रामराज्य का मूल ज्ञान: योग वसिष्ठ
(The Core Wisdom of Ramrajya: Yog Vasistha)
"यदा न ज्ञायते मोहः सर्वत्र समदर्शनम्।
तदा ब्रह्म परं ज्ञातं तत्त्वज्ञानं तदुच्यते॥"
— योग वसिष्ठ
"जब मोह समाप्त हो जाता है और सब में समदृष्टि का अनुभव होता है, तब ब्रह्म का साक्षात्कार होता है। यही तत्त्वज्ञान कहलाता है।"
"When delusion ends and one sees all with equanimity, the supreme reality (Brahman) is known. That is true wisdom."
📖 योग वसिष्ठ क्या है?
योग वसिष्ठ एक अद्भुत ग्रंथ है जिसमें भगवान श्रीराम और उनके गुरु महर्षि वसिष्ठ के बीच संवाद हुआ। जब राम बाल्यावस्था में ही संसार के दुःख और माया से व्यथित हो उठे, तब गुरु वसिष्ठ ने उन्हें आत्मज्ञान की अमृतवर्षा दी।
योग वसिष्ठ ने श्रीराम को एक संकोचपूर्ण राजकुमार से मर्यादा पुरुषोत्तम बना दिया।
🌍 आज के युग में इसकी प्रासंगिकता
आज जब मनुष्य मोह, भ्रम और व्यस्तता से ग्रस्त है, तब योग वसिष्ठ हमें विवेक, वैराग्य और आत्मशांति का मार्ग दिखाता है। यह हमें बताता है कि संसार की वास्तविकता क्या है, और हमें अपने अंदर झाँकने की प्रेरणा देता है—जैसे श्रीराम ने किया।
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29/05/2025