारों का अपनी हस्तशिल्प एवं कला को प्रदर्शित करने व बढ़ावा देने के लिए अंतर्राष्ट्रीय मंच प्राप्त हुआ ।
बनफूल कलाकारों द्वारा जनजाति संस्कृति एवं परंपरा से जुड़ी कलाकृतिओं की काफी सराहा गया । प्रदर्शनी में इन जनजाति कलाकारों द्वारा बनाई गई कलाकृतियों की बिक्री हुई ।
इस तीन दिवसीय हस्तशिल्प एवं कला प्रदर्शनी कार्यक्रम में टीआरआई से सहयोगी अधिकारी के रूप में श्री सुधीर दवे निदेशक (सा.) ने इस प्रदर्शनी में भाग लिया ।
23/01/2025
माणिक्यलाल वर्मा अनुसूचित जनजाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान तथा माय मिशन-नि:शुल्क कोचिंग के संयुक्त तत्वावधान में आरएएस एवं अधीनस्थ सेवाओं में भर्ती हेतु प्रारंभिक परीक्षा के पैटर्न पर ऑफलाइन टेस्ट दिनांक 15-01-2025 , 20-01-2025 को संपन्न हुआ।
श्री ओमप्रकाश जैन (निदेशक TRI) के मार्गदर्शन में हुए इस टेस्ट में अभ्यर्थियों को आरपीएससी के मानदंडो के अनुरूप ही अभ्यर्थियो को परीक्षा कक्षा में प्रवेश दिया गया। टेस्ट पेपर भी सिलेबस के अनुरूप बनाया गया। निर्धारित मानदंडो का अनुसरण करते हुए पाठ्यक्रम के सभी क्षेत्रों से सभी स्तर के प्रश्नों का समावेश करने का प्रयास किया गया।इन मॉक टेस्ट के संयोजक संजय लुणावत प्राचार्य है।
आगामी 24 जनवरी और 28 जनवरी को इसी तरह अशोक नगर स्थित टीआरआई परिसर में आरएएस प्रारंभिक परीक्षा की तैयारी बाबत टेस्ट पेपर आयोजित होंगे।
सहायक निदेशक बनवारी लाल बुम्बरिया संपर्क कर आगामी टेस्ट सीरीज में शामिल हो सकते हैं।
13/11/2024
आदिवासी महिलाओं की परंपरागत मांडना कला से आजीविका बढ़ाने पर होगे व्यापक प्रयास : जनजाति आयुक्त
5 दिवसीय जनजाति मिनी पेंटिग कार्यशाला का समापन
जो कला अभी तक घर के आंगन, दीवारों पर आदिवासी समुदाय खुद के लिए बनाता आया है उससे अब बाहर की दुनिया रूबरू हो रही है। कोटड़ा की महिलाएं मिट्टी व परंपरागत रंगो से लेकर फेब्रिक कलर तक पहुंच रही है, यह अपने आप में गौरवशाली बात है। यह बात आयुक्त महोदया प्रज्ञा केवलरमानी, जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग द्वारा टी.आर.आई. में आयोजित 5 दिवसीय (6 अगस्त 2024 से 10 अगस्त 2024 ) जनजाति मिनी पेंटिग कार्यशाला के समापन पर कही।
कोटड़ा आदिवासी संस्थान और टी.आर.आई. के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित इस कार्यशाला में 16 कोटड़ा की भील और गरासिया समुदाय की महिलाओं ने भागीदारी की। परंपरागत मांडना कला को छोटी पेंटिग पर उकेरने का काम इन महिलाओ द्वारा किया गया।
इस कार्यशाला में महिलाओ द्वारा फोल्डर पर डिजाईन बनाने, बुक मार्क, ग्रीटिंग्स कार्ड, फ्रेम साइज पेंटिग, डायरी के लिए कवर पेज तैयार किए गए। उन्होंने बताया की इनका उपयोग सरकारी दफ्तरों, कंपनियों, संस्थाओं के कार्यक्रमों में किया जा सकेगा। साथ ही किसी को उपहार देने के लिए भी इन्हे खरीदा जा सकता है।
आदिवासी कला अलिखित है उसे सदैव चित्रों, गीतों व नृत्यों के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है,परंतु अभी यह लुप्त हो रही है। इस कार्यशाला के माध्यम से इसे पुनर्जीवित करने का एक सुंदर प्रयास किया गया है