22/08/2026
आरक्षण आज के समय में आर्थिक आरक्षण की स्थापना बहुत ही प्रासंगिक, विचारणी विषय बन गया है। और यह समाजिक न्याय एवं समन्वय, राष्ट्र को मजबूत सशक्त, विकसित अंतर कलह से बचाने के लिए अत्यंत आवश्यक है
और यह इस लिए जरूरी है कि वर्तमान जातिगत आरक्षण व्यवस्था में जिनको लाभ मिलना है या मिल रहा है। उसमें एक धड़ा गरीब दुसरा गरीब बनता जा रहा है। चाहे पिछड़ा या दलित जिनको अभी तक जातिगत आरक्षण मिल रहा है। और मिलना भी चाहिए। लेकिन इन्हीं के समाज में जिनका जीवन स्तर प्रत्याशा उच्च लेवल का है आरक्षण का लाभ लेकर। ऐसे लोग कभी भी आरक्षण नहीं छोड़ना चाहते हैं।अगर छोड़ेंगे तो उसका लाभ सवर्ण समाज को तो नहीं मिलेगा, अगर मिलेगा तो वह उनके ही समाज जाति के लोगों को मिलेगा। पर इन्हीं के जाति समाज के लोग नहीं चाहते हैं, की हमारा आरक्षण हमारे लोगों को मिले और हमारे बराबर बन संके।
और ये लोग हैं कौन? पिछड़ा एवं दलित समाज जाति के आरक्षण भोगी अमीर लोग,
जैसे पहला धड़ा राजनीतिक लोग,प्रधान पार्षद, विधायक सांसद मंत्री अन्य
दुसरा धड़ा अधिकारीगण मास्टर, विकास अधिकारी, राजस्व, पुलिस अधिकारी न्याय अधिकारी एवं कलेक्टर अन्य
नेता के बच्चे नेता डॉक्टर का बेटा डॉक्टर अधिकारी का बेटा अधिकारी कभी नहीं चाहेगा कोई हमारी बराबरी कर सके हमारा स्थान ले हमारी सुख सुविधा छिन जाए । नहीं तो इनका आरक्षण छिन जाएगा और या फिर पहले के जैसे गरीब बन जायेंगे। ऐसे लोग कभी नहीं चाहते कि सामाजिक वातावरण शांत एवं समन्वय ठीक रहे । देश हमारा विकास समुन्नत को प्राप्त हो।
ऐसे लोग जो जिस आरक्षण से इस स्थान को प्राप्त किए हैं और उनका जीवन प्रत्याशा उच्च लेवल का हो गया है वही लोग नहीं जाते हैं कि हमारी जाति समाज के लोग हमारे लेवल और बराबरी की हो जाए। जहां पिछड़ा और दलित समाज का एक वर्ग अमीर तो दूसरा गरीब का गरीब बनता जा रहा है।
राजनीतिक एवं अधिकारियों का धड़ा एवं इस समाज के उच्च स्तर का जीवन शैली जीने वाले कभी नहीं चाहेंगे कि हमारा पतन और विनाश हो आरक्षण छोड़ने की वजह से ।
एक मजदूर भिखारीयो का जीवन शैली जीने का लड़का एक मास्टर एक अधिकारी नेता के बेटे का बराबरी कैसे कर सकता है एवं हमारे स्थान को कैसे प्राप्त कर सकता है। दलित पिछड़े राजनेता अधिकारी उच्च प्रत्याशा वाले परिवार कभी हजम नहीं कर पाएंगे कि जिस आरक्षण के बदौलत हम यहां हैं उसको छोड़कर के हम कैसे छोड़ कर उस स्थान पर चले जाएं हम। भले ही वह हमारी जाति हमारे समाज के क्यों न हो।
अगर हम हमारा परिवार आरक्षण छोड़ते हैं तो वहां भी अधिकारी नेता उच्च जीवन प्रत्याशा जीने का अधिकारी हो जाएगा आरक्षण से। भीक्षा वृत्त करने वाला गरीब मजदूर भिखारीयो की जीवन शैली जीने वाले ब्यक्ति का परिवार बच्चे। कैसे बराबरी कर सकते हैं ऐसे नहीं होने दूंगा। जैसे -दलित पिछड़े समाज के अमीर राजनेता अधिकारी उच्च पदास्थ उच्च परिवार के लोग।
और इन सभी का मूलतः निष्कर्ष यही निकलता है अगर जातिगत आरक्षण व्यवस्था को ऐसे ही चलने दिया गया तो आने वाला समय समाज में ना तो शांति,न समन्वय रहेगी ना राष्ट्र विकसित और उन्नत को प्राप्त नहीं कर पाएगा और इन सभी का जिम्मेदार केवल पिछड़ा दलित आमिर उच्च स्तर परिवार राजनीतिक अधिकार गण आरक्षण भोगी लोग ही जिम्मेदार होंगे। जहां पिछड़ा दलित वर्ग में बहुत बड़ा आर्थिक असंतुलन बन जाएगा
और इसका दोष सदैव के भांति सवर्ण समाज पर मढा जाएगा । जो कि देश में अब तक यह देखने को मिल रहा है।
यही लोग आरक्षण विरोधी हैं यह लोग नहीं चाहते कि दलित पिछडे समाज का उत्थान विकास हो और यह सब वही लोग साबित करने में लग जाएंगे जो सही मायने में आरक्षण का लाभ लेकर के अपने ही जात, समाज के लोगों को दबा रहे हैं उनका हक खा रहे हैं। अपने ही समाज जाति में एक बड़ा आर्थिक असंतुलन स्थापित करने का षड्यंत्र करने का काम कर रहे हैं। अपनी निजी स्वार्थ में
सवर्ण समाज हमेशा से ही शिक्षा गत में जागरूक आत्मनिर्भर रहा है। उसको आरक्षण नहीं भी मिलेगा तब भी वह अपना स्थान बना लेंगे और बनाया है। उन्हें किसी तरह का सहायता की जरूरत नहीं है वह हमेशा से शिक्षा जगत में अपने स्थान को बनाया अपने योग्यता क्षमता के ऊपर
जहां स्वर्ण समाज को आरक्षण का लाभ नहीं मिल पा रहा है वहीं आने वाले समय में दलित पिछड़े समाज में एक बहुत बड़ा आर्थिक असंतुलन देखने को मिलेगा और इसका खामियाजा केवल हमारे सवर्ण समाज ही भुगत रहा हैं और सबसे बड़ा क्षति इस देश को होगा और जो इस देश का सच्चा नागरिक होगा वह। कभी राष्ट्र की अहित क्षति करने के विषय में नहीं सोचेगा और ना ही ऐसा कुकृत्य करेगा। अपने निजी स्वार्थ में।
और वर्तमान की जरुरत यही है कि आरक्षण व्यवस्था लागू रहना चाहिए लेकिन जातिगत आरक्षण ना हो करके बल्कि आर्थिक आधार पर सर्व समाज के लिए उपलब्ध होनी चाहिए और इसमें योग्यता क्षमता पारदर्शिता से कोई समझौता ना हो ।
तभी अगडा पिछड़ा दलित अमीर गरीब के बीच में समन्वय सुख शांति समृद्धि स्थापित होगा इस देश के प्रत्येक नागरिक को समान तरीके से अवसर विकास समुन्नत और योग्यतम स्थान पर पहुंचने में सहायक सिद्ध होगा । और हमारा राष्ट्र एक नए आयाम को प्राप्त होगा।
तभी व्यक्ति जाति समाज देश में समन्वय सुख शांति समृद्धि और वैभव समुन्नत को प्राप्त होगा हमारा समाज हमारा देश।