14/01/2026
Kanhaiya Kumar Jha
Never give up, your time will come.
14/01/2026
उदासी
मन क्यों उदास है
ये जानना क्या जरूरी है
ये कैसा सवाल है ?
जिसका ढेरों जवाब है !
चलो जवाब देखते हैं.......
आज पिता के साया को उठे 14 साल पूरे हुए
जीवन की रेस को जीतने का प्रयास जारी है
क्या ये प्रयास सही है !
अब पाँव नहीं लड़खड़ाते हैं
हाँ कभी कतरा आँसू का आ जाता है।
परिवार में सब का प्रेम मिलता है
मगर टूटने पर खुद को बटोरना पड़ता है
परिवार के लिए,आंसू छुपाने पड़ते हैं
मन मारकर मुस्कुराना पड़ता है।
एक व्यक्ति भी प्रेम का सागर बनकर आया,
मर्यादाओं की सीमा ने उसे भी दूर किया !
वो भी प्रेम में है,
ये ऐहसास प्रतिदिन का है।
उसने भी खुद को अलग रखने के कई ढोंग किया,
लेकिन कर नहीं पा रहा है
वैसे, उदासी का कारण समय भी है
ये कैसे बताऊँ ?
मेरे उदासी का कारण उषाकाल भी है
ये कैसे बताऊँ ?
----- कन्हैया कुमार झा -----
उसकी तस्वीर ओझल सी है मन में,
क्यों मेरा दिल उसके "साथ"होने का अहसास करता है ?
----कन्हैया कुमार झा----
"गुफ्तगू"
चलो आज गुफ्तगू करते हैं......
मैं हूँ, तुम हो और ये सावन
बरखा भी थोड़ी सहमी हुई है
शायद सावन नाराज है,
खैर,तुम चाय को फूँक कर पियो,
और मैं छाछ को।
हूँ, क्यों परेशान हो तुम ?
मुझे पता है
तुम्हारी रूह पुकारता है किसी को!
बात कर लो शायद बात बन जाए।
चलो आज गुफ्तगू .............।
क्यों तुम्हारा अहं बाँध रहा तुम्हें
चलो अपने रूह की सुनो
मुझे पता है तुम भी उसे याद करते हो
खुद को उषा बना कर उसे भी रौशन कर दो।
चलो आज गुफ्तगू ............।
भाव मिले तो दिल मिले
दिल मिले तो जीवन,
जमाना फिदा है
कागज की नोट और ज्ञान की रसीद पर
तुम तो दिल की सुनो
क्यों राड़ ठाणे हो ?
चलो आज गुफ्तगू ..............।
वो नहीं कहेगा आत्मसम्मान के कारण,
ठुकराकर उसे,खुद को माफ कर पाओगे ?
अगर हाँ !
तो उसके साथ कि गईं रुसवाईयों के लिए,
उसको बता दो की तुम वो नहीं थी,
झूठ ही सही पर वो खुश होगा ।
वो भूल नहीं सकता है तुझे,
Goodbye बोलने से तुमने ही रोका है।
चलो आज गुफ्तगू खत्म करते हैं,
मैं हूँ, तुम हो...............।
आज बैठा था फुर्सत में,
कुछ रुसवाईयों को याद किये।
भूल गया सब कुछ,
जब वो याद आये।
---- कन्हैया कुमार झा----
प्रेम
जीवन श्रृंगार भी है,
प्रेम में व्यापार भी है।
जीवन स्थिर भी है,क्यों ?
कुछ कारण तो प्रेम भी है।
जीवन की तलाश तो है....
पर शर्त है कि.........
प्रेम एवं सम्मान के लिए
किसी से भीख माँगना....
अपराध तो है।
प्रेम अभी भी है राधे,
वो अधिकार तो है।
कोई हक ना दे तो क्या,
प्रेम में..... संसार तो है।
मेरा गौरव मेरा स्वाभिमान तो है।
तू , तू व्यर्थ की ना सोच ,राधे.....
वक्त है,वक्त है,वक्त है,
प्रेम, फीकी पकवान थोड़ी है।
व्याकुल मन की शीतलता है ,प्रेम
तेरी, तेरी कायरता का आधार भी तो है।
भौतिकता का प्रमाण..... छी: प्रेम नहीं है,
प्रेम, जीवन का आधार भी तो है।
----कन्हैया कुमार झा----
इस दौर के लोगों में,वफा ढूंढ रहे हो तुम ?
जहर की शीशी में शायद,दवा ढूंढ रहे हो तुम।
----बासुकीनाथ झा----
"घमंड है"
रूप हुआ रंज है,
मुख प्रचंड है।
उमंगों का संग है,
इस बात का घमंड है।
नयनों में नीर है,
दिल में लगी तीर है।
रूढ़ियों की फौज से,
निकला फिर शोर है।
मन में व्यंग्य है,
नयनों में रंग है।
यादों का साथ है,
फिर क्या बात है।
वस्तु नहीं मन है,
भौतिक पसंद है।
हँस रहा प्रेम है,
गरीब देख दंग है।
----कन्हैया कुमार झा----
"क्यों"
क्यों हतास है,
क्यों प्यास है ?
तू प्रेम की लौ नहीं,
तू प्रेम की मशाल है।
जहाँ रूढ़ियों की फौज,
वहाँ प्रेमियों की मौज है।
जहाँ प्रकृति खुशहाल है,
वहाँ तू क्यों उदास है।
तू प्रेम की...........
है पैरों में बेड़ियाँ
उस बेड़ियों को तोड़ दे,
है मंजिलें बहुत बड़ी
तू रुग्णता को छोड़ दे।
तू प्रेम की.............
तू आत्मा को जान ले
इस धरा का मान ले,
तू प्रेम की मिसाल है
किस बात का मलाल है।
तू प्रेम की............।
------ कन्हैया कुमार झा------
जिन्दगी बता तेरा फलसफा क्या है
आज कैद है,कल आजाद क्यों है ?
--- कन्हैया कुमार झा---
