Sant shri asaramji public school

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This Page Is For The Promotation Of GURUKLAS Run Under The Gudience Of Pujya Sant Shri ASARAM Ji Bapu.

Photos from Sant shri asaramji public school's post 20/03/2018
01/03/2018

होली महोत्सव
होली की बौछार लाये जीवन में बहार
(पूज्य संत श्री आशारामजी बापू के सत्संग से)
(होली : 1 मार्च)
वैदिक, प्राचीन एवं विश्वप्रिय उत्सव
यह होलिकोत्सव प्राकृतिक, प्राचीन व वैदिक उत्सव है । साथ ही यह आरोग्य, आनंद और आह्लाद प्रदायक उत्सव भी है, जो प्राणिमात्र के राग-द्वेष मिटाकर, दूरी मिटाकर हमें संदेश देता है कि हो... ली... अर्थात् जो हो गया सो हो गया ।
जो बीत गयी सो बीत गयी, तकदीर का शिकवा कौन करे ?
जो तीर कमान से निकल गया, उस तीर का पीछा कौन करे, क्यों करे, कब तक करे ?
हो.. ली...
यह वैदिक उत्सव है । लाखों वर्ष पहले भगवान रामजी हो गये । उनसे पहले उनके पिता, पितामह, पितामह के पितामह दिलीप राजा और उनके बाद रघु राजा... रघु राजा के राज्य में भी यह महोत्सव मनाया जाता था । बापू भी होली खेलते हैं लाखों-लाखों प्यारे भक्तों के साथ !
पलाश का रंग, केसर, चंदन और गुलाब के फूल रगड़कर अकबर भी अपने महल में होली खेलता था लेकिन रानियों के साथ, जहाँगीर भी खेलता था और कई मुसलमान राजा भी होली का उपयोग लेते थे ।
अभी अमेरिका में और अलग-अलग देशों में अलग-अलग नामों से इस उत्सव का लाभ लोग उठाते हैं । स्पेन में लोग टमाटरों से होली खेलते हैं । लाखों टन टमाटर इकट्ठे होते हैं और ‘दे धमाधम... दे धमाधम...’ बकरियों और गायों के लिए तो भंडारा होता होगा लेकिन टमाटर की सब्जी महँगी हो जाती होगी ! लेकिन मैंने न टमाटर से और न ही रासायनिक रंगों से होली खेलना चालू किया बल्कि पलाश के फूलों से चालू किया ।
स्वास्थ्यप्रदायक होली
रासायनिक रंगों का तन-मन पर बड़ा दुष्प्रभाव होता है । काले रंग में लेड ऑक्साइड पड़ता है, वह किडनी को खराब करता है । लाल रंग में कॉपर सल्फेट पड़ता है, वह कैंसर की बीमारी देता है । बैंगनी रंग से दमा और एलर्जी की बीमारी होती है । सभी रासायनिक रंगों में कोई-न-कोई खतरनाक बीमारी को जन्म देने का दुष्प्रभाव है ।
लेकिन पलाश की अपनी एक सात्त्विकता है । पलाश के फूलों का रंग रोगप्रतिकारक शक्ति बढ़ाता है । गर्मी को पचाने की, सप्तरंगों व सप्तधातुओं को संतुलित करने की क्षमता पलाश में है । पलाश के फूलों से जो होली खेली जाती है, उसमें पानी की बचत भी होती है । रासायनिक रंगों को मिटाने के लिए कई बाल्टियाँ पानी लगता है । सूखा रंग, काला रंग या सिल्वर रंग लगायें तो उसको हटाने के लिए साबुन और पानी बहुत लगता है लेकिन पलाश के फूलों के रंग के लिए न कई बाल्टियाँ पानी लगता है न कई गिलास पानी लगता है । और पलाश वृक्ष की गुणवत्ता सर्वोपरि है । पित्त और वायु मिलकर हृदयाघात (हार्ट-अटैक) का कारण बनता है लेकिन जिस पर पलाश के फूलों का रंग छिड़क देते हैं उसका पित्त शांत हो जाता है तो हार्ट-अटैक कहाँ से आयेगा ? वायुसंबंधी 80 प्रकार की बीमारियों को भगाने की शक्ति इस पलाश के रंग में है ।
इस मौसम में सुबह-सुबह 20 से 25 नीम के कोमल पत्ते और एक काली मिर्च चबा के खानेवाला व्यक्ति वर्षभर निरोग रहने का प्रमाणपत्र ले लेता है, बाहर नहीं भीतर ही । होली के बाद 20-25 दिन तक बिना नमक अथवा कम नमकवाला भोजन करना स्वास्थ्य के लिए अच्छा है । इन दिनों में सर्दियोंवाला (पचने में भारी) भोजन करना वर्जित है ।
आनंदित रहने की प्रेरणा देता पर्व
होली के दिन चैतन्य महाप्रभु का प्राकट्य हुआ था । इन दिनों में हरिनाम कीर्तन करना-कराना चाहिए । लट्ठी-खेंच कार्यक्रम करना चाहिए, यह बलवर्धक है । नाचना, कूदना-फाँदना चाहिए जिससे जमे हुए कफ की छोटी-मोटी गाँठें भी पिघल जायें और वे ट्यूमर कैंसर का रूप न ले लें । और कोई दिमाग या कमर का ट्यूमर भी न हो । तुम्हारे शरीर में जो कुछ अस्त-व्यस्तता है, वह गर्मी से तथा नाचने, कूदने-फाँदने से ठीक हो जाती है । और फिर होली जले तो गर्मी का भी थोड़ा फायदा लेना, लावा का फायदा लेना और पलाश के फूलों का रंग एक-दूसरे पर छिड़क के अपने चित्त को आनंदित व उल्लसित करना ।
ऋषियों ने ऐसी सुंदर व्यवस्था की कि जिससे तुम्हारे जीवन में आनंद व उत्साह बना रहे । व्यर्थ का चिंतन मिटाने के लिए भगवद्चिंतन और फिर भगवद्चिंतन भी शांत होकर निश्चिंत नारायण का आनंद उभरे तो समझ लो गुरु के साथ होली मनाने की कला आ गयी ।
होली हुई तब जानिये, पिचकारी गुरुज्ञान की लगे ।
सब रंग कच्चे जाँय उड़, एक रंग पक्के में रँगे ।
पक्का रंग यह है कि जिसकी कभी मौत नहीं होती, त्रिलोकी का प्रलय हो जाय फिर भी जिसे दुःख नहीं छूता वह मैं अमर आत्मा हूँ ।
हम हैं अपने-आप, हर परिस्थिति के बाप !
एक ही परमात्म-सत्ता है - इस ज्ञान की पिचकारी से जितना-जितना आप परमात्म-ज्ञान में रमण करेंगे, उतना-उतना ‘हो... ली...’ अर्थात् जो हो गया सो हो गया... आनंद रहेगा, माधुर्य रहेगा, तृप्ति रहेगी, पूर्णता रहेगी ।
पूर्ण गुरुकृपा मिली, पूर्ण गुरु का ज्ञान...
(लोक कल्याण सेतु : फरवरी 2016)

06/02/2018
स्वास्थ्य-सुरक्षा 09/01/2018

[1/9, 6:58 AM] Chotu Bhai: *स्वास्थ्य-सुरक्षा*

*शरीर की जैविक घड़ी पर आधारित दिनचर्या*

*अपनी दिनचर्या को कालचक्र के अनुरूप नियमित करें तो अधिकांश रोगों से रक्षा होती है और उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायुष्य की भी प्राप्ति होती है।*
*-पूज्य संत श्री आशारामजी बापूजी*

*visit us :* http://balsanskar.ashram.org/ArticleViewer/ArtMID/1933/ArticleID/28124/Svaasthy-suraksha

*समय (उस समय विशेष) सक्रिय अंगः सक्रिय अंग के अनुरूप कार्यों का विवरण*

*प्रातः 3 से 5 बजे (फेफड़े)-* ब्राह्ममुहूर्त में उठने वाले व्यक्ति बुद्धिमान व उत्साही होते हैं। इस समय थोड़ा-सा गुनगुना पानी पीकर खुली हवा में घूमना चाहिए। दीर्घ-श्वसन भी करना चाहिए।

*प्रातः 5 से 7 (बड़ी आँत)-* जो इस समय सोये रहते हैं, मल त्याग नहीं करते, उन्हें कब्ज व कई अन्य रोग होते हैं। अतः प्रातः जागरण से लेकर सुबह 7 बजे के बीच मल त्याग कर लें।

*सुबह 7 से 9 (आमाशय या जठर)-* इस समय (भोजन के 2 घंटे पूर्व) दूध अथवा फलों का रस या कोई पेट पदार्थ ले सकते हैं।

*सुबह 9 से 11 (अग्नाशय व प्लीहा)-* यह समय भोजन के लिए उपयुक्त है।

*दोपहर 11 से 1 (हृदय)-* करुणा, दया, प्रेम आदि हृदय की संवेदनाओं को विकसित एवं पोषित करने के लिए दोपहर 12 बजे के आसपास संध्या करें। भोजन वर्जित है।

*दोपहर 1 से 3 (छोटी आँत)-* भोजन के करीब 2 घंटे बाद प्यास अनुरूप पानी पीना चाहिए। इस समय भोजन करने अथवा सोने से पोषक आहार-रस के शोषण में अवरोध उत्पन्न होता है व शरीर रोगी तथा दुर्बल हो जाता है।

*दोपहर 3 से 5 (मूत्राशय)-* 2-4 घंटे पहले पिये पानी से इस समय मूत्र-त्याग की प्रवृत्ति होगी।

*शाम 5 से 7 (गुर्दे)-* इस काल में हलका भोजन कर लेना चाहिए। सूर्यास्त के 10 मिनट पहले से 10 मिनट बाद तक (संध्याकाल में) भोजन न करें। शाम को भोजन के तीन घंटे बाद दूध पी सकते हैं।

*रात्रि 7 से 9 (मस्तिष्क)-* प्रातः काल के अलावा इस काल में पढ़ा हुआ पाठ जल्दी याद रह जाता है।

*रात्रि 9 से 11 (रीढ़ की हड्डी में स्थित मेरूरज्जु)-* इस समय की नींद सर्वाधिक विश्रांति प्रदान करती है और जागरण शरीर व बुद्धि को थका देता है।

*11 से 1 (पित्ताशय)-* इस समय का जागरण पित्त को प्रकुपित कर अनिद्रा, सिरदर्द आदि पित्त विकार तथा नेत्र रोगों को उत्पन्न करता है। इस समय जागते रहोगे तो बुढ़ापा जल्दी आयेगा।

*1 से 3 (यकृत)-* इस समय शरीर को गहरी नींद की जरूरत होती है। इसकी पूर्ति न होने पर पाचनतंत्र बिगड़ता है।

*✍🏻ऋषियों व आयुर्वेदाचार्यों ने बिना भूख लगे भोजन करना वर्जित बताया है। अतः प्रातः एवं शाम के भोजन की मात्रा ऐसी रखें, जिससे ऊपर बताये समय में खुलकर भूख लगे।*

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[1/9, 6:58 AM] Chotu Bhai: 🌞 हजार नामों के समान फल देने वाले भगवान सूर्य के 21 नाम 🌞

भगवान सूर्य का अवतरण संसार के कल्याण के लिए हुआ है इसलिए पंचदेवोपासना में उनका विशिष्ट स्थान है। शास्त्र कहते हैं कि ‘आरोग्यं भास्करादिच्छेत्’ अर्थात् आरोग्य की कामना भगवान सूर्य से करनी चाहिए। सूर्य की उपासना से मनुष्य का तेज, बल, आयु एवं नेत्रों की ज्योति की वृद्धि होती है; मनुष्य दीर्घायु होता है। सूर्य समस्त नेत्र-रोग व चर्म-रोग को दूर करने वाले देवता हैं। भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र साम्ब ने अपने कोढ़ के रोग को सूर्य की उपासना से दूर किया था।

🌞 श्रीकृष्ण के पुत्र साम्ब हुए भयंकर कुष्ठरोग से ग्रस्त

भगवान श्रीकृष्ण और जाम्बवती के पुत्र साम्ब बलवान होने के साथ ही अत्यन्त रूपवान भी थे। अपनी सुन्दरता का अभिमान ही उनके पतन का कारण बना। एक बार रुद्रावतार दुर्वासामुनि द्वारकापुरी में आए। तप से अत्यन्त क्षीण हुए दुर्वासा को देखकर साम्ब ने उनका उपहास किया। इससे क्रोध में आकर दुर्वासामुनि ने साम्ब को शाप दे दिया कि ‘तुम कोढ़ी हो जाओ।’ उपहास बुरा होता है; और वही हुआ।

भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र साम्ब अत्यन्त भयंकर कुष्ठरोग से ग्रस्त हो गए। रोग दूर करने के लिए अनेक उपचार किए पर उनका कुष्ठ नहीं मिटा।

🌞 कुष्ठरोग मिटाने के लिए साम्ब ने की सूर्योपासना

भगवान श्रीकृष्ण की आज्ञा से साम्ब चन्द्रभागा नदी के तट पर सूर्य की आराधना में लग गए। रोग से मुक्ति के लिए साम्ब नित्य भगवान सूर्य के सहस्त्रनाम का पाठ करते थे। एक दिन भगवान सूर्य ने साम्ब को स्वप्न में दर्शन देते हुए कहा–’तुम्हें सहस्त्रनाम से मेरी स्तुति करने की आवश्यकता नहीं है। मैं तुम्हें अपने अत्यन्त प्रिय एवं पवित्र इक्कीस नाम बताता हूँ, उनके पाठ से सहस्त्रनाम के पाठ का फल प्राप्त होगा। जो मनुष्य दोनों संध्याओं के समय इस स्तोत्र का पाठ करेंगे, वे समस्त पापों से छूटकर धन, आरोग्य, संतान आदि वांछित फल प्राप्त करेंगे और समस्त रोगों से मुक्त हो जाएंगे।’

🌞 भगवान सूर्य ने साम्ब को बताये अपने 21 नाम

भगवान सूर्य ने श्रीकृष्ण पुत्र साम्ब को अपने 21 नाम बताये जो ‘स्तवराज’ के नाम से भी जाने जाते हैं–

ॐ विकर्तनो विवस्वांश्च मार्तण्डो भास्करो रवि:।
लोकप्रकाशक: श्रीमान् लोकचक्षुर्महेश्वर:।।
लोकसाक्षी त्रिलोकेश: कर्ता हर्ता तमिस्त्रहा।
तपनस्तापनश्चैव शुचि: सप्ताश्ववाहन:।।
गभस्तिहस्तो ब्रह्मा च सर्वदेवनमस्कृत:।। (भविष्यपुराण)

🌞 भगवान सूर्य के ये 21 नाम हैं–

🌷विकर्तन (विपत्तियों को नष्ट करने वाला)
🌷विवस्वान् (प्रकाशरूप)
🌷मार्तण्ड
🌷भास्कर
🌷रवि
🌷लोकप्रकाशक
🌷श्रीमान्
🌷लोकचक्षु
🌷ग्रहेश्वर
🌷लोकसाक्षी
🌷त्रिलोकेश
🌷कर्ता
🌷हर्ता
🌷तमिस्त्रहा (अन्धकार को नष्ट करने वाले)
🌷तपन
🌷तापन
🌷शुचि (पवित्रतम)
🌷सप्ताश्ववाहन (जिनका वाहन सात घोड़ों वाला रथ है)
🌷गभस्तिहस्त (किरणें ही जिनके हाथ हैं)
🌷ब्रह्मा
🌷सर्वदेवनमस्कृत।

🌞 साम्ब पर भगवान भास्कर की कृपा

भगवान सूर्य के आदेश से साम्ब इक्कीस नामों का पाठ करने लगे। उनकी भक्ति और तप से प्रसन्न होकर सूर्यदेव ने उनका रोग दूर कर दिव्य रूप प्रदान किया।

🌞 सूर्य के 21 नामों (स्तवराज) के पाठ का फल

यह स्तवराज शरीर को नीरोग बनाने वाला, धन की वृद्धि करने वाला और यश देने वाला है। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय इन नामों को पढ़ने से मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। भगवान सूर्य को यह नाम इतने प्रिय हैं कि उनका कथन है–

‘यही मेरे लिए जपने योग्य, हवन व सन्ध्योपासना है। बलिमन्त्र (भोग का मन्त्र), अर्घ्यमन्त्र व धूपमन्त्र भी यही है। नमस्कार, प्रदक्षिणा सभी में यह महामन्त्र जपने से पापों का हरण व शुभफल की प्राप्ति होती है।’

भगवान सूर्य के नाम-जप से अधिकाधिक लाभ प्राप्त करने के लिए रखें इन बातों का ध्यान

भगवान सूर्य की आराधना करने वाले मनुष्य को राग–द्वेष, झूठ और हिंसा से दूर रहना चाहिए। कलुषित हृदय और अप्रसन्न मन से मनुष्य भगवान सूर्य को सब–कुछ अर्पित कर दे तो भी भगवान आदित्य उस पर प्रसन्न नहीं होते; लेकिन शुद्ध हृदय से मात्र जल अर्पण करने पर सूर्यपूजा के दुर्लभ फल की प्राप्ति हो जाती है।

स्वास्थ्य-सुरक्षा शरीर की जैविक घड़ी पर आधारित दिनचर्या अपनी दिनचर्या को कालचक्र के अनुरूप नियमित करें तो अधिकांश रोगों से रक्षा हो�...

09/01/2018

*परिवर्तन देखिये*

1. पहले शादियों में घर की औरतें खाना बनाती थीं और नाचने वाली बाहर से आती थीं। अब खाना बनाने वाले बाहर से आते हैं और घर की औरतें नाचती हैं।

2- पहले लोग घर के दरवाजे पर एक आदमी तैनात करते थे ताकि कोई कुत्ता घर में न घुस जाये। आजकल घर के दरवाजे पर कुत्ता तैनात करते हैं ताकि कोई आदमी घर में न घुस जाए।

3- पहले आदमी खाना घर में खाता था और लैट्रीन घर के बाहर करने जाता था। अब खाना बाहर खाता है और लैट्रीन घर में करता है।

4- पहले आदमी साइकिल चलाता था और गरीब समझा जाता था। अब आदमी कार से ज़िम जाता है साइकिल चलाने के लिए।


चारों महत्वपुर्ण बदलाव हैं !

वाह रे मानव तेरा स्वभाव....
।। लाश को हाथ लगाता है तो नहाता है ...
पर बेजुबान जीव को मार के खाता है ।।

यह मंदिर-मस्ज़िद भी क्या गजब की जगह है दोस्तो.
जंहा गरीब बाहर और अमीर अंदर 'भीख' मांगता है..
विचित्र दुनिया का कठोर सत्य..

बारात मे दुल्हे सबसे पीछे
और दुनिया आगे चलती है,
मय्यत मे जनाजा आगे
और दुनिया पीछे चलती है..

यानि दुनिया खुशी मे आगे
और दुख मे पीछे हो जाती है..!

अजब तेरी दुनिया
गज़ब तेरा खेल

मोमबत्ती जलाकर मुर्दों को याद करना
और मोमबत्ती बुझाकर जन्मदिन मनाना...
Wah re duniya !!!!!
✴ लाइन छोटी है,पर मतलब बहुत बड़ा है ~

उम्र भर उठाया बोझ उस कील ने ...

और लोग तारीफ़ तस्वीर की करते रहे ..
〰〰〰〰〰〰
✴ पायल हज़ारो रूपये में आती है, पर पैरो में पहनी जाती है

और.....

बिंदी 1 रूपये में आती है मगर माथे पर सजाई जाती है

इसलिए कीमत मायने नहीं रखती उसका कृत्य मायने रखता हैं.
〰〰〰〰〰〰
✴ एक किताबघर में पड़ी गीता और कुरान आपस में कभी नहीं लड़ते,

और

जो उनके लिए लड़ते हैं वो कभी उन दोनों को नहीं पढ़ते....
〰〰〰〰〰〰〰〰
✴ नमक की तरह कड़वा ज्ञान देने वाला ही सच्चा मित्र होता है,

मिठी बात करने वाले तो चापलुस भी होते है।

इतिहास गवाह है की आज तक कभी नमक में कीड़े नहीं पड़े।

और मिठाई में तो अक़्सर कीड़े पड़ जाया करते है...
〰〰〰〰〰〰〰
✴ अच्छे मार्ग पर कोई व्यक्ति नही जाता पर बुरे मार्ग पर सभी जाते है......

इसीलिये दारू बेचने वाला कहीं नही जाता ,

पर दूध बेचने वाले को घर-घर
गली -गली , कोने- कोने जाना पड़ता है ।
〰〰〰〰〰〰〰〰

✴ दूध वाले से बार -बार पूछा जाता है कि पानी तो नही डाला ?

पर दारू मे खुद हाथो से पानी मिला-मिला कर पीते है ।

Very nice line
इंसान की समझ सिर्फ इतनी हैं
कि उसे "जानवर" कहो तो
नाराज हो जाता हैं और
"शेर" कहो तो खुश हो जाता हैं!
जबकि शेर भी जानवर का ही नाम है
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06/01/2018

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*पंचांग 2018 – हिंदी कैलेंडर 2018*
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जनवरी 2018 त्यौहार, व्रत और तिथि
2 जनवरी 2018 – मंगलवार, पौष पूर्णिमा व्रत
5 जनवरी 2018 – शुक्रवार, संकष्टी चतुर्थी
12 जनवरी 2018 – शुक्रवार, षटतिला एकादशी
14 जनवरी 2018 – रविवार, मकर संक्रांति , पोंगल , उत्तरायण , प्रदोष व्रत (कृष्ण)
15 जनवरी 2018 – सोमवार, मासिक शिवरात्रि
16 जनवरी 2018 – मंगलवार, पौष अमावस्या
22 जनवरी 2018 – सोमवार, सरस्वती पूजा , बसंत पंचमी
28 जनवरी 2018 – रविवार, जया एकादशी
29 जनवरी 2018 – सोमवार, प्रदोष व्रत (शुक्ल)
31 जनवरी 2018 – बुधवार, माघ पूर्णिमा व्रत
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फरवरी 2018 त्यौहार, व्रत और तिथि
3 फरवरी 2018 – शनिवार, संकष्टी चतुर्थी
11 फरवरी 2018 – रविवार, विजया एकादशी
13 फरवरी 2018 – मंगलवार, कुम्भ संक्रांति , मासिक शिवरात्रि , महाशिवरात्रि , प्रदोष व्रत (कृष्ण)
15 फरवरी 2018 – गुरुवार, माघ अमावस्या
26 फरवरी 2018 – सोमवार, आमलकी एकादशी
27 फरवरी 2018 – मंगलवार, प्रदोष व्रत (शुक्ल)
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मार्च 2018 त्यौहार, व्रत और तिथि
1 मार्च 2018 – गुरुवार, होलिका दहन , फाल्गुन पूर्णिमा व्रत
2 मार्च 2018 – शुक्रवार, होली
5 मार्च 2018 – सोमवार, संकष्टी चतुर्थी
13 मार्च 2018 – मंगलवार, पापमोचिनी एकादशी
14 मार्च 2018 – बुधवार, मीन संक्रांति , प्रदोष व्रत (कृष्ण)
15 मार्च 2018 – गुरुवार, मासिक शिवरात्रि
17 मार्च 2018 – शनिवार, फाल्गुन अमावस्या
18 मार्च 2018 – रविवार, चैत्र नवरात्रि , उगाडी , गुड़ी पड़वा , घटस्थापना
19 मार्च 2018 – सोमवार, चेटी चंड
25 मार्च 2018 – रविवार, राम नवमी
26 मार्च 2018 – सोमवार, चैत्र नवरात्रि पारणा
27 मार्च 2018 – मंगलवार, कामदा एकादशी
29 मार्च 2018 – गुरुवार, प्रदोष व्रत (शुक्ल)
31 मार्च 2018 – शनिवार, हनुमान जयंती , चैत्र पूर्णिमा व्रत
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अप्रैल 2018 त्यौहार, व्रत और तिथि
3 अप्रैल 2018 – मंगलवार, संकष्टी चतुर्थी
12 अप्रैल 2018 – गुरुवार, बरूथिनी एकादशी
13 अप्रैल 2018 – शुक्रवार, प्रदोष व्रत (कृष्ण)
14 अप्रैल 2018 – शनिवार, मासिक शिवरात्रि , मेष संक्रांति
16 अप्रैल 2018 – सोमवार, चैत्र अमावस्या
18 अप्रैल 2018 – बुधवार, अक्षय तृतीया
26 अप्रैल 2018 – गुरुवार, मोहिनी एकादशी
27 अप्रैल 2018 – शुक्रवार, प्रदोष व्रत (शुक्ल)
30 अप्रैल 2018 – सोमवार, वैशाख पूर्णिमा व्रत
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मई 2018 त्यौहार, व्रत और तिथि
3 मई 2018 – गुरुवार, संकष्टी चतुर्थी
11 मई 2018 – शुक्रवार, अपरा एकादशी
13 मई 2018 – रविवार, मासिक शिवरात्रि , प्रदोष व्रत (कृष्ण)
15 मई 2018 – मंगलवार, वृष संक्रांति , वैशाख अमावस्या
25 मई 2018 – शुक्रवार, पद्मिनी एकादशी
26 मई 2018 – शनिवार, प्रदोष व्रत (शुक्ल)
29 मई 2018 – मंगलवार, पूर्णिमा व्रत
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जून 2018 त्यौहार, व्रत और तिथि
2 जून 2018 – शनिवार, संकष्टी चतुर्थी
10 जून 2018 – रविवार, परम एकादशी
11 जून 2018 – सोमवार, प्रदोष व्रत (कृष्ण)
12 जून 2018 – मंगलवार, मासिक शिवरात्रि
13 जून 2018 – बुधवार, अमावस्या
15 जून 2018 – शुक्रवार, मिथुन संक्रांति
23 जून 2018 – शनिवार, निर्जला एकादशी
25 जून 2018 – सोमवार, प्रदोष व्रत (शुक्ल)
28 जून 2018 – गुरुवार, ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत
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जुलाई 2018 त्यौहार, व्रत और तिथि
1 जुलाई 2018 – रविवार, संकष्टी चतुर्थी
9 जुलाई 2018 – सोमवार, योगिनी एकादशी
10 जुलाई 2018 – मंगलवार, प्रदोष व्रत (कृष्ण)
11 जुलाई 2018 – बुधवार, मासिक शिवरात्रि
13 जुलाई 2018 – शुक्रवार, ज्येष्ठ अमावस्या
14 जुलाई 2018 – शनिवार, जगन्नाथ रथ यात्रा
16 जुलाई 2018 – सोमवार, कर्क संक्रांति
23 जुलाई 2018 – सोमवार, अषाढ़ी एकादशी , देवशयनी एकादशी
24 जुलाई 2018 – मंगलवार, प्रदोष व्रत (शुक्ल)
27 जुलाई 2018 – शुक्रवार, आषाढ़ पूर्णिमा व्रत , गुरु-पूर्णिमा
31 जुलाई 2018 – मंगलवार, संकष्टी चतुर्थी
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अगस्त 2018 त्यौहार, व्रत और तिथि
7 अगस्त 2018 – मंगलवार, कामिका एकादशी
9 अगस्त 2018 – गुरुवार, मासिक शिवरात्रि , प्रदोष व्रत (कृष्ण)
11 अगस्त 2018 – शनिवार, आषाढ़ अमावस्या
13 अगस्त 2018 – सोमवार, हरियाली तीज
15 अगस्त 2018 – बुधवार, नाग पंचमी
17 अगस्त 2018 – शुक्रवार, सिंह संक्रांति
21 अगस्त 2018 – मंगलवार, श्रावण पुत्रदा एकादशी
23 अगस्त 2018 – गुरुवार, प्रदोष व्रत (शुक्ल)
25 अगस्त 2018 – शनिवार, ओणम/थिरुवोणम
26 अगस्त 2018 – रविवार, श्रावण पूर्णिमा व्रत , रक्षा बंधन
29 अगस्त 2018 – बुधवार, कजरी तीज
30 अगस्त 2018 – गुरुवार, संकष्टी चतुर्थी
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सितंबर 2018 त्यौहार, व्रत और तिथि
2 सितंबर 2018 – रविवार, जन्माष्टमी
6 सितंबर 2018 – गुरुवार, अजा एकादशी
7 सितंबर 2018 – शुक्रवार, प्रदोष व्रत (कृष्ण)
8 सितंबर 2018 – शनिवार, मासिक शिवरात्रि
9 सितंबर 2018 – रविवार, श्रावण अमावस्या
12 सितंबर 2018 – बुधवार, हरतालिका तीज
13 सितंबर 2018 – गुरुवार, गणेश चतुर्थी
17 सितंबर 2018 – सोमवार, कन्या संक्रांति
20 सितंबर 2018 – गुरुवार, परिवर्तिनीएकादशी
22 सितंबर 2018 – शनिवार, प्रदोष व्रत (शुक्ल)
23 सितंबर 2018 – रविवार, अनंत चतुर्दशी
25 सितंबर 2018 – मंगलवार, भाद्रपद पूर्णिमा व्रत
28 सितंबर 2018 – शुक्रवार, संकष्टी चतुर्थी
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अक्टूबर 2018 त्यौहार, व्रत और तिथि
5 अक्टूबर 2018 – शुक्रवार, इन्दिरा एकादशी
6 अक्टूबर 2018 – शनिवार, प्रदोष व्रत (कृष्ण)
7 अक्टूबर 2018 – रविवार, मासिक शिवरात्रि
9 अक्टूबर 2018 – मंगलवार, भाद्रपद अमावस्या
10 अक्टूबर 2018 – बुधवार, शरद नवरात्रि , घटस्थापना
15 अक्टूबर 2018 – सोमवार, दुर्गा पूजा की तिथियाँ , कल्परम्भ
16 अक्टूबर 2018 – मंगलवार, नवपत्रिका पूजा
17 अक्टूबर 2018 – बुधवार, दुर्गा महा अष्टमी पूजा , तुला संक्रांति , दुर्गा महा नवमी पूजा
18 अक्टूबर 2018 – गुरुवार, शरद नवरात्रि पारणा
19 अक्टूबर 2018 – शुक्रवार, दशहरा , दुर्गा विसर्जन
20 अक्टूबर 2018 – शनिवार, पापांकुशा एकादशी
22 अक्टूबर 2018 – सोमवार, प्रदोष व्रत (शुक्ल)
24 अक्टूबर 2018 – बुधवार, अश्विन पूर्णिमा व्रत
27 अक्टूबर 2018 – शनिवार, करवा चौथ , संकष्टी चतुर्थी
नवंबर 2018 त्यौहार, व्रत और तिथि
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3 नवंबर 2018 – शनिवार, रमा एकादशी
5 नवंबर 2018 – सोमवार, मासिक शिवरात्रि , धनतेरस , दिवाली पूजा की तिथियाँ , प्रदोष व्रत (कृष्ण)
6 नवंबर 2018 – मंगलवार, नरक चतुर्दशी
7 नवंबर 2018 – बुधवार, दिवाली , अश्विन अमावस्या
8 नवंबर 2018 – गुरुवार, गोवर्धन पूजा
9 नवंबर 2018 – शुक्रवार, भाई दूज
16 नवंबर 2018 – शुक्रवार, वृश्चिक संक्रांति
19 नवंबर 2018 – सोमवार, देवुत्थान एकादशी
20 नवंबर 2018 – मंगलवार, प्रदोष व्रत (शुक्ल)
23 नवंबर 2018 – शुक्रवार, कार्तिक पूर्णिमा व्रत
26 नवंबर 2018 – सोमवार, संकष्टी चतुर्थी
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दिसंबर 2018 त्यौहार, व्रत और तिथि
3 दिसंबर 2018 – सोमवार, उत्पन्ना एकादशी
4 दिसंबर 2018 – मंगलवार, प्रदोष व्रत (कृष्ण)
5 दिसंबर 2018 – बुधवार, मासिक शिवरात्रि
7 दिसंबर 2018 – शुक्रवार, कार्तिक अमावस्या
16 दिसंबर 2018 – रविवार, धनु संक्रांति
19 दिसंबर 2018 – बुधवार, मोक्षदा एकादशी
20 दिसंबर 2018 – गुरुवार, प्रदोष व्रत (शुक्ल)
22 दिसंबर 2018 – शनिवार, मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत
25 दिसंबर 2018 – मंगलवार, संकष्टी चतुर्थी

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06/01/2018

*एक ऐसा चुटकला जो चुटकला नहीं है*
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एक अफ्रीकी पर्यटक ऐसे शहर मे आया जो शहर उधारी में। डूबा हुआ था !

पर्यटक ने 1000 Rs होटल (जिसमे छोटा सा रेस्टोरेंट भी था) के काउंटर पर रखे और कहा मैं जा रहा हूँ कमरा पसंद करने

होटल का मालिक फ़ौरन भागा घी वाले के पास और उसको 1000 Rs देकर घी का हिसाब चुकता कर लिया !

घी वाला भागा दुध वाले के पास और जाकर 1000 Rs. देकर दुध का हिसाब पूरा करा लिया !

दुध वाला भागा गाय वाले के पास और गाय वाले को 1000 Rs. देकर दुध का हिसाब पूरा करा दिया !
गाय वाला भागा चारे वाले के पास और चारे के खाते में 1000 Rs कटवा आया !

चारे वाला गया उसी होटल पर ! वो वहां कभी कभी उधार में रेस्टोरेंट मे खाना खाता था। 1000 Rs देके हिसाब चुकता किया !

पर्यटक वापस आया और यह कहकर अपना 1000 Rs ले गया कि उसे कोई रूम पसंद नहीं आया !

*न किसी ने कुछ लिया*
*न किसी ने कुछ दिया*

सबका हिसाब चुकता !

बताओ गड़बड़ कहाँ है ?

*कहीं गड़बड़ नहीं है बल्कि यह सभी की गलतफहमी है कि रुपये हमारे है।*

*खाली हाथ आये थे,*
*खाली हाथ ही जाना है।*

*विचार करें और जीवन का आनंद लें।*
*🙏🏻आपका दिन मंगलमय हो🙏🏻*

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