इंसानी ज़िन्दगी के लिए एक अव्यावहारिक किताब है क़ुरान।
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एक इंसान को सामान्य ज़िन्दगी जीने तक से भी रोकती है क़ुरान। एक इंसान सामान्य रूप से जीने के लिए जो कुछ भी करता है। यह उस सबकी मुमानियत करती है। रोज़ाना की ज़िन्दगी के जो अभिन्न अंग हैं। जिनके बिना जीने की कल्पना तक भी नहीं की जा सकती। यह उन सब पर सख़्त पाबंदी लगाती है। क़ुरान में हँसना, गाना, नाचना, संगीत, आपसी बातचीत, गुफ्तगू करना, कोई भी अच्छा काम करना, गुनगुनाना, किसी भी तरह का खेल खेलना, हंसी-मजाक करना, चुहल करना, गुदगुदाना, किसी भी तरह का मनोरंजन करना, मुस्कराना, प्यार करना, दोस्त बनाना, उछलना व कूदना सभी कुछ हराम है वर्जित है। दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि क़ुरान इंसानों को मुर्दों की तरह से गूंगे-बहरे होकर, बिना हिले-डुले व रोते हुए ही जीने का फ़रमान देती है। क़ुरान को हँसते हुए इंसान अच्छे नहीं लगते। यह इंसानों को खुशहाल तरीके से जीते हुए देखना ही नहीं चाहती।
यह मेरा विश्व के सभी मुल्ला, मौलाना, मौलवी, क़ारी और उलेमाओं को चैलेंज है कि कोई भी मुझे क़ुरान की रोशनी में मेरी इन बातों का जवाब दे और मुझे ज़्यादा तो क्या सिर्फ़ और सिर्फ़ कोई ऐसा मुस्लिम पूरी दुनियाँ में बता दे। जो सिर्फ़ और सिर्फ़ क़ुरान के अहकाम के मुताबिक ही जी रहा हो। मेरा कहना है कि दुनियाँ में सभी के सभी मुस्लिम हराम की ज़िंदगी जी रहे हैं। यदि किसी को उज्र है तो यहाँ पर जवाब दे सकता है।
मेरा कहना है कि क़ुरान बहुत ही ज़्यादा महदूद किताब है। जिसमें यह कहीं भी नहीं लिखा है कि मुसलमान Electricity और बिजली और उसके Appliances का स्तैमाल करेंगे। इसके साथ ही पेट्रोलियम पदार्थों पेट्रोल, डीजल व रसोई गैस आदि का प्रयोग करेंगे। Electronics Gadgets जैसे TV, Computer, Laptop, Mobile Phone, Network, Social Media आदि का प्रयोग करेंगे। क्या क़ुरान में यह लिखा हुआ है? यदि नहीं! तो फिर यह स्वतः ही साबित हो जाता है कि विश्व के सभी मुसलमान हराम की ज़िंदगी ही जी रहे हैं। इसीलिए मैं कह रहा हूँ कि ज़िन्दगी के लिए इतनी ज़्यादा अपर्याप्त और Insufficient किताब है क़ुरान।
यदि सच कहा जाए तो क़ुरान इंसानों को एक प्रकार से जीने की ही मुमानियत करती है। जैसे कोई कह रहा है कि आपको आक्सीजन के बिना ही जीना होगा। क्या यह सम्भव हो सकता है? बिल्कुल भी नहीं। फिर तो समझ में आ ही जाना चाहिए कि कितनी अव्यावहारिक किताब है यह क़ुरान।
लोधी विनोद पटेल, आगरा।
The Fans of Vinod Patel Agra
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14/03/2026
दुनियाँ में सभी ग़ैर-मुस्लिम इंसानों को काफ़िर और मुशरिक कह कर वाजिबुल-क़त्ल मानना इंसानियत की सबसे बड़ी Mobe Lynching है।
. स्वामी की धरोहर पर भयंकर संकट का साया।
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राठ स्थित स्वामी ब्रह्मानन्द जी की थाती की स्थिति ख़राब नहीं है बल्कि बहुत ज़्यादा ख़राब है।
1100 एकड़ भूमि स्वामी के श्रम की पूँजी में से निकल चुकी है। उसका अधिग्रहण 'वन-विभाग' द्वारा प्रबंधकों की घोर लापरवाही के चलते कर लिया गया है। समाज को इसका पता तक नहीं है। इतने बड़ा समाज का अहित हो जाने पर भी समिति ने इसे किसी को बताना तक उचित नहीं समझा। वस्तुतः वहाँ की प्रबन्ध समिति स्व० डा० राम सिंह और उनके परिवार की ग़ुलाम सी है। आज तक दूसरे परिवार का कोई भी व्यक्ति चेयरमैन नहीं बन सका है। जो उनके जबरन एकाधिकार का ही परिचायक है। वर्तमान में डा० राम सिंह के छोटे बेटे डा० इन्द्रपाल सिंह जी ही चेयरमैन हैं।
स्वामी के समय कुल 105 फाउन्डर सदस्य थे। जिनमें अब केवल 24 ही जीवित बचे हैं। कुल सदस्यों की संख्या 274 है। जिनमें ग़ैर लोधी ज़्यादा हैं। इन सदस्यों में जो डा० राम सिंह परिवार के चहेते हैं। उन्हें ही सदस्य बनाया जाता है। जिनके बल पर ही यह परिवार हमेशा प्रबंध समिति में काबिज रहता है।
एक श्री सुन्दर लाल विश्वकर्मा हैं। जो वर्तमान में 15-16 वर्ष पूर्व काॅलेज के कार्यालय अधीक्षक पद से रिटायर हो चुके हैं। लेकिन इनका इतना बड़ा दबदबा और जलवा है कि इनके बिना वहाँ पर परिन्दा भी पर नहीं मार सकता। इनके अतिरिक्त जो प्रबंध समिति दिखाई दे रही है। वह नाममात्र की ही संस्था है। किसी का कोई अस्तित्व नहीं है। आज स्वामी ब्रह्मानन्द जी की धरोहर का जो भी सत्यानाश हो रहा है। उसके एकमात्र सूत्रधार यही हैं। इन्होंने सन् 1980 के दशक में चपरासी रहते हुए 30,000/- के स्पिरिट की चोरी की थी। जिसके कारण तत्कालीन प्राचार्य श्री डूंगर सिंह ने इन पर 50/- का जुर्माना लगाया था। लेकिन डा० गोपी नाथ जी ने वह जुर्माने वाली इनकी चरित्र पंजिका ही बदल दी थी। यह था इस व्यक्ति का प्रभाव। यह व्यक्ति प्रारम्भ में काॅलेज में चपरासी भर्ती हुआ था। किन्तु चापलूसी के बल पर बहुत जल्दी लिपिक बन गया। उसके बाद फिर बहुत जल्दी कार्यालय अधीक्षक।
यदि समग्र रूप से देखा जाये तो सम्पूर्ण कार्य समिति पर इन सुन्दर लाल विश्वकर्मा का एकाधिकार है। जैसे कि वहाँ का पूरा का पूरा लोधी साम्राज्य इनके अधीन ही हो।
वहाँ प्रबंध समिति का पद तो डा० राम सिंह परिवार के लिए आरक्षित है ही। लेकिन वहाँ पर जो भी प्राचार्य बनता है। वह भी सुन्दर लाल विश्वकर्मा की पसन्द का ही होता है तथा सदैव उनका अधीनस्थ सा ही रहता है।
चेयरमैन और कालेज के प्राचार्य इनके पैर छूते हैं।
स्वामी ब्रह्मानन्द जी की इस थाती की लगभग 2100 एकड़ ज़मीन को एक कम्पनी को नाममात्र की दिखावटी धनराशि पर लीज पर दे दिया गया है। जिसमें हमेशा ही बहुत ही बड़ा घपला रहता है।
मैंने अपने व्यक्तिगत स्रोतों से प्राप्त सूचना के आधार पर स्वामी ब्रह्मानन्द जी की क्षरित हो रही धरोहर पर एक छोटी सी प्रकाश की किरण डाली है। इसलिए कि समाज इस पर गम्भीरता से संज्ञान ले और यथोचित व अपेक्षित कार्यवाही करे। कहीं ऐसा न हो कि हमारी सुषुप्तावस्था समाज के इस एकमात्र साम्राज्य बंटाधार ही कर दे और हमारे पास पछतावे के अलावा और कुछ शेष ही न रह जाये। इसलिए जागना बहुत आवश्यक है।
मैं एक श्रंखला की भाँति इस परिप्रेक्ष्य में अनवरत लिखता रहूँगा और समाज को जगाने का प्रयास करता रहूँगा। वैसे मैं लगभग दस वर्ष पूर्व भी ऐसा प्रयास कर चुका हूँ। परन्तु समाज ने उस समय बिल्कुल भी वांछित ध्यान नहीं दिया था। इस बार मैं अपने सुधी और प्रबुद्ध बन्धुओं से करबद्ध निवेदन कर रहा हूँ कि वे अवश्य ही समाज के इस ज्वलंत व सुलगते हुए विषय पर अवश्य ही ध्यान ही न दें। अपितु कुछ न कुछ सकारात्मक ऐसा करें कि हमारी इस दुखती हुई रग को शान्ति मिल जाये। अंततः स्वामी जी की धरोहर को सुरक्षित रखना हमारी प्रथम वरीयता में होना ही चाहिए। स्वामी ब्रह्मानन्द जी के प्रति हम सभी के हृदय में जो शुचिपूर्ण व सम्मान का भाव है। वह आज हम सबसे एक यथोचित कार्यवाही की प्रबल मांग कर रहा है। इसलिए हम सभी का स्वयंमेव ही यह नैतिक कर्त्तव्य बन जाता है कि हमें प्राणप्रण से उनकी थाती का संरक्षण करके उनकी पवित्र आत्मा को शान्ति प्रदान करनी ही चाहिए।
मेरे प्रिय समाज बन्धुओं! जागो अब तो मेरे लोधी समाज जागो। कम से कम अपने समाज के एकमात्र महामानव तथा पुण्य आत्मा द्वारा किये गये श्रम से अर्जित धरोहर को बचाने के उद्देश्य से जागो। समाज के साथ अव्यावहारिकता और अनियमित आचरण करने वालों को बता दो कि हम भी मानव हैं और स्वामी ब्रह्मानन्द जी के सच्चे सेवक हैं। अब हमारी मानवीयता भी जाग गई है और हम अपने समाज की पुण्यात्मा तथा महापुरुष के लिए कुछ भी कर सकते हैं। अब हम यह सिद्ध करके ही रहेंगे कि हम भी इस इक्कीसवीं शताब्दी का एक जागरूक और संगठित समाज हैं।
बहुत-बहुत धन्यवाद।
लोधी विनोद पटेल, आगरा।
युवाओं द्वारा छात्रावस्था का गम्भीरता से लेना सफलता की गारन्टी है।
सारी इंसानियत को ख़त्म कर उसे सिर्फ़ अपने ही मज़हब में बनाने का सपना इंसानियत के अस्तित्व के लिए सबसे विध्वंसक व अनैतिक काम है।
13/12/2024
इंसानियत को निगलने के लिए लपलपाती हुई इस्लाम मज़हब की ज़हरीली जीभ।
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