03/06/2026
भारतीय साहित्य व संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्द्धन को समर्पित राष्ट्रीय संस्था !! https://www.youtube.com/c/NationalWritersCulturalForum
03/06/2026
02/06/2026
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नव सृजन - 283
मंगलवार, 2 जून 2026
विषय : साइकिल व बाइसिकल
समय : प्रातः 11 बजे से रात्रि 9 बजे तक
नोट: नव सृजन क्रमांक एवं अंत में अपना नाम अवश्य लिखें। गद्य अथवा पद्य में अधिकतम दो रचनाएँ भेजी जा सकती हैं। चयनित रचनाएँ "स्पंदन – हृदय से हृदय तक" में प्रकाशित की जाएँगी।
••●●•●•●●••• सुप्रभात •••●●•●•●●••
क्लिक! क्लिक! कैमरों की चमक, मोबाइलों की सेल्फियाँ और सोशल मीडिया पर त्वरित प्रसारण का दौर है। समाचार चैनलों के संवाददाता, स्थानीय पत्रकार, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन, उत्साही नागरिक, युवा और बच्चे—सभी साइकिलों पर सवार होकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने निकल पड़े हैं। कुछ कदम साइकिल चलाते ही कैमरे मुस्कुरा उठते हैं और तस्वीरें अगले ही क्षण डिजिटल संसार में पहुँच जाती हैं।
विश्व पर्यावरण दिवस के स्वागत में यह उत्साह निश्चित ही सराहनीय है, परन्तु प्रश्न यह भी है कि क्या साइकिल केवल एक दिवस का उत्सव बनकर रह जाए? कुछ ही देर बाद अधिकांश लोग अपनी मोटरबाइकों और कारों की ओर लौट जाते हैं। पीछे रह जाती हैं कतारबद्ध साइकिलें, जिन्हें आयोजक पुनः समेटकर सुरक्षित रखने लगते हैं। मानो साइकिल स्वयं कह रही हो—"मेरा सम्मान केवल तस्वीरों में नहीं, जीवनशैली में होना चाहिए।"
सच तो यह है कि साइकिल केवल दो पहियों वाला वाहन नहीं, बल्कि मानव सभ्यता की सबसे उपयोगी, सरल और पर्यावरण-अनुकूल खोजों में से एक है। इसी महत्व को रेखांकित करने हेतु प्रतिवर्ष 3 जून को विश्व साइकिल दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र ने 2018 में इस दिवस को मान्यता प्रदान की, ताकि विश्व समुदाय को यह संदेश दिया जा सके कि साइकिल एक स्वच्छ, सस्ती, स्वास्थ्यवर्धक और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था का श्रेष्ठ माध्यम है।
आज जब महानगर धुएँ, शोर और यातायात जाम की समस्या से जूझ रहे हैं, तब साइकिल एक आशा की किरण के रूप में दिखाई देती है। यह न पेट्रोल माँगती है, न डीज़ल और न ही किसी प्रकार का प्रदूषण फैलाती है। यह हमें गंतव्य तक पहुँचाने के साथ-साथ स्वास्थ्य भी प्रदान करती है।
आज की आधुनिक और आकर्षक साइकिल लगभग दो शताब्दियों के विकास का परिणाम है। इसकी यात्रा अत्यंत रोचक रही है।
सन् 1817 में जर्मनी के आविष्कारक कार्ल वॉन ड्राइस ने पहली बार लकड़ी से निर्मित बिना पैडल वाली साइकिल बनाई। इसे ड्रैसीन अथवा हॉबी हॉर्स कहा गया। इसे चलाने के लिए सवार को अपने पैरों से जमीन को पीछे धकेलना पड़ता था।
इसके बाद फ्रांस के पियरे मिकॉक्स और उनके पुत्र ने अगले पहिए में पैडल जोड़कर एक नया प्रयोग किया। 1860 के दशक में बनी यह साइकिल वेलोसिपीड या बोनशेकर कहलायी। इसके लोहे के पहिए और कठोर ढाँचे के कारण सवारी करना किसी चुनौती से कम नहीं था।
1870 के दशक में पेनी-फार्थिंग नामक साइकिल लोकप्रिय हुई, जिसमें आगे का पहिया बहुत बड़ा और पीछे का छोटा होता था। यद्यपि इसकी गति अधिक थी, परन्तु संतुलन बनाए रखना कठिन था और दुर्घटनाएँ सामान्य बात थीं।
सन् 1885 के आसपास जॉन केम्प स्टार्ली ने आधुनिक साइकिल की नींव रखी। दोनों पहियों को समान आकार देकर तथा चेन प्रणाली के माध्यम से पिछले पहिए को शक्ति प्रदान कर उन्होंने सेफ्टी बाइसिकल का निर्माण किया। इसके बाद जॉन बॉयड डनलप द्वारा वायुभरे रबर टायरों के आविष्कार ने साइकिल को अधिक आरामदायक और तेज बना दिया।
लकड़ी से आरम्भ हुई यह यात्रा लोहे, स्टील, एल्युमिनियम और आज कार्बन फाइबर तक पहुँच चुकी है। वर्तमान में माउंटेन बाइक, रोड बाइक, हाइब्रिड बाइक, रेसिंग बाइक और इलेक्ट्रिक साइकिल जैसी अनेक उन्नत श्रेणियाँ उपलब्ध हैं।
भारत के सामाजिक और आर्थिक विकास में साइकिल का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। एक समय था जब किसी घर में साइकिल होना समृद्धि का प्रतीक माना जाता था। गाँवों में शिक्षक, डाकिया, स्वास्थ्यकर्मी, किसान और विद्यार्थी साइकिल के माध्यम से अपनी दैनिक यात्राएँ करते थे।
कई पीढ़ियों की स्मृतियों में पिता की साइकिल के आगे डंडे पर बैठकर विद्यालय जाना, खेतों तक पहुँचना, मित्रों के साथ सैर करना और गिरते-पड़ते साइकिल सीखना आज भी जीवंत है। साइकिल केवल वाहन नहीं, बल्कि बचपन की मधुर स्मृतियों का अभिन्न हिस्सा रही है।
भारत के अनेक राज्यों में छात्राओं को साइकिल वितरण योजनाओं ने शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन किया है। इससे दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों की बालिकाओं को विद्यालय तक पहुँचने में सुविधा मिली और उनकी शिक्षा जारी रखने में सहायता मिली।
नीदरलैंड को विश्व की साइकिल राजधानी कहा जाता है। वहाँ लगभग प्रत्येक नगर में अलग साइकिल मार्ग, पार्किंग व्यवस्था और सुरक्षित यातायात संस्कृति विकसित की गई है। डेनमार्क के कोपेनहेगन नगर में बड़ी संख्या में लोग प्रतिदिन साइकिल से कार्यस्थलों तक पहुँचते हैं।
चीन में सार्वजनिक साइकिल शेयरिंग प्रणाली अत्यंत लोकप्रिय है, जबकि यूरोप के अनेक देशों ने साइकिल को शहरी परिवहन का महत्वपूर्ण अंग बना लिया है।
भारत में भी अब अनेक शहर साइकिल ट्रैक और सार्वजनिक साइकिल व्यवस्था की दिशा में प्रयास कर रहे हैं, किन्तु अभी बहुत कुछ किया जाना शेष है।
चिकित्सकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार नियमित साइकिल चलाना सम्पूर्ण शरीर के लिए लाभदायक है। इससे हृदय स्वस्थ रहता है, रक्तचाप नियंत्रित होता है, मधुमेह का जोखिम घटता है और शरीर की सहनशक्ति बढ़ती है।
साइकिल चलाने से—
- हृदय और फेफड़े मजबूत होते हैं।
- शरीर का अतिरिक्त वजन कम होता है।
- मांसपेशियाँ और हड्डियाँ सुदृढ़ बनती हैं।
- तनाव और अवसाद में कमी आती है।
- मानसिक प्रसन्नता एवं आत्मविश्वास बढ़ता है।
- शरीर में सकारात्मक हार्मोनों का स्राव बढ़ता है।
अर्थात् साइकिल शरीर को सक्रिय और मन को प्रफुल्लित रखने का सरल उपाय है।
आज पृथ्वी ग्लोबल वार्मिंग, प्रदूषण और ऊर्जा संकट जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय में साइकिल एक ऐसी मित्र है जो न धुआँ छोड़ती है, न शोर करती है और न ही प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन करती है।
यदि छोटी दूरी के लिए लोग साइकिल का उपयोग बढ़ाएँ तो ईंधन की बचत, प्रदूषण में कमी और स्वस्थ समाज का निर्माण संभव है। आवश्यकता केवल जागरूकता और उपयुक्त सरकारी व्यवस्थाओं की है। सुरक्षित साइकिल ट्रैक, पार्किंग स्थल और साइकिल-अनुकूल यातायात नीति समय की माँग है।
साइकिल हमें केवल चलना नहीं सिखाती, बल्कि जीवन का गहन दर्शन भी समझाती है। साइकिल तब तक संतुलित रहती है जब तक वह गतिशील रहती है। रुकते ही गिरने का खतरा बढ़ जाता है। जीवन भी कुछ ऐसा ही है—निरंतर प्रयास, निरंतर कर्म और निरंतर प्रगति ही संतुलन बनाए रखती है।
साइकिल के दो पहिए हमें जीवन और परिवार के दो महत्वपूर्ण पक्षों की याद दिलाते हैं—कर्तव्य और संबंध। दोनों में संतुलन आवश्यक है। किसी एक के कमजोर पड़ने पर यात्रा कठिन हो जाती है।
हम सभी ने बचपन में साइकिल सीखते समय अनेक बार गिरकर उठना सीखा है। शायद यही साइकिल का सबसे बड़ा संदेश है—गिरना असफलता नहीं, पुनः उठकर आगे बढ़ना ही सफलता है।
आइए, विश्व साइकिल दिवस के अवसर पर केवल स्मृतियों को ही नहीं, बल्कि साइकिल के प्रति अपने व्यवहार को भी नया आयाम दें। स्वास्थ्य, पर्यावरण और संतुलित जीवन की दिशा में एक छोटा-सा कदम उठाएँ। संभव है कि यही छोटा कदम भविष्य की बड़ी सकारात्मक यात्रा का प्रारम्भ बन जाए।
तो आइए, सृजन के माध्यम से साइकिल की यादों, अनुभवों, उपयोगिता और जीवन-दर्शन को शब्दों में पिरोने का प्रयास करें।
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मोहनलाल जाँगिड़
नेशनल राइटर्स एंड कल्चरल फोरम (NWCF), आगरा
01/06/2026
🌹 मेरे प्रिय NWCF परिवार के आत्मीय परिवारीजनों, 🌹
आज जब "नेशनल राइटर्स एंड कल्चरल फोरम" (NWCF) अपनी सातवीं वर्षगाँठ पूर्ण कर आठवें वर्ष में प्रवेश कर रहा है, तब आप सभी के स्नेहिल संदेश पढ़ते हुए मेरा हृदय भावनाओं से भर उठा है।
सच कहूँ तो आज मैं किसी संस्थापक की तरह नहीं, बल्कि इस परिवार के एक सदस्य की तरह आप सबसे संवाद कर रहा हूँ।
प्रातः से अब तक प्राप्त प्रत्येक शुभकामना, प्रत्येक कविता, प्रत्येक गीत, प्रत्येक संस्मरण और प्रत्येक आशीर्वचन ने मन को भीतर तक स्पर्श किया है। कई संदेश पढ़ते समय मुस्कान आई, कई बार पुरानी स्मृतियाँ आँखों के सामने तैर उठीं और कुछ क्षण ऐसे भी आए जब आँखें सचमुच नम हो गईं।
सात वर्ष पहले जब इस मंच की शुरुआत हुई थी, तब यह कल्पना भी नहीं थी कि एक दिन यह मंच देश-विदेश में फैले इतने आत्मीय लोगों का परिवार बन जाएगा। उस समय यह केवल एक सपना था, लेकिन आज आप सभी के प्रेम ने उसे एक सुंदर यथार्थ बना दिया है।
इन सात वर्षों में हमने केवल रचनाएँ नहीं लिखीं; हमने रिश्ते बनाए हैं।
हमने केवल कविताएँ नहीं पढ़ीं; हमने एक-दूसरे के मन को पढ़ा है।
हमने केवल गीत नहीं गाए; हमने एक-दूसरे की खुशियों और भावनाओं को स्वर दिया है।
हमने केवल साहित्य नहीं साधा; हमने आत्मीयता और मानवीय मूल्यों को भी जिया है।
आपमें से अनेक साथी प्रारंभ से इस यात्रा में साथ हैं, अनेक बाद में जुड़े, और अनेक ऐसे हैं जिनसे कभी प्रत्यक्ष भेंट भी नहीं हुई; फिर भी ऐसा लगता है मानो वर्षों का पारिवारिक संबंध हो।
यही NWCF की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
आज मैं हृदय की गहराइयों से उन सभी वरिष्ठजनों, सहयोगियों, समिति सदस्यों, रचनाकारों, कलाकारों, गायकों, समीक्षकों, पाठकों और प्रत्येक परिवारीजन का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ, जिन्होंने अपने अमूल्य समय, अथक श्रम, स्नेह, विश्वास और आत्मीय सहयोग से इस मंच को सींचा, संवारा और यहाँ तक पहुँचाया।
आज जब हम इस सुखद पड़ाव का उत्सव मना रहे हैं, तब कुछ प्रिय चेहरे स्मृतियों के आकाश में उज्ज्वल नक्षत्रों की भाँति झिलमिला उठते हैं। वे साथी, जिनकी उपस्थिति कभी हमारी रचनाओं, चर्चाओं और उत्सवों को जीवंत बना देती थी, आज भौतिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं। किंतु उनका स्नेह, उनका मार्गदर्शन, उनकी मुस्कान और उनकी रचनात्मक छाप हमारे हृदयों में आज भी सुरक्षित है। इस विशेष अवसर पर उन्हें अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए हम उनकी स्मृतियों को सादर प्रणाम करते हैं....🙏
यदि कोई मुझसे पूछे कि इन सात वर्षों की सबसे बड़ी उपलब्धि क्या है, तो मेरा उत्तर होगा—
केवल "NWCF" नहीं, बल्कि "NWCF परिवार"।
आप सबका विश्वास ही मेरी शक्ति है।
आप सबका स्नेह ही मेरी पूँजी है।
आप सबका साथ ही मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि है।
आज इस विशेष अवसर पर मैं आप सभी के प्रति अपना सिर श्रद्धा और कृतज्ञता से झुकाता हूँ। 🙏🏼🙏🏼
ईश्वर से प्रार्थना है कि हमारा यह परिवार सदा प्रेम, सम्मान, सौहार्द, रचनात्मकता और मानवीय संवेदनाओं के सूत्र में बँधा रहे। आने वाले वर्षों में हम और अधिक सृजन करें, और अधिक सीखें, और अधिक मुस्कुराएँ तथा इसी प्रकार एक-दूसरे का हाथ थामे आगे बढ़ते रहें।
आप सभी के प्रेम, आशीर्वाद, विश्वास और आत्मीय शुभकामनाओं के लिए हृदय की अनंत गहराइयों से धन्यवाद।
NWCF हम सबका है, और इसकी सबसे सुंदर पहचान आप सभी हैं।
स्नेह, सम्मान और कृतज्ञता सहित—
🌹 आपका अपना,
कुँवर अनुराग
संस्थापक
नेशनल राइटर्स एंड कल्चरल फोरम (NWCF)
🙏💐❤️💐🙏
01/06/2026
01/06/2026
🎉🌸 हर्ष सूचना 🌸🎉
प्रिय NWCF परिवारीजनों,
जैसा कि पूर्व में सूचित किया जा चुका है, आज NWCF के स्थापना दिवस के शुभ अवसर पर जन्मोत्सव समारोह को हर्षोल्लास एवं उल्लासपूर्ण वातावरण में मनाने हेतु बॉलीवुड संगीत संध्या "मनभावन रंगोली" का आयोजन NWCF-साहित्य पटल (व्हाट्सएप पटल) पर सायं 6:00 बजे से 8:00 बजे तक किया गया है।
इस आनंदोत्सव में आप सभी सादर एवं सप्रेम आमंत्रित हैं। 💐
कार्यक्रम की विशेषता यह रहेगी कि इसमें केवल हर्ष, उत्सव, उल्लास एवं सकारात्मक भावों से परिपूर्ण गीत ही प्रेषित किए जाएँगे। कृपया यह सुनिश्चित करें कि कोई भी गीत दुःख, विरह अथवा ग़म की भावना लिए हुए न हो, ताकि पूरे आयोजन में उत्सव का आनंदमय वातावरण बना रहे।
प्रत्येक सदस्य अधिकतम 5 गीत प्रेषित कर सकता है।
तो आइए, अपनी मधुर सहभागिता से इस आनंद-पर्व को और अधिक सुरमय, मधुर एवं अविस्मरणीय बनाइए तथा खुशियों के इस उत्सव में सम्मिलित होकर इसका भरपूर आनंद उठाइए।
आप सभी की स्नेहिल उपस्थिति की प्रतीक्षा रहेगी।
सादर। 🌹
कुँवर अनुराग
संस्थापक
नेशनल राइटर्स एंड कल्चरल फोरम (NWCF)
आगरा (उ.प्र.)
Note: If you are not member of NWCF Whatsapp Group, and are interested to join in the above-mantioned program, please send message thru messenger OR by commenting on this post, mentioning your Name, City, Few lines about your literary or cultural interests and of course your whatsapp number, so that we may include you in the whatsapp group. Thanks.