SUCI-Communist UP East

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07/11/2025

"आवश्यक सूचना"
साथियों,
आप सभी जानते हैं कि, दिनांक 7 नवम्बर को रूस में सम्पन्न हुई विश्व की प्रथम समाजवादी क्रांति की वर्षगांठ है। इस अवसर पर 7 नवम्बर 2025 को शाम 7 बजे से आनलाईन परिचर्चा होगी। जिसे मुख्य रूप से काॅमरेड शंकर घोष [केन्द्रीय कमेटी सदस्य, एस.यू.सी.आई (सी)] सम्बोधित करेंगे।
अतः आप सभी साथी अधिक संख्या में समय से अवश्य जुड़ें। धन्यवाद!

क्रांतिकारी अभिवादन सहित
अशोक कुमार खरवार (जिला सचिव)
एसयूसीआई (सी) - जौनपुर

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07/11/2025
Photos from SUCI-Communist UP East's post 07/11/2025
Photos from SUCI-Communist UP East's post 06/11/2025

" काॅमरेड तालुकदार की याद में श्रद्धांजलि सभा आयोजित हुई "

06 नवम्बर 2025 / बदलापुर जौनपुर, उ.प्र।
एस.यू.सी.आई (कम्युनिस्ट) पार्टी के जौनपुर जिला कमेटी के सदस्य व एआईकेकेएमएस के उत्तर प्रदेश राज्य कमेटी के सदस्य काॅमरेड तालुकदार का असमय देहांत 18 अक्टूबर 2025 को 51 वर्ष की उम्र में हो गया था। दिवंगत काॅमरेड की याद में आज दिनांक 6 नवम्बर 2025 को दोपहर 2 बजे से जौनपुर जिले के महराजगंज क्षेत्र में सराय पड़री चौराहा के निकट केवटली रोड पर नहर के पास विद्यालय में श्रद्धांजलि सभा आयोजित किया गया।
शोक सभा की अध्यक्षता - काॅमरेड अलगूराम पटेल व संचालन - काॅमरेड शिवप्रसाद विश्वकर्मा ने किया। मुख्य वक्ता - काॅमरेड रविशंकर मौर्य [राज्य सचिव, (एसयूसीआई सी), पूर्वी उत्तर प्रदेश] ने काॅमरेड तालुकदार के जीवन संघर्ष पर विस्तार से चर्चा किया। वक्ताओं में काॅमरेड बेचन अली, अशोक कुमार खरवार, मिथिलेश कुमार मौर्य, प्रमोद कुमार शुक्ल, इन्दुकुमार शुक्ल, दिलीप कुमार खरवार, रामशरन विश्वकर्मा, राजमणि मिश्रा, रामकुमार, छोटेलाल, देवनारायण मौर्य, मनोज कन्नौजिया, प्रवीण विश्वकर्मा, रवीन्द्र पटेल, रामप्रसाद व अन्य ने अपने विचार रखे।
अंत में एस.यू.सी.आई (सी) पार्टी के संस्थापक काॅमरेड शिवदास घोष पर रचित गीत प्रस्तुत किया गया और दो मिनट मौन रखते हुए सभा समाप्त की गई।

💐 काॅमरेड तालुकदार - लाल सलाम 💐

18/10/2025

दुःखद सूचना-

साथियों,
हमारी प्रिय पार्टी एस.यू.सी.आई (कम्युनिस्ट) के जौनपुर जिला कमेटी सदस्य व एआईकेकेएमएस के उत्तर प्रदेश राज्य कमेटी के सदस्य काॅमरेड तालुकदार जी ( निवास- केवटली, सराय पड़री) का निधन आज 18 अक्टूबर 2025 को भोर में हो गया। वे लगभग 50 वर्ष के थे। उनका गंभीर बीमारी का इलाज BHU में चल रहा था। दो दिन पहले उन्हें घर लाया गया था। उनका असमय चले जाना परिवार, पार्टी व क्षेत्र के लिए अपूर्णीय क्षति है। पार्टी शोक संवेदना व्यक्त करती है और उनके परिवार के साथ हमेशा खड़ी रहेगी।

काॅमरेड तालुकदार - लाल सलाम 💐

Photos from SUCI-Communist UP East's post 09/09/2025

*काॅमरेड माओ त्से-तुंग की 50वीं स्मृति दिवस मनायी गई*
विश्व सर्वहारा वर्ग के महान नेता व चीन की क्रांति के शिल्पकार काॅमरेड माओ त्से-तुंग की 50वीं स्मृति दिवस पर आज दिनांक 9 सितम्बर 2025 को एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) पार्टी की ओर से पूर्वी उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के बदलापुर में स्थित पार्टी कार्यालय पर ध्वजारोहण व श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम की शुरूआत कार्यक्रम के मुख्य वक्ता- काॅमरेड सपन चटर्जी [ केंद्रीय कमेटी सदस्य, एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) ] के द्वारा लाल ध्वजारोहण करके किया गया। इसके बाद काॅमरेड माओ त्से-तुंग की फोटो पर माल्यार्पण करके श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता- काॅमरेड रविशंकर मौर्य (राज्य सचिव, एसयूसीआई (सी), पूर्वी उत्तर प्रदेश) और संचालन- कॉमरेड अशोक कुमार खरवार (जिला सचिव, एसयूसीआई (सी), जौनपुर) ने किया। कार्यक्रम को राज्य कार्यालय सचिव काॅमरेड जगन्नाथ वर्मा ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का समापन अंतर्राष्ट्रीय गीत प्रस्तुत करके किया गया।

काॅमरेड माओ त्से-तुंग लाल सलाम !

Photos from SUCI-Communist UP East's post 10/08/2025

एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) पार्टी के संस्थापक काॅमरेड शिवदास घोष की 50वीं स्मृति दिवस पर जनसभा आयोजित हुई।

10 अगस्त 2025 / बदलापुर, जौनपुर, उ.प्र
आजादी आंदोलन के गैर समझौतावादी धारा के अग्रणी क्रांतिकारी, सर्वहारा वर्ग के महान नेता, विख्यात मार्क्सवादी दार्शनिक तथा एस.यू.सी.आई (कम्युनिस्ट) पार्टी के संस्थापक महासचिव कॉमरेड शिवदास घोष की 50वीं स्मृति दिवस के अवसर पर आज दिनांक 10 अगस्त 2025 को जनसभा का आयोजन माया मैरिज हॉल बदलापुर, जौनपुर में किया गया। इस जनसभा में जौनपुर, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, इलाहाबाद, बलिया गाजीपुर, मऊ, बनारस सहित कई जिलों से सैकड़ों की संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं व समर्थकों ने हिस्सा लिये।
कार्यक्रम की अध्यक्षता- काॅमरेड जगन्नाथ वर्मा (राज्य कार्यालय सचिव, एसयूसीआई (सी), पूर्वी उत्तर प्रदेश) व संचालन- कॉमरेड रविशंकर मौर्य (राज्य सचिव, एसयूसीआई (सी), पूर्वी उत्तर प्रदेश) ने किया। जनसभा के मुख्य वक्ता - कॉमरेड शंकर घोष [ केंद्रीय कमेटी सदस्य, एसयूसीआई (सी) ] ने संबोधित करते हुए कहा कि-
किशोरावस्था में ही काॅमरेड शिवदास घोष स्वतंत्रता आंदोलन की क्रांतिकारी धारा में शामिल हो गए थे। अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत उन्होंने उस दौर के सबसे बड़े क्रांतिकारी संगठन 'अनुशीलन समिति' के एक स्वयंसेवक के रूप में की थी। बहुत कम समय में ही वे एक जिम्मेदार संगठक बन गए। 1942 के "भारत छोड़ो आंदोलन" में वे ओतप्रोत रूप से जुड़ गए एवं गिरफ्तार हो गए। उससे पहले, इस देश के कई विचारशील लोगों की तरह, वे मार्क्सवाद से परिचित हो गए थे। लेकिन उन्हें मार्क्सवाद का गहराई से अभ्यास करने का अवसर नहीं मिला था। उन्हें यह अवसर जेल में मिला और तीन साल (1942 से 1945) तक उन्होंने मार्क्सवाद के विभिन्न पहलुओं का गहराई से अध्ययन किया एवं अभ्यास में अपने आपको नियोजित किया । इस अभ्यास के माध्यम से ही उनमें मार्क्सवाद की गहरी समझ विकसित हुई। इस तरह 24 अप्रैल 1948 को भारतवर्ष की धरती पर एकमात्र कम्युनिस्ट पार्टी- एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) की स्थापना और उसकी प्रगति हुई । वास्तव में, एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) का इतिहास कॉमरेड शिवदास घोष के जीवन संघर्ष का इतिहास है। इसलिए, एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) और कॉमरेड शिवदास घोष एक एवं अभिन्न हैं।
पार्टी गठन के इस संघर्ष के माध्यम से ही उन्होंने इस देश की मिट्टी के अनुसार मार्क्सवाद-लेनिनवाद को विशेषीकृत करते हुए इस ज्ञान भंडार में नये विषय को संयोजित किया एवं समृद्ध किया। काॅमरेड शिवदास घोष की प्रत्यक्ष देखरेख में, एस यू सी आई (कम्युनिस्ट) ने स्थापना के बाद से ही पूंजीवाद विरोधी समाजवादी क्रांति के लक्ष्य को सामने रखते हुए एक के बाद एक आंदोलन संगठित किए । उनके जीवन काल में ही पार्टी देशव्यापी स्तर पर फैल गई थी। 5 अगस्त 1976 को उनकी मृत्यु के बाद, उनकी शिक्षाओं के आधार पर ही भारतवर्ष के लगभग सभी राज्यों में पार्टी का संगठन और भी अधिक विस्तृत हुआ है, तथा देश के बाहर भी उनके विचारों और संघर्षों का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।
इस वर्ष कॉमरेड शिवदास घोष की 50वीं स्मृति दिवस हम ऐसे समय में मना रहे हैं, जब पूरे देश में आम जन जीवन असंख्य समस्याओं से ग्रसित है। इस पतनशील पूंजीवादी व्यवस्था को बचाने के लिए केंद्र और राज्यों के सत्तारूढ़ पार्टियों की गतिविधियों के परिणामस्वरूप सामाजिक व आर्थिक असमानता जमीन और आसमान की दूरी के समान हो गयी है। भूखमरी और इलाज के अभाव में मौतें अब रोजाना की घटनाएं हो गई हैं। नई शिक्षा नीति 2020 का दुष्प्रभाव है कि, सरकारी शिक्षा विध्वंश के कगार पर है। उत्तर प्रदेश में जहां, 27000 सरकारी स्कूलों को बंद किया जा रहा है वहीं उत्तर प्रदेश भर में ही 27000 से ज्यादा शराब की दुकानों को खोला जा रहा है। जुलाई-अगस्त महीने में जिन बच्चों को स्कूल में पढ़ाई करना चाहिए, आज उन्हें अपना स्कूल बचाने के लिए सड़क पर उतरना पड़ रहा है।
अब बिजली लोगों की आवश्यक जरूरत बन चुकी है। लेकिन बिजली की समस्यायें भयंकर रूप ले रही है, जिसे बिजली संशोधन अधिनियम 2023 के माध्यम से निजीकरण के हवाले किया जा रहा है। प्रीपेड स्मार्ट मीटर के माध्यम से आम उपभोक्ताओं को लूटने की खुली छूट दी जा रही है। इस तरह बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य समेत सभी क्षेत्रों में घोर भ्रष्टाचार व्याप्त है। सरकार की तमाम जन विरोधी नीतियों के परिणामस्वरूप योग्य शिक्षक अपनी नौकरियां खोकर रास्ते पर आ गये हैं, घर-घर में बेरोजगारों की भीड़ बढ़ रही है। मजदूरों को उचित मजदूरी एवं रोजगार की गारंटी नहीं मिल रही, खेतिहर मजदूरों की दुर्दशा चरम पर है। किसानों को उनकी उपज का सही दाम नहीं मिल रहा है, जबकि खेती की लागत बढ़ती जा रही है। परिणामस्वरूप लाखों किसान कर्ज के बोझ के कारण आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं। महंगाई चरम पर है। हिंसा, अपराध, हत्या, रेप, गैंगरेप बढ़ते जा रहे हैं। एक तरफ जहां शराब व नशा का कारोबार बढ़ रहा है एवं दूसरी तरफ महिलाओं के खिलाफ हिंसा बढ़ती जा रही है। इसके साथ साथ समाज में सामग्रिक रूप से नीति - नैतिकता और संस्कृति का पतन हो रहा है।
इस असहनीय स्थिति के खिलाफ देश के अलग-अलग हिस्सों में लोग संगठित हो रहे हैं, आंदोलन कर रहे हैं। शासक वर्ग इससे भयभीत है। इसलिए वह जन-जीवन की समस्याओं से ध्यान भटकाने के लिए धार्मिक उन्माद व सांप्रदायिकता का जहर फैला रहा है। इसके साथ ही युद्ध का उन्माद पैदा कर देश की जनता में देशभक्ति की गलत धारणा पैदा करके उन्हें असली मुद्दों से भटकाने की साजिश चल रही है। केवल इस देश में ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में पूंजीवादी देश अपनी अर्थव्यवस्था के गंभीर संकट से खुद को बचाने के लिए तरह-तरह के बहाने से युद्ध छेड़ रहा है। महिलाओं और बच्चों समेत अनगिनत लोग इसके शिकार बन रहे हैं।
देश की जनता को इस दयनीय स्थिति से मुक्ति दिलाने के लिए सही नेतृत्व में जन आंदोलनों को मजबूत करने की शपथ लेने का आह्वान देता है यह 5 अगस्त का दिन।
इस अवसर पर अशोक कुमार खरवार, हीरालाल गुप्त, बेचन अली, शैलेंद्र कुमार, जयप्रकाश मौर्य, विजयानंद तिवारी, त्रिभुवन शर्मा, मुन्ना शर्मा, रामकुमार यादव, हरिशंकर मौर्य, रामसमुझ मौर्य, मकरध्वज चौहान, मिथिलेश मौर्य, दिलीप कुमार, उषा सिंह, मीता गुप्ता, सरोजा कन्नौजिया, पूनम प्रजापति, अनीता निषाद सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।

07/08/2025

10 अगस्त
जनसभा सफल बनाएं

02/08/2025

Long live Comrade SIBDAS GHOSH

Photos from SUCI-Communist UP East's post 09/07/2025

09.07.2025 .जौनपुर, उत्तर प्रदेश
“देशव्यापी आम हड़ताल के समर्थन में तथा उ.प्र में 5000 सरकारी स्कूलों को बंद करने व अन्य जन-विरोधी नीतियों के खिलाफ जिला मुख्यालय पर जुलूस व विरोध-प्रदर्शन”

उत्तर प्रदेश में 5000 सरकारी स्कूलों को बंद करने, नई शिक्षा नीति 2020, सार्वजनिक क्षेत्रों के निजीकरण, बिजली कानून संशोधन अधिनियम 2023, चार लेबर कोड, सभी फसलों पर एमएसपी की कानूनी गारण्टी न देने व सरकार की अन्य जन विरोधी नीतियों के खिलाफ देशव्यापी आम हड़ताल के समर्थन में एसयूसीआई (सी), एआईडीएसओ, एआईडीवाईओ, एआईकेकेएमएस, एआईयूटीयूसी के द्वारा संयुक्त रुप से जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। कार्यक्रम के पहले विकास भवन के सामने स्थित क्रांति स्तम्भ से जुलूस निकाला गया जो कचहरी रोड होते हुए विरोध-प्रदर्शन स्थल तक पहुंचा। इस बीच महामहिम राज्यपाल को सम्बोधित ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा गया।
वक्ताओं ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 5000 सरकारी स्कूलों को बंद/मर्ज करने का सरकारी फैसला घोर जन-विरोधी व छात्र विरोधी है। शिक्षा के निजीकरण - व्यापारीकरण को बढ़ावा देने तथा नये सरकारी शिक्षकों की भर्ती न करने के लिए स्कूलों को बंद किया जा रहा है। लेकिन दूसरी तरफ शराब की दुकाने हर जगह खोली जा रही हैं। जाहिर है कि आम गरीब जनता को अनपढ़ बनाने और नशाखोरी की ओर धकेलने की साजिश सरकार कर रही है। हास्यापद है कि, कम छात्र संख्या का हवाला देकर सरकारी स्कूलों को बंद करके सार्वजनिक शिक्षा को खत्म किया जा रहा है। सरकार को गरीब बच्चों के प्रति तनिक भी चिंता नहीं है कि, गाँव का स्कूल बंद होने पर गरीब अभिभावक अपने बच्चों की पढ़ाई मर्ज किए गए 3 किमी. दूर के स्कूल में कैसे जारी रख पायेंगे ? कई स्कूल तो ऐसे हैं जिन्हें मर्ज करने के बाद भौगोलिक दृष्टि से दुर्गम व कठिन रास्ते और कठिन आवागमन बच्चों के लिए खतरनाक है। ऐसी स्थिति में विद्यालय जाने में बच्चे सक्षम नहीं है। परिणामस्वरूप उनकी पढ़ाई छूट जायेगी और उनका भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। सरकार नई शिक्षा नीति 2020 लागू करते हुए सरकारी स्कूलों को बदहाल कर शिक्षा के निजीकरण व्यापारीकरण को बढ़ावा दे रही है।
सरकार की विभिन्न जन विरोधी नीतियों के परिणामस्वरूप आम जनता त्राहि त्राहि कर रही है। जब आम जनता शान्तिपूर्ण व लोकतांत्रिक ढंग से अपने हक-अधिकारों की मांग कर रही है तो सरकार तानाशाही तरीके से दमन कर रही है। चार श्रम कोड, बिजली कानून संशोधन अधिनियम 2023, वन संरक्षण कानून में संशोधन करके मजदूर वर्ग के अधिकारों पर हमले किये जा रहे हैं। किसान आंदोलन की मांगों सहित - सभी फसलों पर एमएसपी की कानूनी गारंटी देने के वादे से सरकार मुकर रही है। देश का किसान बदहाल होता जा रहा है। इसलिए अब बचने के लिए संगठित होकर जन आंदोलन करना ही एकमात्र रास्ता है।
इस अवसर पर इस अवसर पर एस.यू.सी.आई (सी) के अशोक कुमार खरवार, एआईकेकेएमएस से श्रीपति सिंह, एआईडीएसओ से दिलीप कुमार खरवार, एआईडीवाईओ से इन्दुकुमार शुक्ल, एआईयूटीयूसी से प्रवीण कुमार शुक्ल ने कार्यक्रम को संबोधित किए। इस मौके पर रविशंकर मौर्य, दिनेशकांत मौर्य, प्रमोद कुमार शुक्ल, विजय प्रकाश गुप्त, राकेश निषाद, शिवप्रसाद, अलगूराम, विनोद मौर्य, संतोष प्रजापति, मनोज कनौजिया, लालताप्रसाद, राकेश मौर्य, रामदेव मौर्य, देवव्रत, राजबहादुर विश्वकर्मा, प्रदीप सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।

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