20/07/2026
मुसलमानों के तालीम और तरक्की पर हमला
मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय को गिराने के आदेश के ज़रिए सिर्फ़ इमारतों को नहीं, बल्कि तालीम, तरक़्क़ीपसंद ख़यालात और संविधान की रूह को निशाना बनाया गया है।
यह सिर्फ़ एक यूनिवर्सिटी का मामला नहीं, बल्कि उस सोच का सवाल है जो तालीमी इदारों को मज़बूत करने के बजाय उन्हें मिटाने में यक़ीन रखती है। मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय माइनॉरिटी इंस्टीट्यूट है पर इसमें हर मज़हब, हर जाति और हर तबके के हज़ारों छात्र तालीम हासिल करते हैं। ऐसे इदारे को निशाना बनाना नौजवानों के मुस्तक़बिल और मुल्क की तालीमी बुनियाद पर हमला है।
अगर कहीं कोई क़ानूनी या प्रशासनिक कमी थी, तो उसका हल क़ानून के दायरे में सुधार था, गिराने का आदेश नहीं। किसी विश्वविद्यालय को ढहाने का आदेश इंसाफ़ नहीं, बल्कि सियासी इंतक़ाम की मिसाल है।
यह BJP उत्तर प्रदेश हुकूमत की बीमार, इंतक़ामपसंद और तालीम-विरोधी ज़ेहनियत को बेनक़ाब करता है। जो हुकूमतें यूनिवर्सिटी नहीं बना सकतीं, वे उन्हें गिराने के आदेश देकर अपनी नाकामी छिपाने की कोशिश करती हैं।
आज वक़्त की माँग है कि समाज तालीम, इंसाफ़ और संविधान की हिफ़ाज़त के लिए एकजुट होकर आवाज़ बुलंद करे। क्योंकि जब तालीमी इदारे निशाने पर होते हैं, तो ख़तरे में सिर्फ़ एक इमारत नहीं, बल्कि पूरे मुल्क का मुस्तक़बिल होता है।
मा. लेफ्ट कमांडर
डॉ. अलिम पटेल
युनाइटेड रिपब्लिकन फोरम अमरावती, महाराष्ट्र
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