08/03/2026
तरुण वाली कहानी फ़र्ज़ी है??
ये आधी अधूरी ख़बर है …. माफ़ी किसी ने नही मांगी… लड़ाई गुब्बारे की वजह से ही हुई है लेकिन इन दोनों घरों में पहले से लड़ाई चल रही थी। ये लोग 60 साल से ज़्यादा से एक दुसरे के साथ पड़ोस में रहते हैं कभी कभी बीच में भी लड़ाई होती थी जैसे पड़ौसी के बीच होती है
होली वाले दिन पूरे दिन लड़ाई हुई। रात को ये लड़का जिम से लड़के लेकर आया ख़ूब लड़ाई हुई। मुस्लिम पक्ष के 4,5 लोग बुरी तरह से घायल हैं। 1 लड़का जिसकी उम्र 13 साल है सफदरजंग में भर्ती है ICU में। 1,2 लोगों की पसलियां टूटी हैं।
जो मरा है वो ही जिम से लड़के लेकर आया था। इन्होंने हमला किया था। लेकिन इसके सर पर लग गयी और ये वही गिर गया। जिम के लड़के भाग गए। जब दोनों तरफ़ से लड़ाई होती है तो ऐसा ही होता है।
उसके बाद घर को लूट लिया गया। मुसलिम परिवार के घर में आग लगा दी गई।
ये जो पोस्टें हो रही हैं ये एकतरफ़ा कहानी है जो संघीयों द्वारा गढ़ी हुई हैं ॥
18/03/2020
#वो_मुसलमानों_से_बहुत_डरता_था
वो मुसलमानों से बहुत डरता था
हालांकि उसे शाहरुख़ खान बहुत पसंद था
उसके गालों में घुलता डिम्पल
और उसकी दीवाली की रिलीज़ हुई फ़िल्में भी
दिलीप कुमार यूसुफ़ है, वो नहीं जानता था
उसकी फिल्में भी वो शिद्दत से देखता था
वो उनसे नहीं डरता था
बस मुसलमानों से डरता था
वो इंतज़ार करता था आमिर की क्रिसमस रिलीज़ का
और सलमान की ईदी का
गर जो ब्लैक में भी टिकट मिले
तो सीटियाँ मार कर देख आता था
वो उनसे नहीं डरता था
बस मुसलमानों से डरता था
वो मेरे साथ इंजीनियर बना
विज्ञान में उसकी दिलचस्पी इतनी कि
कहता था कि अब्दुल कलाम की तरह
मैं एक वैज्ञानिक बनना चाहता हूँ
और देश का मान बढ़ाना चाहता हूँ
वो उनसे नहीं डरता था
बस मुसलमानों से डरता था
वो क्रिकेट का भी बड़ा शौक़ीन था
ख़ासकर मंसूर अली खान के नवाबी छक्कों का
मोहोम्मद अज़हरुद्दीन की कलाई का
ज़हीर खान और इरफ़ान पठान की लहराती हुए गेंदों का
कहता था कि ये सारे जादूगर हैं
ये खेल जाएं तो हम हारें कभी न पाकिस्तान से
वो उनसे नहीं डरता था
बस मुसलमानों से डरता था
वो नरगिस और मधुबाला के हुस्न का मुरीद था
उन्हें वो ब्लैक एंड व्हाईट में देखना चाहता था
वो मुरीद था वहीदा रहमान की मुस्कान का
और परवीन बाबी की आशनाई का
वो उनसे नहीं डरता था
बस मुसलमानों से डरता था
वो जब भी दुखी होता था तो मुहम्मद रफ़ी के गाने सुनता था
कहत था कि ख़ुदा बसता है रफ़ी साहब के गले में
वो रफ़ी का नाम कान पर हाथ लगाकर ही लेता था
और नाम के आगे हमेशा लगाता था साहब
अगर वो साहिर के लिखे गाने गा दें
तो ख़ुशी से रो लेने का मन करता था उसका
वो उनसे नहीं डरता था
बस मुसलमानों से डरता था
वो हर छब्बीस जनवरी को अल्लामा इकबाल का
सारे जहाँ से अच्छा गाता था
कहता था कि अगर
गीत पर बिस्मिल्ला खान की शहनाई हो
और ज़ाकिर हुसैन का तबला
तो क्या ही कहने !
वो उनसे नहीं डरता था
बस मुसलमानों से डरता था
उसे जब इश्क़ हुआ तो लड़की से
ग़ालिब की ग़ज़ल कहता
फैज़ के चंद शेर भेजता
उन्ही उधार के उर्दू शेरों पर पर मिटी उसकी महबूबा
जो आज उसकी पत्नी है
वो इन सब शायरों से नहीं डरता था
बस मुसलमानों से डरता था
बड़ा झूठा था मेरा दोस्त
बड़ा भोला भी
वो अनजाने ही हर मुसलमान से
करता था इतना प्यार
फिर भी न जाने क्यों कहता था, कि वो
मुसलमानों से डरता था
वो मुसलमानों के देश में रहता था
ख़ुशी ख़ुशी, मोहोब्बत से
और मुसलमानों के न जाने कौन से मोहल्ले में
अकेले जाने से डरता था
दरअसल
वो भगवान् के बनाए मुसलमानों से नहीं डरता था
शायद वो डरता था, तो
सियासत, अख़बार और चुनाव के बनाए
उन काल्पनिक मुसलमानों से
जो कल्पना में तो बड़े डरावने थे
लेकिन असलियत में ईद की सेंवईयों से जादा मीठे थे।।
22/01/2020
मुनव्वर राणा साहब की दोनो बेटियों पर CAA के ख़िलाफ़ प्रोटेस्ट करने की वजह से एफ़आईआर हुई है मगर हौसला बुलंद है.
दिल से सलाम है इस जज़्बे को
21/01/2020
खुली छतों के दिए कब के बुझ गए होते !
कोई तो है जो हवाओं के पर कतरता है !!
.
..
21/01/2020
मोबाइल का उपयोग सेल्फी के बजाए कौम को जागरूक
करने के लिए कीजिए
क्योंकि अपने देश की मीडिया बिक चुकी हैं 😔😔😔
Hindu muslim Ekta zindabad
05/01/2020
नकाबपोश गुंडों द्वारा जेएनयू के छात्रों और शिक्षकों पर किया गया क्रूर हमला चौंकाने वाला है। इसमें कई छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। आज देश को फासीवादी ताकतें चला रहीं हैं, जो बहादुर छात्रों की आवाज से डरती हैं। जेएनयू में आज की हिंसा उसी डर का उदाहरण है।
02/01/2020
#फ़ैज़_अहमद_फ़ैज़
जिन दिनों फ़ैज़ साहब निर्वासन की ज़िंदगी गुज़ार रहे थे, तो किसी तीसरी दुनिया के मुल्क से गुज़रते हुए पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के एयरपोर्ट पर उतर गए, वहां पर मौजूद इमीग्रेशन वालों ने कहा कि क्योंकि आप पाकिस्तानी हैं और पाकिस्तानी सिर्फ दिल्ली और मुम्बई एयरपोर्ट के रास्ते से ही इंडिया में दाखिल हो सकते हैं इसलिए हम आपको यहां से अंदर नहीं आने देंगे।
इस पर #फ़ैज़_साहब ने कहा कि आप अपने
#मुख्यमंत्री_ज्योति_बसु_जी को फोन मिला दें श्र
इमीग्रेशन वालों ने ज्योति बसु को फोन मिला दिया। ज्योति बसु ने कहा कि मैं तुरंत फ़ैज़ साहब आपको लेने खुद एयरपोर्ट पर आ रहा हूँ।
ज्योति बसु साहब एयरपोर्ट पहुँच गए और वहां मौजूद इमीग्रेशन वालों से कहा "फ़ैज़ साहब किसी एक मुल्क के शायर नहीं हैं इनके लिए हिन्दुस्तान के सभी एयरपोर्ट के दरवाजे खुले हैं" और फिर ये तो उनके विचारधारा वाले स्टेट का एयरपोर्ट है यहाँ आने से उन्हें वैसे भी कोई रोक नहीं सकता।
ये सुलूक हुआ फ़ैज़ साहब का भारत में क्योंकि फ़ैज़ जितना पाकिस्तान के थे उतना हिंदुस्तान के। फ़ैज़ के लिए सरहद मायने नहीं रखती। क्योंकि ‘फ़ैज़ अहमद फ़ैज़’ हुस्न, मोहब्बत, इंसानी दोस्ती, अदल-ओ-इंसाफ़ का मसीहा और जुर्रत-ए-इज़हार का दूसरा नाम है।
#इंक़लाब_आकर_ही_रहेगा_इंशाअल्लाह
✍️ वरिष्ठ लेखक Majid Majaz साहब