01/09/2026
31-अगस्त - लिबरेशन डे
1871 के ब्रिटिश क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट के अंतर्गत 1857 की क्रांति में देशभक्तों का साथ देने के कारण कुछ घुमंतू जनजातियों (बंजारा, बावरिया, नट, कंजर, सांसी आदि) को hereditary criminal अर्थात् पैदाइशी अपराधी का स्टेटस दे दिया गया था। इन पर जांच, पूछताछ, जेल इत्यादि अन्यायपूर्ण शोषणात्मक कार्यवाही की पुलिस एजेंसियों को संदेह मात्र के आधार पर कानूनी रूप से खुली छूट थी। देश की आज़ादी के भी वर्ष पश्चात जाकर 15-अगस्त-1947 की जगह 31-अगस्त-1952 को सच्चे अर्थों में विमुक्त समाजों ने स्वतंत्रता दिवस मनाया।
1993 से आधिकारिक रूप से कम्युनिटी के उत्थान, सम्मान, शिक्षा और सशक्तिकरण के लिए कटिबद्ध है। पिछले कुछ वर्षों से समय समय पर हमारे interventions घुमंतू, अर्ध-घुमंतू, एवं विमुक्त (denotified) समाज को skilled और आर्थिक रूप से आत्म-निर्भर बनाने की दिशा में होते रहे हैं। समाज की मुख्यधारा से इन्हें जोड़ने, और भय-भूख-भ्रष्टाचार से आज़ादी पाने की इस जद्दोजहद में मुक्तिधारा आज भी इनके साथ खड़ी है, और समाज की मुख्य धारा में रहने वाले आप सभी संभ्रांत नागरिकों का यथाशक्ति इस मुहिम में हमसे जुड़ने के लिए आह्वान करती है।