Astrologer Jyotsana Deeptrashim Professional Services

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29/07/2025

समय मिले तो आज अपने इष्ट श्रीकृष्ण की प्रसन्नता के लिए उनकी परम से भी परम भक्तिमति तथा शिव जी की प्रिय शिष्या ( जिनका नाम मनसा देवी है )
उन देवी जरत्कारु ( मनसा ) का यह स्तोत्र आज अवश्य जपें। चूंकि यह स्तोत्र इन्द्र कृत है अतः किसान लोगों को यह स्तोत्र आज कम से कम 11 बार जपना चाहिए ऐसा करने से वे इन्द्र आपकी फसलों पर आये हुए विघ्न भी दूर कर डालते हैं तथा जो भी मात्र एक बार पढ़ता है उस पर सालभर सर्पबाधा नहीं आती।
यह स्तोत्र हमारी पुस्तक महादेवी स्तोत्र संग्रह के अध्याय 53 में भी है ( कल के श्रीमनसा 12 नामो का अध्याय 54 है ) ।
पुरन्दर उवाच-
देवि त्वां स्तोतुमिच्छामि साध्वीनां प्रवरां वराम् ।
परात्परां च परमां न हि स्तोतुं क्षमोऽधुना ॥
स्तोत्राणां लक्षणं वेदे स्वभावाख्यानतत्परम् ।
न क्षमः प्रकृते वक्तुं गुणानां तव सुव्रते ॥
शुद्धसत्त्वस्वरूपा त्वं कोपहिंसाविवर्जिता ।
न च शप्तो मुनिस्तेन त्यक्तया च त्वया यतः ॥

त्वं मया पूजिता साध्वि जननी मे यथादितिः ॥
दयारूपा च भगिनी क्षमारूपा यथा प्रसूः ।
त्वया मे रक्षिताः प्राणाः पुत्रदारा: सुरेश्वरि।।
अहं करोमि त्वां पूज्यां प्रीतिश्च वर्धते मम ।
नित्यं यद्यपि त्वं पूज्या भवेऽत्र जगदम्बिके ।
तथापि तव पूजां च वर्धयामि च सर्वतः ।
ये त्वामाषाढसंक्रान्त्यां पूजयिष्यन्ति भक्तितः ॥
#पञ्चम्यां मनसाख्यायामिषान्तं वा दिने दिने । पुत्रपौत्रादयस्तेषां वर्धन्ते च धनानि वै ॥
यशस्विनः कीर्तिमन्तो विद्यावन्तो गुणान्विताः ।
ये त्वां न पूजयिष्यन्ति निन्दन्त्यज्ञानतो जनाः ।
लक्ष्मीहीना भविष्यन्ति तेषां नागभयं सदा ।
त्वं स्वर्गलक्ष्मीः स्वर्गे च वैकुण्ठे कमला-कला ॥ नारायणांशो भगवान् जरत्कारुर्मुनीश्वरः ।
तपसा तेजसा त्वां च मनसा ससृजे पिता ॥
अस्माकं रक्षणायैव तेन त्वं मनसाभिधा।
मनसा देवितुं शक्ता स्वात्मना सिद्धयोगिनी ॥
तेन त्वं मनसादेवी पूजिता वन्दिता भवे ।
ये भक्त्या मनसां देवाः पूजयन्त्यनिशं भृशम् ॥
तेन त्वां मनसादेवीं प्रवदन्ति मनीषिणः ।
सत्यस्वरूपा देवी त्वं शश्वत्सत्त्वनिषेवया ॥
यो हि यद् भावयेन्नित्यं शतं प्राप्नोति तत्समम् ।
इन्द्रश्च मनसां स्तुत्वा गृहीत्वा भगिनीं च ताम् ॥
स्वभवनं प्रजगाम भूषावासपरिच्छदाम्।
( ब्रह्म वैवर्त पुराण प्रकृतिखण्ड अध्याय ४६ )

हिन्दी मे अर्थ लिखने के लिए अभी समय नहीं पर आप आज पाठ अवश्य करें और अर्थ के लिए कमेन्ट में फोटो खींच कर डाल रहे हैं।

पुस्तक- अक्षयरुद्र अंशभूतशिव की संकलित पुस्तक महादेवी स्तोत्र संग्रह अध्याय 53-54 में भी है जो Telegram group मे निशुल्क पीडीएफ फाइल रूप में उपलब्ध है ही।

हरियाली तीज पर करें यंत्र का निर्माण #astrojyotsana#astrosolutions#video #viral 27/07/2025

https://youtube.com/shorts/bJJ2UpzQOVU?si=_WwguMi9XeAAFygu

शिव की कृपा होगी
मिलेगा मां पार्वती का आशीर्वाद
जब मनाएं मिलकर सब हरियाली
तीज का त्योहार
हरियाली तीज की आप सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाये 💐💐

Regards:
Jyotsana Srivastava

Astrologer from
Ayodhya UP

हरियाली तीज पर करें यंत्र का निर्माण #astrojyotsana#astrosolutions#video #viral

26/07/2025

आजकल बहुत से लोग ज्योतिष को बहुत ही आसान समझ बैठते हैं। सोचते हैं - कुंडली देखी, ग्रह देखा, और बस फलादेश कर दिया। कोई भाव में कोई ग्रह है, बस उसके सामान्य से परिणाम पढ़ लिए और उपाय शुरू कर दिए। पर क्या ज्योतिष इतना आसान है?

नहीं… बिल्कुल नहीं।

ज्योतिष में लग्न से किसी व्यक्ति का व्यक्तित्व बताना आसान हो सकता है। उसके मानसिक और शारीरिक बल का अनुमान लगाना भी संभव है। लेकिन सबसे कठिन होता है - सटीक फलादेश करना।
और यही वह बिंदु है, जहाँ से सच्चा ज्योतिष शुरू होता है।

आज की दुनिया में जब AI और कंप्यूटर इतनी तेज़ी से गणनाएँ कर लेते हैं, तब भी ये मशीनें एक सटीक भविष्यवाणी नहीं कर पातीं। क्यों?
क्योंकि फलादेश केवल गणित नहीं है…
ये एक जाग्रत चेतना से निकलती सूक्ष्म अंतर्दृष्टि है।

तो फिर मुश्किल क्या है?
किसी ग्रह के फल केवल इस बात पर निर्भर नहीं करते कि वह किस राशि या नक्षत्र में है।
उसके पीछे एक पूरा ब्रह्मांड छिपा होता है -

वो ग्रह किस अंश पर है?

कौन सी दशा चल रही है?

कौन सा कारक ग्रह है?

कौन किसे देख रहा है?

किसके साथ युति में है?

क्या गोचर का प्रभाव है?

और कितनी ही अदृश्य लेकिन गूढ़ स्थितियाँ उस फल को प्रभावित करती हैं।

यानी एक ही ग्रह… एक ही भाव… लेकिन अनगिनत फल।
और यहीं से ज्योतिष एक साधना बन जाती है।

तो फिर कोई फलादेश करता कैसे है?
सच कहें तो - हर कोई नहीं कर सकता।
किसी एक सूत्र से किसी जातक का भविष्य तय कर देना सबसे बड़ी भूल होती है।

एक सच्चे ज्योतिषी को -

निरंतर अध्ययन करना होता है,

अलग-अलग कुंडलियों पर प्रयोग करना होता है,

सूत्रों को आत्मसात करना होता है,

और सबसे जरूरी - अपने अंतर्मन को फलादेश की प्रेरणा से जोड़ना होता है।

ज्योतिष केवल गणना नहीं है।
यह संवेदना और अंतर्दृष्टि की विद्या है।
जहाँ गणना तो एक आधार बनती है, लेकिन फल वहां से निकलता है जहां बुद्धि मौन होती है और चेतना जाग्रत होती है।

यही कारण है कि जब मेरे पास कोई ज्योतिष सीखने की जिज्ञासा लेकर आता है, तो उसे मैं अध्ययन के साथ ध्यान साधना की सलाह भी देता हूँ। क्यूँ की आपका अध्ययन चाहे कितना भी गहरा क्यूँ ना हो, फलादेश केवल अंतर्मन से ही निकलेगा।

क्यों नहीं कर सकता AI ज्योतिष?

क्योंकि AI के पास आँकड़े हैं, अनुभव नहीं।
AI के पास सूत्र हैं, अंतःप्रेरणा नहीं।
AI गणना कर सकता है, लेकिन अनुभूति नहीं कर सकता।

मेरे विचार में :
फलादेश करना केवल सूत्रों की तोड़-मरोड़ नहीं है। ये एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें -

अनुभव,

अध्ययन,

आत्मनिरीक्षण,

और एक सजग अंतःकरण की ज़रूरत होती है।

ज्योतिष एक विज्ञान भी है और साधना भी।
जिसे समझने के लिए केवल पढ़ना नहीं,
बल्कि जीना पड़ता है।

और यही कारण है कि सच्चे फलादेशकर्ता कभी पुस्तक में नहीं, एक साधक के भीतर जन्म लेते हैं।

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25 मई से 3 जून तक नौतपा का प्रकोप दान पुण्य का सुनहरा अवसर प्राप्त हो रहा है।

29/04/2025

🚩साल का अद्भुत दिन🚩 अक्षय तृतीय 30 April 2025

खीर का भोग माँ लक्ष्मी विष्णु जी को लगा के सभी लोग खाये प्रसाद पूरे दिन कृष्ण राधा का ध्यान भजन जाप करे सभी लोग... विष्णु सहस्त्रनाम yubtube पे लगा के सुन ले। 12:15 से 1.30 दोपहर मे शुक्र का होरा है इस समय मां लक्ष्मी जी का नाम जाप करके प्रार्थना करो सुख समृधि बनी रहे हम सभी पर।

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✍️ Jyotsana Deeptrashim
Astrologer
Ayodhya UP

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