Defence Account Department

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27/03/2026

8वें वेतन आयोग पर सरकार ने लोकसभा में दिया जवाब

“8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट 18 महीने में आएगी। वित्तीय प्रभाव रिपोर्ट जमा होने और मंजूरी के बाद तय होगा।”
18 महीने का एरियर खत्म 😂
जैसे कोरोना काल का एरियर खत्म हुआ।

18/03/2026

रिसेप्शन पर बैठी लड़की ने सिर उठाया तो उसने देखा

"द्वार पर एक दुबला-पतला बूढ़ा आदमी खड़ा था। बाल पूरी तरह सफ़ेद, कमीज़ पर धुले हुए पुराने दाग, और हाथ में एक नीला प्लास्टिक फ़ोल्डर… जिसमें शायद उसका बायोडाटा था।"

"वह धीरे-धीरे अंदर आया, जैसे हर कदम किसी याद को दबाकर रखा गया हो।

लड़की ने चौंककर पूछा,

“जी आप?”

बूढ़े ने धीमे से कहा,

“न… नौकरी के लिए… आवेदन देना था।”

और यही क्षण पूरे ऑफिस में एक अनचाहा सन्नाटा छोड़ गया।

HR मैनेजर अभिषेक ने जब उस बूढ़े आदमी को देखा, तो उसे अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हुआ।

"सामने करीब 68-70 साल का व्यक्ति,

जो शायद ठीक से चल भी नहीं पा रहा था,"

नौकरी के लिए आवेदन लेकर आया था।

अभिषेक ने नरमी से कहा,

“दादाजी, नौकरी? आप… आपको किस तरह का काम चाहिए?”

"बूढ़े आदमी ने फ़ोल्डर खोला, काँपते हाथों से बायोडाटा आगे बढ़ाते हुए बोला,"

“कोई भी… जो आप दे सकें। मैं सीख लूँगा।”

उसकी आवाज़ में एक ऐसी टूटन थी…

जैसे उसने कभी जीवन से उम्मीद ही नहीं की थी,

"बस ज़रूरत ने उसे आज इस दफ़्तर तक पहुंचाया था।"

अभिषेक ने बायोडाटा खोला…

और उस पर नज़र पड़ते ही उसका दिल जैसे भारी हो गया।

"बायोडाटा"

नाम: सुरेश प्रसाद

उम्र: 69 वर्ष

योग्यता: 12वीं पास

अनुभव:

32 साल सरकारी स्कूल में चपरासी

समय पर स्कूल खोलना

सफ़ाई, बच्चों की मदद, चाय-पानी

रिटायरमेंट: 7 साल पहले

लेकिन आख़िरी लाइन ने अभिषेक को अंदर तक हिला दिया

“पेंशन का पैसा धोखे से ले लिया गया, घर में कोई कमाने वाला नहीं, दो पोते स्कूल में हैं, बहू बीमार है… नौकरी न मिले तो शायद घर चलाना मुश्किल हो जाएगा।”

अभिषेक ने सिर उठाकर बूढ़े आदमी को देखा।

वह फ़ोल्डर कस कर पकड़े खड़ा था। उसकी आँखों में उम्मीद नहीं… सिर्फ़ बेबसी थी।

ऑफिस में फुसफुसाहट हो रही थी।

कुछ कर्मचारी कान में कान डालकर कहने लगे

“इतनी उम्र में नौकरी?”

“अब उम्र भर काम और क्या करना?”

“चैरिटी चल रही है क्या?”

लेकिन अभिषेक किसी और दुनिया में खो गया था।

उसे अपने पिता का चेहरा याद आ गया…

जो उम्र में लगभग इतने ही थे…

और diabetes व arthritis से जूझ रहे थे।

अगर कभी हालात ऐसे हो जाएँ कि उसके पापा को नौकरी ढूँढनी पड़े…

तो?

उसकी आँखें नमी से भर गईं।

अभिषेक ने नम्रता से कहा,

“दादाजी, बैठिए। मैं आपका छोटा सा इंटरव्यू लेता हूँ…”

बूढ़ा थोड़ा हिचका, जैसे उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि उसे सच में बैठने को कहा जा रहा है।

वह धीरे से कुर्सी पर बैठा और बोला,

“बेटा, इंटरव्यू की ज़रूरत नहीं… बस काम दे दो। मैं सुबह सबसे पहले आ जाया करूँगा। मेहनत करूँगा। किसी से झगड़ा नहीं करूँगा।”

“दादाजी, ऐसा नहीं कहते,” अभिषेक मुस्कुराया।

“आप बताइए, आपको नौकरी क्यों चाहिए?”

बस यह सवाल सुनते ही बूढ़ा आदमी तुड़प सा गया।

उसके होंठ काँपे, और गला भर आया।

कुछ सेकंड चुप रहकर उसने कहा…

“मेरी पत्नी तीन साल पहले चल बसी।

बड़ा बेटा… ट्रक चलाता था… सड़क हादसे में चला गया।

बहू अकेली रह गई… दो पोते हैं।

पेंशन का पैसा मेरे छोटे भाई ने हड़प लिया…

काग़ज़ पर धोखा करके।

अब केस चल रहा है… पर न्याय कहाँ इतनी जल्दी मिलता है?”

वह हँसने की कोशिश करता है पर आवाज़ फट जाती है

“बहू बीमार रहती है। पोते स्कूल जाते हैं…

मैं उनके लिए फीस न भर पाऊँ तो मुझे नींद नहीं आती।”

उसका हाथ सीना पकड़ लेता है,

“बेटा, घर में अनाज तक नहीं बचा।

कुछ दिन पहले पड़ोस से उधार माँगा…

तो शर्म से जमीन में गड़ गया।”

वह काँपती आवाज़ में आख़िरी बात कहता है

“इसलिए नौकरी चाहिए… किसी भी तरह की।”

अभिषेक की आँखें भर आईं।

लेकिन उसने अपने चेहरे पर भाव नहीं आने दिए।

उसने पूछा,

“दादाजी, चलने-फिरने में दिक्कत है?”

“थोड़ी… पर कर लूँगा बेटा।

बस आप मुझे बोझ मत समझना।”

यह सुनते ही अभिषेक ने गहरी साँस ली।

अभिषेक ने उस बूढ़े को पानी देकर कहा,

“आप पाँच मिनट बैठिए… मैं लौटता हूँ।”

और वह सीधे मालिक मीरा मेहता के केबिन में गया।

मीरा ने जब पूरी बात सुनी…

उनकी आँखें भी भर आईं।

“अभिषेक, ऐसे लोग हमारे सिस्टम में खो जाते हैं।

हमें कुछ करना चाहिए।”

“मैम, बात सिर्फ़ नौकरी की नहीं है…

इज़्ज़त की है।

उन्हें दया नहीं… काम चाहिए।”

मीरा बोलीं,

“ठीक है। उन्हें ऑफिस असिस्टेंट की नौकरी दे देते हैं

हल्के काम की।

और हर महीने के साथ हम एक छोटी सी extra मदद भी जोड़ देंगे,

लेकिन उन्हें लगे कि यह उनके मेहनताने का हिस्सा है…

खैरात नहीं।”

अभिषेक के चेहरे पर राहत उतर आई।

जब दोनों वापस लॉबी में आए, बूढ़ा अपनी फ़ाइल पकड़े, उम्मीद टूटने वाले चेहरे के साथ खड़ा था।

शायद वह सोच रहा था—

‘कहीं मना न कर दें।’

मीरा ने मुस्कुराकर कहा,

“श्री सुरेश प्रसाद?”

बूढ़ा घबराकर खड़ा हो गया।

“आपकी नियुक्ति कर दी गई है।”

वह स्तब्ध रह गया।

दो सेकंड तक तो उसे विश्वास ही नहीं हुआ।

“स…सच?”

उसकी आँखों में आंसू छलक आए।

“हाँ। कल से काम शुरू।

बस थोड़ा ऑफिस में दस्तावेज़ भरने होंगे।”

बूढ़ा आदमी फ़ोल्डर छाती से लगा लेता है और रो पड़ता है।

रोना भी ऐसा…

जैसे बरसों बाद किसी ने उसकी थकी हुई ज़िंदगी को सहलाया हो।

उसने कांपते हाथों से अभिषेक और मीरा के पैर छूने की कोशिश की,

पर उन्होंने तुरंत रोक लिया।

“दादाजी ये क्या कर रहे हैं!?”

अभिषेक ने कहा।

बूढ़ा बोला

“बेटा… तुमने आज मेरे घर में उम्मीद जगा दी।

मेरे पोते की फीस भर जाएगी…

बहू को दवा मिल जाएगी।”

अभिषेक ने उसकी पीठ थपथपाई,

“अब आप हमारे ऑफिस के दादाजी हैं।

अब किसी चीज़ की चिंता मत करना।”

अगले दिन बूढ़ा आदमी साफ़ कुर्ता पहनकर आया।

उसने अपनी दाढ़ी भी थोड़ी सी कटवाई थी।

ऑफिस में सबके लिए उसने पानी रखा,

डाक पहुँचाई,

गमलों में पानी दिया…

और हर काम ऐसे करता जैसे उसकी पूरी दुनिया वही हो।

लोगों ने देखा जब वह फाइलें संभालता, तो उसके हाथ काँपते थे,

पर उसकी आँखों में मेहनत की चमक जगमगाती थी।

कई बार वह अपने छोटे पोते की टॉफी का खाली रैपर निकालकर जेब में रखता,

फिर उसे देख मुस्कुराता।

शायद उसे याद आता होगा

अब इस रैपर को दोबारा भरने के पैसे मिलेंगे।

एक महीना पूरे होने पर पहले महीने की तनख्वाह मिली

8,000 रुपये।

मीरा ने उसमें 3,000 की ‘बोनस इंक्रीमेंट’ जोड़ दी।

बूढ़े ने तनख्वाह का लिफाफा हाथ में लेकर कहा…

“बेटा, इतने पैसे कभी देखे नहीं…

मैंने तो सोचा था किसी दुकान में झाड़ू लगाकर 2–3 हजार मिलेंगे…

लेकिन आज…”

उसकी आँखें फिर भर आईं।

अभिषेक ने मुस्कुराते हुए कहा,

“दादाजी, पैसे अब कम नहीं रहे…

आप कमा रहे हैं।

और आपने ये हर रुपए अपने हक़ से पाए हैं।”

दो महीने बाद…

एक सुबह बूढ़ा आदमी ऑफिस नहीं आया।

फोन करने पर बहू की टूटी आवाज़ आई

“भैया… बाबूजी की तबीयत रात से खराब थी।

अभी हम अस्पताल में हैं…”

सब घबरा गए।

अभिषेक और मीरा अस्पताल पहुँचे तो देखा

बूढ़ा आदमी बेड पर लेटा था।

ऑक्सीजन लगा था।

लेकिन जैसे ही उसने अभिषेक को देखा…

वह मुस्कुराया।

“बेटा… ऑफिस नहीं जा पाया… सॉरी…”

अभिषेक की आँखें भर आईं,

“दादाजी, ऐसी बात मत कीजिए।”

बूढ़ा धीरे बोला,

“आज… मेरे पोते की फीस भरनी थी…

तुम… भर देना, बेटा।”

अभिषेक ने उसका हाथ पकड़ा,

“दादाजी, वह काम मैं कर चुका हूँ… आपके नाम पर।”

बूढ़े की आँखों से आँसू बह निकले।

उसने धीरे से कहा,

“भगवान तुम्हें… खुश रखे…

तुमने मुझे… एक इंसान होने का सम्मान दिया।”

और अगले ही पल…

उसके हाथ की पकड़ ढीली हो गई।

और दादा जी इस दुनिया से बिदा हो गए।

ऑफिस में उस दिन कोई काम नहीं हुआ।

सभी ने दो मिनट का मौन रखा।

मीरा ने घोषणा की

“श्री सुरेश प्रसाद हमारे कर्मचारी नहीं… परिवार का हिस्सा थे।

उनके पोतों की शिक्षा का पूरा खर्च हमारी कंपनी उठाएगी।”

अभिषेक ने बूढ़े का फ़ोल्डर उठाया

जिसमें वही पुराना, काँपते हाथों से लिखा बायोडाटा रखा था।

उस बायोडाटा के साथ एक चिट्ठी भी थी,

शायद उसने बहुत पहले लिखी होगी

“अगर मुझे नौकरी मिल जाए,

तो मेरे पोते का भविष्य चमक जाएगा।

अगर न मिले…

तो शायद वह पढ़ाई छोड़ देगा।

मेरी एक ही इच्छा है—

वह मुझसे बेहतर इंसान बने।”

अभिषेक की आँखें भर आईं।

वह फुसफुसाया,

“दादाजी, आपका पोता ज़रूर कुछ बड़ा बनेगा…

हम सब आपकी आख़िरी इच्छा पूरी करेंगे।”

और सच में

अगले साल कंपनी ने दादाजी के नाम पर एक छात्रवृत्ति शुरू की

“सुरेश प्रसाद स्मृति छात्रवृत्ति”

जिससे ग़रीब बच्चों की फीस भरी जाने लगी।

:- कई लोग बायोडाटा में अपनी काबिलियत लिखते हैं…

पर उस बूढ़े ने…

अपनी मजबूरी, अपना दर्द, और अपनी टूटती उम्मीदें लिखकर… एक पूरी दुनिया को इंसानियत सिखा दी।

कभी-कभी नौकरी…

सिर्फ़ पेट पालने का तरीका नहीं होती

वह किसी घर की रोशनी,

किसी पोते की पढ़ाई,

किसी बूढ़े बाप की इज़्ज़त भी होती है!(NA)!

और वह बूढ़ा आदमी…

अपनी आख़िरी सांस तक इज़्ज़त से जिया।

13/03/2026

राज्य सभा के एक सवाल के जवाब में भारत सरकार ने कहा है कि में रिव्यू कमिटी ने सुधार किए थे यानी , जो पूरी तरह फेल हो चुकी है और के खिलाफ अभी भी लोग लड़ाई लड़ रहे हैं तो आगे सरकार क्या करेगी? इस पर कोई बात नहीं कही जा रही है। केंद्र शासित प्रदेशों यथा दिल्ली में तमाम कर्मचारी जो रिटायर हो चुके हैं और न तो और न ही के तहत कोई पेंशन पा रहे हैं, तो कोई केस पेंडिंग कैसे नहीं हो सकता! सरकार का यह जवाब कि सबको पेंशन मिल रही है, बिल्कुल गैर जिम्मेदाराना और झूठा है। दिल्ली में सैकड़ों ऐसे शिक्षक हैं जिन्हें न तो से पेंशन मिल रही है और न से और उनके रिटायरमेंट को साल भर से भी ज्यादा हो चुका है। वजह बहुत सीधी है: दिल्ली एक केंद्र शासित प्रदेश है, जहां शिक्षकों/ कर्मचारियों पर सेंट्रल गवर्नमेंट के रूल लागू होते हैं लेकिन सेंट्रल गवर्नमेंट के रूल एंडोर्स करने में ही महीनों निकल जाते हैं। अगर एंडोर्स भी कर लिए जाएं तो इंप्लीमेंटेशन ठीक से हो ही नहीं पाता। को भी दिल्ली में जून 2025 में एंडोर्स तो कर लिया गया पर किसी विभाग को आदेश दिए ही नहीं गए कि इस पर कार्यवाही की जाय। फलस्वरूप अंतिम तिथि सितंबर 2025 में खत्म हो गई और अब जो इस इंतजार में रिटायर हुए कि से पेंशन ले लेंगे तो वे न घर के रहे न घाट के। उल्टे केंद्र सरकार ने NPS पोर्टल पर केवल केंद्रीय कर्मचारियों को ही एलाऊ किया जिसके कारण और के कर्मचारियों को यह लाभ मिल ही नहीं पाया। माननीय मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह जी को इस पर तुरंत संज्ञान लेना चाहिए कि कोई भी केंद्रीय कर्मचारियों के लिए आदेश या नोटिफिकेशन हो तो उसको सभी के चीफ सेक्रेट्रीज को अनिवार्य रूप से प्रति भेजी जाए जिससे का धरातल पर भी क्रियान्वयन हो सके।

03/03/2026

8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8वें CPC) की प्रश्नावली से संबंधित सूचना का संदर्भ लें, जिसे कर्मचारियों, पेंशनभोगियों, संघों/यूनियनों और मंत्रालयों/विभागों से संरचित प्रतिक्रियाएं प्राप्त करने के लिए ऑनलाइन उपलब्ध कराया गया है।
आयोग ने दो श्रेणियों के अंतर्गत प्रतिक्रियाएँ आमंत्रित की हैं: (i) नियंत्रण और (ii) व्यक्ति/कर्मचारी/पेंशनभोगी/संघ/यूनियन; मंत्रालय/विभाग/केंद्र शासित प्रदेश और उनके प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन कार्यालय!

25/02/2026

8 cpc हेतु अभी तक चयन हो रहा है
कब??????????

Photos from Defence Account Department's post 24/02/2026

एक बात समझ में नहीं आ रही है जब वित्त मंत्रालय द्वारा दिनांक 28/02/2003 द्वारा आदेश जारी कर दिया गया था कि दिनांक 01/01/1996 से वरिष्ठ लेखा परीक्षक का वेतन मान 5500-175-9000 होना चाहिए तो लागू क्यों नहीं किया गया।
अब इसके लिए लोग कोर्ट का सहारा ले रहे है🤔🤔🤔🤔

18/02/2026

8 वे वेतन आयोग द्वारा सुझाव मांगे गए है कृपया वेबसाइट पर जाकर योग्य उम्मीदवार अपने सुझाव वेतन आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने का कष्ट करे
धन्यवाद 🙏🙏

Photos from Defence Account Department's post 18/02/2026

Advertisement for Engagement of Young Professionals-Regarding in CGDA

Photos from Defence Account Department's post 17/02/2026

जिस कंपनी को दिया जा रहा है उसके गुण से ज्यादा तो दोष है फिर भी दिया जा रहा है
Pros
Government-owned trust and high financial stability (AAA rated).
High claim settlement ratio.
Extensive network coverage across India.
Comprehensive, often cost-effective, policy options.
Cons
Some processes can be bureaucratic or slow.
Customer service may not be as proactive as some private insurers.
Relatively high volume of customer complaints.

12/02/2026

From department of pension

Re-skilling today. Resilience tomorrow.
Labour reforms strengthen workforce adaptability by supporting retrenched workers through employer-funded re-skilling initiatives and assured financial assistance.

11/02/2026

देखिये NPS की खूबसूरती सेवा कल 20 वर्ष से ज्यादा लेकिन पेंशन बनी 13100/
अब सवाल ये है कि इस राशि के कोई बंदा अपने एवं अपने परिवार का भरण पोषण कैसे करेगा????

06/02/2026

8 वे वेतन आयोग के निदेशक की नियुक्ति

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