19/03/2026
बाँदा कृषि एवं प्रॉद्योगिक विश्वविद्यालय बाँदा में अनुसूचित जाति उपयोजना के अंतर्गत गत दिवस Date. 18.03.2026 को स्थानीय अ.जा. किसानों के लिए कृषि आदानों के वितरण कार्यक्रम में शामिल हुए ICAR-IIPR,SCSP योजना के नोडल ऑफिसर डॉ टी एन तिवारी, श्री लखन वर्मा सहा•मुख्य तकनीकी अधिकारी, अ.जा. उपयोजना के क्रियान्वयन को नजदीक से परखा।
कृषि आदानों यथा -स्टोरेजबिन, स्प्रेयर मशीन, सिचाई पाइप एवं पशु आहार आदि के वितरण कार्यक्रम का आयोजन निदेशक कृषि प्रसार-बाँदा कृषि एवं प्रोद्योगिक विश्वविद्यालय डॉ एन के बाजपेई जी द्वारा किया गया। इस अवसर पर मेरे द्वारा इस योजना के और बेहतर क्रियान्वयन के लिए अपने विचार रखे गए साथ ही इस क्षेत्र में दलहनी फसलों के अधिक उत्पादन के लिए आवश्यक नवीन कृषि तकनीकों को अपनाकर क्षेत्रफल एवं उत्पादकता बढ़ाने हेतु आवश्यक दिशा निर्देश भी दिए गए। कृषि आदानों के वितरण कार्यक्रम के दौरान अ.जा. कृषकों से लिए जाने वाले दस्तावेज/अभिलेख और वितरण संबंधी अन्य सावधानियों को बरतने को लेकर श्री लखन वर्मा ने भी अपने विचार रखे।
निदेशक कृषि प्रसार BUAT बाँदा डॉ एन के बाजपेई जी ने सभी अतिथियों और किसान भाइयों का स्वागत किया। कार्यक्रम का आयोजन बेहद सफल रहा,लाभार्थी किसान कृषि आदानों को प्राप्त कर बेहद ख़ुश हुए।
13/03/2026
The ICAR–IIPR HRD-sponsored ten-day training programme on “Biochemical Characterization of Seed Components” was inaugurated on 9th March 2026 at the Training Centre, ICAR–IIPR, Kanpur. The programme was chaired by The Director, ICAR-IIPR, Dr. G P Dixit accompanied by Project Coordinators and Heads of different divisions of the institute.
12/03/2026
कृषि खाद्य प्रणाली में महिलाओं की भागीदारी पर वैश्विक सम्मेलन (GCWAS-2026) का उद्घाटन आज नई दिल्ली में हो रहा है। भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू, केन्द्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की उपस्थिति में, 3 दिन के कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन करेंगी। कृषि में बदलाव लाने वाली महिलाओं के साथ इस जश्न का आयोजन किया जाएगा। महिलाएं वैश्विक खाद्य प्रणाली की रीढ़ हैं। आइए में उनकी लीडरशिप तथा नवाचार का जश्न मनाएं। कृषि खाद्य प्रणाली में महिलाओं को सशक्त बनाने का मतलब है भविष्य के लिए खाद्य सुरक्षा को सशक्त करना। जब महिलाएं कृषि में आगे बढ़ती हैं, तो समुदाय तरक्की करता हैं साथ ही खाद्य प्रणाली आगे बढ़ता है। खेतों से लेकर योजना निर्माण मंच तक—महिलाएं खेती का भविष्य को आकार दे रही हैं। जब महिलाएं कृषि खाद्य प्रणाली में आगे बढ़ती हैं तो नवाचार और सुदृढ़ होता है। दुनिया भर में कृषि को नया आयाम देन वाली महिला वैज्ञानिक, किसानों, उद्यमी तथा लीडर्स का जश्न। टिकाऊ तथा मज़बूत कृषि खाद्य प्रणाली हासिल करने हेतु महिलाओं की भागीदारी ज़रूरी है। वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए खेती में लैंगिक समानता को आगे बढ़ाना आवश्यक है।
महिलाएं पूरी कृषि-खाद्य मूल्य श्रृंखला में तरक्की ला रही हैं। सशक्त महिला किसानों का मतलब है मजबूत खाद्य प्रणाली तथा मजबूत अर्थव्यवस्थाएं। आइए, दुनिया भर में कृषि एवं खाद्य प्रणाली में महिलाओं की आवाज़ को बुलंद करें। नवोन्मेषी महिलाएं, तकनीकी तथा लचीलेपन से कृषि में बदलाव ला रही हैं। कृषि का भविष्य - सबको साथ लेकर चलना, सतत् एवं महिलाओं के नेतृत्व वाला है। कृषि एवं विज्ञान से जुड़े सभी बाधाओं को तोड़ने वाली महिला लीडर्स के साथ जश्न मना रहे हैं। महिलाएं, कृषि में टिकाऊ विकास तथा बदलाव की उत्प्रेरक के रूप में जानी जाती हैं।
कृषि-खाद्य प्रणालियों में लैंगिक समानता सिर्फ निष्पक्षता नहीं है - यह एक स्मार्ट अर्थशास्त्र है। महिलाएं भोजन, पोषण तथा टिकाऊपन का भविष्य निर्माण कर रही हैं। अनुसंधान प्रयोगशाला से लेकर ग्रामीण कृषि तक, महिलाएं खेती को नए रूप में परिभाषित कर रहीं हैं। नवाचार, लीडरशिप और लचीलापन—महिलाएं दुनिया भर में कृषि खाद्य प्रणाली को बदल रहीं हैं।
आइए, वैश्विक कृषि को आकार देने वाली महिला किसानों तथा वैज्ञानिकों के योगदान का जश्न मनाएं। महिला किसानों को मज़बूत बनाने से खाद्य सुरक्षा के साश-साथ गांव की रोज़ी-रोटी कमाने के साधन भी मज़बूत होती है। जलवायु-अनुकूल खाद्य प्रणाली के लिए कृषि में महिलाओं का नेतृत्व जरूरी है। समावेशी कृषि विकास लैंगिक समानता से शुरू होता है। दुनिया भर में, महिलाएं खेती में बदलाव ला रही खेती में महिलाओं को सपोर्ट करने का मतलब है टिकाऊ विकास को सपोर्ट करना। महिला सशक्तिकरण मज़बूत खाद्य प्रणाली की नींव है। ज़मीनी स्तर से लेकर वैश्विक लीडरशिप तक—महिलाएं कृषि-खाद्य व्यवस्था के रूपांतरण को आगे बढ़ा रही हैं। महिलाएं कृषि-खाद्य क्षेत्र में नवोन्मेषी, उद्यमी तथा लीडर हैं।
कृषि एवं खाद्य प्रणाली को बदलने में महिलाओं की क्षमता का जश्न मनाना है। महिलाओं की लीडरशिप टिकाऊ खेती की दिशा में विकास की गति को और तेज़ करता है। एक ज़्यादा समावेशी कृषि खाद्य प्रणाली महिलाओं को सशक्त बनाने से शुरू होता है। वैश्विक खाद्य सुरक्षा हासिल करने में महिला किसान महत्वपूर्ण साझीदार हैं। कृषि एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं के महत्वपूर्ण योगदान को पहचानना। महिला वैज्ञानिक कृषि के साथ-साथ अनुसंधान एवं नवाचार को आगे बढ़ा रही हैं। हम सब मिलकर खेती के लिए लैंगिक-समावेशी भविष्य का निर्माण कर सकते हैं। कृषि में महिलाओं का सशक्तिकरण नवाचार और लचीलेपन को बढ़ावा देता है। आइए, कल के कृषि खाद्य प्रणाली को आकार देने वाली महिला लीडर्स को आगे बढ़ाएं। टिकाऊ कृषक समुदायों बनाने के लिए महिलाओं की भागीदारी ज़रूरी है। सबको साथ लेकर चलने वाले कृषि खाद्य प्रणाली महिलाओं तथा समुदायों, दोनों के लिए अवसर निर्माण करते हैं।
महिलाएं अपने ज्ञान, नवाचार तथा लीडरशिप से कृषि को बदल रही हैं। सतत् विकास लक्ष्यों (SDGs) को पाने के लिए कृषि में महिलाओं को सशक्त बनाना ज़रूरी है।
महिलाओं की लीडरशिप खेती में नवाचार एवं टिकाऊपन को मज़बूत करती है।
महिला किसान दुनिया भर में खाद्य सुरक्षा की प्रमुख आधार हैं।
कृषि में लैंगिक समानता से मज़बूत और अत्यधिक टिकाऊ खाद्य प्रणाली का निर्माण होता है। उन महिलाओं का जश्न मनाना जो दुनिया भर के कृषि खाद्य प्रणाली में बदलाव लाने हेतु उन्हें प्रेरित करती हैं। महिलाएं कृषि, विज्ञान एवं नवाचार के भविष्य को आकार दे रही हैं। कृषि में महिलाओं को सपोर्ट करने का मतलब है सभी के बेहतर भविष्य को सपोर्ट करना। महिलाओं की आवाज़ कृषि खाद्य से जुड़े योजनाओं एवं फ़ैसलों के केन्द्र में होनी चाहिए। महिला नेतृत्व वैश्विक कृषि परिदृश्य को बदल रहा है। समावेशी कृषि की शुरुआत महिलाओं एवं लड़कियों को मज़बूत बनाने से होती है। महिला उद्यमी कृषि खाद्य प्रणाली में नए अवसर का निर्माण कर रही हैं। टिकाऊ कृषि के निर्माण में महिलाओं की भूमिका को पहचानना है। महिला किसान दुनिया के लिए भोजन उपलब्ध कराने में एक महत्वपूर्ण साझीदार हैं। लैंगिक समावेशी नवाचार से खेती में तरक्की होती है।
महिलाएं टिकाऊ तथा जलवायु-अनुकूल कृषि को उपनाने हेतु आगे बढ़ रही हैं। महिला किसानों को मज़बूत बनाने से गांव की खुशहाली एवं मज़बूती बढ़ती है। महिला लीडर वैश्विक खाद्य प्रणाली का भविष्य गढ़ रही हैं।
दुनिया भर में कृषि एवं खाद्य प्रणाली में महिलाओं की उपलब्धियों का जश्न मनाना। टिकाऊ भविष्य के लिए कृषि खाद्य प्रणाली को बदलने में महिलाएं अहम भूमिका निभाती हैं। सशक्त महिला किसान मजबूत समुदाय एवं अर्थव्यवस्था का निर्माण करती हैं। महिला इनोवेटर्स दुनिया भर में कृषि में बदलाव ला रही हैं। आइए, ऐसे समावेशी कृषि-खाद्य प्रणाली बनाएं, जहां, महिलाएं आगे बढ़ें।
महिलाएं टिकाऊ कृषि की ओर आगे बढ़ रही हैं। खेती में महिलाओं को सपोर्ट करने का मतलब है हमारे खाद्य भविष्य को सुरक्षित करना। मज़बूत एवं टिकाऊ खाद्य प्रणाली के लिए महिलाओं का सशक्तिकरण ज़रूरी है। दुनिया भर में महिलाएं कृषि में नवाचार ला रही हैं।विज्ञान, कृषि तथा खाद्य प्रणाली में महिलाओं के योगदान को पहचानना। आइए, हम सब मिलकर कृषि के भविष्य निर्माण करने वाली महिला लीडर को आगे बढ़ाएं।
05/03/2026
On 5th March, let’s celebrate the birthday of Hon’ble Union Minister Shri Shivraj Singh Chouhan as “Prem-Seva Sankalp Diwas” 🌱
No hoardings. No bouquets.
Just plant a tree and serve Mother Earth.
The best birthday wishes are those that benefit society and nature. 🌿
This 5th March, plant a tree and join the green mission inspired by Shri Shivraj Singh Chouhan.
Let’s pledge for a greener tomorrow.
A birthday dedicated to nature and service 🌱
Join the movement. Plant a tree. Share your photo. Become a Shiv Vriksh Mitra and receive your certificate.
03/03/2026
स्प्रिंग समर सीजन में बोआई के लिए उन्नाव के आदर्श दलहन ग्रामों (इनायतपुर बर्रा, प्रतापखेड़ा, मक्काखेड़ाऔर गहा खेड़ा) के किसानों को मूंग और उर्द की उन्नत प्रजाति का बीज वितरित किया गया
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अनुसूचित जाति उपयोजना के अंतर्गत जनपद उन्नाव के औरास ब्लॉक के आदर्श दलहन ग्राम इनायतपुर बर्रा, प्रतापखेड़ा, मक्काखेड़ा और गहा खेड़ा के अनुसूचित जाति के कुल 96 कृषकों को आज बुधवार दि. 02.03.2026 को संस्थान परिसर में संस्थान के निदेशक मा. डा.जीपी दीक्षित सर के कुशल मार्गदर्शन में नोडल ऑफिसर अनुसूचित जाति उपयोजना डॉ टी एन तिवारी द्वारा मूंग व उर्द की उन्नत प्रजाति का बीज वितरण किया गया।
बीज वितरण उपपरांन्त किसानों दलहनी फसलों में उर्वरकों का प्रयोग और खरपतवार नाशी दवाओं की प्रयोग विधि बताई गयी तथा अन्य फसलोपयोगी क़ृषि से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां देकर उन्हें जागरूक किया गया।
बीज वितरण का व्यवस्थित तरीके से क्रियान्वयन कराने में मौलिक विज्ञान विभाग के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी श्री लखन वर्मा का सहयोग रहा।
25/02/2026
स्प्रिंग समर सीजन में बोआई के लिए रायबरेली के आदर्श दलहन ग्रामों (टांडा, महारानीखेड़ा और शेषपुर समोधा के किसानों को मूंग और उर्द की उन्नत प्रजाति का बीज वितरित किया गया
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अनुसूचित जाति उपयोजना के अंतर्गत जनपद रायबरेली के बछरावां ब्लॉक के दलहन ग्राम टांडा, शेषपुर समोधा और महारानीखेड़ा के अनुसूचित जाति के कुल 103 कृषकों को आज मंगलवार दि. 24.02.2026 को संस्थान परिसर में संस्थान के निदेशक मा. डा.जीपी दीक्षित सर के कुशल मार्गदर्शन में नोडल ऑफिसर अनुसूचित जाति उपयोजना डॉ टी एन तिवारी द्वारा मूंग व उर्द की उन्नत प्रजाति का बीज वितरण किया गया।
बीज वितरण उपपरांन्त किसानों दलहनी फसलों में उर्वरकों का प्रयोग और खरपतवार नाशी दवाओं की प्रयोग विधि बताई गयी तथा अन्य फसलोपयोगी क़ृषि से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां देकर उन्हें जागरूक किया गया।
बीज वितरण का व्यवस्थित तरीके से क्रियान्वयन कराने में मौलिक विज्ञान विभाग के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी श्री लखन वर्मा का सहयोग रहा।
25/02/2026
Farmers from Nagaland visited Technology Park at ICAR-IIPR, Kanpur on 24 February 2026
19/02/2026
अनुसूचित जाति उपयोजना के अंतर्गत भोपाल और आस-पास के ज़िलों के किसानों को सीड बिन और बैटरी से चलने वाला स्प्रे पंप बांटा गया।
18/02/2026
स्प्रिंग समर सीजन में बोआई के लिए बाराबंकी और औरैया के आदर्श दलहन ग्रामों के किसानों को मूंग और उर्द की उन्नत प्रजातियों का बीज वितरित किया गया
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अनुसूचित जाति उपयोजना के अंतर्गत जनपद बाराबंकी के फतेहपुर ब्लॉक के दलहन ग्राम सादुल्लापुर, पारादीपू रसूलपुर, मौथरी और औरैया जनपद के ब्लॉक भाग्यनगर अंतर्गत दलहन ग्रामों सुजानपुर, लुखरपुरा के अनुसूचित जाति के कुल 167 कृषकों को आज बुधवार दि. 18.02.2026 को संस्थान परिसर में संस्थान के निदेशक मा. डा.जीपी दीक्षित सर के कुशल मार्गदर्शन में सह-नोडल ऑफिसर अनुसूचित जाति उपयोजना डॉ देवराज मिश्र द्वारा मूंग व उर्द की उन्नत प्रजातियों का बीज और मूंग की ज़ैविक उर्वरक Rhizobium Mungbean और Urdbean की 100 मि.ली. की एक-एक बोतल प्रति किसान को वितरण किया गया।
बीज वितरण उपपरांन्त किसानों जैव उर्वरक की प्रयोग विधि बताई गयी तथा अन्य फसलोपयोगी क़ृषि से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां देकर उन्हें जागरूक किया गया।
बीज वितरण का व्यवस्थित तरीके से क्रियान्वयन कराने में मौलिक विज्ञान विभाग के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी श्री लखन वर्मा का सहयोग सराहनीय रहा।
17/02/2026
National launch of Bharat Vistaar (Phase-1) on 17th Feb., 2026 in Jaipur, Rajasthan by the Hon'ble Union Minister Agriculture and Farmer Welfare Shri Shivraj Singh Chauhan ji in the presence of the Hon'ble Chief Minister of Rajasthan Shri Bhajanlal Sharma ji. Total 81 farmer participants ( 22 females and 59 males) participated in the event virtually (live telecast) at ICAR -IIPR, Kanpur.
17/02/2026
रबी सीजन में बोआई के लिए किसानों को मूंग बीज की उन्नत प्रजाति का बीज वितरित किया गया
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अनुसूचित जाति उपयोजना के अंतर्गत जनपद कानपुर के अनुसूचित जाति कृषकों को आज मंगलवार दि. 17.02.2026 को भारत विस्तार के ऐतिहासिक शुभारम्भ के अवसर पर केंद्रीय कृषि मंत्री के सम्बोधन उपरांत संस्थान परिसर में संस्थान के निदेशक मा. डा.जीपी दीक्षित सर के कुशल मार्गदर्शन में सह-नोडल ऑफिसर अनुसूचित जाति उपयोजना डॉ देवराज मिश्र द्वारा मूंग बीज की उन्नत प्रजाति "शिखा"का बीज, साथ ही मूंग की ज़ैविक उर्वरक Rhizobium Moongbean की 100 मिली की एक-एक बोतल प्रति किसान को वितरण किया गया।
बीज वितरण उपपरांन्त किसानों को फसलोपयोगी क़ृषि से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां देकर उन्हें जागरूक किया गया।
बीज वितरण का व्यवस्थित तरीके से क्रियान्वयन कराने में मौलिक विज्ञान विभाग के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी श्री लखन वर्मा का सहयोग सराहनीय रहा।
11/02/2026
2026
National Conference on Pulses ( 2026) is being jointly organized by ISPRD and ICAR-IIPR, Kanpur during 10-12 Feb., 2026 at ICAR-IIPR, Kanpur
भाकृअनुप- भारतीय दलहन अनुसन्धान संस्थान में विश्व दलहन दिवस दिनांक 10 फ़रवरी, 2026 को “पल्सेस, प्लेनेट एंड पीपल : सस्टेनेबल लाइवलीहुड एंड न्यूट्रिशनल सिक्योरिटी अंडर चेंजिंग क्लाइमेट सिनेरियो” (10-12 फ़रवरी) विषय पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन करते हुए समारोहपूर्वक मनाया गया I
इस अवसर पर डॉ. मंगला राय, पूर्व सचिव,डेयर एवम महानिदेशक, भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद्, अध्यक्ष एवं डॉ. त्रिलोचन महापात्रा, चेयरपर्सन, पीपीवी एवं एफआरए, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे, साथ ही डॉ एस के चतुर्वेदी, अध्यक्ष, आईएसपीआरडी भी उपस्थित रहे I तीन दिवसीय इस राष्ट्रीय संगोष्ठी के विभिन्न सत्रों में वैज्ञानिक गण दलहन से जुड़े तमाम विषयों पर विमर्श करेंगे I
वैज्ञानिकों का आवाहन करते हुए मुख्य अतिथि डॉ. त्रिलोचन महापात्रा ने संस्थान की उपलब्धियों की प्रशंसा की एवँ वर्तमान निदेशक डॉ जी.पी.दीक्षित द्वारा किये जा रहे कार्यों /उपलब्धियों की विशेष सराहना करते हुए कहा कि आपके कुशल नेतृत्व में संस्थान में शोध कार्य सुचारू रूप से चल रहा है और कहा कि हम जिस प्रकार योजनाबद्ध तरीके से शोध कर रहे हैं, आने वाले समय में दलहन में आत्मनिर्भरता की दिशा में अच्छे परिणाम की आशा कर सकते हैं I
संस्थान के निदेशक डॉ निदेशक डॉ जी.पी.दीक्षित ने सभी महानुभावों का संस्थान में स्वागत करते हुए कहा कि यह संस्थान के लिए गौरव के क्षण हैं I आपने बताया कि अन्तर्राष्ट्रीय संस्थानों एवम राष्ट्रीय कार्यक्रमों के अन्तर्गत दलहनों पर चल रही विभिन्न परियोजनाएं अत्यंत लाभप्रद रही हैं और उनसे उन्नत प्रजातियों, तकनीकी तथा मानव संसाधनों की दिशा में काफी सफलता मिली है और हम किसानों के लिए ज्यादा से ज्यादा उन्नतशील बीज उपलब्ध करने की दिशा में सतत प्रयास कर रहे हैं I अभी हाल में ही हमने विकसित कृषि संकल्प अभियान के अंतर्गत दलहनी खेती कर रहे किसानों से व्यापक संपर्क अभियान चलाया और वर्तमान स्थिति का पर्याप्त आंकड़ा एकत्र किया है, पिछले दिनों सरकार द्वारा दलहन पर राष्ट्रीय मिशन लॉन्च किया गया है जिसके तहत कई महत्वपूर्ण शोध प्रस्ताव संस्थान द्वारा तैयार किये गये हैं और हमने इस दिशा में पर्याप्त प्रयास किये हैं I
इस अवसर पर दलहन पर उत्कृष्ट शोध कार्य कर रहे वैज्ञानिकों को आईएसपीआरडी द्वारा पुरस्कृत किया गया, साथ ही संस्थान द्वारा प्रकाशित एक स्मारिका एवं कुछ अन्य प्रकाशनों – माइक्रोबियल टेक्नोलॉजीज फॉर ग्रेन लेग्यूम्स और हैंडबुक ऑन पेस्टिसाइड यूजेज इन पल्सेस का मुख्य अतिथि द्वारा विमोचन किया गया I धन्यवाद प्रस्ताव डॉ नरेंद्र कुमार, सचिव आईएसपीआरडी द्वारा किया गया I कार्यक्रम का संचालन डॉ मीनल राठोर, प्रधान वैज्ञानिक एवं डॉ रेखारानी वैज्ञानिक द्वारा किया गया I