Saurabh Awadh

Saurabh Awadh

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प्रचारक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अम्बेडकरनगर अयोध्या जी

14/02/2026

आज से 5 साल पूर्व श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए समर्पण राशि एकत्रित करते हुए

राम काज कीन्हे बिनु मोहि कहाँ विश्राम।
राम नाम बसि रघुवर चरना, तनु मन बचन धरम निधान॥

जब तक प्रभु राम का कार्य पूरा न हो जाए, तब तक मुझे विश्राम नहीं है। मेरे तन, मन और वचन में केवल प्रभु राम का नाम ही बसता है।
जय श्री राम ❣️❣️

11/02/2026

कालनेमि आज भी ज़िंदा है बस हमें पहचानने की जरूरत है।

इस विषय पर अपना तर्क प्रस्तुत करें। वर्तमान में यह विषय बहुत प्रसांगिक विषय है।

रामायण में एक पात्र आता है—कालनेमि। वह साधु का भेष धरकर हनुमान जी को भ्रमित करने आया था। केसरिया वस्त्र, जप-तप, मीठे वचन… सब कुछ था, पर भीतर छल और स्वार्थ भरा था। हनुमान जी ने पहचान लिया कि साधु का वेश पहन लेने से कोई साधु नहीं बन जाता, विचार बदलने पड़ते हैं।
इसी तरह रावण भी माता सीता का हरण करने साधु बनकर ही आया था। बाहरी रूप धर्म का था, लेकिन मन में अहंकार, सत्ता और वासना थी। इसलिए वह रावण ही रहा—भेष बदल गया, विचार नहीं।
आज का भारत भी कुछ ऐसा ही दृश्य देख रहा है। हिंदू होने का दावा, धर्म की भाषा, मंदिर-घंटे और नारों की गूंज—सब कुछ दिखाई देता है। लेकिन उसी के साथ हिंदू समाज को जातियों में बाँटने, एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा करने और भेदभाव को कानून और नीतियों के ज़रिये मजबूत करने के प्रयोग भी चल रहे हैं।
अगर सत्ता सच में हिंदू विचारधारा से चलती, तो वह समरसता, समानता और एकता को मजबूत करती—न कि समाज को छोटे-छोटे खांचों में तोड़ती।
हिंदू धर्म की आत्मा “वसुधैव कुटुम्बकम्” है, न कि “तुम ऊँचे, हम नीचे”।
हिंदू होना कपड़ों, नारों या सत्ता से नहीं तय होता—विचार, आचरण और न्याय से तय होता है।
इतिहास गवाह है—
भेष बदलने वाले बहुत आए,पर हम फिर भी दिग भ्रमित नहीं हुए
कालनेमि और रावण अंततः पहचाने गए।
अब सवाल यह है—
हम पहचानेंगे या फिर भ्रमित ही रहेंगे ?
कालनेमि आज_भी जिंदा है
व्यक्ति का भेष नहीं विचार देखो
हिंदू एकता के लिए जातिवाद_बंद करो
जबकि धर्म हमें न्याय शांति करूणा दया सिखाता है
हम सभी को रामायण से सबक लेना चाहिए।
सत्ता या संस्कार,त्याग , संतोष या भोग,

07/02/2026

भारत में छुआ छूत का सच।
क्या प्राचीन भारत में सच में छुआछूत और जातिगत शोषण था?या फिर यह झूठ हमें बार-बार पढ़ाया गया।

चलिए, हज़ारों साल पुराने इतिहास से जवाब ढूंढते हैं..

वैदिक और प्राचीन भारत का इतिहास -

सम्राट शांतनु ने मछुआरे की पुत्री सत्यवती से विवाह किया था।उनके पुत्र के लिए भीष्म ने आजीवन ब्रह्मचर्य की प्रतिज्ञा ली — यह शोषण था या त्याग।

महाभारत के रचयिता वेदव्यास मछुआरे कुल से थे, फिर भी महर्षि बने, गुरुकुल चलाया।

विदुर, दासी पुत्र होकर भी हस्तिनापुर के महामंत्री बने विदुर नीति आज भी राजनीति का महाग्रंथ है।

भीम ने वनवासी हिडिम्बा से विवाह किया। श्रीकृष्ण ग्वाल परिवार में जन्मे, बलराम हल धारण करने वाले कृषक थे।फिर भी श्रीकृष्ण पूरे विश्व के पूजनीय बने और गीता दी।

रामायण कालीन इतिहास -

राम के मित्र निषादराज उनके साथ गुरुकुल में पढ़े।लव-कुश ने शिक्षा पाई वनवासी महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में।

स्पष्ट है कि शिक्षा, सम्मान और पद योग्यता से मिलते थे, जन्म से नहीं।वर्ण काम के आधार पर थे — आज की भाषा में Division of Labour।

महाजनपद और साम्राज्य कालीन इतिहास -

नन्द वंश (मगध साम्राज्य) — नाई कुल से उठकर सम्राट बने।

मौर्य वंश — मोर पालने वाले चंद्रगुप्त को ब्राह्मण चाणक्य ने भारत का सम्राट बनाया।

गुप्त वंश — घोड़े का व्यापार करने वाले सम्राट बने और 140 वर्षों तक राज किया गुप्त काल को भारत का स्वर्ण युग कहा गया।

प्राचीन काल का 92% शासन उन्हीं वर्गों का रहा जिन्हें आज “दलित-पिछड़ा” कहा जाता है।

तो फिर शोषण कहाँ था?

मध्यकाल और मराठा कालीन इतिहास -

बाजीराव पेशवा ने ग्वाले गायकवाड़ को गुजरात का राजा बनाया और चरवाहा होलकर को मालवा का शासक। होलकर साम्राज्य की अहिल्याबाई होलकर को शिवभक्त, मंदिर और गुरुकुलों की निर्माता कहा जाता है।

मीरा बाई (राजपूत राजा की पत्नी) के गुरु चर्मकार संत रविदास जी थे।और रविदास जी के गुरु ब्राह्मण रामानंद जी थे।

यहाँ भी कोई जातिगत भेदभाव नहीं दिखता।

तो असल समस्या कब शुरू हुई?

मुगल काल में पर्दाप्रथा, गुलामी, बाल विवाह और कुरीतियां पैदा हुई।

ब्रिटिश भारतीय शासन (1800–1947) -

"Divide & Rule"बांटो और राज करो की नीति सामने आती है और जाति की सख़्त दीवारें सामने आती है।

अंग्रेज अधिकारी Nicholas Dirks की किताब “Castes of Mind” बताती है कैसे अंग्रेजों ने जातिवाद को मजबूत किया और कैसे कुछ स्वार्थी नेताओं ने उसे राजनीति बना दिया।

मेगास्थनीज, फाहियान, ह्वेनसांग, अलबरूनी इत्यादि किसी भी विदेशी यात्री ने नहीं लिखा कि भारत में जातिगत शोषण था।

निष्कर्ष क्या निकलता है?

प्राचीन भारत मे योग्यता, कर्म और समरसता थी। जातिवाद वास्तव में औपनिवेशिक काल की साजिश थी और इसे हिंदुओं को कमजोर करने के लिए कुछ स्वार्थी आधुनिक राजनेताओं ने राजनीतिक रंग दिया।

04/02/2026

होटल के मुस्लिम वेटर ने हिंदू को मटन की जगह गौमास खिलाया.

ब्राह्मण अभिनेता को कोलकाता के पब में खिला दिया गया गोमांस; मुस्लिम वेटर गिरफ्तार

अभिनेता सायक चक्रवर्ती शुक्रवार रात कोलकाता के एक पब में गए जहां उन्हें 'मटन स्टेक ऑर्डर करने पर बीफ डिश पेश की गई। बकौल सायक, उन्होंने अनजाने में उसे खा भी लिया और ब्राह्मण होने के नाते इससे उनकी धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए शनिवार को मुस्लिम वेटर को गिरफ्तार कर लिया।

04/02/2026
04/02/2026

यूपी के बस्ती से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक हिंदू युवती ने एक मुस्लिम युवक पर आरोप लगाया है कि उसने अपनी पहचान छिपाकर उसके साथ नजदीकियां बढ़ाईं और फिर रेप किया। युवती को जब युवक की सच्चाई पता लगी तो युवक की तरफ से उसे धमकाया गया और धर्म परिवर्तन का प्रेशर बनाया गया। पीड़िता ने आरोप लगाया, "300 से ज्यादा हिंदू लड़कियां उसका शिकार हो चुकी हैं। जिसमें से एक मैं भी हूं। ना जानें कितनी लड़कियों को बेच दिया गया है।" बस्ती पुलिस ने इस मामले में लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी अजफरुल हक को मुंबई के बांद्रा इलाके से गिरफ्तार कर लिया है।

इस देश का दुर्भाग्य देखिए जहां पर आज हिंदू समाज को बांटने की राजनीति चल रही है वहीं यूजीसी एससी एसटी जैसे गंभीर विषय पर सरकार द्वारा कानून लाया जाना और समाज को जाति के आधार पर बांटना उनको समाज में वैमनस्य का भाव बढ़ाना एक दूसरे के मन में दुर्भावना जाति नमक विभिषिका पैदा करना इसके लिए कानून बना रही है सरकार लागू भी करने वाली है। और आपस में लड़ा करके देश को समाज को व्यक्ति को खत्म करने का जो कुछ षडयंत्र है उस पर सरकार एकदम सक्रिय है।

वही देश में जहां पर भारतीत्व तो को खंडित करने के लिए इस राष्ट्र को खोखला बनाने के लिए ईसाई मशीनरिया इस्लामी मिशनरी एकदम सक्रिय रूप से अपने षड्यंत्र को अंजाम देने में अग्रसर है इससे नादेश समाज व्यक्ति और धार्मिकता को नष्ट करने की जो एक वैश्विक लेवल का षड्यंत्र चल रहा है इस भारत देश में इस पर सरकार जरा सा भी ध्यान आकृष्ट करने के मूड में बिल्कुल नहीं है यह हमारे लिए दुर्भाग्यपूर्ण है समाज के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है हिंदू के नाम पर वोट लेना सत्ता में रहकर भोग करना यही सरकारों का रवैया वर्तमान में चल रहा है और लोग अपने को षड्यंत्र को उद्देश्य की पूर्ति में एकदम तटस्थ है और हम हिंदू हिंदू के नाम पर वोट लेकर के सट्टा का भोग कर रहे हैं उसी में व्यस्त और मस्त हैं।
और ह मंदिर बनाने में बनाकर लोगों की धार्मिक भावनाओं को जागृत कर सत्ता भोग में व्यस्त हैं और समाज को गुमराह करने का काम कर रहे हैं मंदिर तो हम बना रहे हैं हमारा देश पुरातन में मंदिर धन-धान्य से संपन्न राष्ट्र रहा है क्या हमारा आज धन-धान्य मंदिर इत्यादि सुरक्षित हैं।नहीं ना । क्या मंदिर निर्माण से हमारा राष्ट्र मजबूत सशक्त हो जाएगा या हिंदू हिंदू करने से मजबूत हो जाएगा। नहीं ना आज समाज को हिंदू समाज मंदिर सनातन संस्कृति को अगर कुछ जरूरत है तो वह है हमारी एकता , हमारे मंदिरों की सुरक्षा। राष्ट्र की आंतरिक सुरक्षा, सनातन विचारों की रक्षा और इन विषयों पर सरकार एकदम मदमस्त है कोई ध्यान नहीं है ना इन पर कोई अभी तक ठोस कदम उठाए गए हैं। हमारी एकता को खंडित करने के लिए सरकार विभिन्न तरह का समाज विरोधी कानून ला रहे हैं जहां समाज में समता नहीं पर वैमानशता का भाव बढ़ रहा है।
मंदिर तो बनाए जा रहे हैं लेकिन उसकी सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं जिससे कि हमारा भविष्य सुरक्षित हो।
आज इसी एवं मुस्लिम मिशनरिया का वैश्विक लेवल का षड्यंत्र हिंदू समाज को खत्म करने के लिए लगा हुआ है और अपनी वह लक्ष्य की पूर्ति के लिए अग्रसर है परंतु हमारे वैचारिक सरकार इस पर जरा सही भी ध्यान आकृष्ट नहीं कर रही है कुंभकरण की तरह एकदम मदमस्त है
और यह सब विषय हमारे लिए इस देश के नागरिक लिए इस देश की मजबूती के लिए बहुत महत्वपूर्ण है इस पर बड़ा षड्यंत्र चल रहा और खोखला बनाती जा रही है हमको अंदर से साथी साथ जनसंख्या नियंत्रण कानून भी बहुत अति आवश्यक हो चुका है वर्तमान समय में नहीं तो जनसंख्या बढ़कर की ही देश को कब्जा कर लेंगे इस पर भी सरकार का ध्यान नहीं जा रहा है।
हमारी न्यू को और इस देश को इससे सबक लेने की जरूरत है इस समय, समाज को

04/02/2026

01 वर्ष में संसद के 03 सत्र होते हैं।

प्रत्येक सत्र में मात्र 01 घटिया नियम-कानून बदलते तो अब तक 33 घटिया नियम-कानून समाप्त कर 33 सर्वोत्तम नियम-कानून बना सकते थे।

नियम-कानून और सिस्टम बदले बिना भ्रष्टाचार, अपराध, अराजकता को समाप्त करना असंभव है.

04/02/2026

हिंदू सम्मेलन पहितीपुर कटेहरी

04/02/2026

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की त्याग समर्पण बलिदान की १०० वर्ष की ध्येय यात्रा

24/01/2026

संस्कृति के संरक्षण और विकास के संकल्प के साथ निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर उत्तर प्रदेश आज विरासत और भविष्य के सशक्त समन्वय का प्रतीक बन रहा है।

उत्तर प्रदेश राज्य के स्थापना दिवस पर समस्त प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं।

#यूपी_दिवस_2026

Photos from Saurabh Awadh's post 23/01/2026

श्रवण धाम महोत्सव

Smile Buddy 22/01/2026

कृपया आप सभी मेरे यूट्यूब चैनल को लाइक एवं सब्सक्राइब करें और श्रवण क्षेत्र धाम महोत्सव का आनंद लिजिए

Smile Buddy Manoranjan

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