𝗕𝗵𝗮𝗿𝗮𝘁 𝗦𝗵𝗮𝗵

𝗕𝗵𝗮𝗿𝗮𝘁 𝗦𝗵𝗮𝗵

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समता, स्वतंत्रता, बंधुता, सामाजिक न्याय और लोकतंत्र जैसे मूल्य ही सच्चे राष्ट्रवाद के स्तंभ हैं।

22/12/2025

धनंजय, तुम इतनी जल्दी साथ छोड़ जाओगे, सोचा न था। तुम्हारी यादें हमेशा हमारे दिलों में जीवित रहेंगी। अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि और शत-शत नमन।

10/07/2024

મારા જન્મદિવસ નિમિત્તે વિવિધ માધ્યમો થકી જન્મ દિવસ ની શુભકામનાઓ પાઠવનાર દરેક સાથી મિત્રો નો ખુબ ખુબ આભાર.
બીજું કશું કમાયા કે ના કમાયા આપ સહુ મિત્રો નો પ્રેમ, સ્નેહ અને સાથ સહકાર કમાયા તેનો સંતોષ છે જે જીવનમાં ઊર્જા આપે છે.
કોઈ ને પણ આભાર માનવાનું રહી ગયું હોય તો ક્ષમા ચાહું છું.
આમ જ આપ સૌ હંમેશા મને આશીર્વાદ અને શુભકામનાઓ આપી મારી સાથે રહેશો એવી આશા...🙏

07/05/2024

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23/11/2023

आधुनिक वर्णव्यवस्था और जातिवाद कहा है?

हिंदुत्व के हिसाब से एक क्षत्रिय का जातिगत काम सिर्फ युद्ध लड़ना यानी सुरक्षा और सलामती की स्थापना करना और शासन करना होता है लेकिन आज के जमाने में यह सारे क्षत्रिय वाले काम सभी वर्ण के लोग करते है और कोईभी क्षत्रिय उसका विरोध नहीं करता! और नाही कहेता है की फौज, पुलिस में सिर्फ हम ही होंगे और विधायक, सांसद बनके देश का शासन सिर्फ हम ही चलाएंगे।

वैश्य का जातिगत काम सिर्फ व्यापार करना होता है लेकिन आजकल सारे वर्ण के लोग व्यापार या बिजनेस करते है और कोईभी वैश्य उसका विरोध नहीं करता!

शुद्र का जातिगत काम बाकी सभी वर्ण वालो की सेवा करना यानी नोकरी करना होता है लेकिन नोकरी तो सभी वर्ण के लोग करते है और कभीभी कोई शुद्र यह नहीं कहता कि सारी सरकारी और गैर सरकारी नौकरी सिर्फ हमे ही मिलनी चाहिए।

जबकि एक ब्राह्मण सभी वर्ण वालो के काम करता है जैसे पुलिस में जाना, फौज में जाना, सरकारी और प्राइवेट नौकरियां करना, व्यापार या धंधा करना, विधायक या सांसद बनके देश पर शासन करना, वग़ैरह-वग़ैरह, लेकिन वह कभी भी अपना जातिगत काम यानी मंदिर का पुजारी बनना, महंत बनना या कर्मकांड जैसे पंडिताई के काम कभी भी किसी को सीखने भी नही देता और अगर कोई सिख लेता है तो उसे करने नही देता है या उसका विरोध करता है, ऐसा क्यों?

यानी की यह वर्णव्यस्था सिर्फ ब्राह्मणों के ही लाभ की व्यवस्था थी और आज भी है, क्योंकि बाकी के तीनो वर्ण देश के संविधान की वजह से कुछ हद तक हकारात्मक परिवर्तन की ओर बढ़ते दिख रहे है लेकिन ब्राह्मण वर्ण आज भी वही पुरानी और घटिया व्यवस्था से नए नए तरीके से चिपका हुआ सा लगता है, और अन्य तीनो वर्णों को अपने खुद के स्वार्थ के लिए इस्तेमाल करता है।

Mhara Pichchar | Trailer 06/08/2023

Hi, Mhara Pichchar (Our Film) is Budhan Theatre’s new film. As the world grappled with the impact of the first and second waves of the COVID-19 pandemic, Budhan Theatre artists felt compelled to give voice to the marginalized communities that were overlooked by mainstream media and government institutions. At a time when physical spaces were shut down, we turned to the digital realm to amplify the voices of those who were facing immense challenges and document their stories of survival.
Please watch, Share, Comment, Like or Dislike...

Mhara Pichchar | Trailer Mhara Pichchar (Our Film) | 49 mins | 2023 | India, UK In response to the COVID-19 pandemic, a collective of indigenous artists belonging to India’s ‘ex-crim...

21/01/2023

આપ કા કહેના તો સહી હૈ લેકિન,
હમેં રહેના તો વહી કે વહી હૈ...

03/12/2022

मेरे सभी एडवोकेट मित्रो को
"अधिवक्ता दिवस"
की हार्दिक शुभकामनाएं।

13/11/2022

रोज़ भौंकनेवाले क्या समझेंगे इस बात को।
तुम्हे हम भी सताने पे उतर आए तो क्या होगा,
तुम्हारा दिल दुखाने पे उतर आए तो क्या होगा;
हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में,
अगर हम सच बताने पे उतर आए तो क्या होगा।

सच बोलने पे मजबूर करोंगे तो घाटे में रहोंगे…

08/09/2022

अब इस दुर्घटना को ध्यान में रखते हुए सोफे पर भी सीट बेल्ट अनिवार्य कर देना चाहिए। 😂😄🤣
"at any lost, lives have to be saved".

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